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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Podhiye laal nivaas attari ..
NityaPad-346
पोढीये लाल निवास अटारी ॥ ललितादिक सखिन जुर आई फुलि रही फुलवारी ॥॥१॥ रत्न जटित हीरा के कटोरा धरे अरगजा संवारी ॥ अति अनुराग परस्पर दोउ करत लेपन पिय प्यारी ॥। २॥ वृन्दावन की सघन कुंज में कुसुमन रावटी संवारी ॥ सूरदास बलबल जोरी पर तन मन धन कीने बलिहारी॥३॥
Bihaag
Huttery baithe sritrajrai..
Part2-063
हटरी बैठे श्रीत्रजराय॥ नानाविध पकवान मिठाई लेले देत सबन को चाय || विविध श्रंगार बन्यो अति नीको लागत अति शोभाय ॥ दे बिरा आरती उतारत जीन गोविंद बल जाय ॥२ ॥
Bilawal
Aeye kaun prakriti tihariho lalana maaee joe dekhe sou kahaa kahai yahaan
Part1-250
ए कौन प्रकृति तिहारीहो ललना माई जो देखे सौ कहा कहै यहाँ ठाढ़ो इत उतकौ ।| सकल व्रजके बगरमें गायनके डगरमें घेरि घेरि राखी हम कहा धराबत तुमारो यह न्याव कितकौ ॥|१॥ दानदान करि राख्यौ झूठेई गाल मारत ऐसें कैसें भरिबो री माई इनसों नित नितकौ ॥ चलो री उलटे भवन जाय दानके मिस लूटत हम कहैंगी जाय नंदजूसौं पायौ मतौ गोविंदप्रभुके चितकौ ॥२॥
Poorvi
Radheju key badan kii shobha.. jaahi dekh mayan
Part2-357
राधेजू के बदन की शोभा॥ जाहि देख मयन थाक्यो कृष्ण मन लोभा॥१॥ सीसफूल सिर माँग सोहे भाल कुंकुमबिंदु ॥ मानों गिरि सुमेरु उपर वस्यो रवि अरु इंदु ॥२ ॥ दियें आड कुरंग मदकी मलय केसर सींच ॥ मानों सुर गुरु उदय कीनो हेमगिरि के बीच ॥३ ॥ तनक तरोना श्रवणसोहे कमकरतल जराय॥ मानों रविकी किरण पसरी रही भूपर छाय ॥४ ॥ चंचल नयन कुरंग मानों सजल जलद जल एन ॥ चिते वांकी चितवनी में उभयमारें मैन ५ ॥ सुभग नासा वेसर सोहे स्वाती सुतराजें॥ निरख मुक्तन यह शोभा असुर गुरु लाजे॥६॥ अधर दर्शन तंबोल राजत सहज विहेसत वाम ॥ मानों दामिनी दसोंदिश की बसत एकही धाम ॥७ ॥ निरख प्रियातन यह शोभा चिबुक सांवल बिंदु॥ मानों छबिकी जालमें पर॒यो अलिसुत फंद॥८ ॥ अंगअंगसों प्रेमबरषत सकल सुखको मूरि॥ राधेजूके चरण की रज गदाधर सिर भूरि ॥९ ॥
Sorat
Aapakdamb chadhadekhatsyam vasanaabhushansab harleene vinavasan jalbhitar vaam ...1..
NityaPad-035
आपकदंब चढदेखतस्याम वसनआभूषणसब हरलीने विनावसन जलभीतर वाम ॥।१॥ मुदितनयन ध्यानधरहरिकों अंतरयामि लीनीजान । बारबारसबतासों मांगत हम पावें पतिस्थाम सुजान ॥२॥ जलतें निकस आयतट देख्यो भूषणचीरतहां कछुनाहीं | इतउतहेर चकित भईसुंदरि सकुचगई फिर जलहीमाहिं ॥३॥ नाभिपर्यत नीरमेठाढी थरथरअंगकंपत सुकुमारी ॥ को लेगयो बसन आभूषण सूरस्याम उरप्रीतिबिचारी ॥।४॥।
Ramkali
Dekh ree sakhti useerke mahal mein karat bhojan sanga liye radha baal ..
NityaPad-302
देख री सख्ती उसीरके महल में करत भोजन संग लिये राधा बाल ॥ किये चंदन खोर कपूर बहुविध घोर ता पर लसी कंठ पोहोपन माल ॥ १॥ परस्पर देत मुख कोर दोऊ मधुरपतें भरे शीतल भोग भरि शीतल थार। गई सुधबुध भूल निरख मुख युगलछबि कहो कहा बने देखे हि गिरिधरलाल ॥२॥
Kanharo
Maanat parv diwariko sukh huttery baithe nandkumar ..
Part2-060
मानत पर्व दीवारीको सुख हटरी बैठे नंदकुमार ॥ मंगल बाजे होत चहूंदिश भीर बहुत अति आंगनद्वार ॥१ ॥ कुंवरि राधिका नवल वधू सब कर आंइईहें रुचिर शृंगार ॥ सोंथे भीनी कंचुकी सारी ओर पहरें फूलनके हार ॥२ ॥ पहलें सोदालेहु हमहींपे तब लीजों दाउपें जाय ॥ नीकेदेहों रूंटनखेहों ऐसें कहत लाल मुसिकाय ॥३ ॥ हँसहँस जात राय नंदरानी हँसत भान सब गोप गुबवाल॥ चुंबत बदन अहो ये घातें कापें सीखेहो नंदलाल ॥४ ॥ झगरो करत भरत आननन्‍्दसों चंद्रावलि ब्रजमंडल नारि।॥ श्रीविद्वुलगिरिधरनलालसों रंग करत सब गोपकुमारि ॥५ ॥
Kanharo
Jembat kaanh karat kilkari ..
NityaPad-076
जेंबत कान्ह करत किलकारी ॥ भर बुकटा मेलत मुखभीतर कर पकरत महतारी ।।१॥ फूक फूक दूध मुख लावत डारत बाहां उछारी तैसें ही चपल हरत सबको मन श्रीविद्डलगिरिधारी ॥२॥
Dhanshree
Devaki munn chakit bhaee . dekhi aaya putra mukh kaahe naan aisee
Part1-077
देवकी मन चकित भई । देखी आय पुत्र मुख काहे न ऐसी कबहूँ होय दई ॥१॥ माथें मुकट पीत पट काँधे भृगुरेखा भुज चारि करें । पूरब कथा सुनाई कही हरि तुम माँग्यौ यह रूप धरें ॥२॥ छूटे निगड़ सुवाओं पलना द्वार कपाट उघार्यौ । अब लैजाहु मोहि तुम गोकुल यह कहिकें शिशुरूपहि धास्यौ ॥३॥ तबही रोय उठे वसुदेव सुनि नंदभवन गये । बालक धरि बसुदेव कन्या लै आप सूर मधुपुरि आये ॥४॥ है पठाय ॥६॥ जागी महरि उठी जब जसुमति नंदमहरके लिये बुलाय । जयजयकार भयौ गोकुलमें व्रजजन आनंद उर न समाय ॥७॥ गोपीग्वाल गोप सब व्रजजन स्रवन सुनतही रंक निधि पाई | हरद दूब अक्षत रोरीसों कर कंचनके थार भराई ॥८॥ बाजत ताल पखावज आबज मुरली दुंदुभी शब्द सुहाय । नंदमहर घर ढोटा जायो दि लै छिरकत करत बधाय ॥९॥ ध्वजा पताका तोरनमाला ग्ृहग्रह मंगल कलश धराय । चित्रविचित्र किये प्रमुदित मन दि माखनके मॉट लुटाय ॥१०॥ तब ब्रजराज गोपसों मतौ करि अति आदरसों
Saarang
Ranijsodajinen khole baitho sunder vrajanon naath ray..
NityaPad-085
राणीजसोदाजीनें खोले बैठो सुंदर व्रजनों नाथ रे।। भोजन- करताएं ने डीठोजेनो जूठोहाथरे ॥१॥ वालेमरिभूषण सघला एंठाकीधा अंगेबलगोभातरे ॥ रमवाने कारणे उठता जननीऐभीडीबाथरे ॥२॥। मरकलडाते मुखनां जोतां गोपी जन नो साथ रे।। रसिकराय आनंदे गाये गोविंदना गुन गाथरे ॥ ३॥।
Aasawari
Duhi duhvi lawat dhori gaitha .
NityaPad-197
दुहि दुह्वि लावत धोरी गैथा । कमल नैनको अति भावत है मथि मधि प्यावत घैया।। मोहन भूख अधिक जबलागी छाक बांटि पियोरे मैया। ऐसो स्वाद हम कबहु न चाख्यो अपनीसोंह कनैया ॥ हंसि हंसि ग्वाल कहेत हे मोहन सो सुनि गोकुल के रैया। परमानंद दास को ठाकुर पुनि पुनि लेत बलैया ॥
Aasawari
Vishad kadamb saghan vrindaban rachyau raas tarani tanyatat ..
Pustak1-323
विशद कदंब सघन वृंदाबन रच्यौ रास तरणि तनयातट ॥ शरदनिशाः उड़पति उजियारी पूरचौनाद मुरली नागरनट ॥१॥ श्रवण सुनत चली व्रजसुंदरि साजि सिंगार पेहेर भूषणपट ॥ अति हुलास कुमदिनी ज्यों प्रफुल्लित निरख लाल टाढ़े बंसीबट ॥२॥| मंडल मधि नाचत पिय प्यारी गावत स्वर टोडी तान बिकट ॥ दास सखी देखत नयनन भर वार फेर डारों कोटि मदनभट॥३॥
Todi
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