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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Sakal kalaa praveen arrie ehaan vrindavan rung ..
Pustak1-331
सकल कला प्रवीन एरी एहाँ वृंदावन रंग ॥ सारीगमपथनी अलाप करत रस उपजत तान त्तरंग ॥१॥ निर्तत गत जत लेत ग्रग्रततत किटधिमकधिलांग थोंग बाजत मृदंग ॥ गोविंदप्रभुके जु अंग अंग पर वारों कोटि अनंग. ॥२॥
Saarang
Vrajmein hott kulahal bhaari . anandamgan gwal sub naachat deit
Part1-050
ब्रजमें होत कुलाहल भारी । आनंदमगन ग्वाल सब नाचत देत परस्पर तारी ॥१॥ नंदरायके भवनमें आवत आनंदित ब्रजनारी । पुत्र जन्म सुनि हरख भयौ है परमानंद बलिहारी ॥२॥
Sarang
Srinokul rajkummar laal rung bheenehen .. khelat
Part3-184
श्रीणोकुल राजकुंमार लाल रंग भीनेहें ॥ खेलत डोलत फाग सखा संग लीनेहें ॥|१॥ चितन्न विचित्र सुदेस सबे अनुकूलेहें ॥ राजत रंग बिरंग सरोजसे फूलेहें ॥२॥ एकनके करकंकण जेरी जरायकी ॥ एकन के पिचकाई सुहेम भरायकी ।। ३॥ कुंकुम घोर भरें घट हाटिकके घने ॥ पंकज पुंज पराग सुमृगमद सोंसने ॥8॥ डोलकी ढोल निसान मुरज डफ बाजहीं ॥ मेनके मेघ मानो रस वृष्टि सों गाजही ॥।५॥ धुनि सुनकें अकुलाई चली नव नागरी ॥ एकते एक महाणुण रूपकी आगरी ॥६॥ राधाके संज सुहाई अनेक सहेली हैं ॥ कामके काननकी मानों कंचन वेली हें ॥।७॥ भेष बनायेकी भांति न जात वबखानी हें ॥ जेती तेती उपमा मनमें बिलखानी हैं ॥८॥ कोयल कूरकहा सुर भेदहि जानही ॥ कुंजर कायर कोन कहा गति ठानहीं ॥९॥ केरनकोजुसुभाव परच्ोो अति कंपको ॥ हेमलियो हठनेम सुपावक झंपको ॥ १० | खंजन कंजसों लागिरहे गति लासतें ॥ के हरिकंदर मंदिरमें दुरच त्रासतें ॥११॥ पंक में पंकज मूलरहो छिपि लाजतें ॥ नित्य प्रकास बिलास मिट्यो द्विज राजतें ॥|१२॥ ताल पखावज आवज बाजे जंत्रहें ॥ गान मनोहर मेनके मोहन मंत्र हें || १ ३॥ सो इतकी उत्तकी धुनि लागे सुहाई हैं ॥ मानो अनंगके आंगन बाजे बधाई हें ॥१४।॥ गोकुल गोरिन खोरिन खेल मचायो हे || रंग विरंग अबीरसों अंबर छायो है ॥ १ ५॥ लाल गुलालकी धूंघरमें मुखत्यों लसें ॥ प्रात पतंग प्रभाविच कंचन कंजसें ॥।१६॥ दृष्टि करी पिचकारी भरी अनुरागसों ॥ जाय लगी ब्रजराज लला बडभागसों ॥१०७॥। उज्वल हास कपूरकी धूर उडावही ॥ सुंदर श्याम सुजानसों नयन जुडावही ॥१८॥ गावत गारिन नारि सबे झुक प्रीतिकी ॥ बात बनावत आपनी आपनी जीतकी ॥१९॥ घिरिआईं अबला सब लाल गोपालसों || हेमलता लपटी मानो स्यथाम तमालसों ॥२० ॥ कोऊ गहें पटपीत कोऊ बन दामकों ॥ कोऊ निसंक व्है अंकभरे घनस्यामकों ॥२१॥ स्यामके सीसतें स्यामाजू केसरढोरी है ॥ दे करतारी कहें सब हो हो होरी है ॥२२॥ एसोई ध्यान सदा हरिको जीय जोरहे ॥ तोपें गदाधर याके भागिकी को कहे ॥२३॥
Kaafi
Sehera dharey-taba praat hii kunj mahal sejan tein aalsakon taja
NityaPad-016
सेहेरा धरे-तब प्रात ही कुंज महल सेजन तें आलसकों तज दुलहनि जागी॥ अति श्रम सिथिल अंग देखियत है श्याम सुन्दर अधरन रस पागी ॥ १॥ बींजना ब्यार करत ललिता ले श्रम जल मुखतें पोंछन लागी।॥। देख देख मुसिकात परस्पर कहत लाल लोचन अनुरागी ॥।२॥ जागी दुल्हे संग रैन सब एयाम केलि सुख सदा सुहागी ॥ जन त्रिलोक प्रभुसों रति मानी कोऊ न ऐसी बड़भागी ॥। ३॥।
Bibhaas
Merey bultaae nahin boltari kaahekon bhulawat ..
NityaPad-124
मेरे बुल्ताए नाहिन बोलतरी काहेकों भुलावत ॥ हों पठई प्यारे तोहि बोलन उलटी नागरी आंख दिखावत ।।१॥ तेरे मन भावे नंदनंदन तू हरिके चितमन बुद्धिभावत को जाने कामिनी कौतुककी मोसिनकुं बात नबोरावत ॥ ३॥| धरतमुरलिका आपतें अधरकर तनमनभई मधुर कलगाबत ॥। कृष्णदास स्वामीगिरिधरकी मोहनमूरति कुचबीच अरुझावत ॥३।।
Bihagaro
Baithe phool mahal mein dou radha aur giridhari | phoolanke haar
NityaPad-257
बैठे फूल महल में दोउ राधा और गिरिधारी | फूलनके हार सिंगार फूलनके फूलटिपारों धारी ॥ १ ॥ फूलनकी सेज गेंदुवा तकीया फूलनकी पिछवारी॥ फूले गावत वेणु बजावत राग रंग भयो भारी॥२॥ फूले मधुप कोकिला कूजत वहेत पवन सुखकारी॥ श्रीविद्ठलगिरिधरनलाल पर तन मन धन सब वारी॥३॥
Saarang
Avadh raaj aeka aagam aayo... kartal nirakh
Part2-257
अवध राज एक आगम आयो॥। करतल निरख कहेत सब गुणिजन बहुत ने परचो पायो ॥१ ॥ बूढो बडो प्रमाणिक बामन शंकर नाम सुनायो॥ संग सुशिष्य सुनत कौशल्या भीतर भवन बुलायो ॥२ ॥ पाय पखार पूजदियो आसन अशन वसन पहरायो॥ मेलेचरण चारू चार्योसुत माथें हाथ दिवायो।|३॥ नखशिख बाल बिनोद विप्र तन पुलक नयन जल छायो ॥ लेले गोद कमलकर निरखत उर प्रमोद अनुमायो ॥४ ॥ जन्म प्रसंग कर्यो कौतुक मिस सीय स्वयंवर गायो॥ तुलसीदास निवास चरणहि सबहिनके मन भायो ॥५ ॥
Saarang
Rislayak taapar riskije .. jihin risaten prabhu dehi naan chheeje..1..
Part2-082
रिसलायक तापर रिसकीजे ॥ जिहिं रिसतें प्रभु देही न छीजे॥१॥ तुम प्रभु हमसे सेवक जाके॥ एसो कोन रहत तुमताके ॥२॥ छीनहोमें ब्रज धोय वहावें॥ डुंगरको नहीं नाम बचावे ॥३।॥ आप क्षमा करियें देवराई॥ हम करिहें उनकी पोहोंनाई ॥४ ॥ यह सुनकें हरषित चित कीनों॥ आदरसहित पान कर दिनों ॥५ ॥ प्रथमही देहो पहार बहाई।॥ मेरी बलिहे उन सबखाई ।॥।६ ॥। सूर इंद्रमेघन समझावत ॥ हरख चले घन आदर पावत ।।७ ॥
Bilawal
Duff baajan laage hailey .. chalhu chalhu jaiye
Part3-147
डफ बाजन लागे हेली ॥ चलहु चलहु जैये तहँँ री ॥ जहँ, खेलत स्याम, सहेली ॥ जहँ घन-सुंदर साँवरो, नहिं मिस, देखन दाँऊ॥ ये गुरुजन बैरी भएए, कीजे कौन उपाउ ॥१॥ आबहु बछरा मेलियै, बन को देहिं बिडारि | वे दैडे हमको पठे, देखें रूप निहारि ॥२॥ ऑऔजत गागरि ढ़ारिये, जमुना जल कैं काज ॥| इंहिं मिस बाहिर निकसिकै, जाई मिलें ब्रजराज ॥ ३॥ राग रंग रैंगि मँगि रह्यो, नंद राई दरबार || गावति सकल गुवारिनी नाचत संकल गुवार ॥४॥ घरी घरी आनंद कारि, जीवन जानि असार ॥५॥ खाइ, खेलि, हँसि लीजिये, फाग बड़ौ त्यौहार ॥ मुरली मुकुट बिराजही, कटे पट राजत पीत ॥ सूरज प्रभु आनंद सौं गावत होरी गीत ॥६॥
Aasawari
Dekho juu mohan
NityaPad-269
देखो जू मोहन काहू अबै मेरी ईंडुरी दुराई ॥ सूधेसूधे बेगि किनमानों यह कौन कीनी चतुराई ॥१॥ कछूजो परस्पर करत सेनाबेनी ताहि मोहि किनदेहो बताई ॥ सबे समिट यहां कहत कौनसों ताकी फेंट पक्र किनधाई ।।२॥ जापे होय वेगकिन आनों ताहिहै ब्रजराजदुहाई ॥ गोविंदप्रभु कछु हँसत बहुत से मेरे जान तुमहिं चुराई ॥३॥
Todi
Kaanh saun kaun kahey kahaa aalee ree bhor hii
Part3-078
कान्ह सौं कौन कहे कहा आली री भोर हि नाम लै गावत डोले ॥ काम की डौंडी बसंत लीए दूजे होरी निर्संक ू्है लाज कौ खोले ॥१॥ कैसें रहे ब्रज में कन्हैया जोई मुख सोई बक करि बोले ॥ भरि पिचकारी मुख पै मारी 'सूरदास' के प्रभु कैसे समझाऊ मन आँई तोले ॥२॥
Ramkali
Mohan choryori mammakhan urajmathani ..
NityaPad-183
मोहन चोर॒योरी मममाखन उरजमथानी ॥ दुहूँकर दृढकर लाग्यो अधररस चाखन॥।१॥ नेतीलाज तोरसबसूत्योनेकुनरह्योरवाई आंखन।॥। जाय कहूँगी ब्रजपतिजूके आगे नाहिकोऊसाखन ॥॥२॥।
Ramakali
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