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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Khele prabhu bethe maharaj kesar aranja bheene ..
Part3-042
खेले प्रभु बेठे महाराज केसर अरणजा भीने ॥ ठाडे यूथ रसिक भक्तनके फाग खिलाये आज ॥१॥ देतअसीस सकल ब्रजसुंदरि मिल चिरजीयो सिरताज ॥ वलल्‍्लभदास प्रभु गोकुलेश्वर राजेंसंग समाज ॥२॥
Sarang
Vrajbanita madhya ransik radhika bunny sharad kii raati hoe ..
Pustak1-335
ब्रजबनिता मध्य रंसिक राधिका बनी शरद की राति हो ॥ नृत्यत तत थेई गिरिधर नागर गौर श्याम अंग कांति हो ॥१॥ एक एक गोपी विचबिच माधौ बनी अनूपम भांति हो ॥ जयजय शब्द उच्चारत सुरमुनि कुसुमन बरख अधातिहो ॥२)| निरखि थक्‍्योौ शशि आयी शीश पर क्यों हूँ न होत प्रभात हो ॥ परमानंद प्रभु मिले यह अवसर बनी है आजकी बात हो ॥३॥
Malav
Tuu raadhe ! nutt naval nagri . gaj-gati gaban karati madhu
NityaPad-270
तू राधे ! नट नवल नागरी । गज-गति गबन करति मधु व्यासनि चली जमुना-जल भरन गागरी ॥ उर पर हार सिंगार बन्यो है कटि मेखला चरन झांझरी । अंबु लैन कहें चली अकेली संग लाडिलौ करत लागरी ॥। देखि बदन मोहे गन गंधर्व गयो निसापति गगन भागरी ॥ परमानंद प्रभु सब सुखदाइक लालन जूके कंठ लागरी ॥|
Kanharo
Nandlalason mero manmaanyon kahakarengo koyri ..
NityaPad-089
नंदलालसों मेरो मनमान्यों कहाकरेंगो कोयरी ।। होतोचरणकमललपटानी जोभावेसोहोयरी ॥|१॥ गृहपति मातपिता मोहि त्रासतहँसतबटाऊलोगरी ॥॥। अबतो जिय ऐसी बनिआई बिधनारच्योहै-संयोगरी ॥२॥ जो मेरेबहलोक जायगोऔर परलोकनशायरी ॥ नंदनंदनको तोऊनछाडू मिलूंगीनिशानबजायरी ॥३॥ यह तनधर बहुरद्योनहींपढ़ये वबलल्‍लभवेषमुराररी ॥ पर॑मानंदस्वामी केऊपरसर्वस्व डारों वाररी ॥॥४॥।
Ramkali
Kaanh kunwar khelain horry jamuna tata .. saghan
Part3-352
कान्ह कुँवर खेलैं होरी जमुना तट ॥ सघन कुंज बन बिथिनि चोवा चंदन और अरगजा अबीर लीये भरि झोरी ॥१॥ बाजति ताल मृदंग बाँसुरी सुर की उठति झकोरी ॥ “धोंधी' के प्रभु तुम बहु नाइक खेलि मचायो गोरी ॥२॥
Bihaag
Chakit bhaeen hari kii chaturai .. hamahin chhali inn
Part3-307
चकित भईं हरि की चतुराई ॥ हमहिं छली इन कुंवर कन्हाई || कहा ठगौरी देखत लाई || घिर बति हैं कहि, भली बनाई ॥ एक सखी हलधर-बपु काछी ॥| चली नील पर ओढे आछोौ | स्याम मिलन ताकौं तहं॑ आए ॥ अग्रज-कानि चले अतुराये ॥ मिले सांकरी ब्रज की खोरी ॥ ढुकी रहीं जहँ-तहैँ दोऊ गोरी ॥ गह्यौ धाई, भुज दोऊ लपटानी ॥ दौरि परी सब सस्ब्री सयानी ॥ निरखि-निरखि तरूनी मुसुकानीं ॥ एक निलज, इक रही लजानीं ॥ कहा रही करि सकुच दिवानी ।। अब इनकी जनि राखौ कानी ॥ नारि गारि सब देहिं सुहानी || नंद महरलौं जाति बखानी | उतरयो, सूर, स्याम-मुख-पानी || गईँ लिवाई जहँ राधा रानी ॥
Gouri
Manmrigvedhyomohanayanbas .. goodhbhaavaki
NityaPad-094
मनमृगवेध्योमोहननयनबानसो ॥ गूढ्भावकी सैनअचानकतकि तान्यों भूकुटी कमानसो |।१॥ प्रथम नादबल घेरनिकटले मुरलीस्वरसप्तकबंधानसो ॥ पाछें बंक चितैमृूदुहसके घातकरीउलटी सुठानसों ॥२॥ चतुर्भुजदास पीर यह तनकीमिट तनऔषधआनसों ॥ व्हेहिंसुखतबहीउरअंतर आलिंगनगिरिधरसुजानसों ।। ३।।
Ramkali
Pitambar koo cholana paharavatmaiah | kanakchhaap tapardhari
NityaPad-155
पीतांबर को चोलना पहरावतमैया | कनकछाप तापरधरी जझीनी एक तनैया ॥१॥ लालइजारचुनायकी औरजरकसी चीरा ॥ पहुँचीरत्नजरायकी उरराजतहीरा ॥। २॥| ठाडी निखयशोमति फूली अंगसमैया ॥। काजर लेबिंदुकादियो व्रजजनमुसकैया ।। ३।। नंदबाबा मुरलीदई कह्योऐसेंबजैया।। जोईसुने ताकोमनहरे परमानंद बलजैया ॥।४।॥।
Bilawal
Piyakon nachban sikhwat pyaari .. bundavan mein raas rachyo
Part1-357
पियकों नचबन सिखवत प्यारी ॥ बुंदावन में रास रच्यो है शरदरैन' उजियारी ॥१॥ तालमृदंग उपंग बजाबत अति प्रबीन ललिता री ॥ रूपभरी गुण हाथ छरी लियें डरपत लालबिहारी ॥२॥ बीणा बेणु नूपुर ध्वनि बाजत खग मृग बुद्धि बिसारी ॥ ब्यास स्वामिनी की छबि निरखत रीझ देत करतारी ॥३॥
Bihagaro
Pyaari tuu dekh naval nikunjanayak
NityaPad-331
प्यारी तू देख नवल निकुंजनायक रसिक गिरिवरधरन ।। सकल अंग सुख ससि सुन्दर सुभग सांवरे वरन ॥ १॥ सहज नटवर भेख दरसन नेन सीतल करन कर सरोज उरोज परसत जुबवती जन मनहरन ॥२॥| बेगि चलि मिलि गुन निधाने साजी पट आभरन ॥ चतुर्भुज प्रभु नवरंग नायक सुरति सागर तरन ॥ ३॥
Kedaro
Duperi jhanak bhaee taamein aaye paas merey mein uthh keeno aadar ..
NityaPad-249
दुपेरी झनक भई तामें आये पास मेरे में उठ कीनो आदर ॥ आंको भरले गई तनकी तपत सब ठोर ठोर बूँदन चमक ॥।१॥ रोम रोम सुख संतोष भयो गयो अनंग तनतें न रह्मो ननक ।। मोहि मील्यो अब चतुर धोंधीके प्रभु मिट गई विरहकी जनक ॥२॥
Saarang
Tilak tilanganaho.. tribhuvan bandnaho bhav
Part2-310
तिलक तिलंगनाहो॥ त्रिभुवन बंदनाहो भव भयभंजनाहो कलिमलखंडनाहो ॥ प्रकटे श्रीवललभ महाराज ॥ पुष्टि भक्ति दृढ प्रकट करनकों श्रीलक्ष्मण सुत ट्विजराज॥१॥ माथव मास कृष्ण एकादशी अमल उदित रविवार ॥ प्रकटभये ट्विजगाज कुल दीपक वदन अग्नि अवतार ॥२॥ दैवीजन कलियुगमें हुतेजे ते सब किये सनाथ ॥ सबसागरमें बहें जातहें राखे निजगहि हाथ ।!३ ॥ पूरण पुरुषोत्तमकी लीला प्रकट करी रसमूल ॥ हरिसेवा सोंपी करुणाकर मुक्ति नाहिं समतूल ॥।४ ॥ मायावाद खंड खंडनकर निगम सुबचन प्रकाश॥ श्रीभागवत दी बरखत सुफल कियो निजदास॥५॥ अपने जान अभयपद दीने ऐसे परमकृपाल ॥ आरती हरण चरण अंबुजपर बलबल दास गोपाल ॥६ ॥
Gouri
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