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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Tatthei tatthei tattathei thei .... naachat gaabat gopi naana
Part1-338
ततथेई ततथेई ततताथेई थेई ॥॥ नाचत गाबत गोपी नाना नई ॥१॥ मृदंग धीधीकटि दट्ुमद्रम दई ॥ त्रिवट ताल गति लेत नई नई ॥२॥ गोवर्द्धधारी लाल रीझे अति सई ॥ कृष्णदास प्रभु प्यारी आकों भरि लई ॥३॥
Gouri
Arrie tuu kaahe anmani bolat naahin bulaave..
NityaPad-322
अरी तू काहे अनमनी बोलत नाहिं बुलावे।। अवलोतो तू हँसत खेलतही कहाभयो मोहिं आये ॥ १॥। नयन नीचेकियें चितवन रखदिये तिरछीश्रृं चढायें ॥। रसिकप्रीतमपिय कबके ठाडे विनवत हैं परपायें ॥२॥।
Kanharo
Doodh piyo merey shyam zu pyaare .
NityaPad-305
दूध पियो मेरे श्याम ज़ु प्यारे । ओट्यो सद्य बेला भर लाई कुंवर किशोर दृगनके तारे ॥ १॥ तामें मधुर सुगंध मिलाई सुन पीवत ब्रजराज ललारे॥ कुंभनदास' प्रभु गोवर्धनधर छबि पर तन मन धन सब वारे ॥ २॥
Kanharo
Aaj nandjuke dwaaren bheer .. gawat mangal geet sabai milli
Part1-020
आज नंदजूके द्वारें भीर ॥ गावत मंगल गीत सबै मिलि प्रगटे हैं सुंदः बलवीर !१॥ एक आवत एक जात विदाह्बै एक ठाड़े मंदिरके तीर ॥ एकनकौं .गौदान देतहै एकनकों पहरावत चीर ॥२॥ एकनकौं फूलमाल देतहै एकनकों घसि चंदननीर ॥ सूरदासने नवनिधि पाई धन्य यशोदा पुन्य शरीर ॥३॥
Bilawal
Hoe hoe horry khele nandaki curr ambujbhare
Part3-077
हो हो होरी खेले नंदकी कर अंबुजभरे मकरंदको ।॥॥| तनसुख पाण बनी कसूंभी सिरधरे मोर के चंदको ॥|१॥ एक ओर प्रजट्यो तरुनीमधि अंकुरपरमानंदको ॥ एक ओर ब्रजजन चकोरमधि उदय भयो मानों चंदको ॥२॥ लेले सुरंग अबीर दुहुुंकर खेलभयो मनफंदको ॥ तिहि ओसर प्यारी मुख निरखत मान गयो अरविंदको ॥।|३॥ चोवाचंदन ओर अरणगजा मृगमद कुंकुम गंधको ॥ भांति-भांति बाजे बाजत सुनि छूटि गयो मन बंधको ॥|४।| यह सुख निरखि बरखा वरखावत सुमनन मिलि सुर वृंदको || तिहि औसर रघुवीर निरखि मुख हुलस्यो मन आनंदको ॥५॥
Ramkali
Chaampat charan mohanlal ..
NityaPad-126
चांपत चरण मोहनलाल ॥ पलका पोढी कुवरिराधे सुंदरी नवबाल |।१॥ कबहुं करगहि नयनमिलावत कबहु छुवावत भाल ॥ नंददासप्रभुछब्िनिहारत प्रीतके प्रतिपाल ।। २।।
Bihaag
Deit gaj baaj aaj vrajraj biraje gopeen key sirtaj ..
Part1-072
देत गज बाज आज व्रजराज बिराजे गोपीन के सिरताज ॥ देस देस ते खट दरसन आवत मनवां छीत फल पावत किरत अपरंपार ऊंचे चढ़े दान जहाज ॥१॥ सुरभी तिल पर्वत अर्ब खर्ब कंचनमन दीने सो सुतहीत के काज ॥ हरिनारायन श्यामदास के प्रभु को नाम कर्म करावन मेहर मुदित मन बंधि है धर्म कि पाज ॥२॥
Todi
Naval kishore navalnagariya.. apani bhuja syambhuj
NityaPad-342
नवल किशोर नवलनागरिया॥ अपनी भुजा स्यामभुज ऊपर स्थामभुजा अपने उरधरिया ॥१॥। करतबिहार तरुण तनया तटस्वामा स्वाम उमग रसभरिया॥ यो लपटायरहें दोऊ जन मरकतमणि कंचन जैसे जरिया ।॥॥२॥ या उपमाको रविशशि नाहीं कंदर्पकोटिवारनेकरिया ॥ सूरदास बलबलजोरी पर नंदनंदन वृषभान दुलरिया ॥ ३॥
Bihaag
Lalankaun grihagaahaki leey dhaavain || gajmotinke chaukan oopar
Part1-010
ललनकौं गृहग॒हकी ले धावैं || गजमोतिनके चौकन ऊपर अमोल पामड़े बिछावैं ॥१॥ भाये मनोरथ करत सबै मिलि देखिदेखि हीयो सिरावै ॥ चिनि थचिनि बस्तर रतनन आभूषन रचिरचिकैं पहरावैं ॥२)॥ अति सुगंध सोंधो लै लै कर अपने हाथ लगायें ॥| श्री विद्लगिरिधरन कुंवरकों नई नई रीति सिखावैं ॥३॥
Devgandhar
Krishna tarani tanaya teer rasmondallerchyou adhar curr madhur swar venu baajai ...
Pustak1-338
कृष्ण तरणि तनया तीर रासमंडलरच्यौ अधर कर मधुर स्वर वेणु बाजै .॥ युवतती जन यूथ संग नृत्यत अनेक गति निरख अभिमान त्यज कामलाजै ॥१॥ स्याम तनपीत कोशेय पद नख रुचिर चंद्रिकां सकल भुव तिमिर भ्राजै ॥ ललित अवतंस भुव धनुष लोचन चपल चितवनि मानो मदन बाण साजै ॥२॥ मुखर मंजीर कंटि किंकिणी क्वणित रव बचन गंभीर मानों मेघ गाजें ॥ दास कुंभननाथ हरिदास वर्य धर नखशिख स्वरूप अद्भुत बिराजें ॥३॥
Gori
Jalakon gaee sughat neh bhar laaee parihai chatpati darshaki ..
NityaPad-275
जलकों गई सुघट नेह भर लाई परीहै चटपटी दरशकी ॥ इत मोहनगास उत गुरुजनत्रास चित्रलिखी ठाढी नांमधरत सखी परस की ॥१॥। टूटे हार फाटेचीर नयनन बहेत नीर पनघट भई भीर सुध न कलशकी ॥। नंददासप्रभुसों ऐसी प्रीत गाढ़ी बाढ़ी फेलपरी चायन सरस की ॥२॥
Adano
Sonjhi bhalee bunn aire .. sriradhe brikhbhanlali .. burren
Part1-277
सॉँझी भली बन आईरे ॥ श्रीरधे बृुखभानलली ॥ बरन बरन फूल बीनकें ॥ अपने हाथ बनाईरे ॥१॥ नंदगामतें सखी भेखले आये कुंवर कन्हाईरे ॥ पुरुषोत्तम प्रभु की छबी निरखत ॥ नैन निरखि सचुपाइरे ॥२॥
Khamach
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