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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Aao merey govindagokulke chandaa. bhaee buddy vaar khelat
NityaPad-106
आओ मेरे गोविंदगोकुलके चंदा। भई बडी वार खेलत यमुनातट बदन दिखाय देउ आनंदा ॥ १॥॥ गाय आवनकी भईहे विरियां दिनमणि किरण होत अतिमंदा ॥ आये मेरे तातमात छतियां लाग गोविंदप्रभु ब्रजजन सुखकंदा॥।२॥
Gori
Aaj teree fabi adhik chhabi nagri ..
NityaPad-337
आज तेरी फबी अधिक छब्िि नागरी ॥ मांग मोतिन छटा वदनमपर कचलटा नीलपट घनघटा रूपगुण आगरी ॥|१॥ नयनकजल अणीकवरी लज्नितफणी तिलक रेखा बनी अचल सौभागरी ॥। नासिका शुकचंचु अधर बंधूकसम बीजदाडिम दशन चिबुकपर दागरी ॥ २॥ वलय कंकण चूरि मुद्रिका अतिरूरी बेसरि लटक रही कामगुण आगरी॥ ताटंक मणिजटित किंकिणी कटितटित प्रोत मुक्तादाम कुचकंचुकी लागरी ॥। ३॥ मूक मंजीरध्वनि चरण नखचंद्रमा परम सौरभ बढत मृदुल अनुरागरी ॥ कहे कृष्णदास गिरिधरन वशक्िये करत जबमधुरस्वर ललितवर रागरी ॥४॥
Bihagaro
Baanak bunn thhan thaado ree mohan sunder jamuna teer |
NityaPad-167
बानक बन ठन ठाडो री मोहन सुंदर जमुना तीर | सीस कुल्हे चंदन खोर कीए कुटील अलक शप्रों पैं धनुष दृग खंजन स्याम बरन नासा कीर ॥ १॥॥ अधर दसन अधर बिंब चुवक गाढे ग्रीवा मुक्त माल बिसाल बिराजत चिन्ह नव कट गंभीर ॥ पग नूपुर रूनक झुनक पीत बसन मदन मोहन कर मुरली गोविंद' प्रभु गोप रूप गोपीनाथ बलबीर ॥। २॥
Saarang
Haye heen dhaadhin vrajranijuki keerati jaanchan iju. bhawan prakas
Part1-207
है हीं ढाढ़िन ब्रजरानीजूकी कीरति जाँचन आईजू। भवन प्रकास करन कुल कन्या वृषभान नृपततिकें जाईजू ॥१॥ मम पति हरखे और देव सब॑ उर आनंद न समाई ॥ उमड़े सब जाचक ब्रिभुवनके सुनि यह सुजस बधाई ॥२॥ कीजै मोहि अजाचक रानी जाँचन अनत न जाई | दीजै रतन मणि मानिक मुक्ता नग निरमोल मेँगाई ॥३॥ जो दीजै तो सात साखिकों दोऊ वंश बखानों ॥ नंदराय वृषभान नृपतिकी कुल परपाटी जानों ॥४॥ वंश अहीर महा बहु नृष भये कंजभानको गाऊँ। भुजबल चित्रसेन अजमीड़े यश पर्यत सुनाऊँ ॥५॥ बड़े भाग्य कुल तिलक नंदजू जा कुल कीरति भाई । तिहिं फल सुभग श्याम घन सुंदर मंगल मोद निकाई ॥६॥ अब सुनि गोपदंश कुल रानी सर्वोपरि रजधानी । अष्टसिद्धि नवनिधि जोरिकर कमलासी ललचानी ॥७॥ भये रति भान सकल भान नृप चित्रभान सुखदाई । भान अषछ्में जोतभान बड़े कंजभान बड़राई ॥८॥ बड़ों वंश बरनन को लघुमति कीरति जाति न जानी । ता कुल श्रीवृषभाननृपतिकी कन्या व्यास बखानी ॥९॥
Maru
Murali hari tein naan chhootatahai .. vaahike vash bhaye nirantar vaha adharan
Part1-279
मुरली हरि तें न छूटतहै ॥ वाहीके वश भये निरंतर वह अधरन रसलूटतहै ॥१॥ तुमतें निठुर भई वह बोलत तन तें मन उचटावतहै ॥ आरज पथ कुल कान मिटावत सबकों निलज करावतहै ॥२॥ निडरी रहत डरत नहीं काहू मुख पायें बहु फूलतहै ॥ अब यह हरितें होत न न्‍्यारी तू काहेकों भूलतहै ॥३॥ रोमरोम नखसिख रस पागी अनुरागिन हरे ध्यारी है ॥ सूरश्याम वाके रस लुब्बे जानी सौत हमारी है ॥४॥
Bhairav
Raho raho vihariju merrie aankhin mein vrukajin
Part3-049
रहो रहो विहारीजू मेरी आंखिन में वृूकाजिन मेलो अंतर व्हे मुख अबलोकनकों ॥ अरभामती तिहारी मिलल्‍यो चाहे मिसकरि पैयां लागों पलपलकों ॥१॥ गावत खेलत जो सुख्र उपजत सोनकोटिवल हेजुवतिनकों ।। हरिदास के स्वामी को हँसत खेलत मुख कहा पाइयतह़े यह सुख मनकों ॥२॥
Basant
Kokil bollie bunn-bunn phoole, madhup gunnaaran
Part3-068
कोकिल बोली बन-बन फूले, मधुप गुँनारन लागे ॥ सुनि भौ भोर, रोर बन्दनिको, मदन-महीपति जागे ॥१॥ ते दूने अंकुर द्वुम-पल्लव, जे पहिले दब दागे ॥ मानहु रतिपति रीि जाचकनि, बरन-बरन दिय बागे ॥२॥ नवल प्रीति, नव लता, पुहुप नव, नवल नयन रस-पागे ॥ नवल नेह़, नव नागरि हरषित, सूर, सुरंग अनुरागे ॥३॥
Basant
Mohe bolvo naan chalvo bulaayavo naan bolvo jasodaju tihaare kaanh
Part1-265
मोहे बोलवो न चालवो बुलायवो न बोलवो जसोदाजु तिहारे कान्ह ऐसी गारी दीनी |! दधिपें लगायो दान दिये बिन न देत जान ऐसी अटपटी बात तिहारे कान्हकीनी ॥॥१॥। खोर में मरोरी बांह मटुकी झटकलीनी जानों कहाकीनी पद ईडी नवीनी ॥ अकथ कहानी बरजो न मानी व्रजपति रानी में तिहारी कांन ॥२॥
Poorvi
Mero hari gangako sopanyo ..
NityaPad-195
मेरो हरि गंगाको सोपान्यो ॥ पांचबरसको सुद्धसांवरो तें क्यो विषई जान्यो ॥१॥ नित्य उठ आबत हाथ नचावत कौन सहेकबान्यो ॥ चूरी फोरत बांह मरोरत मांट दहीको भान्यो ॥ २॥। ठाडी हँसत नंदजूकी रानी ग्वालिन बचन न मान्यो || परमानंद मुसकायचली जबदेख्यो नंदघरान्यो ॥३॥
Saarang
Hamaare raay ghar dhota jaayi jasumati kookhi siraiju. suni
Part1-032
हमारे राय घर ढोटा जायी जसुमति कूखि सिराईजू। सुनि सब चलीं गृह गृहते साजि बधायो लाईजू ॥१॥ हरद दूब अक्षत दध्ि कुमकुम कंचन थार सुहाई । नवसत साजि सिंगार यूथ मिलि जसुमति मंदिर आई ॥२॥ देखि नंद आनंद बढ्यौ अति महरि निरखि सुख पाई | तिलक करत आनंद रायकें ले शीश दूब धराई ॥३॥ कोरे चीति संभारि साथिये बंदनवार बंधाई | तिलक करत प्यारे लालनकों नन्‍्योंती दे सुख पाई ॥४॥ सुनिसुनि ग्वालन गाय बहोरी जुरि बालक सब आये । दूध दही माखन काँवरि भरि भरि धरिषरि कांथे लाये ॥५॥ नाचें गावैं करत कुलाहल प्रमुदित है नरनारी । मुख नवनीत लगाई डारि दथि हँसिकें दे कर तारी ॥६॥ महामहोच्छवके रस माते तनमन सुधि बिसराई । महरि झुलावति सुत्हिं पालने आनंद देत बधाई ॥७॥ कुल प्रोहित ढिंग बोलि नंदजू नांदी मुख पितर पुजाये | हेम रत्न पार्टंबर भूषण देत सबन मन भाये ॥८।॥ यह सुख मुख बरनत नहिं आबै निरखि नैन मन फूले। हरखि देवगण बरखत सुमनन कौतुक देखत भूले ॥९॥ देत असीस चले नरनारी यह दिन नित प्रति आवौ | चिरजीयौ जसुमति तेरो सुत ब्रजपति लाड़ लड़ावों ॥
Asawari
Deepmalika shravan sunhai..
Part2-056
दीपमालीका श्रवन सुन्हाई॥ दोहरी पाथ बनी दिपन की ब्रज शोभा लागत अति अधिकाई ॥ विविध शृंगार पहर पट भुखन प्रफुलित उर आनन्द न समाई ॥ बड़ो पर्व त्यौहार दिवाली श्रीवि्ठवल के यह जी भाई ॥
Kanharo
Jhoolau paalane nandlal . jaauun bali bali badan oopar chapal
Part1-096
झूलौ पालने नंदलाल । जाऊँ बलि बलि बदन ऊपर चपल नयन बिसाल ॥१॥ कंठ कंटुला केहरीनख सुभग मुक्तामाल । गरे हँसुली कोंधनी कटी चरन नूपुरजाल ॥२॥ निकट बैठी जननी झुलावत भाग मानत भाल । लै खिलोना कहत हरिसों खेलिये मम बाल ॥३॥ कबहुँक सुतके गाय गुणगान देत करसों ताल । कबहुँ अँगुरी लाय लालहिं चलन सिखावत चाल ॥४॥ लेऊ माखन और मिश्री खाऊ मेरे लाल | निरखि यह सुख जसुमतिकौ सूर होत निहाल ॥५॥
Ramkali
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