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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Gaay khilaay aaye nandanadan shobhit taal mridang bajaaye .. | Part2-046 | गाय खिलाय आये नंदनदन शोभित ताल मृदंग बजाये ॥
हँसहँस ग्वाल देत करतारी आछे आछे मंगल गाये ॥१ ॥
अति आनंद नंदजुकीरानी गजमोतिनके चोक पुराये |
वारवार नोंछावर वारत जबही लाल घर भीतर आये ॥२॥
आछे चीर बहुत भांतनके गोपी ग्वाल सब पेहेराये॥
श्रीवि्ुलगिरिधरनलाल को मुख चुंबत ओर लेत बलाये ॥३ ॥ | Sarang |
Maaee aaj tou badhaai chhaai champaranya dhamri. | Part2-306 | माई आज तो बधाई छाई चंपारन्य धामरी।
जायो है इलम्मागारू श्री लछमननन्दरी ॥१९ ॥ प्रकटे हैं पूरन ब्रह्म अखिल निगम रूप । अग्निकुण्ड मध्य देखो द्विनकुलचंदरी ॥२ ॥ दोड आये मात
तात हरख निरख श्याम गात। दष्टसुं दष्ट मिली भयो है आनन्द री ॥३ ॥
लियो है उछंग मात दियो पुनि गोद तात। निरखि के भयो है जु सबको
आनन्द री ॥४॥ छूटी स्तन दुग्धधार नभ भयो जैजैकार । दियो है मारग
जननी आनन्दकन्द री॥५ ॥ भई है आकासबानी सबन के मनमानी!
पुष्टिपथ स्थापन कियो जशोमति नन्द री ॥६ ॥ कृष्णपक्ष माधो मास सुभ
एकादशी आज। दक्चि दूध छिरकत नाचे सुखकंद री॥७॥ दियो हे
ओगार माल निसिदिन नंदलाल। नाम धर्यो श्री बलल्लभ गयो दुखदन्द
री ॥८ ॥ ब्रह्मा सिव इन्द्रादिक सुरनरगुनीजन। नारद गंधर्व जैजे करे
जगवंदरी ॥९ ॥ देवता विमान चढी पुष्पन की वृष्टि करि | कृष्णदास जस
गायो भयो है आनंद री ॥१० ॥ | jejevanti |
Baithe laal phoolanke chobare.. | NityaPad-256 | बैठे लाल फूलनके चोबारे॥
कुर्बक बकुल मालती चंपो केतकी नवल निवारे॥|१॥
जाई जुई केवरो कुंज रायवेलि म्हेकारे॥।
मंद समीर कीर पिक कूजत मधुप करत झंकारे ॥२॥
राधा रमण रंगभर क्रीडत नाचत मोर अखारे॥
कुंभनदास गिरिधरकी छबि पर कोटिक मन्मथवारे॥।३॥ | Lalidya |
Sakhaasahit gayemakhanchori .. | NityaPad-186 | सखासहित गयेमाखनचोरी ॥
देखोस्याम वापंथहैगोपी एकमथत दथधिभोरी ॥१॥
हेरमथानी धरीमांटतें माखनहैउतरात ॥
आपगई कमोरीमाँगन हरिपाईतहांघात ॥
पैठसखनसहित घरसूनो माखनदधिसबखाये ।।
छूंछीछांड मट॒ुकियादधिकी हससबबाहिर आये | ३॥
आयगई कर लियेकमोरी घरतेनिकसेग्वाल ॥|
माखनकरदधि मुखलपटानो देखरहेंनेंदलाल ।।४॥
कहांआये वृद्ध बालकसंगले माखन मुखलपटानो ॥
खेलतते उठभाजोसखा यहीघर आय छिपानो ॥५।॥।
भुजागहिलिये कान्ह एकग्वालिन निकसेब्रजकीखोरी ।।
सूरदासठगिरही ग्वालिनी मनहरलियो करचोरी ॥।६॥। | Bilawal |
Hamein vrajraj laadileson kaaj .. | NityaPad-104 | हमें ब्रजराज लाडिलेसों काज ॥
यश अपयशको हमें काहा डर कहिनों होय सो कहिलेउ आज ॥। १॥
केधों काहू कृपाकरीधो न करीजो सन्मुख ब्रजनृप युवराज ॥
गोदिंदप्रभुकी कृपा चाहिये जोहें सकलघोष सिरताज ॥ २।। | Nat |
Aachhevnarajke kharikarwane vadadevagar .... | NityaPad-178 | आछेव्नरजके खरिकरवाने वडडेवगर ॥॥
नवतरुणी नवतरलितमंडित अगणितसुरभी हूंकडगर ॥१॥
जहांतहांदधिमथन घमरके प्रमुदित माखनचोर लंगर।। मागधसूतवदतबंदीजन लज्जितसुरपुर नगरीनगर ॥ २॥।
दिनमंगल दिनवंदन माला भवन सुवासित धूप अगर ॥
कौनगिनें हरिदासगहवरगुण मसिसागर अरुअवनीकगर ॥।३॥ | Aasawari |
Nirtat mohan rasik sakhansang gidgid tatthei tatthei | Part1-322 | निर्तत मोहन रसिक सखनसंग गिडगिड ततथेई ततथेई
तत्ता ॥ मृदंग धरम धरम धरम ज्ञाल उरपसप्त सुरजो मिलकत मधुप मत्ता ॥१॥
टिपासे सिर पीतपटलाल काछनी बनी किकिनी रुनझूनात गावत सुरसत्ता ॥
गोविंद प्रभुके जु गोपबालकसंग जे जे जे करत प्रेम अनुरत्ता ॥२॥ | Ramkali |
Aajukau tilak nandamaharghar . magan sabain naachat naari | Part1-044 | आजुकौ तिलक नंदमहरघर । मगन सबैं नाचत नारी
नर ॥१॥ जायौ पूत जसोदारानी | भोहन मूरति सब सुखदानी ॥२॥
रंगरंग पहरे अंबर गोपी । सुंदरता देखि उपमा ल्ोपी ॥३॥ सोभित मंगल
बाजे बाजत । हरद दही घृत छिरकत लाजत ॥४॥ तनमन फूले सब सुख
सानें । पर जुबती पर पुरुष न जानें॥५॥ भरि भरि भाँवरे लेत सु अंक ।
बरख्यौं गोरस माची पंक ॥६॥ सुनि सुनि फूले सब व्रज के जन । मुदित
महामन देत सबै धन ॥७॥ द्विज बंदी जन मंगत जनगन । नंद दयौ भायौ
जाके मन ॥८॥ दामोदर हित कीरत गाऊँ । माँगौ प्रेम बधाई पाऊँ ॥९॥ | Sarang |
Shyam sunder bunn khelat sakhan sanga bibidh khel .. kalindani | NityaPad-171 | श्याम सुन्दर बन खेलत सखन संग बिबिध खेल ।। कालिंदनी
तट बांधी फेंट पट करत जुध भुज जु परस्पर पेल ॥१॥| काहुकी मुरली चोरत
काहुकी संग षष्ठी काहुको छीको नाडो काहुकी चोरत सेली ॥ गोविंद पिय रस
भरे निर्तत सखाके ग्रीवा भुज मेली ॥२॥ | Saarang |
Varasaane kii gwalini or khelat faag vasant | Part3-346 | वरसाने की ग्वालिनी ओर खेलत फाग वसंत
हो ॥ शंक न मानें काहूकी मात पिता सुत कंत हो ॥१॥ चंद्रभागा चंद्रावली
मध्य नायक राजत राधा ॥ सहज स्वरूप सुहावनो शोभा सिंधु अगाधा
॥५॥ सकल साज संग ले चली आंई बट संकेत ॥ पठई सखी एक आपनी
नंद कुंबर के डेत ॥ ३॥ चली सब चतुर सिरोमणि ओर खेलनकों रस फाग ॥
रसिक कुंबरि वृषभान की तुमसों अति अनुराग ॥8॥ रामकृष्ण हंस यो
कह्कौ सुनो हो सखा श्रीदाम ॥ हमपें आय सबे जुरीं ओर तिनमें अति
से भाम ॥५॥ वेग चलो सब ग्वाल ले दिखाओ अपुने हाथ ॥ जेसें बहोरिन
आवहीं छांड आपनों साथ ॥६॥ अनंत अबीर गुलाल ले देहु निसान घुराई ॥
बहुत कलश सोंघे भरे कुंकुम भर पिचकाई ॥७॥ दलवादर ज्यों देख सनन््मुख
आई धाई ॥ मेघ घटा ज्यों वरखहीं अद्भुत खेल मचाई ॥८॥ कमलन ले
ले नवलासी कुसुम गेंद कर मारी ॥ मुरि भाजे बल मोहना हो हो कहें
ब्रजनारी ॥९॥ चंद्रावलि बल जू गहे स्याम गहे श्री श्यामा || सखा गए
सब भाज के लियो छिनाय दमामा ॥१०॥ संकरषण सोंधे भरे श्याम भरे
सुकुमारी ॥ आनन सीस सवारिकें भेष बनायो नारी ॥ १ १॥ रस वश भई
ब्रजसुंदरी लीला कहीय न जाई ॥ चतुर्भुज प्रभु इन वस किये गिरि गोवर्द्धन
राई ॥१२॥ | Bihaag |
Garaj garaj vraj gherat aavein.. tarak tarak chapla chamkaaven..91.. | Part2-082 | गरज गरज ब्रज घेरत आवें॥ तरक तरक चपला चमकावें॥९१॥
नरनारी सब देखत ठाढे॥ ये बादर परलेके काढे ॥२॥
दरदरात घहरात प्रबल अति॥ गोपी ग्वाल भये औरे गति॥३॥
कहा होंन अबही यह चाहत। जिहिं तिहिं लोग यहे अवगाहत ॥४॥
क्षण भीतर क्षण बाहिर आवत॥ गगनदेख धीरजविसरावत ॥५॥
सूरश्याम यह करी पुजाई। तातें सुरपति चढयों रिस्याई ॥६ ॥। | Bilawal |
Fagu khele radha gori shree vrishabhaanu joo kii pauri | Part3-179 | फागु खेले राध ा गोरी श्री वृषभानु जु की पौरि
हो ॥ नंदलाल वृषभानु नैँदनी भली बनी यह जोरी हो ॥१॥ चारु, अबीर,
गुलाल, लसत तन, बिच बिच राजति रोरी हो ॥ झख करदम हरि रहसि भरै तब, केसर कुँमकुम घोरी हो ॥२॥ तन सुख चारु छींट छिरकति तन,
डणमगात डोरी हो ॥ अंचल पट सोभित्त ऊरू कुच पै उपमा श्रीफल कोरी
हो ॥३॥ स्याम सुभग के बाम अंस पै राजति नवल किसोरी हो ॥ नूपुर
रुनति कुनित कटि मेखला निरखि मदन मति भोरी हो ॥४॥ रीक्षि-रीि
तब “रसिक राई” कौं मृदु मुसिकनि मुख मोरी हो ॥ प्रेम गाँठि परि जू
परसपर छुटत नहिं क्यों हूँ छोरी हो ॥५॥ | Jetshri |
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