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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
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Shrivrishbhan nandini naachat laalan giridharan sanga laag daat urpatirap rasrang rakhyo .. | Pustak1-352 | श्रीवृषभान नंदिनी नाचत लालन गिरिधरन संग लाग डाट उरपतिरप रासरंग राख्यो ॥
झपताल मिल्यो राग केदारों सप्तस्वरन अवधर वर सुघर तान गान रंग राख्यो ॥१॥
पाई सुख सुरति सिद्धि भरत काम बिबिध रिद्धि अभिदल नवसत सुहाग हुलास रंगराख्यौ ||
बनिता शतयूथके पीय निरख थकक््यौसघन चंद बलिए'री क्ृष्णदास सुयश रंग राख्यो ॥२॥ | Kedaro |
Srivallabhnath kau roop kahaa kahon ? pragate hain sub | Part2-300 | श्रीवल्लभनाथ कौ रूप कहा कहों ? प्रगटे हैं सब
सुख के सागर॥ लीला-भाव जो प्रगट जनावत कीनों है सब जगत
उजागर ॥ देखि-देखि जो यह निधि आई गहों जो चरन-सरन मन दृढ़
कर । 'छीत-स्वामी' गिरिधर रस बरसत अपुने जीव पर अति करुनाकर ॥ | Sarang |
Jasumati tumari pooran bhaag .. barasgantike sub vraj sundari | Part1-011 | जसुमति तुमारी पूरन भाग ॥ बरसगांटिके सब ब्रज सुंदरि
भीजि रही अनुराग ॥१॥ जसुमति गावति और सुख पावति संग लिये
ब्रजबाल ॥ सबन भनोरथ पूज बढ़ाये रायनंदजूके लाल ॥२॥ रोमरोम प्रफुलित
नंदरानी सुंदर बदन फुलाये ॥ श्रीविद्लगिरिधरकी मैया मेवन गोद भराये।।३॥ | Devgandhar |
Shobhit subhag nandjuki raani. atee anand aanganmein baithi | Part1-169 | शोभित सुभग नंदजूकी रानी। अति आनंद आंगनमें बैठी
गोद खिलावत सारेंगपानी ॥१॥ तृणावर्तकों करी सुरति जिय पठयौ कंस असुर
अभिमानी । गरुवे भये वहीं बैठारे सहि न परै जननी अकुलानी ॥२॥ आपुन
गई सदन में दौरी कछू एक काज तहाँ लपटानी । भयौ उर महाभयानक गोकुल
सकल प्रलयकौ उदयौ गोपाल जानी ॥३॥ महा दुष्ट ले चल्यो अकासें बालकृष्ण
यहे जिय ठानी । चाँपी ग्रीव हरि प्राण हरे ्रगन रंगत चल्यौ अधिकानी ॥४॥
पायल सिला निरखि हरि परयौ उपर खे लत श्याम सुखानी । ब्रज वनिता उपवनमें
पाये लये उठाय कंठ लपटानी ॥५॥ लाई गही चूँमत चाहति घर घर सबन
बधाई मानी । देत आभूषन बारि बारि सूर सब नारी बारि पीवत पानी ॥६॥ | Bilawal |
Cone purry nandlaalen baan .. praatasmein jaaganaki viriyaan | NityaPad-024 | कोन परी नंदलालें बान ॥ प्रातसमें जागनकी विरियां
सोवतहें पीतांबर तान ॥१॥ मात यशोदा कबकी ठाडी ले ओदन भोजन घृत
सान ॥ उठो स्यथाम कलेऊ कीजे सुंदर वदन दिखाओ आन ॥२॥ संग सखा
सब द्वारें ठाडे मधुवन धेनु चरावन जान ॥| सूरदास अतिही अलसाने सोवतहें
अजहू निशिमान ॥।३॥। | Bilawal |
Paag sohe latpati gulab key phoolan kulah bharein .. | NityaPad-265 | पाग सोहे लटपटी गुलाब के फूलन कुलह भरें ॥
भ्रुकुटी विलास हास कुंडल कपोल झाई कोटिक मनमथ मनहंरे ॥१॥
कुंचित केश सुदेश तिलक रुचिर भाल माल मोतिनकी विचित्र भेख करें ॥
चतुर्भुजदास प्रभु गिरिधर ऐसी विधि ठाड़े मुरली अधरधरें ॥२॥ | Kanharo |
Aisee aisee baatan laalan queyon manmaanen .. urmein banaaybanaay | NityaPad-149 | ऐसी ऐसी बातन लालन क्यों मनमानें ॥ उरमें बनायबनाय
जासोंकहिये जो यह नहींजानें || १॥ रतिकेचिन्ह प्रकट देख्वियत सबके सेकदुराने ॥
कुमनदासप्रभु गोवरधनधर तुमहो भले सयाने ॥२॥। | Bilawal |
Manmohana russ mutt piyaare chhaand sakal kull | Part3-292 | मनमोहना रस मत पियारे छांड सकल कुल
लाज ॥ यश अपयश कोऊ कहो मोहि नाहि काहू सों काज ॥१॥ खिरक
दुह्वन हों गईं मिले ब्रजराज किशोर ॥ गहि बैयां मोडि ले चले आई तहां
तें भोर ॥२॥ कुंज महल क्रीडा करी कुसुमन सेज बिछाय ॥ सुरत शिथिल
अति दंपति तेरहेहें कंठ लपटाय ॥ ३॥। विविध कुसुम मालागुही सुंदर करकमल
संवार ॥ प्यारी राधा कों दे घालियो पहरे घोष मझार ॥४॥ कुंज महल
बनठन चले प्यारी राधा कों दे सेन ॥ चतुराई वरनी नापरे सकल रूप
गुणएन ॥५॥ नंदराय के लाडिले थेनु चराबन जाय ॥ प्यारी राधा विन
ज्योंना रहे छिन छिन कल्प विहाय ॥६॥ सब गोकुल के लाडिले जसुमति
प्राण आधार ॥ राधा के तुम चाडिले जयजय नंदकुमार ॥७॥ मदन मोहन
पियबस किये अपने गुनरूप सुहाग ॥ चिते परस्पर दंपती प्रतिछिन नव
अनुराग ॥८॥ इत मनमोहन राजही सखा सकल लिये संग ॥ उतते आई
ब्रज वधु भरत आपने रंग ॥९॥ मोहन पकरे भेदसों दई परस्पर सेन ॥
प्यारी कर काजर लियो आंजे पियके नयन ॥१०।॥| यह बिध होरी खेलही
ग्याति बंदु संगलाय ॥ गोविंद बलंबदन करे सुनो हो गोकुल के राय ॥ १ १॥ | Gouri |
Tumpai kaun duhwat | NityaPad-296 | तुमपै कौन दुह्ावत
गैया ॥ यूढभाव सूचत अंतर गति अतिसेकाम कीन्हैयां ।।१॥ गुप्तप्रीति तासो
मिलकीजै जोहोय तुम्हारी दैया ॥ वार वारही लपटत फिरत हो यही सिखायो
मैया ॥२॥ लेजु रहे कर कनक दोहनी बैठेहो अधपैयां | परमानंदयों हठ मांड्यो
ज्यों घर खसम गुसैयां ॥३।। | Gori |
Haaken hatak hatak gaay thathak thathak rahee gokulki gully sub sankari... | NityaPad-105 | हाकें हटक हटक गाय ठठक ठठक रही गोकुलकी गली सब सांकरी।॥
जारी अटारी झरोखन मोखन झांकत दुरदुर ठोरठोरते परत कांकरी ॥१॥
चंपकली कुंदकली वरषत रसभरी तामें पुन देखियत लिखेहें आंकरी ॥
नंददासप्रभु जहीं जहीं द्वारें ठाठे होत तहीं तहीं
बचन मांगत लटक लटक जात काहूसों हांकरी काहूसें नाकरी ॥।२॥ | Poorvi |
Murali jeeti radha raani.. | Part2-065 | मुरली जीती राधा रानी॥
दाव पर्यो वृषभानु सुताको मोहन रूंगट ठानी ॥१ ॥
लीयो जीत पीतांबर पीयको खेलत हंसत सयानी ॥
विद्वुल विपीन विनोद बिहारिन कोकर सके बखानी ॥२ ॥ | Kanharo |
Abaheete | NityaPad-315 | अबहीते
मन्मथ चितचोरत कहा करेंगी जोबन विरियां॥| मनहर लेत तनक चितवन में
फेरत है नपननकी तरियां ॥ १॥ तेरोतन गिरिधरनलाल हित सबगुण रास विधाता
धरियां ॥ कृष्णदासप्रभु गिरिधरनागर रिझ्बत हंसत सहज फुलझरियां ॥२॥ | Adano |
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