top of page
Sheetkal Ke Pad
To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.
Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Tolon hoe baikunth naan jehon .. suna pralhaad pratigya merrie | Part2-333 | तोलों हो बैकुंठ न जेहों ॥ सुन प्रल्हाद प्रतिज्ञा मेरी
जोलों तो शिरछत्र न देहों ॥१ ॥ मनकर्म वचन मानजिय अपने जहीं जहीं
जाने तहिंतहिं लेहों ॥ निगुण सगुण हेर सबदेखे तोसो भक्तमें कबहु न
पेहों ॥२ ॥ मो देखत मेरोदास दुखित भयो यह कलंक अबही जुचुकेहां ॥
हृदय कठिन पाषाण है मेरो अबही दीनदयाल कहेंहों ॥३ ॥ गहि तन
हिरण्यकशिपुकों चीरूं उदर फार नख रुधिर बहेहों ।॥ यह सुन वात तात
अब सूरज यह कृतको फल तुरत चखेहों ॥४ ॥ कोटि रे | Kanharo |
Kilkat kaanh ghuturuvan aavat . manimay kanik nandke | Part1-154 | किलकत कान्ह घुटुरुवन आवत । मनिमय कनिक नंदके
आँगन मुख प्रतिबिंब पकरवे धावत ॥१॥ कवहूँ निरख हरि आप छाँहकों
करसों पकरन चाहत । किलकत हँसत राजत दे देंतुली पुनि पुनि तिहिं
अवगाहत ॥२॥ कनक भूमि पर कर छाया यह उपमा इक राजत । कर कर
प्रति पद प्रति मन बसुधा कमल बैठकी साजत ॥३॥ बाल दशा मुख देख
जसोदा पुनि पुनि नंद बुलावत । अँचरातर लै ढॉँकि सूरके प्रभुकों दूध
पिवावत ॥४॥ | Bilawal |
Giridharlal russ bhar khelat vimal vasant radhika | Part3-046 | गिरिधरलाल रस भर खेलत विमल वसंत राधिका
संग ॥| उडत गुलाल अबीर अरगजा छिरकत भरत परस्पर रंग ॥ १॥ बाजत
ताल मृदंग अधोटी वीना मुरली तानत रंग ॥ कुंभनदास प्रभु यह विधि
क्रीडत यमुना पुलीन लजावत अनंग ॥१॥ | Basant |
Kelikala kamaneey kishore ubhay raspunjan kunjke nere .. | NityaPad-333 | केलिकला कमनीय किशोर उभय रसपुंजन कुंजके नेरे ॥
हास-विनोद कियो बल आली केतो सुखहोत है हेरे ।। १॥| बेलीके फूल प्रियाले
पियपर डारेकी उपमा होत मन मेरे नंददास मानों सांझ समय बगमाल तमालकों
जात बसेरे ॥२॥ | Poorvi |
Yashoda madangopale bulaave.. | Part2-036 | यशोदा मदनगोपाले बुलावे॥
धनतेरस आवो मेरे प्यारे ले उछंग हुलरावे ॥१ ॥
हरीजरी बागा बहु भूषण रुचिसों बहुत धरावे ॥
ब्रजपतिकी मुख शोभा निरखत रोमरोम सुख पावे ॥२ ॥ | Devgandhar |
Haake hataki hataki gaay thathaki thathaki rahee | NityaPad-279 | हाके हटकि हटकि गाय ठठकि ठठकि रही
गोकुलकी गली सब सांकरी ॥
जारी अटारी झरोखन मोखन झांकत दुरदुर
ठौरठौरते परत कांकरी ॥ १ ॥
चंपकली कुंदकली वरषत रसभरी तामेंपुन देखियत लिखेसे आंकरी ॥
नंददासप्रभु जहींजहीं द्वारें ठाढे होत तहीं तहीं बचन मांगत
लटक लटक जात काहूसों हां करी काहूसों ना करी ॥३॥ | Poorvi |
Nandrai pramudit shree jasomati suta jaayo sukhdai houn .. | Part1-035 | नंदराय प्रमुदित श्री जसोमति सुत जायो सुखदाई हों ॥
भादों कृष्ण अष्टमीकी निसि अचल महानिधि आइहो ॥१॥ तरुनी गन नख
सिख सजीआई गावत कहत बधाई हो ॥ पूरत चोक बिबिध रंगनके मंगल कलस
धराई हो ॥२॥ बेरख बंदन माल ग्रेह प्रति बसुधा सुधा बनाई हो ॥ वाजत
पंच शब्द सुथरे सुर जाचक आस पुराई हो ॥३॥ द्विज वर सबकों देत दछिनां
कीरति त्रिभुवन गाई हो |! सब जय अमित संपदा फेली व्रजजन अति चित चाइ
हों ॥४॥ तरुनि गनकों रंगरंग सारी देत असीस महाई हो ॥ गाय बच्छ
व्रजबासी प्रफुलित जमुनां बन सरसाई हो ॥५॥ सेवकजनकी पूरी आसा देव
कुसुम बरखाई हो ॥ ब्रजाधीश चिरजीयो लाडीलो सोभा बरनी न जाई हो ॥६॥
| Asawari |
Sunau kapi kaushalya kii baat .. yeh purr jinn aau munn | Part1-305 | सुनौ कपि कौशल्या की बात ॥ यह पुर जिन आऔ मन
वॉछित बिन लक्ष्मण लघु भ्रात ॥१॥ छाँड़ि राज काज माता हित तुम चरणन
चितलाय ॥ ताहि विमुख जीवन धीक रघुपति कहियो कपषि समुझाव ॥२॥
जो तुम कुशल क्षेम वैदेही तौ आन राजपुर कीजो ॥ नॉतर सूर सुमित्रा सुतपर
वारि अपनपौ दीजो ॥३॥ | Maru |
Aeye douu aeka rung rung gahare rung majeeth | haun vaake munn way merey munn | NityaPad-065 | ए दोऊ एक रंग रंग गहरे रंग मजीठ | हौं वाके मन वे मेरे मन
बस रहे आली री कहां करेगो बसीठ ॥१॥ पीत दुघालो लाल सिर सोहे तासो
मेरो मन मोह्यो अद्भुत छबि देखि सिला भई लीठ। ब्रजाधीश' प्रभु संग लाज
गई मेरी मुसक ठगोरी लागी ताते बावरी डोले वे तो लंगर ढीठ ॥।२॥। | Aasawari |
Nand key laal naval naagar anuraage hain.. khelati | Part3-216 | नंद के लाल नवल नागर अनुरागे हैं॥ खेलति
होरी फागु प्रेम रस पाणे हैं ॥१॥ गोप कुमार सस्वरा संग रंग रंगीले हैं ॥
प्रेम छके छिरकैं पट छैल छबीले हैं ॥२॥ ताल पखावज आबज महुवरि
बाजे हैं ॥ मानो सरोज सभा में बसंत बिराजे हैं ॥३॥ अनुरागे रस पागे
गायन गाव हैं ॥ कुमकुम मीर अबीर गुलाल उड़ावै हैं ॥४॥| गारि-गारि
घनसार अरगजा घोरे हैं ॥ केसरि रंग सुरंग में अंबर बोरें हैं ॥५॥ धाई-
धाई पिचकारिन भरि-भरि छाॉँटैं हैं | महामंगल मन मोद सौं भरि-भरि
बाँटें हैं ॥६॥ कालिंदी के कूल कुलाहल भारी हैं ॥ “रिषीकेस” के जीवनि-
कुंज-बिहारी हैं ॥७॥ | Kafi |
Madan gopal rasmondalmein malav raag rasabhasbau gaavai.. avghar | Part1-333 | मदन गोपाल रासमंडलमें मालव राग रसभस्बौ गावै॥ अवघर
तानबंधान सप्तस्वर मधुर भधुर मुरलिका बजाबै ॥१॥ निर्तत सुलपलेत
नौतनगति बहुविध हस्तक भेद दिखावै ॥ उघटत शब्द तत थेई तत थेई युवतिबूंद
मनमोद बढ़ावै ॥२॥ थक््यौ चंद मोहे खग नग भूृग प्रतिक्षण अमित अनागति
लावै ॥ च॒तुर्भुज प्रभु गिरिधर नटनागर सुरनर मुनि गति मति बिसरावै ॥३॥
# राग मालव & कमलनयन प्यारी अवधर तान जाने ॥ अलाग लाग सुराग
रागिणी बहुत अनागत आने ॥१॥ रसिकराय शिर मौर गुणिनमें गुण तुमही
पा ॥ कुंभनदास प्रभु गोवर्धनधर हरत लाल सबकौ मन जबही करत हो
गा ॥२॥ | Malav |
Mohan chhaak baantat jahaan... | NityaPad-211 | मोहन छाक बांटत जहां॥।
सुबल सुबाहो श्रीदामा टेरत कर कर ऊंची बाह ॥१॥ गोवर्धनकी सिखर पर
बेठे तरु कदंब की छाह ॥ हंस हंस भोजन करत परसपर ले लेकरतल मांह ॥ २॥
सिवसनकादीक से निज सेवक या सुख कों ललचाय ॥ सूरदास गिरधरकी
जूठन मांगे हंस हंस खाय ॥३॥ | Saarang |
Page 1 of 1
bottom of page
