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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Dekhori yeh chandan pahere thaade kadam kii chhaai .
NityaPad-241
देखोरी यह चंदन पहेरे ठाडे कदम की छाई । कदम की डारतर सुन्दर खसखानो रच्यो कुसुमनसे सेज बनाई ॥१॥ बिंजना ब्यार करत ललितादिक छूटत फुहारे फुही । झरनाझर लाई सीतल मंद सुगन्ध ब्यार चलत तहां बैठे अधिक छबि छाई । श्याम सुन्दर ओर कुंवरी राधिका बैठे डार दोउ गल वांही ॥ हरिनारायन श्यामदास के चेरे इने नवनिधि दूजे अष्ट महा सिद्धि पाई ॥२॥
Saarang
Diye mahawar gorey payan || namanjadit kanchan
Part3-248
दिये महावर गोरे पायन || नमनजदित कंचन की जेहर सुमन बनी डोलत हें चायन ॥१॥ जंघ युगल कदली कटि के हरि रूप अनूप गुसायन ॥ भुज मृणाल श्रीफल कठोर कुच जानत रसके दायन ॥२॥ खमक बनी अंगिया जुखयन तैसीये भ्रृंह चढायन ।। मानो मेन खराद खरादी वह पाई उपमायन ॥३॥ गुलाल भरद्यो तन एसो लागत मानो हेम काढ्यो हे तायन ॥ सुघर रायको प्रभु रीइझ््यो वृषभान कुंवरि के भायन ॥४॥
Sarang
Aaj vrajavadhu vrajnath bundavan mein taal bansuri
Part3-334
आज ब्रजवधु ब्रजनाथ बुंदावन में ताल बांसुरी बजावें हो ॥ सबही को मन हुलास राग कान्हरो गावें हो ॥ १॥ चोवा चंदन ओर अरगजा अबीर गुलाल उडावें ॥ केसर कुंकुमा पिचकाई भर भर छिरके ओर छिरकावें ॥२॥ सूर के प्रभु कों गण गंधर्व जीव जिते सुरनर मुनि सब देखन आवें हो ॥ हरख हरख कें तन मन धन वारत विमाननते पुष्प वृष्टि कराबें हो ॥३॥
Kanharo
Nandakulchand udit kaumudi boonda vipin vimal akashe |.
NityaPad-135
नंदकूलचंद उदित कौमुदी बूंदा विपिन विमल आकाशे |। निकलंकवेदीसतसखी घधृंदवर तारका लोचन चकोर वित्य रूपरस प्यासे ॥ १॥। रसिकजन अनुराग उदित विविध तनमरयाद भाव अगणित कुमुदिनी गण विकासे कहें गदाधर सकल विश्व असुरनविना भान भवताप अज्ञानि तिमिरनासे ॥२॥।
Ramkali
Soodhe naan boll kahaa itrano .. yaa vraj mein kaun tein kaun bado
Part1-265
सूधे न बोल कहा इतरानो ॥ या ब्रज में कौन तें कौन बड़ो कहा रंक कहा रानो ॥१॥ कोन टेव दिन दिन नित प्रति की तकत अंग बिरानो ॥ जोई जोई हाल किये कहि दे हों “अग्र स्वामि” रहे छानो ॥२॥
Dhanashri
Kahan laage mohan maiya maiya . baabaa baabaa nandrayason aru
Part1-164
कहन लागे मोहन मैया मैया । बाबा बाबा नंदरायसों अरु हलधरसों भैया भैया ॥१॥ छगन मगन मधुसूदन माधौं सब ब्रज लेत बलैया। नाचत मोर रहत संग उनके तोतरे बोल बुलैया ॥२॥ दूरि खेलन जिन जाउ मनोहर मारैगी काहूकी गैया | मात यशोदा ठाड़ी टेरे लै ले नाम कन्हैया ॥३॥ सब गोकुलमें आनंद उपज्यौ घरघर होत बबैया | नंदनंदन की या छबि ऊपर परमानंद बलि जैया ॥४॥
Nat
Navamon bilas kiau joo ladaiti navdha bhakt bulaaye .. apane
Part1-308
नवमों बिलास कियौ जु लड़ैती नवधा भक्त बुलाये ॥ अपने अपने सिंगार सबै सज बहु उपहार लिवाये ॥१॥ सब श्यामा जुर चलीं रंगभीनी ज्यों करिणी घनघोरें ॥ ज्यों सरिता जल कूल छांड़िकें उठत प्रवाह हिलोरें ॥२॥ बंसीवट संकेत सघन बन कामकला दरसाये ॥ मोहन मूरति वेणुमुकुट मणि कुंडल तिमिर नसाये ॥३)! काछनी कटि तट पीत पिछौरी पग नूपुर झनकार करें॥ कंकण वलय हार मणि मुकता तीनग्राम स्वर भेद भरें |॥४॥ सब सखियन अवलोक स्याम छबि अपनो सर्वसु बारें ॥ कुंजदार बैठे पियप्यारी अद्ृभुतरूप मिहारें ॥५॥ पूआ खोबा मिठाई मेवा नवधा भोजन आनें ॥ तहाँ सतकार कियौ पुरुषोत्तम अपनों जन्मफल मानें ॥६॥ भोग सराय अचबाय बीराधर निरांजन उतारे ॥ जयजय शब्द होत तिहँँपुरमें गुरुणन लाज निवारे ॥॥७॥ सघनकुंज रसपुंज अलिगुंजत कुसुमन सेज सँवारी ॥ रतिरण सुभट जुरे पिय प्यारी कामवेदना टारी ॥८॥ नवरस रास बिलास हुलास व्रजयुवतिन मिलकीने ॥ श्रीवललभ चरण कमल कृपातें रसिक दास रसपीने ॥९॥
Malav
Saanvareki drishti maanon premki katari .. lagat bihalbhai
Part1-254
सांवरेकी दृष्टि मानों प्रेमकी कटारी ॥ लगत बिहालभई गोरसकी सुधन रही तनहीमें व्याप्यो काम मनमथ वारीये ॥१॥ मिल सखी दे चार बावरीभई बव्रजनार मेंनें याकों जान्यो नहीं कुंजको बिहारी है ॥ कुंडल मुकुट सोहे पीतांबर धारीये सांवरी सुरतपर सूर बलिहारीये ॥२॥
Jejevanti
Aii hoe aaj reejhi houn tihari baanik parr roop chatakaten ataki .
NityaPad-174
ऐ हो आज रीझी हों तिहारी बानिक पर रूप चटकतें अटकी । कही न जात सोभा पीत पटकी कुंडल चटक लटक मुगटकी ।।१॥ कहा री कहों कछु कहत न आवे सोभा नागर नटकी। सूरदास प्रभु तिहारे मिलनको सुध भूली घट पटकी ॥२॥
Gori
Rjhivat piyahin barambar ..
Pustak1-321
र्झिवत पियहिं बारंबार ॥ निरख नयन लजात पिय के नहीं शोभा पार ॥१॥ चाल स्वल्प गज हंस मोहत कोक कला प्रवीन ॥ हँसि परस्पर तान गावत करत पिय आधीन ॥२॥ सुनत बन म्रग होत व्याकुल रहत चित्रित आय ॥ सूर प्रभु वश किये नागर जान शिरोमणिराय ॥३॥
Ramkali
Vedaanuddharte jagannivahate bhugol mudvibhrate .. daityan daaryate
Part1-085
वेदानुद्धरते जगन्निवहते भूगोल मुद्विभ्रते ॥ दैत्यान दारयते बलिंछलयेत क्षत्रक्षयं कुर्वते ॥ पौलस्तयं जयते हलंकलयते कारुण्य मातन्वते ॥ म्लेच्छान्‌ मूर्छयते दशाकृति थध्रृते कृष्णायतुभ्यं नमः ॥१॥
Malav
Arrie milaniyan mohan gawat .. adhar venu dhara sapt suran
Part1-346
अरी मिलनियाँ मोहन गावत ॥ अधर वेणु धर सप्त सुरन सों राधे नाम ले तोहि बुलावत ॥१॥ यह जानी गति प्राणनाथ की तानन राग अनंग बढ़ावत ॥ राका रजनी शरदचंद की रंजित छबि कौतुक उपजावत ॥२॥ सुरत दैन युवती मृगनयनी चपलनयन ओ्रौहन सरलाबत ॥ कृष्णदासप्रभु गिरिधरनागर रासरसिक बड़भागिन पावत ॥३॥
Kanharo
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