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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Vallabh priya mill karat kaleu. nava vyanjan curr
Part2-326
वललभ प्रिया मिल करत कलेउ। नव व्यंजन कर दियो ढाँपि जब प्रीत हृदैकी लख्यो न कोऊ ॥९॥ राख्यो थार अमरती घेवर माखन मिश्री मिठाई मेव्रा अरु सलोने जेंबत हैं दोऊ। रामदास वललभजन ठाडे पूछत राज कछु लेऊ ॥२ ॥
Bhairav
Shree vrishbhaanke betty bhaee. bhaadon sudi ashtami shubh dinn dhanya
Part1-202
श्री वृषभानके बेटी भई। भादों सुदी अष्टमी शुभ दिन धन्य कुखि कीरतिजू माई ॥१॥ श्रवन सुनत सहचरी मिलि आई अति प्रफुलित सब देत बधाई । ध्वजा पताका तोरनमाला आंगन मोतिन चौक पुराई ॥२॥ पंच शब्द बाजै बाजत है प्रमुदित ब्रजजन मंगल गाई । विप्र वेद उचारन लागे जाचकजन बहु करत बडाई ॥३॥ त्रिभुवनकी शोभाजू प्रगट भई श्री गिरिवरधरकों सुखदाई । जैजैकार भयो वसुधामें हरखि इन्द्र पुष्प बरखाई ॥४॥ यह जोरी रहो ब्रज अविचल राज करो राधा व्रजराई । श्री वललभ सुत चरनकमल रज 'हरिदास” नौछावर पाई ॥५॥
Kanharo
Aachho neeki sohat hassan daiy daiy dudhaki datiyaan . ghuturuvan
Part1-168
आछो नीकी सोहत हसन दै दै दुधकी दतियां । घुटुरुवन आंगन रिंगन मोहन खेलत आनआन भतियां ॥१॥ लरलटकन मटकन करपोहोंची बोलत तोतरी बतियां | मुख चुंबत रघुनाथदास बलि हसि लगावत छतियां. ॥३॥
Kanharo
Gori pati poojat vrajnari ..
NityaPad-045
गोरी पति पूजत ब्रजनारि ॥ नेमधरम सो रहेंत क्रिया जुत बहुत करत मनुहारी ॥१॥ यह कहेंत पति उमापति गिरिधर नंददुलार सरण राखिलीजेशिवसंकर तनही त्रखावत मार ।। २॥ कमल पत्र मातुलप व्होत्र फल नाना सुमन सुवास || महादेव पूजन मनवचकर सूर स्थाम की आस ।।३॥।
Ramkali
Aabo vasant vadhaavo vrajki naari.. sakhee singhpori thaade murari ..|shru0..
Part3-015
आबो वसंत वधावो ब्रजकी नारि॥ सखी सिंघपोरि ठाडे मुरारि ॥|श्रु०॥ नौतन सारी कसूंभी पहरिकें नवसत अभरनसजियें ॥ नवनवसुख मोहन संग विलसत नवल कान्ह पियभजियें ॥१॥ राधा चंद्रभगा अंद्रावलि ललिता भाम सुसीले ॥| संजावली कनिकघट शिरपर अंबमोर जब लीले ॥२॥ चोवा चंदन अगरकुंकुमा उडत मुलाल अबीरे ॥ खेलत फागभाग बड गोपी छिरकत स्याम शरीरे ॥३॥ वीनावेन झांझ डफ बाजे मृदंग उपंगन ताल ॥ कृष्णदास प्रभु गिरिधरनागर रसिक कुंवर गोपाल ॥४॥
Basant
Raam janm anand badhaai.. surataru kamshenu
Part2-255
राम जन्म आनंद बधाई॥ सुरतरु कामशेनु चिंतामण अवधपुरी मानों घरघर आई॥१॥ अंतरिक्ष जन फिरत अवनीपर मिलत परस्पर दूब बंधाई ॥ प्रफुल्लित हदें नगर बासिनके बाल वृद्ध सब बात सुहाई ॥२ ॥ घीर गंभीर नाचें नरनारी बाचे बहुत गिने नहीं जाई॥ मंगल कलश चौक मोतिनके द्वारन बंदनवार बंधाई ॥३ ॥ सुतको बदन निहार नारि सब बारत भूषण लेत बलाई ॥ रत्न गर्भ कौशल्यारानी धन्य भाग्यकी करत बडाई ॥४ ॥ दशरथराय नहाय भये ठाडे कंचन बसन अनेक मगाई॥ परम पुनीत विप्र पद वंदित दान मान जन घन बरखाई ॥५ ॥ मागथ सूत भाट बंदीजन अष्टसिद्धि नवनिधि बांछित पाईं॥ दशरथ सुत नितप्रति हों देखों अग्रदासके यह जीय भाई ॥६ ॥
Jetashri
Doll maaee jhoolat nandkumar .. vaam bhaag
Part3-374
डोल माई झूलत नंदकुमार ॥ वाम भाग वृषभान मंदिनी जोरी अति सुकुमार ॥१॥ श्री यमुना तट सघन कुंज तर बृंदावनहि मझार ॥ माधुरी कुंद लता अति प्रफुल्लित उरझि परस्पर डार ॥२॥ बहुत समीर मंद अति शीतल अलिपिक करत पुकार ॥ झोटादेत हरख ललितादिक इकटक रहत निहार ॥। ३॥ कुरबक बकुल पहोप नव लासी होत परस्पर मार ॥ उड़त अबीर गुलाल कुंमकुमा देत भामती गार ॥४॥ बाजत ताल मृदंग झांझ डफ रीझ देत उरहार || ललिताजू अपने कर बीरी पिय मुख देत संवार ॥५॥ हरस्व असीस देत गोपीजन जोरी रहो अटार ॥ श्रीवल्लभ श्रीविट्टल पदरज दास निरख बलहार ||६॥
Devgandhar
Kheli faag anurag bharey douu hansati chaley podhan
Part3-362
खेलि फाग अनुराग भरे दोऊ हँसति चले पोढन पीय प्यारी ॥ नवल कुंज नव धाम मनोहर नवल बाल नव केलि बिहारी ॥१॥ नवल सहचरी गान करति नव नवल ताल बीना कर धारी ॥ पौढे नवल सेज नव ब्रजपति चांपत चरन नव भानु कुमारी ॥२॥
Basant
Shrivallabhamadhurakriti merey .. sadambaso munn yeh jeevandhan sabahinsonju kahatahun terre .. 1..
NityaPad-353
श्रीवल्लभमधुराकृति मेरे ॥ सदांबसो मन यह जीवनधन सबहिनसोंजु कहतहूं टेरे ॥ १॥ मधुरबचन और नयनमधुर भ्रोंह युगमधुर अलकन की पांत ॥ मधुरमाल अरु तिलक मधुर अतिमधुर नासिका कही नजात ॥ २॥। अधरमधुर रसरूपमधुर छविमधुर मधुर दोऊ ललित कपोल ॥ श्रवणमधुर कुंडलकी झलकन मधुर मकर दोऊ करत कलोल ॥ ३॥ मधुर कटाक्ष कृपारसपूरण मधुरमनोहर वचन विलास ॥ मधुर उगारदेत दासनकों मधुर विराजत मुख मृदुहास ॥।४॥। मधुरकंठ आभूषणभूषित मधुर उरस्थल रूपसमाज ॥ अतिविशाल जानु अवलंबित मधुरबाहु परिरंभण काज ॥५॥। मधुरउदर कटिमधुर जानुयुग मधुर चरणगति सब सुखरास ।। मधुर चरणकी रेणु निरंतर जनम जनम मांगत हरिदास ॥६॥
Bihaag
Sukhad sez podhe shrinatavar chaampat charan radhika raani ..
NityaPad-346
सुखद सेज पोढे श्रीनटवर चांपत चरण राधिका रानी ॥ नवल निकुंज सुखद यमुना तट सीतल पवन चलत सुखदानी ॥१॥ विजना ब्यार करत ललितादिक फूलन रचि रचि सेज बिछाई ॥ चंदन घसि दोऊ लेपन करि तजी ऋतु पांच ग्रीष्म ऋतु मानी । श्याम सुंदरको रसवस कीने रतिपति केलि करत सुखदानी ।॥२॥
Bihaag
Vinati karat martahaun laaj ...
NityaPad-352
विनती करत मरतहौं लाज ॥। नखसिखलौं मेरी यह देहीहे पापकी जहाज ॥| १॥ और पतित आवत नआंखनतर देखत अपनो साज | तीनोपन भरवार निवाहे तोऊन आयोवाज ।। २॥ पाछे भयो न आगे ह॒वेहै सब पतितन सिरताज ॥ नर्कहु भजे नाम सुन मेरो पीठ दई यमराज |३॥ अबलो मैं सुने तुम जे तारे ते सब वृथा अकाज ॥ सांचो विरद सूरकों तारे लोकनिलोक अवाज ॥४॥
Bihaag
Bunny aaj evet paag
NityaPad-251
बनी आज एवेत पाग लालसिर चलो सखी देखन जाय ॥) उसीर महल में कुसुम रावटी छिरक्‍्यो गुलाबनीर नैननको फल पाय ॥।१॥ मंजुल चोटा तामधि बांध्यो बने हे मदनरूप कदमकी छांय ॥ नंददासप्रभु प्रिया प्रीतम परस्पर कबहुक करत केलि कबहुत हसि ढर जाय ॥२॥
Kanharo
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