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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Horry kheli aae kahaan saun tum rasik saanvare
Part3-081
होरी खेलि आए कहाँ सौं तुम रसिक साँवरे रैंग भीनै ॥ फैंट गुलाल अबीर की झोरी कंचन पिचकाई कर लींने ॥१॥ पलकन पीक अधरन पै अंजन सिथिल गात मरगजा बागे कीने ॥ “सूरदास' प्रभु काहे कौ छिपाव हि साँची कहि अब हँसि दीनें ॥२॥
Devgandhar
God liye balmohan dodd odh rajaai baithi
NityaPad-342
गोद लिये बलमोहन दोड ओढ रजाई बैठी नन्‍्दरानी ।। परदा डरे द्वार द्वारन प्रति रोहिनी धरी अंगीठी आनि ॥॥१॥| मुख देखन गृह-गृह तें आई ब्रज ललना गावत मूदु वाणी ॥ द्वारकेस हरि हलथर मैया भैया बदन रहे लपटाई॥।२॥
Bihaag
Govind barbar mukh jovai . kamalanain hari hilkin rowat
Part1-142
गोविंद बारबार मुख जोवै । कमलनैंन हरि हिलकिन रोवत बंधन छोड़े यह सोवै ॥१॥ जो तेरी सुत खरोई अचगरी अपनी कूखि कौ जायौ। कहा भयौ जो घरकौ लरिका चोरी माखन खायौ ॥२॥ नई मटुकिया दह्यौ जमायौ देव न पूजन पायौ । तिहिं घर देव पितर काहेके जिहि घर कान्हर आयी ॥!३॥ जाकौ नाम कुठार धारहै यमकी फाँसी काटे । सो हरि बॉँथे प्रेम जेबरी जननी सॉट लै डाटै !!४॥ परमानंददासकौ ठाकुर करत भक्त मन भाये। देखि दुखि ये सुत कुबेरके लालजू आप बँधाये ॥५॥
Bilawal
Dipdan vraj param suhaayo..
Part2-057
दिपदान ब्रज परम सुहायो॥ अमावस पर्व बड़ो दिन है यह बाल कहत बाबा समुझायो ॥ अगणित दिप जुराय सबे मिल ऊँची अटा चढ़ायल | नंदरानी यह छेया मानो पहराई कंचन माल ॥२ ॥ हंस हंस कान कह्यो जननीसों अपनी थेन श्रृंगारे जाय॥ श्रीविडुल नंदरानी कहत है बलदाउ को लेहो बुलाय ॥
Kanharo
Kahi thon moll yaa dshikauri gwalin shyam sunder hansi hensi
Part1-242
कहि थों मोल या द्षिकौरी ग्वालिन श्याम सुंदर हँसि हेंसि बूझत हैं ॥ बेचैगी तो ठाढ़ी रहे देखोंधों कैसो जमायौ काहेकों भागी जाति नयन विशालन ॥१॥ वृषभाननंदनीकौ निर्मोलक दह्मौं ताकौ मोल श्याम हीरा तुमपे न दीयौ जाय सुनि व्रजराज लाड़िले ललन हैँसि हँसि कहत चलत गज चालन ॥ गोविंद प्रभु पिय प्यारी नेह जान्यों तब मुसिकाय ठाढ़ी भई सेंना बेनी कर सबै आलिन _॥३॥
Saarang
Chandanpaher aaya haribaithe kalindike coole .. saghankunj dram
NityaPad-237
चन्दनपहेर आय हरिबैठे कालिंदीके कूल ॥ सघनकुंज द्रम चहुंदिश फूल ललित लताके मूल ॥१॥ कुंदमाल श्रीकंठ बनी और विचविच विविधभांतके फूल ॥ रुचिर प्रवाह बहेत यमुनामध्य तरु तमालके झूल ॥२॥ नाचत गावत वेणु बजावत सकल सखा लियें संग | गोविंदप्रभु पियकी छबि निरखत होत नयन गतिपंग ॥३॥
Saarang
Sub mill gawat raag hindol baaje bajawant
Part3-037
सब मिल गावत राग हिंडोल बाजे बजावंत घन सुं बरसे मिलि बधावन चली बसन्‍्त ॥ बरन-बरन आभरन पछहेरे नौतन हाथ लिये गड्डवा चलत चाल गजगंत ॥१॥ एकजु नाचत देती सुधंग लाग दाट उरप तिरप दूर जाई सो मिलि पोहोप मंजरी भर केसर कुमकुमा अबीर छिरकती ॥ चिरजीयो “तानसेन' के प्रभु राजा राम देत मुक्ताहल नग कचनबरखत खतपति ॥
Hindool
Aaj kahaa sambhramahe tumare ghar taat.. gopsaben karat kaaj aanand naan samaat..1..
Part2-109
आज कहा संभ्रमहे तुमारे घर तात॥ गोपसबें करत काज आनन्द न समात॥१॥ हाथजोर ठाड़े हरि पूछतहें आय॥ मोसों यह बात कहो बावा ब्रजराय॥२॥ बोले नंदराय देव इंद्रहिं बलिदेंहें ॥| वरसे जल निपजे नाज वरषलों सुख पेंहें ॥३ ॥ बहुत द्योस भये करत हें हम सबकोय ॥ अबजो हम छांड देंहिं तो न भलो होय ॥॥४ ॥ बोले हरि सुनो तात बात एक मेरी ॥ कर्मके बल सबें होई मिलि सुभाय हेरी ॥५ ॥ कर्मके आधीन देव कहो कहा करिहें ॥ ताको कछु चलिहें नहिं कर्म बिन न सरिहें ॥६ ॥ जो तुम जगदीश जान पूजतहो याहीं॥ यासों हमें काज कहा गौचारन जाहीं ॥७ ॥ गिरि कानन बसतहे हम पूजें ता ईश॥ सो तो ह्विज देव गाय ठाकुर जगदीश ॥८ ॥ गोवर्द्धन पूजो ओर देहो विप्रन गाय ॥ अर्पो बलि देहो दान धेनु तृण चराय ॥९॥ करवाओ पाक सकल युवती जन बुलाय॥ खीर आदि सूप अंत सबे विधि बनाय ॥१० ॥ ओदयो संयाव पूरा चकुलीदे आदि ॥ रखवाओ दूध सबें खरचो जिन वादि॥११॥ बलि देहो ह्विज पूजि गाय खिलाय ॥ गिरिकी करो शकट जोर परिक्रमा जाय ॥१२ ॥ भूषण बहु मोल सबें वसन तन बनाय॥ हसत खेलत गावत गिरि देखो फिर आय ॥१३ ॥ मेरोतो मतो यह सुनहो त्रजराज ॥ भावें तो कौजेनू मेरो यह काज॥१४ ॥ जैसें हरि कह्यो सबन तेसेंही कीयो॥ धरकें बलिखात दरशदीयो ॥१५ ॥ सबहिन संग पांयपरे मोहन निजरूप ॥ दीनी प्रतीत सबे गोकुलके भूप ॥१६॥ हरिस्वरूप फलले सब अपने गृह आये॥ निज कर ब्रजवासी हरि फेर ब्रजवसाये ॥१७ ॥ कोपि इंद्र पठये मेघ बरसो दिनरात॥ गिरिथर ब्रजवासी सब राखलिये दुख्यात ॥१८ ॥ देख रूप आनंदमें भूख टिक ॥ बरखतहे कहां मेघ काहू न सुध पाईं ॥१९ ॥ सात दयोस ठाडे न पग हलायो ॥ ऐसो त्रजवासिन यह भाग्यनते पायो ॥२० ॥ सुरपति को गर्व गयो रह्मो अतिखिस्याई ॥ उघर शये मेघ सबे उदयोरवि आई ॥२१ ॥ बोले प्रभु निकसो सब बाहिर रहो मेह॥ निडर भये फिरो सबे करोजिन संदेह २२ ॥ राख्यो गिरि भूमि ऊपर भेटे ब्रजवासी॥ पायो अति परमानंद गोकुल सुखरासी ॥२३॥ प्रेममरी व्याकुलव्हे चुंबल मुखमाई॥ बारंवार बालकके करकी बलिजाई ॥२४ ॥ हरखत त्रजवासी सब आये घर फेरी॥ निशदिन वे जीवतहें सुंदर मुख हेरी ॥२५ ॥ पछतानो इंद्र कामधेनु संग लायो॥ अपनों अपराध पांय पर क्षमा करायो॥२६॥ कीनो अभिषेक तहां गंगाजल आनी॥ ऐराबत हे अपने प्रभुजानी ॥२७॥ गोविंद यह नामथर्यों आप भयोदास॥ सब गर्व गयो पायो में त्रास॥२८ ॥ हरिकों अभिषेक होत सबनि बेर टूदयो॥ गोबिंद यह नामलेत सहजदोष छूदयो ॥२९॥ यह लीला अति अद्धूत रसिक होय गाबे॥ अन्य भजन छांड चरण हरिजूके पावे ॥३० ॥
Bilawal
Maaee naye khilar aaju mein dekhe chanchal chapal
Part3-269
माई नये खिलार आजु में देखे चंचल चपल चवाई ॥ हँसि मुसिकाइ नेन सैन दे मोकूं पकरि नैंचाई ॥१॥ कोउ गुलचे कोउ कर मुख माँडे गोपी करें हँसाई ॥ “कृष्ण जीबन लछी राम' के प्रभु की मुरली लई छिनाई ॥२॥
Goud Sarang
Prakate srivallabh nijnath ..
Part2-269
प्रकटे श्रीवललभ निजनाथ ॥ श्रीलक्ष्मणवंश हंस उज्ज्वल यश ट्विजकुल किये सनाथ॥१॥ दरसपरस दिये जीवनकों निर्मल हियो कियो॥ करुणासागर रूप उजागर शरण आपनी लियो ॥२ ॥ भाव भक्ति दई भक्तनकों प्रभुकों दिये गहाई॥ मनवांछित फल सबहिनपाये जेरहे चरण शिरनाई ॥३ ॥ कीने दास लालगिरिधरके आपन भये सहाय॥ पूजे सकल मनोरथ मनके श्रीविड्डुल गिरिराय ॥४ ॥
Devgandhar
Baithe vrajraj kunwar useer sadan kunj bhawan
NityaPad-244
बैठे ब्रजराज कुंवर उसीर सदन कुंज भवन सीतल मंद त्रिविध पवन लागत सुखदाई ॥ सहचरी समीप आय ठाढी मुख निरखत हें पहिरावत पहोंप माल अरगजा लगाई ॥१॥ इक सख्री पान खवावे अधर कमल परस करत इक सखी दरपन ले पिये को दिखाई ॥ प्रभु 'कल्यान'गिरिधर पीय यह बिध ऋ्रतु मनाय निरखि निरखि उर आनंद हृदय में समाई ॥२॥
Saarang
Bheejee chandravali paramsuhag .. gaavati naachati dey curr taari
Part1-013
भीजी चंद्रावलि परमसुहाग ॥ गावति नाचति दे कर तारी नारीजू खोले भाग ॥१॥ झलकत मांग सुरंग सेंदुर्सा काजर नैन भरे ॥ झलकति डुलकति अंगन सारी सुभ सिंगार करे ॥२॥ मांडे बदन हरद रोरिसों दूध दही और लौनी ॥ श्री विदलगिरिधरनलालके मंगल करत सलोनी ॥३॥
Devgandhar
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