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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Raine basey hoe laal jaake taahike phir jaao .. | NityaPad-056 | रेन बसे हो लाल जाके ताहीके फिर जाओ ।।
सियरे हाथ जिन मोय लगावो पाय परो किन ताके ॥ १॥
खानपान भोजन सुध बिसरी चढ़यो रहत चित चाके॥
प्रभु कल्यान गिरिधर एते पर मोय करत कित नाके ॥२॥ | Malkos |
Lalana tum merey munn ativaso sunder chatur | Part3-230 | ललना तुम मेरे मन अतिवसो सुंदर चतुर
सुजान । ललनां ॥ करणहि मोहन मुरलिका नीके सुनावो
तान ॥ ललनां ॥१॥ मोर मुकुट सोभाबनी सुंदर तिलक सुभाल ॥| मुख
पर अलका वलि विधुरी मनहुं कमल अलिमाल ॥२॥ अधर दशनबरनासिका
ग्रीवा चिबुक कपोल ॥ पीतांबर क्षुद्र घंटिका लाल काछनी डोल ॥३॥
नखसिख अंग वरनों कहा अंगअंग रूप अतोल ॥ पटतर को कोऊ नहीं
अति मीठे मृदुबोल ॥४॥ एक दिनासेनन मिले नवल कुंवर ब्रजराज ॥ ग्रहते
आवन ना बन््यों भई बेरिन कुंल लाज ॥५॥ ग्रहते गोरस मिस चली लाज
छाड कुलऐन ॥ वे मुसिकनि हृदेवसी अति अनियारे नयन ॥६॥ कहा जानें
तुम कहा कियो ग्रह अंगना न सुहाय ॥ बिन देखें नागर प्यारो युग समान
पलजाय ॥७॥ सकल लोक मोहि वरजही पचिहारे समझाय ॥ नहीं भावे
मोहि कुलकथा मोहडि तिहारी चाय ॥८॥ ग्वालिन पर गिरिधर रीझे लीला
कही न जाय ॥ गोपालदास प्रभु लाल रंगीलो हंसलीनी उरलाय ॥५९॥ | Sarang |
Chali chali ree sakhee brindabanan jaiye mohan | Part3-124 | चलि चलि री सखी ब्रिंदाबनन जैए मोहन
खेलति होरी ॥ बालक जूथ सखा सब सँग लीनें हरि हलधर की जोरी
॥१॥ चोवा चंदन बुका बंदन केसरि भरि हैं कमोरी ॥ गारी गावति, भरति भरावति सींचति ब्रज की खोरी ॥२॥ सुनि सब ब्रज देखनि को उमड्यों
भवन रह्यौं नहि कोरी ॥ बाजति ताल, मृदंग, झांझ, ढ़फ, मधुर मुरली
ध्ुनि थोरी ॥३॥ सुर बिमान कौतूहल भूलें, मुनि मनसा भरई बोरी ॥
“आसकरन' प्रभु मोहन के सँग, बिलसति राधा - गोरी ॥४॥ | Bilawal |
Rangileri chhabile nayana rasbhare nayana naachat | Part3-157 | रंगीलेरी छबीले नयना रसभरे नयना नाचत
मुदित अनेरे॥ खंजरीट मानों महामत्त दोऊ केसेडूं घिरतन घेरे ॥१॥ स्याम
सेतराते रंगरंजित मानों चित्रचितेरे || कुमनदासप्रभु गोवर्धनधर स्यथाम सुभग
तनहेरे ॥२॥ | Dhanashri |
Aunguriya chhaandi aray tharag ! nupur baajat tyon tyon dharani | Part1-159 | ऑँगुरिया छाँडि अरय थरग ! नूपुर बाजत त्यों त्यों धरनि
धरत पग ॥१॥ कबहुंक यशोदामाई भुजा पसारत हँसि डगमगाइकें उलटि
भरत डग । जननी मुदित मन चिते शिशुतन कंठ लगाइ सुंदर श्याम सुभग॥२॥
मूदुवानी तुतरात मांगि नवनीत खात भुजन भाव जैसें जनावत बाल खग। चतुर्भुज
प्रभु गिरिधरके बाल विनोद नंद आनंद मुख देखें ठाड़े डगमग ॥३॥ | Dhanashri |
Baney laal rung bharey neeke rahey tum rajani aaj nenn tou arun bhaye | NityaPad-147 | बने लाल रंग भरे नीके रहे तुम रजनी आज नेंन तो अरुण भये
बैन तुतरात भले जु भले राजाधिराज ॥। १॥। कौन की उपरैनी लाये अपनी तो छांड
आये सकुचत नाहीन डारी सब लाज ॥२॥ कल्याण के प्रभु गिरधरन राज रहो
केधों कहो कछु हमसों काज ।। ३॥॥ | Bibhaas |
Phoolanaki mandali varmandit phool hiyein piya anga lasenhen.. phoolanaki sez phoolanke aabhushan | NityaPad-257 | फूलनकी मंडली वरमंडित फूल हियें पिय अंग लसेंहें॥ फूलनकी सेज फूलनके आभूषण
फूले फूले कोटिकाम एसेंहें॥१॥ फूलन बनी अति दासचतुर्भुन सखी सब
फूल हियें हुलसेहें॥। फूल निशा शशि फूल रहे हैं गिरिधर भामते कुंज बसेहें।।२ | Saarang |
Aaj atee sobhit haye nandlal | navchandanko lape kiyo haye taa | NityaPad-165 | आज अति सोभित है नंदलाल | नवचंदनको लेप कियो है ता
पर मोतिन माल ॥१॥ खासाको कटि बन्यो पिछोरा कुलह जु सुतरु सोहे
भाल। कुन्द मालती कंठ विराजत बीच बीच फूल गुलाल ॥२॥ सारंग राग
अलापत गावत मधुर मधुर सुरताल। गोविन्द प्रभुकी या छबि निरखत मोहि रही
ब्रजबाल | ३॥। | Saarang |
Tumein pahenchaanat naahinn veer .. inn nainanmein kabahun naan dekhe | Part1-299 | तुमें पहेंचानत नाहिंन वीर ॥ इन नैननमें कबहुँ न देखे
रामचंद्र के तीर ॥१॥ मुँदरी डार दई जब करतें तब मन उपजी धीर ॥
सूरदास प्रभु लंका घेरी बाँध्यो सायर नीर ॥२॥। | Maru |
Khelani aaee humm mohan tum sanga ..| begi | Part3-166 | खेलनि आई हम मोहन तुम सँग ॥| बेगि
मँगाओ जु अबीर अरगजा और केसरि कों रँग ॥|१॥ धाँईई गहि बैयाँ
गिरिधर की चोबा चंदन लपटावति अंग ॥ 'हरि बलभ' प्रभु दिजै फगुवा
जानति तुझारे ढंग ॥२॥ | Dhanashri |
Meromai arritayohai balgovinda .. | NityaPad-293 | मेरोमाई अरृटयोहै बालगोविंदा ।।
गहि अचरा मोहि गगन बतावत खेलनको मांगे चंदा ॥१॥
भाजनमें जल मेल यशोदा लेकर चंद दिखावे।॥।
रुदन करत पानी में ढूंढत चंद धरनी कैसे आबे ॥ २॥
दूधदही पकवान मिठाई जो कछु मांगेंसो देहों स्िलोना॥।
लहटु चकई पाटके लटकन मांगलेहु मेरे छोना ॥३॥
दैत्यदलन गजदंत उखारे केसी कंस निकंद ॥
सूरस्याम बलजाय यशोदा सुखसागर के कंद ॥|४॥ | Iman |
Yamuna pulin subhag brindaavan naval laal | Part2-354 | यमुना पुलिन सुभग बृन्दावन नवल लाल
श्रीगोवर्द्धन धारी ॥ नवल निकुंज नवबल कुसुमित दल नवल नवल बृषभान
दुलारी ॥ ॥ नवल हास नवल छब क्रौड़न नवल विलास करत
सुखकारी॥ नवल श्रीविट्वलनाथ कृप ाबल नंददास निरखत
बलिहारी ॥२ ॥ | Goud Sarang |
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