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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Daan dey ree naval kisori .. maangat laal ladillau naagar pragat
Part1-246
दान दे री नवल किसोरी ॥ माँगत लाल लाडिलौ नागर प्रगट भई दिनदिनकी चोरी ॥१)| नवनागर हारावलि विदुम सरस जलज मन गौरी॥ पूरित रस पीयूष जुगल घट कमल कदली खंजन की जोरी ॥२॥ तापैं सकल सोंज दामनकी कित सतरात कुटिल द्रग मोरी ) नूपुर रव किंकिनी पिय सुनियत हित हरिवंंस कहत नहीं थोरी ॥३॥
Saarang
Sakhee vraj phoole vividh basant .. phoole morr,
Part3-025
सखी ब्रज फूले विविध बसंत ॥ फूले मोर, कमुद, सरसी अरू, फूले अलि, जल जंत ॥१॥ फूले द्वूम बेली फूले द्विज गावत गुनवंत ॥ '्रजाधीस” जन फुले लखि अति सुख फूले मिलि हरि कत ॥२॥।
Basant
Poochhat janani kahaan tey aaye | aaj gayo shree bal‍labhake ghar
NityaPad-072
पूछत जननी कहां ते आये | आज गयो श्री बल्‍लभके घर बहोतक लाड लडाये ॥ १॥। विविध भांत पट भूषण ले ले सरस सिंगार बनाये। सीस पाग सिरपेच बांधे तहां मोर चन्द्रिका लाये ॥२॥ बहोत भांत पकवान मिठाई विंजन सरस बनाये । पायस आदि समर्पित मोहि मेरी लीला गाये ॥। ३॥। प्रेम सहित वल्‍लभ मुख निरखत और न कछु सुहाए। रसिक' प्रीतम कहत जननी सों आज अधिक सुख पाये ॥॥४॥।
Todi
Shayam ghana baadarke jese sub bhakt sohe
Part2-330
शयाम घन बादरके जेसे सब भक्त सोहे दामिनी दमकत तेसे वललभ सुजान । अंधियारी रैन मध्य जेसे उद्डुगन सोहे पावस ऋतुमें सोहे जेसे मलार तान॥१॥ बना बने नंदलाल बराती हैं ग्वाल बाल सोहे लीली घोरी पर रूपके निधान | घोषकी जु नारी सब अटा चढी देखबेको देव सब देखत हें बैठे जु विमान ॥२ ॥
Megh Malhaar
Aaj dashahara shubh dinn neeko ponyatau juji hoe gopal ..
Part1-314
आज दशहरा शुभ दिन नीको पॉँयतौ जूजी हो गोपाल ॥ ब्रजरानी ब्रजराज कुँवरकौ करो सिंगार परम रसाल ॥१॥ तब व्रजराज अश्व सिंगारे तापर चढ़े श्रीगिरिधरनलाल रसिक प्रीतम पिय चले कुदावत जहाँ बैठी वृषभान की बाल ॥२॥
Bilawal
Chhabili raadhe pooj lenny gangor..
Part2-245
छबीली राधे पूज लेनी गनगोर॥ ललिता 'विसाखा सब मिल नीकसीं आई वृषभानकीपोर ॥१ ॥ सघनकुंज गहवर बन नीको मिल्यो नंदकिशोर॥ नंददासप्रभु आये अचानक घेरलिये चहुंओर ॥२ ॥
Saarang
Gayanke paachhepaachen nutber kaachhenkaachen banyohe tiparo aachho lalgiridharike..
NityaPad-062
गायनके पाछेपाछें नटबर काछेंकाछें बन्योहे टिपारो आछो लालगिरिधारिके॥ धातुको तिलक किये बनी गुंजमाल हिये वनके शृंगार सब विपिन विहारीके ॥१॥| नटवरवेष किये ग्वालमंडली संगलिये गावतबजावत देत कर तारीके ॥ गोविंदप्रभु बनते ब्रज आवतदोरदोर ब्रजनारी झांकत मध्य जारीके ॥२॥
Poorvi
Paniyan naan jaauun ree aalee nandanandan
NityaPad-271
पनियां न जाऊं री आली नंदनंदन मेरी मटरी पटक के झटकी ॥ चक्‍क दुपहरी में अटकी कुंजन लों कोऊ न जाने घट घटकी ॥१॥ कहा करों कछु बस नहीं मेरौ नागर नट सों अटकी ॥ नंददास प्रभु की छबि निरखत सुध न रही पनघट की ॥२॥
Saarang
Larkai mein jobanki chhabi dekho sunder nayanan bharbhar ...
NityaPad-161
लरकाई में जोबनकी छबि देखो सुंदर नयनन भरभर ॥। बिथुरी अलक बदन छबि राजत सुरत केलि मानो सीख दई हर ॥। १॥ गंड चखोडापर चख बिंदुला चिह्न किये मानो चुंबन करकर ॥ नेन सलोने भ्रमर भमत मानो ललितगिरा राजत अति तोतर ॥२॥ आंगन डोलत फिरत महागज लेत सखी लरकारे भुजन भर ॥ सूरस्यथाम सब समे महारस देत लाला पावत सुख नागर ॥। ३॥
Pancham
Kaanah tihaare raaj basant hoe sub mukh chain dikhaai deit naheen curr vaa chhin ..
Part3-003
कानह् तिहारे राज बसंत हो सब मुख चेन दिखाई देत नहीं कर वा छिन ॥ नंद समीप मंगल मित अंत न होत जुजान बीतत वरज निसदिन ॥ १॥ भूर भाग्य निज जन घर ब्रजवासी कहावत नारीन धन्य ॥ परमानंद या सुखके कारन सदा बसंत रहत बूंदावन ॥२॥
Malkoos
Dekho brindavanako bhoomi bhagu .. jahaan radhamadhav
Part3-030
देखो बृंदावनको भूमि भागु ॥ जहां राधामाधव खेलत फायु ॥भ्रु०)। जाको शेषसहस्त्र मुखलहे न अंत गुनगाबे नारदसे अनंत ॥ जाको अगम निगम कहें तेज पुंज ॥ सोतो होहो करत फिरत कुंजकुंज ॥१॥ जाके कोटिक ब्रह्मा कोटि इन्द्र ॥ जाके कोटिक रवि कोटिचंद्र ॥ जाको ध्यानधरत मुनिरहेहारि ॥ ताकोंसकल गोपी मिल देत गारि ॥ सोहे मोरमुकुट सिरतिलकभाल ॥ ऐसें ललित लोल लोचन बिशाल ॥ जाकि चितवनि मुसक्तिनि हंसचाल || लखि मोहि रहीं सब ब्रज की बाल ॥ ३॥ जहां बाजेबाजत तूरिताल ॥ सुरमंडल महुबरिधुनि रसाल ॥ बीना उपंग मुरली मृदंग ॥ बार्जेरायगिडगिडी ओरचंग ॥४॥ जहां करत कुतुहल गोपीग्वाल ॥ तहां उडति अबीर कुंकुम गुलाल ॥ ऐसे छांडत छिरकत फिरें गुपाल ॥ तातें हरहर हरि हंसिभये खुशाल ॥।५॥ जाकों बेद कहतिहें नेतिनेति ॥ जासों हंसिहंसि ग्वालिनी फगुवा लेत ॥ अद्भत लीला अपरंपार ॥ जाको सुरनर भुनिकरें जैजैकार ॥ राधाजीवन ऊरको हार ॥ऐसे मुरलीदास प्रभु करें बिहार ॥६॥
Basant
Lalnaan nava kisor naagar hari dharchau joo natwar
Part3-259
ललनाँ नव किसोर नागर हरि धरच्ौ जु नटवर भेख हो ॥ ब्रिंदाबन बिहरति चले आनंद बढ्यो बिसेष हो ॥१॥ श्री स्यामा सखि बोलि लई, गिरिधर पिय के संग हो ॥ ऋतु बसंत मन मोद सौं बन पुहुपित नव रंग हो ॥२॥ सेत डैंडिया सुरंग बन्यौ अति लैहिंगा पचरंग बॉनि हो ॥ तोई अरून, पियरे पलैं, केसर छींट सुहांनि हो ॥३॥ मृगमद- तिलक अंजन दियो अधरनि रंग तंबोर हो ॥ चिबुक चारु नैंकु चुनगीया चौकी रवि सम हो रहो ॥|४॥ ख्बन खुभी दुलरी गरैं, कंचन वलय अमोल हो ॥ चूरी चारु द्धै भुज बनी, कबरी कुसुम झकझोल हो ॥५॥ नीवी बंध फौंदा बन्यों नाभि जलज के तीर हो ॥ कटि रसना पद बीछीया, तापै क्वनित मंजीर हो ॥६॥ सुखद सिरोमनि साँवरों लटकि पीत सिर पाग हो | चारू टकोंचा खासा कौ सौंधे भींजति लाग हो ॥७।॥| कनक हि बरन तिलक बन्यौ कौस्तुभ राजत कंठ हो ॥ उपरैनी आछी बनी कटे किंकिनि फैंटा गंठ हो ॥८॥ लाल इजार नूपुर बने कूंजत मृदु कल-बंस हो ॥ मान सरोवर में मानौं क्रीड़ति दंपति हंस हो ॥|९॥ फूलछरी कर पिचकारी कुच पै मेलैं कच सीस हो ॥ घूंघट पट दंतिनि गद्मौ दे भुकुटि कमानक सीस हो ॥१०॥ कुंमकुम चंदन अरगजा मिस्रित माँझ कपूर हो ॥ कनक कचौरा कर धरें तकि तकि मारत दूर हो ॥११॥ बूका थैली हरि गही, दे मूठी मुख माँझी हो ॥ घेर अंबर, लखियतु नहीं भ्रमि गुलाल भई साँझि हो ॥१२॥ मुरज, पखावज, बांसुरी, आबज, दुंदुभि ढ़ोल हो ॥| ताल मृदंग, चंग, कठतोरी, बिच मुख चंग सुबोल हो ॥१३॥ गोमुख, डंडा, सुर-तुरी जंत्र, रबाब अनूप हो ॥ गारी परसपर गाव हीं सांवल गौर सरूप हो ॥१४।॥ इत सौं उन तट खेल हीं कौतुक कह्यौ न जाई हो ॥ रिझवति ललनां लाल कौं सुंदर सारंग हो ॥१५॥ मुख देखति अति सुख भयो कूजति सुक, पिक, मोर हो ॥ अनंग मुरझि धरनि परचौं सखि डारति हो तिन तोरी हो ॥१४॥ चांचरि चैत सुहावनौं गावति फागु धमार हो ॥ “बिस्नु दास” सुरनर मुनि पद रज, बंदित सार हो ॥१७॥
Sarang
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