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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Chand govind gopi taaraagan baney raasmein banwari ..
Pustak1-334
चंद गोविंद गोपी तारागण बने रासमें बनवारी ॥ मुख प्रताप रंजित वृंदावन नव युवति जनसुखकारी ॥१॥ कमल नयन कमनीय मनोहर मनहरनी गोकुलनारी हस्त कमल पर गलित कुसुमदल नृत्य मान प्रीतम प्यारी ॥३॥॥ रसमय रास रसिकनी भामिनी अति रसाल बने बिहारी ॥ क्ृष्णदास प्रभु रसिक शिरोमणि रसिकराय गिरिवरधारी ॥३॥
Malav
Aho kaana daan kaidhaun burry aaee .. tum naan janaai
Part1-254
अहो कान दान कैधौं बरि आई ॥ तुम न जनाई मगवारी कित आई ॥१॥ बहियाँ मरोरत हार तोरत कसि कंचुकी दरकाई ॥ सूरदास प्रभु गिरिधर नागर यहै बात कित पाई ॥२॥
Shyam Kalyan
Yashoda kaahe naan mangalgave ..
NityaPad-279
यशोदा काहे न मंगलगावे ॥ पूरण ब्रह्म सकल अविनाशी ताकों गोद खिलावे ॥ १ ॥ कोटि कीट ब्रह्मांडकों करता मुनिजन जाकों ध्यावे ॥ ना जानूं ये कौन पुण्यते सो तेरी धेनु चरावे ॥२॥ ब्रह्मादिक सनकादिक नारद जपतप ध्यान न आवे ॥ शेषसहस्रमुख जपत निरंतर हरिको पार न पावे ॥३॥ सुंदरवदन कमलदललोचन गोधन के संग आवे ॥ करत आरती मात यशोदा सूरदास बलजाबे ॥४॥
Gori
Raghukulmein prakate raghuveer..
Part2-256
रघुकुलमें प्रकटे रघुवीर॥ देशदेशतें टीको आयो दिव्य रत्न मनिहीर ॥१ ॥ घरघर मंगल होत बधाई अति पुरवासिन भीर ॥ आनंद मगन भये अति डोलत कछुव सुधि न शरीर॥२ ॥ हाटक बहु इच्छाजो लूटायो रत्न गायदेचीर॥ देत असीस चूर चिरजीयो रामचंद्र रणधीर ॥३ ॥
Saarang
Barasaaneten saji chully .. rung bheeni gwal ..
Part3-141
बरसानेतें सजि चली ॥ रंग भीनी ग्वाल ॥ फाग खेलन हरि संग ॥ होरि रंज रह्यो रंग भीनी ग्वालि ॥ करि सोल्डे शृंगारसबे ॥ रंग भीनी ग्वालि ॥ भरिभरि सेंदूर मंग ॥ होरी रंग रह्यो रंग भीनी ग्वाल ॥१॥ गृहजृहतें सब निकसी ॥ अपने अपने रंग ॥| बहुविधि वाजे वाजहीं ॥ ताल मुरज डफ चंग ॥ २॥ मधि हें गोरी राधिका ॥ अलियन बृंदन मांह ॥ फूलन की छरी हाथले ॥ गह्नि ललिता की बांह ॥३॥ कंचन घट कुंकुम भरे ॥ चोवा अगर अबीर ॥ बांधे फेंट गुलालकी ॥ केसुकेसरि नीर ॥9॥ गाबत गीत तहां गई ॥ घोष राय जूकी पोरि ॥ सुनत कुंबर कोलाहल ॥ आये हें गिरिधर दोरि ॥५॥ पिचकाई सोंधे भरी ॥ करलियें मदन गुपाल ॥ तकितकि तिनकोंछिरकहीं ॥ जे मृगनयनी बाल ॥६॥ इतसखिलारबल मोहना ॥ लरिका गोपकुमार ॥ उत ललिता चंद्रावली |॥ राधा गोपी अपार ॥७॥ अंचल ओट दुरावहीं ॥ भरिभरि कनक कचोल ॥ प्यारे के सीस नवावही हो होकर बोल ॥८॥ काजर नयनन आंजिकें ॥ मंडित करहिं कपोल || फिरफिर श्री मुख देखही ॥ फूले करह़िं कलोल ॥९॥ फगुवा कोंपट ओंचही ॥ लीनें हार ॥ प्यारी कों पहरावही ॥ हसत देदे करतार ॥१०॥ कमलनमार मचावही ॥ भीजि रहे रस रंग ॥ खेलतहे नंद लाडिलो ॥ वृषभान लडेंतीके संग ॥११॥ सिथिलचीर कटिमेखला ॥ गये कंचुकी बंद टूटि ॥ गलित कुसुम कबरीनतें ॥| गईहे बेनी छूटि ॥१२॥
Aasawari
Apane baal gopalai raniju paalane jhulaavai . barambar nihaari
Part1-091
अपने बाल गोपालै रानीजू पालने झुलावै । बारंबार निहारि कमल मुख प्रमुदित मंगल गावै ॥१॥ लटकन भाल भूकुटी मसि बिंदुका कठुला कंठ बनावै । सदमाखन मधुसानि अधिक रुचि अँगुरिन करिकें चटावै ॥२॥ कबहुँक सुरँग खिलोना ले लै नाना भाँति खिलावै | देखि देखि मुसिकाय साँवरो दै दतियाँ दरसावै ॥३॥ सादर कुमुद चकोर चंद ज्यों रूप सुधारस प्यावै । चतुर्भुज प्रभु गिरिधरन लालकों हँसि हँसि कंठ लगावै ॥४॥
Ramkali
Jaisen jaisen bansi baajai taisen taisen nonche .. paany painjani aru cutty
Part1-324
जैसें जैसें बंसी बाजै तैसें तैसें नॉँचे ॥ पाँय पैंजनी अरु कटि किंकिणीरव तैसेई सप्त स्वरन साँचे ॥॥१॥ विचबिच बाललीला भाव दिखावत त्यों त्यों ब्रज युवतिनमें हास मे ॥ मिलनकी लालसा उपजत मनमें सह न सकत विरह आंच ॥२॥ ऐसी अद्भुत लीला श्रवण सुनत ते मूढ़मति मन न ४ ॥ रसिक प्रीतमकी यह छबि निरखत देवमुनि नारद शारद कहत न बचें ॥३॥
Todi
Nandke laal uthhe jabsoye .. dekh mukharvindaki shobha
NityaPad-025
नंदके लाल उठे जबसोये ॥ देख मुखारविंदकी शोभा कहो काके मन धीरज होये ॥१॥ मुनि मन हरण युवतीको बपुरी रति पति जात मान सब खोये ॥ ईषदहास दशन द्युति बिकसत मानिक ओप धरे जानो पोये ॥ २॥ नवलकिशोर रसिक चूडामनि मारग जातलेत मन गोये ॥ सूरदास मन हरन मनोहर गोकुलवस मोहे सब लोये ॥।३॥
Bilawal
Mohan uthahin raar machaai ! chhaandide jhoothi kaam dhaam sub makhan
NityaPad-031
मोहन उठहिं रार मचाई ! छाँडिदे झूठी काम धाम सब माखन रोटी दै मेरी माई ! कबहुँक झटकि गहत नीवीकर ॥। २॥ कबहुँक कंठरहत लपटाई, मुखचुंबति जननी समुझावति सद लौनी दैहौं कुँवर कन्हाई, उठि कर गही आपु ही नेती माखन बडी बार क्‍यों लाई, परमानंद' देखि यह लीला सुधि सागर मथधिवे की आई॥
Saarang
Merey ramlala koo sohilo suna naacho sur narr
Part2-254
मेरे रामलला को सोहिलो सुन नाचो सुर नर नारीहो ॥ उमग उमग आनंदमें डोलें तन मन धन सब वारीहो॥१॥ गृहगृहतें सब सजि चले अपनें अपने टोलहो ॥ देत बधाई रहसि परस्पर गावत मीठे बोलहो ॥२ ॥ मंगल साज सवारकेंहों हाथन कंचनथार॥ मानों कमलन शशि चढ चले राजा दशरथ के दरबार ॥३ ॥ अवधपुरी अति सोहीयेहो मंगलपुरहि रहि निशान॥ मौतिनचोक पुराय केंहो मंगल विविध विधान ॥४॥ देव पितर गुरु पूजकें हो जातकर्म सबकीने॥ ट्िजवर कुल सनमानकें दान बहुत विधदीने॥५॥ मागध सूत बिरदावलीहो ॥ सूरजबंश वखान॥ याचकजन पूरणकीये सब दानमान परिधान ॥६ ॥ विधि महेश सुर शारदाहो देख सिहात समोद॥ ध्यानघरे नहीं पाईयेंहो सो देखो कौशल्याकी गोद ॥७ ॥ विविध कुसुम वरखा भई आनंद प्रेम प्रकाश॥ रामललाके रूपपें जन बलबल गोविददास ॥८ ॥
Ramkali
Laal sanga rasrang lait maan rasikavan gragrata gragrata tatatatatyeithei gati leaney ..|
Pustak1-341
लाल संग रासरंग लेत मान रसिकवन ग्रग्रता ग्रग्रता ततततततयेईथेई गति लीने ॥| सारीगमपधनी ध्वनि सुन व्रजराज कुँवर गावत री अति जति संगति निषुण तननननननन आन आन गति चीने ॥१॥ उदित मुदित शरद चंद बंद टूटे कंचुकी के वैभव निरखि निरखि कोटिमदन हीने ॥ बिहरत बन रास बिलास दंपति मन ईषद हास छीत स्वामी गिरिवरधर रसवश तबकीने ॥२॥
Iman
Nirtat mandal madhya nandlal ..
Pustak1-324
निर्तत मंडल मध्य नंदलाल ॥ मोरमुकुट मुरली पीतांबर गेरें गुंज बनमाल ॥१॥ ताल मृदंग संगीत बजत है तत थेई बोलत बाल || उरप तिरप तान लेत नटनागर गंधर्व गुनी रसाल ॥२॥ बाम भाग वृषभाननंदिनी गजगति मंद मराल ॥ परमानंद प्रभु की छबि निरखत मेंटत उरके साल ॥३॥
Todi
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