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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Murali atee chully itaraay .. akshayanidhi jinn loot paaee que‍yon
Part1-292
मुरली अति चली इतराय ॥ अक्षयनिधि जिन लूट पाई क्‍यों नहीं सतराय ॥९।॥| आदि ज्यों यह बडी होत चलत सीस नवाय ॥ सबनकों ले संग चलती दौर मिलती धाय ॥३॥ बाँसतें उतपत्ति याकी कहा बुद्धि ठहराय ॥ सूरप्रभु ताके बस जैसें रहत नहीं बिसराय ॥।३॥
Nat
Nandgrah baajat aaj badhaai .. naachat gawat karat kulahal urr
Part1-051
नंदग्रह बाजत आज बधाई ॥ नाचत गावत करत कुलाहल उर आनंद न समाई ॥१॥ गोप सबें मिलि भेट बहुतलें आये अति अतुराई ॥ सूरदास महर मनहि मन फूले अंग न माई ॥२॥
Nat
Shobhit hain anga anga chandan .. binjan
NityaPad-218
शोभीत हैं अंग अंग चंदन ॥ बिंजन साज धरे पनवारे बहु विध सीरे खंडन ॥१॥ पीत पिछोर रंगी केसर रंग जोजो भावे सोई सोई लेहुन॥ सुरदास निरख निरख छबि करों चरन रज बंदन ॥२॥।
Saarang
Jaba tuu gaay duhaavan jaay..
NityaPad-295
जब तू गाय दुहावन जाय॥ तब तहां तूंरी कहा नंदद्वारेपें भूल रही उतपचाय ।। १॥। मठुकी सीस फिरत ब्रजबीथन वारवार मुसकाय ॥ फिरफिर वार करतहै ठाडी सूधेधरत न पाय ॥। २॥॥ तजी लोककी लाज कार्यकरकहिव काज धुका हि॥ चतुर्भुजप्रभु जानतहूं तुब मन हरिसों अटक्यों आहि ॥३॥
Gori
Dhaadhani naachai aru gaavai lai leey naam gope sabanke harkhi assis
Part1-134
ढाढ़नि नाचै अरु गावै लै ले नाम गोप सबनके हरखि असीस सुनावै ॥१॥ आनेंद मगनभई संग ठाढ़नि झाँझनि झमका मचावै । लियें समाज रंग उपजावै ढाढ़ी हुरक बजावै ॥२॥ ये दोऊ गावें अतिमन भावें आनंद उर न समाई । बड़े गोप उपनंद नंदजू दीनी रहस बधाई ॥३॥ कंचन मनी पार्टंबर अंबर ठाढ़ी कों पहिरावै। अगनित गोधन ठाठ द्विजनकों घर घर बॉटि लुटावै ॥४॥ मनिमाला पौहोंची बाजूबंध हरखि हरखि पहिरावै । श्रीनंदरानी सब सुख सानी ठाढ़नीकों पहिरावै ॥५।| आवौ मंगल गावी बधाई कहत जसोदा रानी । ढाढ़ी ढठाढ़नी दोऊ गुन आगर गोप बंसकी मानी ॥६।॥ नंदराय विनति बनी मेरी मोहि अपनों करि लीजै | अपने लालकी रहसि बधाई बलीदास कों दीजे ॥७॥
Iman
Aaee huun abahin dekh subhag sunder bhekh thaado .. larka aeka rupco bhee varo ..1..
NityaPad-273
आई हुं अबहीं देख सुभग सुन्दर भेख ठाडो ॥ लरका एक रूपको भी वरो ॥१॥ परदनी फवत पटुका कंठपर रुरत कर वनमाल माई बदन नांई भांवरो ॥२॥ नीर यमुनातीर भर धरी गागरी जबहीं उठाय देत देखत सब गांवरो । टोकत आवत जात नरनारी कहत युं कियो कारज भलो भरत नहिं भामरो ॥॥२॥ टरत केसें अंक लीख्यो मम भाग्यमें कहेवो करो कोउ धरत मेरो नांवरो । दास परमानंद नंदनंदन कुंवर हृदय में बसत माई मेरे री सांवरो ॥५॥
Hameer
Niz brahmand sue palanon jagahin jhulaavan haar | taahi palana
Part1-094
निज ब्रह्मांड सु पालनों जगहिं झुलावन हार | ताहि पलना पौढायकें झुलावत ब्रजकी नारि ॥१॥ पोढ़ि पालनें चरणदल मुख मेलत कहि देत । चरणामृत महिमा लखे भक्तनके सुख हेत ॥२॥ पोढ़ि पालनें लाड़िले उद्यम किये अनेक । पटकी पूतना शकट पुनि तृणावर्त से नेक ॥३॥ पलना झूलत मुग्ध छैकें कोटि ज्ञान गंभीर । ताहि झुलावत पालनों श्रुतिरूपा आभीर ॥४॥
Ramkali
Aaj badhaai haye barsaanen | pragat bhaee vrishbhan nandini teenlok
Part1-190
आज बधाई है बरसानें | प्रगट भई वृषभान नंदिनी तीनलोक सरसानें ॥१॥ गोपी नाचत गावति आईं राजत सब हरखानें । छिरके ग्वाल रैंगीले राजत हरद दही लपटानें ॥२॥ छिरकत दूध माखन मुख माँखत बदत न काहू आनें । नंदीसुरते नंदरायजू गाय गोप सब आनें ॥३॥ देत दान वृषभान भवनमें याचक बहु सनमानें | मणि कंचन मुक्ता पटभूषन जो जाके मन मानें ॥४॥ कीरति सुनीं न देखीं कबहूँ जे श्रीवृषभानें | कुंज बिहारि बिहारिन ऊपर शंकर बारत प्रानें ॥५॥
Saarang
Shulo paalnen govind | dadhshi mathon navneet kaadhon tumakon
Part1-094
शूलो पालनें गोविंद | दध्षि मथों नवनीत काढ़ों तुमकों आनंद कंद ॥१॥ कंठ कडुला ललित लटकन भूकुटी मनके फंद | निरखि छबि छिनप्ठिन झुलाऊँ गाऊँ लीला छंद ॥२॥ दे दूधकी दँतियाँ सुखकी निधियाँ हसत जब कछु मंद । चतुर्भुज प्रभु जननी बलि गिरिधरन गोकुलचंद ॥३॥ # राग रामकली # सूलो पालनें बलि जाऊँ। स्याम सुंदर कमल लोचन निरखि अति सचुपाऊँ ॥१॥ अति उदार विलोकि आनन पावत नहीं अधघाऊँ चुटकी दे दे नचाऊँ हरिकों चूमि चूमि उर लाऊँ ॥२॥ रुचिर बाल बिनोद तिहारे निकट बैठी गाऊँ । विविध भाँति खिलोना ले लै गोविंद प्रभुकों रिज्ञाऊँ ॥३॥
Ramkali
Ranga hoe ranga hoe piyaa pai daraungi .. syaam sunder
Part3-079
रँग हो रँग हो पिया पै डारौंगी ॥ स्याम सुंदर अविलोकि वदन छबि, तन मन धन सब बारौंगी ॥ १॥ अतर गुलाब अरगजा सब मिलि भरि भरि डारौंगी ॥ 'सूर' के प्रभु साँवरे कारन हैंसि हँसि घुंघट टारींगी ॥२॥
Ramkali
Dhani jasumati badbhagini liyein kaanh khilaavai. tanatanak
Part1-153
धनि जसुमति बडभागिनी लियें कान्ह खिलावै। तनतनक भुज पकरिकें ठाड़े हौन सिखावे ॥१)| लरखरात गिर परत है चलि घुटुरुवन धावै । पुनि क्रम क्रम भुज टेक के पग द्वैक चलाबै ॥२॥ अपने पॉयन कवि चले मो देखन थावै । सूरदास जसुमति यह विधिसों देव मनावै ॥३॥
Bilawal
Laihori maa chandaa lehungo..
NityaPad-293
लैहोरी मा चंदा लेहुंगो।। कहा करों जलपुट भीतरको बाहिर चोंक गहूंगो ॥१॥ यह तो दलमलात झकझोरत कैसेके जु लहुंगो।॥। वहतो निपट निकटही दीपत बरज्यो हूं न रहूंगो ॥२॥ तुम्हारो प्रकट प्रेम मेंजान्यो बहुरायो न बहूंगो॥। सूरस्थाम जब कर गहि लाऊं तब तन ताप दहूंगो ॥३॥
Iman
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