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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Sunder yamunatirari manmohan thaade .. jabate drishtipari yaa mukhpe tabate dharat naan
NityaPad-316
सुंदर यमुनातीररी मनमोहन ठाड़े ॥ जबते दृष्टिपरी या मुखपे तबते धरत न धीररी ॥ १॥ मृगमद तिलक अलकघुँघरारी नासामुक्ता कीररी ॥ सूरदासप्रभु वेणु बजावत थाक्यो सरिता नीररी ॥ २॥
Adano
Paniyan naan jaauun ree aalee nandanandan merrie mataki patak key
NityaPad-273
पनियां न जाऊं री आली नंदनंदन मेरी मटकी पटक के झटकी ॥ चक्क दुपहरी में अटकी कुंजन लों कोऊ न जाने घट घटकी ॥॥१॥ कहा करों कछु बस नहीं मेरी नागर नट सों अटकी ॥ नंददास प्रभु की छबि निरखत सुध न रही पनघट की ॥२॥
Saarang
Yashodarani sovan foolen phooli . tumhaaren pura bhayo kull mandan
Part1-074
यशोदारानी सोवन फूलें फूली । तुम्हारें पुुर भयो कुल मंडन वासुदेव समतूली ॥१॥ देत असीस बिरध जे ग्वालिनी गॉमगॉमते आई । ले ले भेट सबै मिलि निकरसी मंगलचार बधाई ॥२॥ ऐसे दसक होई जो औरे सबकोऊ सचुपावे । बाढ़ो वंश नंदबाबाकों परमानंद जिय भावें ॥३॥
Dhanashri
Saanvaro munn mohan maaee ..
NityaPad-286
सांवरो मन मोहन माई ॥ देख सखी वनतें ब्रजआवत सुंदर नंदकुमार कन्हाई ॥१॥ मोर चंद सिर मुकट बिराजत मुख मुरली सुर सहज सुहाई ॥ कुंडल लोल कपोलन की छबि मधुरी सी बोलनि बरनी न जाई ॥२॥ कुंचित केश सुदेश वदन पर मधुपनकी माला फिर आई ॥ मंदमंद मुसकात मनोहर दामिनि दुर दुर देत दिखाई ॥३॥ लोचन ललित लिलाट भूकुटी पर ताकि तिलककी रेख बनाई ॥ जनु मरजाद उलंघ अधिक बल उमगी चली अति सुंदर ताई ॥४॥ शोभित सुर निकट नासापुर अनुपम अधरनकी अरूनाई ॥ जानुं शुक सुगंध विलोक बिंबफलचाखन चारन चोंच चलाई ॥५॥
Gori
Sunau hoe shyam aeka baat naee ..
Pustak1-324
सुनौ हो श्याम एक बात नई ॥ आज रास राधा अवलोक्यौ मेरे मन अति फूलभई ॥१॥ हँस बोलन डोलन बन बिहरन वे चितवन न जात चितई ॥ कौन कहै वृषभान नंदिनी प्रगट भई मानों मदन जई ॥२॥ तुम सम नयन बैन तुमही सम तुम सम आनंद केलि भई ॥ तुमारौ रूप धरें तुमारी सों तुमही परसभई तुमहि मई ॥३॥ माथें मुकुट पीतपट मुरली बनमाला छबि छाय रई रंचक भेद रह्मौ या तनमें और सकल छबि पलट लई ॥४॥ त्रिया आलिंगन पिय अवलंबन पियकों हँसिकें अंक दई ॥ फिर चितवन और मुरि मुसिकावन उघटन मिसकर नृत्य ठई ॥५॥| यह कौतुक अनूप मनमोहन मानों घोष रसबेलि छई ॥ सूरदासप्रभुके उर परसत ललित बलित *«लिहार गई ॥६॥
Todi
Yeh murali kull dahanhari .. sunhu shravan daiy daiy narr naari
Part1-283
यह मुरली कुल दाहनहारी ॥ सुनहु श्रवन दै दै नर नारी ॥१॥ कपटी कुटिल बाॉसकी जाई ॥ बनतें कहा घरहिं यह आई ॥२॥ जे अपने घर बैर बढ़ावै ॥ तनकी तन अति आग लगावै ॥३॥ ऐसीको हरि संगत कीनी ॥ जात नहीं वाकी उन चीन्हीं ॥४॥ जैसे वे तैसी वह आई।॥ बिधना जोरी भली बनाई ॥५॥ मुरली के संग बने मुरारी ॥ भाग सुहागिन पिय अरु प्यारी ॥६॥ ये कुलटा कुलीटहैं दोऊ ॥ एकतें एक घटै नहिं कोऊ ॥७॥ अधरन धरत सबन के आगें ॥ करतें नेंक कबहुँ नहिं त्यागें ॥८॥ इनके गुण कहियै सो थोरे ॥ सूरस्याम बंसी बस मोरे ॥९॥
Bilawal
Thaade kunj dwaar peeya pyaari karat paraspar hasahas batiyaan..
Part2-244
ठाडे कुंज द्वार पीय प्यारी करत परस्पर हसहस बतीयां॥ रंगीली तीज गनगोर भोर सज आंई घर घर तें सबसखीयां ॥१ ॥ करत आरती अति रसमाती गावत गीत नीरख 2 अखीयां॥ कृष्णदास प्रभु चतुर नागरी कहा बरनों नांहीं गतीयां ॥२ ॥
Khat
Aaee gopi poyne paran .. soee karau jaisen sanga naan chhoote rakhau
Part1-334
आई गोपी पॉयन परन ॥ सोई करौ जैसें संग न छूटे राखौ श्यामशरन ॥१॥ जब तुम बैन बजाय बुलाई अब जिय कित निटुराई ॥ तुमारे भजत पाप किहिं लागे किन यह बुद्धि उपाई ॥२॥ चित नहीं चलत चरण गति थाकी मन न जात गृह पास ॥ परमानंद स्वामी उदार तुम छाँड़ी बचन उदास ॥३॥
Malav
Bado dhana harijanko harinam |.
NityaPad-368
बड़ो धन हरिजनको हरिनाम |। बिनु रखवार चोर नहि चोरे सोवत है सुखधाम ।॥॥|१॥ दिन-दिन बढत सवायो: दूनो घटत नहि कछु दाम ॥ सूरदास हरिसेवा जाके पारसको कहा काम ।॥२॥।
Bihaag
Jopein srivallabh prakat naan hotey..
Part2-303
जोपें श्रीवल्लभ प्रकट न होते॥ कर अलोकिक मारग तेहोते अन होते ॥१ ॥ तीरथ सकल माया संयुतते ते केसेंक शुद्ध होते। दैवी जन चकोर मुख बिधुविन जन्म अकारथ खोते ॥२ ॥ अपने मुख अपनी महिमा कहिं गुरुनन कोऊ कहोते॥ जेसें दीन मनोरथ भोजन रहिजाते सब न्योंते ॥३ ॥ अवश्य बचन संदेह निवारण क्यों करत न होते॥ गिरिधर श्रीमुखकी शोभाकों कहो केसें कर ॥४ ॥
Nat
Tere paiyaan laagun giridhar bhojan keeje ..
NityaPad-298
तेरे पैयां लागूं गिरिधर भोजन कीजे ॥ उलटत पलटत झगुलिया भीजे खीजत खिजावे सुंदर तन छीजे ॥।१॥ फेनी बावर खुरमा खाजा गुंजामिश्री लडुवा लीजे ॥ बांट देत सब ग्वालबालनकों परमानंद जननी करलीजे ॥२॥
Iman
Laalan daan leejai hoe curr sub aaj niberi .. yeh
Part1-254
लालन दान लीजै हो कर सब आज निबेरी ॥ यह मारग हम दिन आवें को करत नित झेरों ॥१॥ तुमतो चपल हठीले ढोटा गो न मानत कह केरो ॥ श्रीविहलगिरिधर छबीले अंचल छाँड़हु बलि मेरी ॥२॥
Shyam Kalyan
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