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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Chakshushrava priyakin palana lalana tihi maanjh jhulaavat hain .
Part1-109
चक्षुश्रवा प्रियकीं पलना ललना तिहि माँझ झुलावत हैं । युवती मुख पंकज बंक चितै मिलिकें क्षितिकौ सुत गांवत हैं ॥१॥ ब्रजराज त्रिया कर डोरि गहे हरुबै हरुबै हुलरावत है । दास गोपाल सबै व्रजभामिनि मिलि ऐसेंहिं लाल लड़यावत हैं ॥२॥
Aasawari
Kachhu bhulgaihon parosat firlai musakaai .. jhoothe miskar
NityaPad-082
कछु भूलगईहों परोसत फिरलाई मुसकाई ॥ झूठे मिसकर आयो चाहत सोतो सांची भईहो लालरी झरहेत केंहभाई ॥१॥ जो भूलीसो लाई अधिक छबि अरसाय आउऊें बनाई ॥ वूंदाबनचंद सुखदेवेको चतुराईहो जनाई ॥२॥
Aasawari
Dridhabt keeno merehet ..
NityaPad-036
दृढब़्त कीनो मेरेहेत ॥ धन्यकहें नंदनंदन जाऊसबनहीकेत ।।१॥ करो पूरन काम तुमारो सरदरास रमाय ॥| हरख भई यहे सुनत गोपी रहीसीस नवाय ।२॥ सबनको अंगपरसकीनो ब्रतकीनोतनगार ॥। सुरप्रभु सुख दियोमिलके ब्रजचली सुकुमार ॥ ३॥।
Ramkali
Fagun maas vraj sundari jasumati ghar aanee ..
Part3-125
फागुन मास ब्रज सुंदरि जसुमति घर आँई ॥ गावति गारी सुहाबनी, सब के मन-भाई ॥|१॥ आव हु जसुमति भोर हीं आतुर हम धाँई | आज कछुक वृषभानु जू तुछों बोलि पठाई ॥२॥ औरू कछू तुम सौं कह्मो संदेस तिहारौ ॥ पियारी कन्या हमारी राधिका वरू पूत तिहारौ ॥३॥ मन, क्रम, बचन किए कह्लौं मोहि सौंह तिहारी ॥ तुम मोहि लागौ सर्दाँ एहो कीरति सौं प्यारी ॥४ ॥ जो कछु तुम सौं कहति हों हित की करि जॉनौं | बरसानों नँदगाँउ कौं एकें करि माँनों ॥५॥ भर होरी के दिवस में बरसानैं रहिए ॥ समझत हौ तुम सबैं तुम सौं कहा कहिए ॥६॥ फिरि नंदरानी बिहँसि कैं बोली मृदु-बानी ॥ जो कछु हम सों कहति हौ हम तों सब जानी ॥७॥ एकु सँदेसो जाई कें कीरति सौं कह्ियो ॥ नंदरानीं ढिंग आइ कै कोऊ दिन रहियो ॥८॥ हँसी सकल ब्रज नागरी नाँचे दै तारी || समझि-समझि मो सौं कछू कहै ठाड़े मिरिधारी ॥९॥ केैसर- कलस भराई कैं सब कौं छिरकाए ॥ मृगमद, अरगजा घोरि कैं मुख सौं लपटाए ॥१०॥ मन भायौ फगुवा दयौ तनसुख की सारी ॥ अंक माल सब कै हिए दींनीं जू दुलारी ॥११॥ खेलि मच्यों अति प्रेम कों आनँद अयौ भारी ॥ फागु कियौ जु सुहाबनौं हरि सौं ब्रजनारी ॥१२॥ जोबन उर में अति बढ्यौ का पै कहि आदैं || दिन दिन यह सुख “माधुरी” निरखें अरू गावैं ॥१३॥
Bilawal
Nand kunwar rung gahar-garbili .. niss dinn
Part3-327
नंद कुंवर रंग गहर-गरबीली ॥ निस दिन पिय संग लागी डोलति छकी छबीली ॥१॥ ताहीं तें मान करति सबहिन तें अंग अंग रूप-रसीली | 'सरस रंग' रस जानति सब बिधि तू ही सुघर- नवेली ॥२॥
Kalyan
Shyam khirikke dwaar karawat gayanakon singar |
Part2-048
श्याम खिरिकके द्वार करावत गायनकों सिंगार | नानाभांत सींग मंडित किये ग्रीवा भेलेहार ॥१ ॥ घंटा कंठ मोरनकी पटियाँ पीठिनकों आछे ओछार ॥ किंकिणी नूपुर चरण बिराजत बाजत चलत सुढार ॥२ ॥ यह विधि सब ब्रज गाय सिंगारी शोभा बढ़ी अपार ॥ परमानंदप्रभु धेनु खिलावत पेहेरावत सब ग्वार ॥३ ॥
Sarang
Saurabh saras sunny seetal nava banaa rawati subhag useer ..
NityaPad-251
सौरभ सरस सनी सीतल नव बना रावटी सुभग उसीर ॥ बारबार छिरकत चंद्रावलि निरख नेंन सुंदर बलवीर ॥१॥ पंखा करत नार रसभीनी पहर अरगजा स्वेत सुचीर ॥ निरख निरख बलजाय गदाधर छूटत धार फुआरन नीर ॥२॥
Saarang
Biharilal aaee chhaak saloni..
NityaPad-199
बिहारीलाल आई छाक सलोनी॥ अति अद्भुत पठई चंद्रावलि एक गांठ है दोहनी ॥१॥ टेरत स्थाम भुजा ऊंची कर गई सुबास आग्योनी ॥ कृष्णदास गिरिधरजूको मनहरद्यो विधिना रसिक रिझोनी ॥२॥
Saarang
Madhavmase bhar veshakhe.. srivallabh hari
Part2-276
माधवमासे भर वेशाखे॥ श्रीवल्लभ हरि जन्मलिया॥ श्रीलक्ष्मण नंदना त्रिभुवन बंदना॥ भक्तिमार्ग जिन प्रकटकिया ॥टेक ॥ प्रकटिया जिन भक्तिमारग बंध जीव छुटाईया॥ संसारतेंते मुक्तिकीने शरण जेजन आईया॥ अभय दान निसानमेल्या चित्तजिन हरिकोंदिया॥ गोपालदास अनंतलीला प्रकट श्रीवल्लभ भया॥१ ॥ दाता भुक्ता और न दूजा॥ साचा त्रिभुवन राय वहां॥ विरह निवारणा भवजल तारणा॥ देखत उपजे चाव उहां (टेक ॥ देखत हरिकों चाव उपजे सकलदुःख निवारही॥ जाकोनाम सुमरेंजरें पातक करजोर निगम पुकारही॥ पतित पावन बिरदजाकों शीसमाधो करमया॥ गोपालदास अनंतलीला प्रकट श्रीवललभ भया॥२॥ ये ब्रजबालिया गोपगुवालिया॥ ये गोकुलके लोगवहां॥ एकन क्रौडा हरिमुखब्रीडा हरिसेवारस भोग वहां ॥टेक ॥ रसभोग ओर संयोग मिलियो हियें अंतर रमरह्या॥ तुब बालचरित्र अनंतलीला दान दे सब गुण कह्या ॥ तेरी भली मुरति देख सूरत राधिका अंचल गह्मा॥ गोपालदास अन॑तलीला प्रकट श्रीवललभ भया ॥३ ॥ पूरणब्रह्म सनातन माधो ॥ कलि केशव अवतार बहां।। जिन जेसा देख्या तिनतेसा पेख्या॥ भक्तन प्राणआधार वहां ॥टेक ॥ भक्तन प्राण आधार श्रीवललभ हिये अंतर राखिया॥ रामकृष्ण मुकुंदमाधो सदाजिब्हा भाखिया ॥ गोपीनाथ अनाथ बंधू बेदमें करुणामया॥ गोपालदास अनंत लीला प्रकट श्रीवल्लभ भया ॥४ ॥
Bilawal
Bhawat haye banavan kii
NityaPad-204
भावत है बनवन की डोलन ॥ मदनगोपाल मनोहरमूरति ही ही धोरी धेनुकी बोलन ॥१॥ करपर प्रात भात ताऊपर बिचबिच व्यंजन धरराखे ॥ बालकेलि सुंदर व्रजनायक ग्वालिन देत आपही चाखे ॥२॥ कहा बैभव बवैकुंठलोकको भवन चतुर्दशकी ठकुराई ॥ शिवविरंचि नारदपदवंदित उपनिषद्‌ कीरतिगाई ॥३॥ यह पुरुष लीलाअवतारी आदि मध्य अवसान एकरस ॥ परमानंदप्रभु बालविनोदी गोकुलमंडन भक्त प्रेमवश ॥४॥
Saarang
Sundardhotakaunako sundarmridubani .. sundarbhalatilakadiye
NityaPad-159
सुंदरढोटाकौनको सुंदरमृदुबानी ॥ सुंदरभालतिलकदिये सुंदर मुखकानी ॥ १॥। सुंदनयननहरलियो कमलनकोपानी ॥ सुंदरतातिहूलोककी लेब्रजमें आमी ॥२॥| भेदबतयोग्वालिनी जायोनंदरानी ।। परमानंदप्रभुमात यशोमति सबसुखसों लपटानी ॥३॥
Bilawal
Aho vidhina topai anchara pasaari maangon janm janm deejai yaahi
Part1-253
अहो विधिना तोपै अँचरा पसारि माँगों जन्म जन्म दीजै याही ब्रज बसिवो ॥ अहीरकी जाति समीप नंदधर घरी घरी घनश्याम हेर हेर हँसिवो ॥१॥ दि के दानमिस व्रजकी बीथिनमें झकझोरन अँगर्जेगकौ परसिवों ॥ छीतस्वामी गिरिधरन श्रीविद्डन शरदरैन रसरासकौ बिलसिवौ ॥२॥
Gori
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