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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Kahet naan aave gharee thathori .. bahis kishore sutakahuki
Part1-212
कहेत न आवे घरी ठठोरी ॥ बहिस किशोर सुताकाहुकी खेलत महेर तिहारी पौरी ॥१॥ अतिसुंदर देखियत सुतलायक कहेत जसोदा लावो घेसे ॥ नाम कहा तिहारे बाबाकों पुछत चाव उठि वकतोरी ॥२॥ आदर सहित बुलाय भवनमें प्रेमसहित गुंथी सिरमोरी | तंदुल मिष्णजु मेरे सुरप्रभु आवत जात सदा यह ठोरी ॥३॥
Aasawari
Kaahe naan murali saun hita jorein .. kaahe naan adharan dhaaren punishuni
Part1-287
काहे न मुरली सौं हित जोरें ॥ काहे न अधरन धारें पुनिषुनि मिली अचानक भोरें ॥१॥ काहे न ताहि कर धरि राखैं क्‍यों नहिं ग्रीव नवावैं॥ काहे न तन त्रिभंग कर धारें ताके मनहि चुरावैं ॥२॥ काहे न यों आधीन रहे है ये अहीर वह बेनु ॥ सूर श्याम करते नहीं टारत बनबन चारत थेनु ॥३॥
Dhanashri
Soochi padhe deeni dwij varr devaa . jaate peer naan hoyee karnakon humm
Part1-139
सूची पढ़े दीनी द्विज वर देवा । जाते पीर न होई कर्णकों हम करिंहें तव सेवा ॥१॥ कहत यशोदा द्विज वर देवा तुव मन भायौ कहिये । गोकुल के प्रतिपालन लाइक नंद गोपकें रहिये ॥२॥ एसौ सुख अपने डृग देखों सकल संपदा बाढ़ी । यातें कहा अधिक चहियत है अष्ट महासिधि टाड़ी ॥३॥ चिरजीयौ यह मँदलाल तेरी द्विज वर बोलें बानी । नंदराय यश जुग जुग बाढ़ीो परमानंद बखानी ॥४॥
Saarang
Lehu lalan kachhu karhu kaleu apune haath jeemaaungi ...
NityaPad-233
लेहु ललन कछु करहु कलेउ अपुने हाथ जीमाउंगी ॥। सीतल माखन मेलश्री कर कर कोर खवाऊंगी ॥१॥ ओट्यग्यो दुध सद्यधोरीको सीयरो कर कर प्याऊंगी ॥ तातो जान जो न सुत पीवत पंखा पवनढुराऊंगी ॥ २॥ अमित सुगंध सुवास सकल अंग करि उबटनो गुन गाउंगी ॥ उष्णसीतल हु न्हवाय खोरजल चंदन अंग लगाऊंगी ॥३॥ त्रिविध ताप नस जातदेखि छबि निरखत हीयो सीराउंगी ॥ परमानंद सीतल करि अखीयां बानिक परबल जाउंगी ॥४॥
Bibhaas
Badhaai shrilakshman grih dwaar ..
Part2-274
बधाई श्रीलक्ष्मण गृह द्वार ॥ करुनानिधि पूरण श्रीवल्लभ पुरुषोत्तम साकार॥१॥ मधुर बचन पोषत निजजनकों श्रीभागवत उच्चार॥ मधुर रूप कृपादृष्टिसों सींचत वारंबार॥२॥ सेवानंतर कथा श्रवनको कह्ो आप विस्तार ॥ द्वारकेश प्रभु प्रगट भयेते भूतल जयजयकार ॥३ ॥
Devgandhar
Namo balal‍labhadhishpadakamalayugale sadaa vasatu mumm hridayam vividhbhaavarsavalitam ..
NityaPad-003
नमो बलल्‍लभाधीशपदकमलयुगले सदा वसतु मम ह॒ृदयं विविधभावरसवलितं ।। अन्यमहिमा55भासवासनावासितं मा भवतु जातु निजभावचलितं ॥१॥ भवतु भजनीयमतिशबितरुचिरं चिरं चरणयुगल सकलगुणसुललितं ।| बदति हरिदास इति मा भवतु मुक्तिरषि भवतु मम देहशतजन्मफलितं ॥२॥।
Bhairav
Saurabharati madhvi suhai .. phoolanke fonda rachi goonthe phoolanaki maalaa joo banaai ..1..
NityaPad-261
सौरभरति माधवी सुहाई ॥ फूलनके फोंदा रचि गूंथे फूलनकी माला जु बनाई ॥१॥ फूलन के कंकण बाजूबंद फूलन की चौकी ढरकाई ॥ फूल रहत सदा मंडल में फूली सखी राधा ढिंगआई ॥२॥ हसिहसि कहत लालगिरिधरसों फूलनकी मंडली बनाई ॥ चत्रभुज प्रभु गिरिधरन लालकी अंग अंग शोभा बरनी न जाई ॥३॥
Saarang
Milli diyau haye sakhee koo bhesh apune laal
Part3-167
मिलि दियौ है सखी को भेष अपुने लाल को ॥ मिलि गावत चली हे धमार गजगति चाल सौं ॥१॥ बृषभानु सुता नंद लाल को हो दियौ है सखी को भेष || सारी सुरंग सुहाबनी हो नैननि काजर रेख ॥२॥ जसुमति आगैं राधिका को कहति हैं बात बिचारि ॥ स्याम सुंदर के कारने हम लाई हैं एकु नारि ॥३॥ जसुमति बुझे राधिका हो कहा की कन्या होई ॥| कहा नाम या बाल कों हों में फुनि जानों सोई ॥४॥ नंद महर की यह सुता हो मोहनी जाकों नाँऊ ॥ महारावर साँची कहीं हो गोकुल जाकों गांऊ ॥५॥ यह रावर मुसिकाई के हो जब जान्यौं या भेव ॥ तन मन धन नोछावरि हो बलिहारी या देब ॥६॥ फगुवा माँगे राधिका हो महा रावर गहि धाई ॥ अब भलें तुम छूटी हो मोए फगुवा देह मँँगाई ॥७॥ फजुवा दीयौ जसुमति हो पांन फूल पकवांन ॥ फगुवा राधिका हो भए सकल कल्यान ॥८॥ लाल गुलाल उड़ाव हि गगनलौं सब छाई ॥ एकु एकनु अँक भरै हो सोभा कही न जाई ॥९॥ रस बाढ्यों गोपिका हो खेलति झूमक चारि ॥ एकु सखी मिलि एकु सौं देति है होरी की गारि ॥१०॥ पुहुष सुरंग सुहाबनों हो फूले फले सुवास ॥ जसोदा नँदन राधिका हो खेलें रैंग बिलास ॥११॥ ऐसी सोभा फागु की हो मोपै बरनि न जाई ॥ 'रसिक' सुंदर लाल पें हो निरसि सदाँ बलि जाई ॥१२॥
Dhanashri
Sunau hoe jasoda aaj kahuun tey gokul mein aeka pandit aayou.
Part1-137
सुनौ हो जसोदा आज कहूँ ते गोकुल में एक पंडित आयौ। अपने सुतकौ हाथ दिखावी सो वह कहै जो विधि निरमायौ ॥१॥ तुरत ही जन पटयौ देखनकों आनि बुलाय दियौ अरघासन । पॉय पखारि पूँजि अँजुली ले तब द्विजपै मॉग्यो अनुशासन ॥२॥ मुख पखारि काजर टिकुली दे कंठन सो हरि कंठ लगायौ । सुंदर तात मात कनियाँ लै विप्र चरन बंदन करवायौं ॥३॥ दे असीस कर धरि कर देख्यौ सुनि विशालनैनी सुतके गुन | लोचन चिह्न होइ ये श्रीपति उदर दाम पावन शुभ बंदन ॥४॥ हस्त सूत पग दूत बहुत गुन भुव मंडल या सम नहीं कोऊ ! परमानंद करी नौछावरि हरखे नंद जसोदा दोऊ॥५॥ चरावो गैया । परमानंददासको ठाकुर सब प्रकार सुख दैया ॥३॥
Ramkali
Main apanen bal rahat syaam sanga tum kaahe dukh paavat ree ..
Part1-286
मैं अपनें बल रहत स्याम सँग तुम काहे दुख पावत री ॥ मो पर रिस पावत हो पुनि पुनि कहा कहि बरन करावत री ॥१॥ तुमहूँ करो सुख में बरजत हो ऐसेंहि सोर लगावत री | कहा करों मुख श्याम निबाजी कहि नहिं दूर करावत री ॥२॥ वृथा बैर तुम करतीं निश दिन आछौ जनम गमावत री ॥ सूर सुनहूँ ब्रजनारि सयानी मूरख द्वै समझावत री ॥३॥
Aasawari
Shrilakshaman bhata deit badhaai ....
Part2-273
श्रीलक्षमण भट देत बधाई ।॥। औवल्लभपम आनंदकी निधि प्रकटभये गृह आई॥१॥ धर्म आदि पुरुषारथ चायों सबहीकों उरलाई॥ निजजनकों कृपा प्रेमरस आनंद वेलि बढाई॥२॥ निजजन सुन सुन अति आनंदित गावत मंगलआई ॥ उदयभयो धन्यभाग्य हमारों फिर लीला प्रकटाई॥३॥ यह कार्लिंदी यह वृन्दावन गिरि गोवर्धनधारी ॥ नंदनंदन संग केलि करो बलदास चरण बलिहारी ॥४ ॥
Devgandhar
Aaee ritu chandish phulai dram kaanan kokila
Part3-357
आई ऋतु चह्ंदिश फुलै द्रम कानन कोकिला समूह मिलि गाबत वसंत ही ॥ मधुप गुंजारत मिलति सप्त सुर भयो हे हलास तनमन सब जंतही ॥१॥ मुदित रसिक जन उमगि भरे हैं नहि पावत मनमथ सुख अंत ही ॥ “कुंभनदास” स्वामिनी बेगि चलि यह समे मिलि गिरिधर नव कंतही ॥२॥
Basant
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