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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Vallabh uthee praatahkaal daras diyo atee rasal
Part2-326
वल्लभ उठी प्रातःकाल दरस दियो अति रसाल भई हैं निहाल सखी राजत संग प्यारी। दोऊनके चिह्न देख ललिता मुसकाय कह्यो आज हो जू बेंदी यह नीकी तुम धारी 5 ।१ ॥ प्रिया-कपोल कक छाप सोभा कछु कही न जात जेती जग उपमा सबे बार फेर डारी। दूँ दिसि बाढी छबि प्यारी की अधिक कछ ऐसी री सुन्दरता पैं रामदास बारी ॥२॥
Devgandhar
Fabyon fenta lalit laal key shish parr nirakhi chhabi madhuri akhiyaan siratari ..
NityaPad-163
फब्यों फेंटा ललित लाल के शिश पर निरखी छबी माधुरी अखियां सिरातरी ॥ प्रेमड़ी बावरी हों सखी व्हे रही सुध बुध बिसर गई द्वार व्हे जातरी ॥१॥ रूप के गर्व कछू आव आदर कियो बहोरो कृपाल मुस्कातरी ।। दास कुंभन नाथ गोवर्धनधर साथ गोपीजन रीझ मिल सांमरे गातरी ॥२॥
Bilawal
Merey bolein boll naan bolenri andeoi dole .. pendo
Part3-277
मेरे बोलें बोल न बोलेंरी एंड्योई डोले ॥ पेंडो तक ठाडो रहे घूंघट हँस खोले ॥१॥ काहूकी गहत बांह कांहूसों कहत नाह तेरो ॥ काहूसों नयन सेन काह्ू वदत वेन अनेरो ॥२॥ काहूके बगर जाय फाग खेलि आवे ॥ काहू के अनुराग भरयो मुरली में गावे ॥३॥ मोपें नहीं र॒त्यो जात कासों कहों हेली ॥| ढीठ ईठ पीठ दई प्रीति पेंड पेली ॥४॥ निठुर वचन सुनते आय सन्मुख हरि भार्यो || तेरोई रूप मेरे उरवसाय राख्यो ॥५॥ निरख वधू विवश भई देह दशा भूली ॥ ब्रजपति के संग सुरत मदन डोल झूली ॥॥६॥
Sorat
Abgunth lavre malania sahero ..
NityaPad-267
अबगुंथ लावरे मालनिया सहेरो ॥ शुभघरी शुभदिन शुभपल महुरत बागो बन्यो सुनेरो ॥।१॥ हार चमेली गुलाब निवारों महेकत आवत केवरो ॥ बना बन्यो श्री वललभवर पिय श्री गोकुलमें गेहरो ॥२॥
Kanharo
Phoolanke athkhambha raajat sanga
NityaPad-257
फूलनके अठखंभा राजत संग वृषभान दुलारी॥ मोर चंदशिर मुकुट बिराजत पीतांबर छबि भारी ॥ १ ॥ फूलनके हार शुंगार फूलनके संग सखी सुकुमारी ॥ परमानंददासको ठाकुर ब्रज जीवन मनहारी॥२॥
Saarang
Gopale makhankhande ..
NityaPad-183
गोपाले माखनखानदे ॥ बांहपकरकर उहां लै जैहों मोहियशोदा पैजानदे ॥ १॥। सुनरीसरब्री मौनहवेरही सगरोवदन दह्योलपटानदे ॥। उनपेंजाय चौगुनोलेहों नयनन तृषाबुझानदे ॥२॥ ज्योज्योंकहत हरिलरका है सुनतमनोहर कानदे ॥ परमानंदप्रभु कबहुनछांडूं राखोंगी तनमनप्राणदे ॥। ३॥।
Ramakali
Bansi naan kaahooke buss bansine keene ree buss banseekon bajaay
Part1-293
बंसी न काहूके बस बंसीने कीने री बस बंसीकों बजाय जानें बंसी जाके बस है ॥ अधर रस प्रेम माती छिनहू न होत हॉती कानपरी प्राण लेत वे चसके रस है ॥१॥ नये नये नेह बाढ़े मोहनलाल नचाय छाँड़े ललित त्रिभंगी कान्ह मोहन सौं अस है।। हित हरिवंस परस्पर प्रीतम राश्ना बृषभान नंदनी सो रस है ॥२॥।
Malhar
Raas mein naachat lalbihari nachwat hain sub vrajaki naari ..
Pustak1-328
रास में नाचत लालबिहारी नचवत हैं सब व्रजकी नारी ॥ ता थेई ता थेई तत ता थेई थेई थुंगनिथै-गनि तटकित तारी ॥१॥ श्रीराधा एक तरजत मिलबत लेत अलाप सप्त स्वर भारी ॥ कृष्णदास नट नाट्य रसिकवर कुशल केलि श्रीगोवर्द्धधघारी ॥२॥
Saarang
Rawal radha pragat bhaee . abb vrajabasi sukh lehu sakhiri pragati
Part1-190
रावल राधा प्रगट भई । अब व्रजबसि सुख लेहु सखीरी प्रगटी कुँवरि रसमई ॥१॥ या निधिकों सब विधि चाहत हैं सो कीरति तुमही दई । रामदास सुनि गोकुल आयौ जसुमतिपै बधाई लई ॥२॥
Saarang
Dekho rasiklal vaano rasal .. khelat vasant piya rasik baal ..shru0-.. ghoshghosh kii sudhar naari || roop rung sub aeka
Part3-034
देखो रसिकलाल वाणो रसाल ॥ खेलत वसंत पिय रसिक बाल ॥श्रु०-॥ घोषघोष की सुधर नारि || रूप रंग सब एक सारि॥ गावत जुरि मिलि मीठी गारि ॥ हसत कुंकुमा सीसडारि ॥१॥ नववसंत अभरन अमोल ॥ सारीमें झलमल झकोल ॥ द्रग अंजन भरि मुंख तंबोल ॥ हुलसत विलसत भई लोल ॥२॥ एक कृष्णागर लेरही हाथ ॥ लेपति उरसि भुज प्रिया साथ ॥ सोंधे में बोरे मिरिधरन नाथ ॥ चोवा वह चल्यो कच पाण माथ ॥३॥ एक कंज परागण लगाबे गाल ॥ एक गूंधि कुसम पहरावे माल ॥ गहि रही कटितट जटित लाल ॥| मानों निकरिनील तरुकरमृनाल || ४॥ उडतहें वंदन ओर अबीर | अरुन पीत भयो श्यामचीर ॥ सुबल वगर में बढोत भीर ॥ वरघत पिचकारिन रंगधीर ॥५॥ कौस्तभ मनि कोंधत भीजगात ॥ वंदन भीतर सगबंगात ॥ पानखात मुसिकात जात ॥ किलकि किलकि सखी करत बात ॥६॥ वाजत ताल मृदंग चंग ॥ सारंणी सुरवीन संग ॥ भरत भरावत नेन रंग ॥ निरखत बनि आवे मोह भ्रंग ॥७॥ सिंघ पोरि ओर ब्रज अवास ॥ चंदन वादर कियो निवास ॥ फेलि रह्यो सौरमा सुवास ॥ रसमें रसमय पिय विलास ॥ ८॥ एक श्रवननि कहत चोख ॥ स्यामलाल अंगअंगपोख ।॥ हसत श्रीदामा सखातोक ॥ फागुन की हमें कछून धोख ॥९॥ रति नायक छबि अति अनूप ॥ नवपलल्‍लब अभिनव ब्रज स्वरूप ॥ श्रीभट परमानंदजूप ॥ आनंदित श्रीनंदराय भूप ॥१०॥
Auganmein hari soy gayeri .. harey harey douu janani milike
Part1-168
ऑगनमें हरि सोय गयेरी ॥ हरे हरे दोऊ जननी मिलिके सेज सहित तब भवन लहेरी ॥१॥ कहत रोहिणी इन्हें न जगावी खेलत डोलत हार गयेरी । बारंबार जुंभात सॉवरौ बदन देख विस्मित जु भयेरी ॥२॥ कहत नंद ये कछून जानें गायन के संग श्रमित भयेरी | सूरदास बलराम श्याम तब ब्रजरानी संग पौढ़ रहेरी ॥३॥
Bihaag
Ringan karat kaanh aangan mein karaliyen navneet ..
Part3-043
रिंगन करत कान्ह आंगन में करलीयें नवनीत ॥ सोभित नील जलद तन सुंदर पहरें झंगुलीपीत ॥१॥ रुनझुन रुनझुन नूपुर बाजत त्यों पण ठुमकि भरें ॥ कटिकिंकिनी कलरब मनोहर सुनि किलकार करें ॥२॥ दुलरीकंठ कनिक दुई कानन दीयो कपोल दिठोना भालविशाल तिलक गौरोचन अलकावलि अलिछोना ॥ ३॥ लटकन लट किरयो भ्रुवअपर कुलह सुरंग बनी ॥ सिंघ पोरितें उम्कि उझकि छबि निरखतहें सजनी ॥४॥ नंदनंदन उनतन चितबत प्रेम मगन मन आईं ॥ कंचनथार साजि घरघरवतें बोहो विधि भोजन लाईं ॥५॥ मनिमंदिर मूढापे सुंदरि आछेवसन बिछावें || बालकृष्ण कों जो रुचि उपजे अपने हाथ जिमावें ॥६।| जलअचवाई बदन पोंछत ओर वीरी देत सुधारी ॥ हियें लगाय बदन चुंबनकरि सर्वस डारत वारी ॥७॥ नेनन अंजनदे लालनकें मृगमद ख्ोरकरें || सुरंग गुलाल लगाय कपोलन चिबुक अबीर भरें ॥८॥| चोवाचंदन छिराकि अबीर गुलालन फेंट भराई ॥ तनक तनकसी मोहनकों भरिदेत कनिक पिचकाई ॥९%॥ आपु समांझ परस्पर छिरकत लालन पे छिरकावें ॥ न्हेंनीन्हेंनी मुठी भराई रंगनसों सेनन नेनभरावें ॥ १ ०॥ निरखि निरखि फूलति नंदरानी तनमन मोदभरी ॥ नित्यप्रति तुम मेरे घर आबो मानो सुफलघरी ॥|११॥ देतअसीस सकल ब्रजवनिता जसुमति भागि तिहारो ॥ कोटि बरस चिरजीयो यह व्रजजीवन प्रानहमारों ॥१२॥
Basant
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