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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Apano jan pralhaad ubaayon.. khambh beechaten prakate
Part2-335
अपनो जन प्रल्हाद उबायों॥ खंभ बीचतें प्रकटे नरहरि हिरण्यकश्यपु उर नखन विदारयों ॥ १ ॥ बरखत कुसुम शब्द ध्वनि जेजे सुर देखत सदा कोतुक हार्यो ॥ कमला हरिज्के निकट न आवत एसो रूप हरि कबहूं न धायों ॥२॥ प्रल्हादे चुंबत ओर चाटत भक्त जानिकें क्रोध निवायों॥ सूरदास बलिजाय दरशकी भक्त विरोधी देत्य भिस्तायों ॥३ ॥
Kanharo
Sub dinn hott naan aeka samaan .. pragatahe
NityaPad-359
सब दिन होत न एक समान ॥ प्रगटतहे पूरव की करनी तजमन सोच अज्ञान ॥१॥ कबहुंक राजाहरिश्चंद्र गृहसंपति मेरुसमान ॥ कबहुँक दासश्वपच गृह ह॒वैके अंबर हरत मसान ॥॥२॥ कबहुंक युथिष्ठिर राजसिंहासन अनुचर श्रीभगवान ॥ कबहुँक द्रपद सुता कौरवबश केशदुशासन तान॥ ३।| कबहुंक दुलहे बन्योबराती चहुंदिश मंगलगान॥ कबहुँक आप मृतकहजै जातहै करलंबे पदपान ॥।४॥ कबहुँक रामसहित जानकी विचरत पुष्पविमान।। कबहुंक रुदनकरत फिरतहै महावन उद्यान ॥५॥। जननी जठर जन्यो जादिनते लिख्यो लाभ अरु हान ॥ सूरदास यतन सब झूठे बिधिके अंकप्रमान ॥६।
Bihaag
Chandanko vago banyo
NityaPad-238
चंदनको वागो बन्यो चंदनकी खोर कीयें चंदन के रूखतर ठाडे प्यारी।। चंदनकी पाग शिर चन्दन को फेंटा बन्यो चंदनकी गोली तन चंदनकी सारी ॥। १॥ चन्दनकी आरसी निहारतहें दोऊजन हंसहंस जात भरत अंकवारी॥ सूरदास मदनमोहन चन्दनके महल बेठे गावत सारंग राग रंग रह्मों भारी॥२॥
Saarang
Grih grihaten aavat vrajnari .. dhari dhari matuki maathe oopar
Part1-262
गृह गृहतें आवत व्रजनारी ॥ धरि धरि मटुकी माथे ऊपर गजमोतिन माँग सवारी ॥॥॥ आभूषण सगरे रचि पहिरें और सुहाई पाटीपारी ॥ कंचुकी कसि लीनीजु हीये पर तन सोहत अंचल डारी ॥२॥ जुरि सब झुंड भईं इकठोरी चंद्रावलि वृषभानदुलारी ॥ आओ तहाँ सब चलि देखें दान निबेरत हैं गिरिधारी ॥ सूधी चली गई बह नागरि आड़ी कीनी ललिता मुसिकान ॥ जाइ न कछू कहिहे हमसों काहे देत अटपटी बान ॥४॥ छाडौ नहीं दान बिनु लीनें भत्नी बौहनी है है प्रात । दधिकी मटुकी छीन सब लैहें काहे कौ अकुलात ॥५॥ उतर होत सब नंदनंदनसौ दान कहत काहे कौ नाम ॥ कौन दमनसो देहुँ लड़ते रहतत हमारे गाम ॥६॥| तुम जो चलावति एक दही की इहाँ लीजियत अँगर्जेगकौ दान ॥ तनकौ दान लेत सबहिनपै भरे हैं ऐसे ठान ॥७॥ दान देंन घरतें लै आवहुँ तब तुमरौ सब देहुँ चुकाई ॥ इतनी दूर तुम जाहु काहेकों तुमहीं पे सब देहुँ बताई !॥८॥ हमपे कहा कहै किन हमसों हमहैं रीति परी तहोँ आईं ॥ रीती नहीं झूठी सौ बोलत नखशिखलों हम भरि भरि लाईं ॥९॥ सो तुम कहो अहो नंदनंदन पैंड़े घाट पाइयत कैसे) काहे करत नॉहि किशोरी दैवेकी दीसत है वैसें ॥१०॥ मटुकी उचक लई सिरपरतें करिकरि स्वाद लाल भल खाई ॥ चितवत हँसत कहत सबहीसों कहा मेल तुम ओट जमाई ॥११॥ आजहू जान देहु घर अपने नये नये अँचरा डरे फार ॥ तुमतौ बैठिहो घर भीतर मनसों देखो क्‍यों न बिचार ॥१२॥ शिविल भई सुनि बचन लालके सुखरस आज बढ़यौ बन माँझ ॥ श्रीविद्वलनगिरिधरके हिंगते निश भई घर आई सौँझ ॥१३॥
Dhanashri
Doodh piyo hoe kunwar kanhai .
NityaPad-304
दूध पियो हो कुँवर कन्हाई । ओट्यो अति ही स्वच्छ भरलाई तामें अधिक मिठाई ॥१॥ सुधर अरगजा अंग लेपन कियो लागत परमसुहाई । कृष्णदास भर लाई जमुनोदक अचवन कीजिये आई।॥।२॥
Iman
Seetal useer grih chhirakyo gulab neer parimal patir ghansar
NityaPad-245
सीतल उसीर गृह छिरक्यो गुलाब नीर परिमल पाटीर घनसार वरखतहैं ॥ सेज सजी पत्रनकी अतरसों तरकी अरगज़ा अनूप अंग मोद दरसत हैं॥१॥ वीजना बियार सीरी छूटत फुहारे नीके मानोघमननमें नहैंनी नहैंनी फुही बरसतहें | चतुरविहारी प्यारी रससो विलास करत जेठमास हेमंतक्रतु सरस दरसत है ॥२॥
Saarang
Kaliyug sub jugate adhikai.
Part2-275
कलियुग सब जुगते अधिकाई। जा जुगमें प्रगटे जग शीतल श्रीवललभ सुखदाई ॥ कलिजुग० ॥ जो कोउ शरन जाय हैं इनके ताकी करत सहाई। दास शरन हरि वागधीश की चरण रेणु निधि पाई ॥कलिजुग० ॥
Ramkali
Girdhar girwardhar nandlal.. dekhat ganga bulaai dhumar koojat benu rasal ...1..
NityaPad-177
गिरधर गिरवरधर नंदलाल॥ देखत गंग बुलाई धुमर कूजत बेनु रसाल ॥।१॥ लाल इजार ताफताकी झगुली पीत दुमालो उर मनिमाल चहुंदिश धेनु कमलसुख निरखत कहत सखा सब ग्वाल ॥ २॥ सांझ भई बगदावो गैयां धाय रहे तेहि काल ॥ उमंग रही देखन परमानंद गोपीजन ब्रजबाल ।॥।३॥।
Gori
Barasganthi laal giridharki houn abahi suni aaee | mangal
Part1-027
बरसगांठि लाल गिरिधरकी हों अबही सुनि आई | मंगल गावति चौक पुरावति घर घर बजत बधाई ॥१॥ ध्वजा पत्ताका तोरनमाला बंदनवार बंधाई । बाजत ताल पखावज आवज झांझन झमक लगाई ॥२॥ गोपीग्वाल परस्पर नाचत दधिकी कीच मचाई । देखि देखि ब्रह्मा शिव नारद कुसुमन वृष्टि कराई ॥३॥ कहिये कहा कहत नहीं आवे बरनों कहा बड़ाई । नंदनंदनकी या छबि ऊपर आस करन बलि जाई ॥४॥
Asawari
Kahaanlo verno sundartai .. khelat kunwar kanak aangan mein
NityaPad-057
कहांलो वरनो सुंदरताई ॥ खेलत कुंवर कनक आंगन में नयन निरख सुखदाई ।। १॥। श्वेत कुलहि शिर स्थामसुंदर के बहुविध रंग बनाई ॥। मानों नवघन ऊपर राजत मघवा धनुष चढाई ॥२॥ श्वेत पीत अरू असितलालमणि लटकन भाल रुराई ॥ मानों असुरदेवगुरु सनि मिल भूमि सुत समुदाई ॥३॥ अतिसुदेश मनहरत कुटिलकच लोचन मुख सकुचाई ॥ मानोंमंजुल कंजकोशपर अलि अवली फिर आई ॥४॥ दूधदंत अधरन छबि अद्भुत अलपतलपजलझाई ॥ किलकत हसत दुरतप्रकटत मानो घनमे विद्युलताई ॥५।। खंडित वचन देतपूरणसुख अद्भुत यह उपमाई ॥ घुटुरुवन चलत उठत प्रमुदित मन सूरदास बलजाई ॥।६॥
Ramkali
Sangeet ruscushal nirt aaves vas lasati radha rasmondal biharini .
Pustak1-329
संगीत रसकुशल निर्त आवेस वस लसति राधा रासमंडल बिहारिनी । दिव्यगति चरण चंचल चक्रवर्तिनी कुंवरी श्याम मनोहर मनोहारिनी ॥१॥ लोचन विशाल मृदुहास मन उल्लास नंदनंदन मनसिज मोद विस्तारनी। मूदुल पदविन्यास चलित वलयावलि किकिनी रुनझुनतकार झंकारिनी ॥२॥ रूप निरुपम कांति भांति वरनी न जाती पहरि आभरन रवि षोडस सिंगारनी । मृदंग बीना ताल सुर संच संचार चारुता चातुरी सार अनुसारिनी ॥३॥ उघट मुख शब्द पियूष बरखत मनो सींची पिय श्रवन तन पुलक कुलकारिनी । कही “गदाधर” जू गिरिराजधरतें अधिक विदित रसग्रन्थ अद्भुत कलाधारिनी ॥४॥
Saarang
Lagan manlagiholagi .. kahaakarenge logmero
NityaPad-090
लगन मनलागीहोलागी ॥ कहाकरेंगे लोगमेरो होंप्रीतमरसपागी ।।९॥ कछूनसुहायजायन कहूंमन ऐसीवनि आईअनमांगी ॥ अबधरीयत चितआसपासरहिये रसीकप्रीतमबडभागी ।।२॥
Bilawal
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