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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
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Sohilau gaaoo lalako . shree vrajraj dulaare lalako naanon | Part1-071 | सोहिलौ गाऊ ललाको । श्री ब्रजराज दुलारे ललाको नानों
वारों चिरजीयों जुग जुग उदयो मनाऊं ॥१॥ नित मोहन मुख चंद निहारों
तैनन हियो सिराऊं। परमानंद” नंदजू के द्वारे दौर दौर हों आऊं ॥ लख फली
अंग न स्माऊं ॥२॥ | Lalit |
Mohani madan gopallalki baansuri .. | Pustak1-341 | मोहनी मदन गोपाललालकी बाँसुरी ॥
मधुरे श्रवण पुट सुनत स्वर राधिके करत रतिराज के तापकौ नास री ॥१॥
शरद राका रजनी विपिन वुंदा सुखद अनिल तन मंद अति शीतल सुवास री ॥
सुभग पावन पुलिन भृंग सेवत नलिन कल्पतरु रुचिर बलवीर कृत रास री ॥२॥
सकल मंडल भली जहाँ हरिसों मिली बनिता बर बनी उपमा कहीं कासु री ॥
कूंज कंचन तनी लालमरकतमनी उभे कलहंस हरिवंश बलिदास री ॥श)। | Iman |
Sandesh naan abke saho pyaare lalana manini maan tyajat.. | NityaPad-276 | संदेश न अबके सहो प्यारे ललना मानिनी मान त्यजत॥
केतीवार तुमहों पठाईजू अनेक यतन करहौं समुझाई उन अपने जियजु कोटिक बात सचत ॥१॥
कितनी दूर कुंजकुटीकी ओट आपन चलियेजू जीत्यो चाहो रतिपति ॥
गोबिंदप्रभु आये दूतीके पाछें पाछें प्यारीके निकटहवे कछु नयनन मुसकति ॥२ | Nat |
Tarani tanyaatir laal girivardharan radhika sanga nrityat subhag | Part1-328 | तरणि तनयातीर लाल गिरिवरधरन राधिका संग नृत्यत सुभग
रास में ॥ तत थेई तत थेई करत गति भेद सों पिय अंग अंग मिलत सुंदरी ता
समें ॥१॥ नंदनंदन निरख सुरसहित सुरनारि वेणु कलनाद सुनि मोहे
काश ॥ थक्यौ घन चंद तारिका थकि रहीं. तान स्वर गान व्रजपति करत
जा समें ॥२॥ | Saarang |
Surpati aagein bhaye sub thaadhe .. chinta sabahinake munn baadhe ..1.. | Part2-088 | सुरपति आगें भये सब ठाढे ॥ चिंता सबहिनके मन बाढे ॥१॥
कोंन काज सुरराज बुलाये। सकुच सहित सब पूछन आये॥२ ॥
कहा कहों कछ कहत न आवे।॥ मेघनकी गति बताबे ॥३ ॥
ब्नजवासी मोकों विसरायो॥ भोजन ले सब गिरिहि चढायो ॥४ ॥
मोकों मेंट परवतही थाप्यो॥ तबमें थरथराय रिस कांप्यो ॥५ ॥
सूरदास यह सुरन सुनाई ॥ ताकारन तुम लिये बुलाई ॥६ ॥ | Bilawal |
Manmohan adbhut doll bunny .. | Part3-371 | मनमोहन अद्भुत डोल बनी ॥
तुम झूलों हों हरख झुलाऊँ वृंदावन चंद धनी ॥ १॥
परम विचित्र रच्यो विश्वकर्मा हीरालाल मनी ॥
चतुर्भुज प्रभु गिरिधरनलाल छबि कापें जात गनी ॥२॥ | Devgandhar |
Horry khelat madan gopal sanga liye vrajbal .. | Part3-321 | होरी खेलत मदन गोपाल संग लिये ब्रजबाल ॥
छिरकत आन परस्पर हरखत किलक देत करताल ॥१॥ बाजत डफ मृदंग
ओर ताल विचविच वेणु रसाल ॥ प्यारी लई घन सारकी झोरी पियहि
अबीर गुलाल ॥ २॥ ललिता चंद्रावली मतोकर पकरे स्याम तमाल || रामदास
प्रभु फगुवा दीनों श्रीगिरिधर मणिलाल ॥|३॥ | Kalyan |
Banate navrang girdhar aavat .. | NityaPad-286 | बनते नवरंग गिरधर आवत ॥
आगे गोधन पाछे आपुन धाय धाय ओह टाबत ॥१॥
बरूहा मुकट दाम गरे ग ुंजा वेनु रसााल बजावत ॥
सप्त सुरन मिल राग रागनि मेघ गिरा मृदु गावत ॥२॥
गोप सखन के संग बिराजत अरू कर कमल फिरावत ॥
परमानददास को ठाकुर सुरनर मुनि मन भावत ॥३।। | Gori |
Sutake kaana chhedat nandaraani . soochi dekhat bhaaji chaley hari bahori | Part1-139 | सुतके कान छेदत नँदरानी । सूची देखत भाजि चले हरि बहोरि
पकरिकें आनी ॥१) छेद कर्ण सबहिन पहरायौ मनमें अति हरखानी । हैंसि
दीनौ तब ब्रजपति प्रभुकी सुनि सुनि तोतरि बानी ॥२॥ | Saarang |
Tedhhi tedhhi piyaa munn mohe chhoote bandsondhe soun lapate . | NityaPad-290 | टेढी टेढी पिया मन मोहे छूटे बंदसोंधे सों लपटे ।
कंचन चोलना यह छबि निरखत काम बापुरो को है ॥१॥।
लाल इजार गरे वनमाल गुंजमाल दुति कुंडल सोहे ।
रसिक' रसाल गुपाललाल गढो कीमत कीमत जो है ॥२॥ | Hameer |
Srivrindavan navanikunj bhramar bhramat karat gunj kusum punj lalit lataa gahwar bunn neeko .. | NityaPad-214 | श्रीवृन्दावन नवनिकुंज भ्रमर भ्रमत करत गुंज कुसुम पुंज ललित लता गहवर बन नीको ॥
जमुनातीर आंजनखर हरे गाय चरवेको प्यारीको
धाम लाल भावतहे जीको ॥१॥ रुचि उपजत छाक खात सखन सहित अति
अघात परम मुदित फेर खात पठई मैया नीको ॥ कृष्णदास गिरिधरको कौतुक
सुरपुर विमान कुसुम वृष्टि करत ओर या सुखतें फीको ॥२ ॥ | Saarang |
Arrie milaniyan mohan gawat .. | Pustak1-346 | अरी मिलनियाँ मोहन गावत ॥
अधर वेणु धर सप्त सुरन सों राधे नाम ले तोहि बुलावत ॥१॥
यह जानी गति प्राणनाथ की तानन राग अनंग बढ़ावत ॥
राका रजनी शरदचंद की रंजित छबि कौतुक उपजावत ॥२॥
सुरत दैन युवती मृगनयनी चपलनयन ओ्रौहन सरलाबत ॥
कृष्णदासप्रभु गिरिधरनागर रासरसिक बड़भागिन पावत ॥३॥ | Kanharo |
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