top of page
Sheetkal Ke Pad
To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.
Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Aeka samein sutakon hulrawati jasumati mudit karat moodugaanen. | Part1-151 | एक समें सुतकों हुलरावति जसुमति मुदित करत मूदुगानें।
बिधुसीौ बदन कमलदल लोचन सुंदर श्याम तबै जुभानें ॥१!॥ तब विलोकी
व्याकुल भई जननी तीनहुँ लोक बदन दरसानें । सूरदास प्रभु मंद मंद हँसि तबही
महरि माया अरू झाने ॥२॥ | Bilawal |
Arrie chalau sakhee tahaan jaiyai .. nava nikunj mein kheli | Part3-327 | एरी चलौ सखी तहाँ जैयै ॥ नव निकुंज में खेलि
मच्यो है रंग-रंण रंगनि रंगैये ॥१६॥ तजि अभिमान समुझि मन सखिरी,
श्याम मिले सुख पैये || अरसपरस, आलिंगन लै लै चुंबन अधरन देये
॥१२॥ करौ सिंगार सुभग तन गोरे मोतिन मांग भरैये ।। सारी सेत पहिरि
त्तनसुख की, ओलि गुलाल भरैये ॥३॥ “रसिक' प्रीतम प्यारे सौं मिलिए
अंतर भाव जनैये ॥ इहि बिधि फागु सुहागु सखी री आनंद सिंधु बढ़ैये ॥४॥ | Iman |
Mangal gaavatihain vrajnari .. mahari dehri bheetar aavati | Part1-012 | मंगल गावतिहैँ व्रजनारी ॥ महरि देहरी भीतर आवति
देखत बदन उधारी ॥१॥ नाचत गोप ग्वाल रस भीने और नाचत नंदराय ॥
काहू गिनत नहीं उर अंतर व्रजजन अति सुखपाय ॥२॥ | Devgandhar |
Bhojan bhalee bhaant hari keeno .. | NityaPad-086 | भोजन भली भांत हरि कीनो ॥
खट रस व्यंजन मठा सलोना मांगमांग हरि लीनो ॥ १॥
हसत लसत परोसत नंदरानी बालकेलि रस भीनो ॥।
परमानंद उबरद्यो पनवारो टेर सुबलको दीनो ॥२॥ | Dhanshree |
Chalau sakal milli kheliye ! nandaa kein dwaar || khelat | Part3-308 | चलौ सकल मिलि खेलिये ! नंदा कें द्वार || खेलत
फागु गोपाल ॥ रितु बसंत बन गहगद्मौ ॥ प्रफुलित ताल तमाल ॥नंदा०॥
अति सुंदर ब्रज-भामिनी॥ आई भईं इक ठौर॥ नव-जोवन वृषभानुजा ॥ सखि -
गन नवल किसोर ॥नंदा०।॥| ढोल-दमामा बाजहीं ।॥| श्री-मंडल मुख चंग ॥
मुरज रुंज डफ दुंदुभी ॥ बीना बेनु उपंग ॥नंदा०॥ गौ-मुख भेरी बाजहीं ॥
झालर झाँझि मृदंग || घोर निसान गगन-धुनी ॥ ब्रज-जनि लावहिं रंग |॥।नंद०॥
चोबा चंदन अरगजा ॥ बहु विधि मलय सुगंध ॥ दै-दै तारी कंठ लावहीं ॥
आलिंगन भुज-बंध ॥नंद०॥ नौतन केसरि घसि घोरी ॥ कुमकुम रस-सुख-
सार ॥ छुटी पिचकाई जित -तितै ॥ लागत हृदै-मंझार ।|नंदा०॥ तनसुख
सारी लपटि रही ॥ सकति न अंग संभाल ॥ बूका बंदन उडि रह्यौ॥ दुह्ढूं दिसि
अरुन गुलाल ॥नंदा०॥ नव सर माला गूंथि कें ॥ जाई जूई बेलि ॥ पुलकि
प्रेम पहिरावहीं || आनंद की झकझेलि ॥नंदा०॥| नंदनंदन ब्रज-नाईका ॥| भूतल
करहिं अनंद ॥ गारी परस्पर गावहीं ॥ नाचहिं आपु सुछंद ॥नंदा०॥ राण-
भोग-रस पूरिता।॥| मुख-कर बीरा-पान | जन 'परमानंद' बलि बली ॥ चरन-
सरन भगवान ॥नंदा०॥ | Gouri |
Mahel useer dou baithe mose mein hode mein paam jhulaaven .. garein baiyaan | NityaPad-248 | महेल उसीर दोउ बैठे मोज में होद में पाम झुलावें ॥ गरें बैयां
झुक लेत फुहारन मुख ढिंग मुखहि डुलावें ॥९॥ स्वेत महीन उपरनान में छबि
शोभित बार खुलावें ॥ नागरिया नागरि छबि चितवत एक टक पलक भुलाबे॥२॥ | Saarang |
Nrityamaan bhamini gopal sanga subhag raas .. tarani tanaya | Part1-341 | नृत्यमान भामिनी गोपाल संग सुभग रास ॥ तरणि तनया
पुलिन बिमल बिगसत्त जाती सुवास ॥१॥ लेत सुलप उरप तिरप दरसत बर
ईषद हास ॥ बदनजोति स्वच्छ कृत मोहे उड़पति आकाश ॥२॥ नीलपट
कसि कंचुकी उतंग नव बिलास ॥ गोवर्द्धधरनलाल रििवत प्रभु
कृष्णदास ॥३॥ | Iman |
Leey raadhe preetam dey pathai shree mukhaki | NityaPad-306 | ले राधे प्रीतम दे पठई श्री मुखकी
आधी बीरी ॥ वेगि बुलाई तू छैलछबीली नागर तजि तनमन भोरी ॥१॥ तव
लगी निस गिरिधर नवरंगको जब लग नहीं प्रगट परपीरी ॥ क्ृष्णदास प्रभु
स्यथाम सुभगके तू श्यामा नेनकी धीरी ॥२॥ | Kedaro |
Maharas pooran pragatyo aani .. atee foolin ghar ghar vrajnari | Part1-202 | महारस पूरन प्रगट्यो आनि ॥ अति फूलीं घर घर व्रजनारी
श्रीराधा प्रगटी जानि ॥१॥ धाई मंगल सजि सबै लै महामहोत्सव मानि ॥
आईं घर बृषभान गोपकें श्रीफल सोहत पान ॥२॥ कीरति बदन सुधानिधि
देख्यौ सुंदर रूप बखान ॥ नाचत गावत दे करतारी होत न हरख अघान ॥३॥
देत असीस सीस चरनन धर सदा रहो सुखदानि ॥ रसकी निधि व्रज रसिक रायसों
करो सकल दुख हानि ॥४॥ | Kanharo |
Aayo fagun maas kahein sub horry horaa .. aeka | Part3-197 | आयो फागुन मास कहें सब होरी होरा ॥ एक
ओर वृषभान नंदनी एक ओर हरि हलधर जोरा ॥। १॥ ब्रजनारी जारी देवेकों
भजि भजि आवें त़जि तजि कोरा ॥ जानन देहो पकरोरी स्यामकों सवे
धरत जोवन को तोरा ॥२॥ रहि न सकत अपने घर कोऊ मानो काम
को फिरदो ढंढोरा ॥ कृष्ण जीवन लछीरामके प्रभुसों होतहे झकझोरी
झकझोरा ॥३॥ | Kaafi |
Jayati telangatilak bhatt. lakshmantanuj | Part2-308 | जयति तेलंगतिलक भट्ट. लक्ष्मणतनुज
वल्लभाधीश पद कमल वंदे ॥ हरिवेद अनल अवतार सुकुमारतन निरख
नयनन जीव सब आनंदे ॥१ ॥ होत जयजय कुसुम बरखत समूह सुर पढत
प्विजवर अजर मुदित छंदे॥ धन्य निज ज्ञान पायचरणरेणु धन शीश
धरसुयश गावत कटित दुरित फंदे ॥२ ॥ | Gouri |
Chaley mukh kha fair amarpur .. curry pukaar jaay agensur ..1.. | Part2-088 | चले मुख ख फेर अमरपुर ॥ करी पुकार जाय आगेंसुर ॥१॥
श्रमतें टूट गये उर॥ जल बिन सबे भये घन धूंधर ॥२ ॥
के मारो के शरण उबारो ॥ हममें कहा रह्मों अबगारो ॥३ ॥
जहांतहां बादर रोबत डोलें॥ श्रम अपनो प्रभु आगें खोलें ॥४ ||
सात दिवस नहिं मिटी लगार॥ बरख्यो सलिल अखंडित धार ॥५ ॥
महाप्रलय जलनेंक न उबयों ॥ ब्रजवासिन नीकें अब निदयों ॥६ ॥
बेसोही गिरि वेसे ब्रजवासी॥ नेक बूंद नहीं धराणि प्रकासी ॥७॥
सूरपति सूरजिय सुनत उदासी ॥ देखो यों आये जलरासी ॥८ ॥ | Bilawal |
Page 1 of 1
bottom of page
