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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Uta saanvaro bahuu rangan rangilo itgun nidhi | Part3-245 | उत सांवरो बहू रंगन रंगीलो इतगुण निधि
राधा गोरी ॥ डफ पुंजन की गुंज गान सुन खणमृग मुदित मची होरी | १॥
अंबर चढ्यो गुलाल उडायो ललितादिक लियें भर भर झोरी ॥ मानो.
दुह/ंदिसनते सजनी उठी अनुराग घटा घोरी॥ २॥| कुंकुम की पिचकारी डारत
चोंक चपलता करत किशोरी ॥ लचक्यो लंकइते मुख फेरयो मानो कनक
लता मोरी ॥३॥ छिरक छींट उठत चोवा की लगी कपोल बाल के थोरी॥
प्रगट करत दोऊ कर अपने गोकुलेश चित्त की चोरी ॥४॥। | Sarang |
Chhando chhando hamari vaat lunger sambre .. jinn | Part3-237 | छांडो छांडो हमारी वाट लंगर सांबरे ॥ जिन
फोरो ढोरो मेरी गागर भरन वेहु यह घाट ॥१॥ जिन झगरो पकरो मेरो
अचरा देख विचारो ठोर ॥ तुम होरी के रातेमाते नोलत ओर की ओर
॥२॥ लेहों घेर निवेर सबनपें कर हों न काहू की कान ॥ श्रीविद्चल गिरिधरन
लाल तुम जीते हो मुसिकान ॥३॥ | Sarang |
Valallabhaheeko bharoso mohi.. | NityaPad-349 | वलल्लभहीको भरो सो मोहि।।
अन्यदेवको जानूँ नमानूं इनको आसरो खरोसो॥ १॥
समझविचार देख मन मेरे वारवार कहों तोसों ॥
रसिक सुधासागर को छांडकेंक्यों पीवत जल ओसो ॥२॥ | Bihaag |
Aaj tou uneede hojulal .. tum podho houn charan palotam naan | NityaPad-050 | आज तो उनीदे होजुलाल ॥ तुम पोढो हों चरण पलोटं नां
जानों जिय ख्याल ।॥।१॥। नख्तक्षतपिय उर पीर हमारे देरियत हो बेहाल ॥ सुनहिं
सूर अब कठिन वचन त्रिय भरलीने अंकवाल ॥।२॥ | Lalit |
Podhemai lalan sez sukhakaari || | NityaPad-126 | पोढेमाई ललन सेज सुखकारी ||
मणिगण खचित रंगमहल में संग श्रीराधाप्यारी || १॥
सहचरी गानकरत मधुरेस्वर श्रवणसुनत सुरत हितकारी ॥।
तनमन मगन भये पियप्यारी निरखदास बलहारी ॥। २॥ | Kedaro |
Yamuna jall sajani houn kesein jaauun .. saanware | Part3-350 | यमुना जल सजनी हों केसें जाऊं ॥ सांवरे
अंग लरिकवा के डर परतन बाहिर पाऊं ॥ १॥ फागुन मास अभागी जाको
नाह ओर ही गाऊं ॥ पिय प्यारी हे पियके पाछें को धरवातरे नाऊं ॥२॥
जब होंकर गहि आरसी देखों आपही आप सिहाऊं ॥ ऐसें ऐसें ही अरूण
अधर रस सखी तापर बीरा खाऊं ॥३॥ कबहुंक उपजत चोंप चोंपई कुच
कच चाहि के चाऊं || कृष्ण जीवन लछीराम के प्रभु कोन मते ठहराऊं | ४॥ | Bihaag |
Dekhocharchandaekathaur .. chitavarhinitambini | NityaPad-158 | देखोचारचंदएकठौर ॥ चितवरहीनितंबिनी
पियसंगसारसुताकी ओर ॥। १॥ द्वैविधुकीगति स्थामबरण है द्वैविधुकीगतिगौर॥।
जाकेमध्यचारशुकराजत द्यफलआठचकोर ॥ २॥ शशिशशिसंगप्रवालकुंदअलि
तहां अरुओमन मोर ॥ सूरदासप्रभुउठभयरूपनिधि बलबलयुगलकिशोर ॥। ३॥। | Bilawal |
Piyako bean sikhawat pyaari | kunj mahalmein baithi shree radha | Part1-336 | पियको बीन सिखावत प्यारी | कुंज महलमें बैठी श्री राधा
संग लिये ललिता री ॥१॥ पियकी अंगुरी ले अपने कर धरत त्तार पै
प्राणआधारी । मध्यम पंचम सुर हि भरावत लाल लकुट कर धार ी ॥२॥ रीस
करत मनमें मुसुकावतत पलका पे सुंदर सुकुमारी । सखी बूंद खंभ छिप ठाडी जाली
कोऊ चढी अटारी ॥३॥ जलकी फूही परत जल भीतर मेघघटा निर्तत नटकारी।
मोर चकोर कोकिला गावत तेसीय सावन की अंधियारी ॥४॥ मेरी नई बीन
है मोहन बंसी निदुर नाही हितकारी । ताहि ते तुमको यह सिखावत बातें करत
विचार विचारी ॥५॥ सुनि प्रिया वचन स्याम जू बोले सुनि हो श्री वृषभान
डुलारी । तुमारी क्रपा बिन हम बंसी धरी सो अब ही विसारी ॥६॥ सुनि
पिय वचन हरखि के प्यारी सिखवत रिझवत देकर तारी । भक्त सदा करे आस
दरसकी तट सोभित है भानसुता री ॥७॥ | Sorat |
Nandjuke laalan kii chhabi aachhi . paay penjani runujhunu | Part1-151 | नंदजूके लालन की छबि आछी । पाय पेंजनी रुनुझुनु
बाजत चलन पूँछ गहि बाछी ॥१॥ अरुन अधर दधि मुख लपटानौ तन राजत
छींट छाछी । परमानंद प्रभु बालिक लीला हँसि चितबत फिरि पाछी ॥२॥ | Bilawal |
Akhiyaan kahuki naan lago .. | NityaPad-064 | अखियां काहूकी न लगो ॥
सांवरो सो ढोरा काहुको ता सिर ग्वाल पगो ॥ १॥
रूप रंग्यो मेरो मन वाके रोमरोम प्रति मेन जग्यो ॥
कुंभनदास लाल गिरधर विन को काहुंको न सगो ॥|२॥ | Saarang |
Harihaunto hariho laltihari pyaari key paanyan parpar.. | NityaPad-322 | हरिहौंतो हारीहो लालतिहारी प्यारी के पांयन परपर॥
रही सिर धरचरणन बडीबार भंई लीजिये मनाय रूठी मानत नाहि क्योंहूं कर ॥१॥
जैसेंजैसें रातजात तैसेतैसें सतरात मोसों न बतरात मानीहै मैं यांसूं हार॥
सुनतही वचन रसिकप्रीतम दूतीके आप उठ चले देखत बदन जात इतहीं ढार ॥ २॥ | Kanharo |
Laal kii barasgaanthihen aajoo .. baajan baajen sabein bidhineeke | Part1-018 | लाल की बरसगांठिहें आजू ॥ बाजन बाजें सबें बिधिनीके
कृष्णके न्हावन काज ॥१॥ फूले फिरत सबें रंग भीनें पुनि पुनि देत असीस॥
द्वारिकिस प्रभु अति ही मनोहर जीयो कोटिबरीस ॥२॥
# राग रामकली # बधाईरी नंदके भई ॥ सुंदर श्याम प्रगट भए गोकुल आप
नई ॥१॥ नांचत सब गोपी ग्वाल छिरकत हरद दही ॥ रामराय भगवान
जोरी परम दई ॥२॥ | Ramkali |
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