top of page
Sheetkal Ke Pad
To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.
Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Hamaro ambardeho murari .. | NityaPad-034 | हमारो अंबरदेहो मुरारी ॥
लेकरचीरकदंब चढबैठे हम जलमांझ उघारी ॥१॥|
तटपर विनावसन क्यो आयें लाजलगतहैंभारी ॥।
चोलीहार तुमहींको दीनेचीरहमेदेहोडारी ॥२॥
तुमयहबातअचंभो भाखत नागीआवोनारी ॥
सूरस्याम कछु नेहकरो जू सीतगयो तनमारी ॥। ३॥ | Ramkali |
Main toson ketik baar kahou .. yeh marag ick sunder dhota | Part1-234 | मैं तोसों केतिक बार कह्ौ ॥ यह मारग इक सुंदर ढोटा
बरबट लेत दह्यौ ॥१॥ इत उत सघन कुंज गहबर में तकि मारग रोकि रहौ॥
अति कमनीय अंग छबि निरखत नेंकुँ न परत रह्ौ ॥२॥ लोचन सुफल होत
पक बिरह न जात सह्यौ ॥ परमानंद प्रभु सहज माधुरी मनमथ मान
॥३॥ | Bilawal |
Phoolanke | NityaPad-260 | फूलनके
महेल बने फूलन वितान तने फूलनके छाजे झरोखा फूलनकी किंवारहें ॥
'फूलनकी गादी गूंथी तकिया फूलनके बैठे श्यामश्यामा शोभित अपारहें ॥१॥।
'फूलनके बसन आभूषण बिराजें फूलनके फोंदा फूल उरहारहें ॥ नंदद ास
प्रभु फूले निरखत सुधिबुधि भूले शुकदेव नारद शारद रटत्त वारंवारहें ॥२॥ | Saarang |
Douu navallal khelati basant .. anandkand | Part3-070 | दोऊ नवललाल खेलति बसंत ॥ आनंदकंद
गिरिधरनचंद ।॥|भ्रुव०॥| नवल कुंज द्रम नवल मोर || नवल कुसुम सम मधुप
सोर ॥१॥ नव लीलाँबर नवल पीतपट नवल अधर मुख बीरी दंत || नवरस
केसरि नवल अरगजा नवल गुलाल अबीर उड़ंत ॥२॥ नवल गुपाल नवल
ब्रज जुबती नवल परस्पर सुख अनन्त ॥ “चत्रभुजदास” दरस दृगलोभी
नवल रूप गिरिधरनचंद ॥३॥ | Basant |
Karmodakmakhranamishreele kuvarkesang dolat nandrani .. | NityaPad-152 | करमोदकमाख्रनमिश्रीले कुवरकेसंग डोलत नंदरानी ॥
मिसकर पकर न्हवायोचाहतबोलत मधुरी बानी ।।१॥|
कनकपथ आंगनमें राख्योसीतउष्णधर्यो पानी ॥
कनककटोरा सोधो उबटना चंदनकांकसी आनी ॥२॥
यों लाईमंजनहित जननीचितचतुराई ठानी ॥
मनमेंमतो करत उठभाजें दुखित के अरुझानी ॥|३॥
निरखनयनभर देखत रानीशोभाकहत न बानी ॥
गातसचिक्कण योराजेंतहै ज्यौघनतडित लपटानी ।।४॥
आओ मनमोहनमेरे ढिंग बात कहूं एकछानी ॥|
खिलौनाएक तातजोलाये बलअजहूनहिंजानी ॥।५॥।
राज कुंवर अधन्हातोभाजो ताकीकहूंकहानी ॥
बेनीनबाढी रहीतनकसीदुलहनिदेखहंसानी ।।६।।
बैठे आयन्हाय पटपहरे आनंदमनमें आनी |
विष्णुदासगिरिधरन सयाने मात कही सोईमानी ॥।७॥ | Devgandhar |
Chalekin jaao upnigale | hamnit prati nikasat | Part1-223 | चलेकिन जाओ अपनीगेल | हमनित प्रति निकसत
गिरिधटीयां गोवर्धनकी सेल ॥१॥ दूध दहींको दान अनोखो हम लाथें कछु
बेल ॥ प्रभु मुकुंद माधो सुखदायक धर लर्का बनछेल ॥२॥
| Lalit |
Laal tum humpay maangat daan .. nitahi roki rahat vadhe haye | Part1-235 | लाल तुम हमपै माँगत दान ॥ नितही रोकि रहत वढ़े है
नितही आवन जान ॥१॥ सैंन मारिकें सखा सिखाये सब मिलि राखीं घेर ॥
माथेतें छीनो दधि मटुकी हँसत बदन तन हेर ॥२॥ फिरि फिरि लाल कहत
ग्वालिनसों मेरे नयनन प्रान ॥ श्रीविष्नगिरिधरनलाल तुम ठान्यों हमसों
ठान ॥३॥ | Bilawal |
Saheli merey aaj tou rangili gangour. | Part2-248 | सहेली मेरे आज तो रंगीली गनगोौर।
नख-सिख अंग आभूखन पहेरों ओढ़ों पीत पटोर ॥१ ॥ नाचों गावों भाव
बताउं जाय नंद की पोौर। बाँधों बंदनवार मनोहर चीतों सुकपीक
मोर ॥२॥ विविश भांति नई सोंज अपने कर अरपों नंदकिसोर ॥ करि
अचबन जल बीरी दै मुख भेटों दोऊ कर जोर ॥३॥ सेज कुसुम रचिपचि
पोढाऊँ राखों नैन की कोर। मदन केलि रस-ब्रेलि बढ़ाऊ मंद हँसनि
चितचोर ॥४ ॥ चांपों चरन निज करन प्रीतम के उलटि-पुलटि दोड ओर।
बींजना ढोरों श्रमजल पोंछों अपने अंचल छोर ॥५ ।| अधर सुधारस पिऊ
पिआऊँ निरखि वदन मुख मोर। आलिंगन चुंबन परिरंभन दै-दे प्रेम
हिलोर ॥६ ॥ मनमथ अंग-अंग प्रति उमग्यो राधा नंदकिंसोर । 'कृष्णदास'
प्रभु रति रस पागे निसि बीती भयो भोर ॥७ ॥ | Saarang |
Jaayau jasumati laal abb munn bhamtau bhayau ..dhu... | Part1-131 | जायौ जसुमति लाल अब मन भामतौ भयौ ॥धु.॥
करि सिंगार ढाढ़ी और ढाढ़ीन श्रीव्रजपति गृह आये | वरनों कहा सदन की शोभा
देखत नैन सिराये ॥१॥ रत्तन जटित बनी कनक अटठारी तिन पर कलस
बिराजे। फरहरात ध्वजा सुरंग सोहने अद्भुत शोभा साजे ॥२॥ बंदनवार
फवी मोतिनकी पचरंग चित्र बनाये | जित देखियत तितही छबि बरखत आनंद
हियें हुलसाये ॥३॥| गोप वधू गावत मंगल गृह मोद भरी एक गाये । मोद
भरे अरु तरुन बिरध सब गाम गामतें आये ॥४) भीर भई न समात गलिन
में जात न निकसन पावै | नवल लालपै करि नोंछावरि देखत नैन सिरावै ॥५)|
बैठे नंद सभा शोभा भरि तहाँ ढाढ़ी मन भायौ । गोप वंश भूपति भये जितने
तिनकौ सुजस सुनायौ ॥६॥॥ कनिक वसन कंचन के भूषन श्रीव्रजपति पहराये।
गैया दई गिनती नहीं जिनकी ठाठ चहूँ दिश छाये ॥७॥ दशहजार मन गेहुँन
के उत्तम सो देखता बताये । श्रीउपपनंद दिये कुंडल बरतेहू रतन जटित
सुहाये ॥८॥ श्री अभिनंद दई मोतिन की माला अति छबिवारी । धरानंद
दयौ सरस दुसाला सुरभी सहस दुधारी ॥९॥ श्रीधरूनंदकी धुधुकी दीनी लग्यो
अमौलिक हीरा । महानंद दियौ रथ सुबरनो और सुहायौ चीरा ॥१०॥ दीने
सुनंदन सहस्र वृषभ दै और बागौ पहरायी। दई सुनंद रतन की कंटी सुजस चहूँ
दिसि छायो ॥११॥ नैंदर्नंद दई अमोलिक माला मोल कह्यौ नहीं जाई ।
श्रीवृषभान ठाट गोधन के सहसक दिये बताई ॥१२॥ मनमुख नाम नाना
मोहन कौ आध लाख धन दीनौ । मामा जसवंत यशोधर यशधर धन दे पूरी
कीनो ॥१ ३॥ श्रीजसुमति ढाढ़िन पहराई सारी सरस सुहाई । नखशिखलों
भूषन कंचनके मोतिन माँग भराई ॥१४॥ पटला नाम लालकी नानी तिनसारी
जरतारी । दीनी सरस पचलरी माला मोतिनकी छवि भारी ॥१५॥ नेमा और
सुरेमा लालकी मामी अति सुखदाई। तिन दीयो हार सरस मोतिनकी पहरत्त अति
छबि छाई ॥१६।॥ सानंदा आनंदा फूली तिन सब भूषन दीने । बड़ी माय
रोहिनी सलोनी वेश दई रंग भीने ॥१७॥ जसदेवी जसरूपा दोऊ मौसी परम
सुहाई । तिन दीनी अति सुरंग चूनरी अँगिया अति मन भाई ॥१ ८)| कीरति
दये रतन भूषण मनि गज मोतिन की माला ! और कहाँ लगि बरनि सके को देत
भई ब्रजबाला ॥१९॥ फूली अँग न समाति है ढाढ़िन अरु ढाढ़ी मन फूल्यो।
लटकि लटकि दोऊ नाचन लागे आनंद तन मन भूल्यौ ॥२०॥ गोपी गोप
भये प्रमुदित चित घर घर बजत बधाई । कृष्णदास गिरिधरन जन्म यह प्रेम मगन
मन गाई ॥२१॥ | Bilawal |
Laalan ayeri terei bhawan maan manaavan kaaj.. | Part2-244 | लालन आयेरी तेरेई भवन मान मनावन काज॥
आपुनो मान छांड दे मानिनी संवत्सरकों शुभ दिन आज ॥१॥
करि सिंगार अपुन मनोहर विविध सुगंध घरी सब साज ॥
कृष्णदास प्रभुके संग भामिनी कीजे सुख सों अविचल राज ॥२ ॥ | Iman |
Duhivon duhayavon bhool gayoho.. | NityaPad-296 | दुहिवों दुहायवों भूल गयोहो॥
सेली हाथ वचरुवा मिलवत नूपुर को ठमकार भयोहो ॥१॥
नव जोबन नई चूनरके रंग घूंघटमें दुर मुर चितयो ।।
धोंधीके प्रभु दंपति पर स्पर प्यारीप्यारी रिझयो ॥२॥ | Gori |
Khelatlal apane rasmagana .. girigiruthat ghuturubantekat | NityaPad-165 | खेलतलाल अपने रसमगना ॥ गिरिगिरउठत घुटुरुबनटेकत
किलककिलकजननी उर लगना ॥ १॥| पायपैंजनी और पनसूरा कटि किंकिणी
पहुँचीजरीकंकना ॥ हारहमेलहँसली औरदुलरी कंठसिरीलटकन छबि
बघना॥। २॥ कुलहीलाल और पीतझगुलिया रिंगनकरतनंदजूके अंगना ॥२॥
निरखतदास जायबलहारी चिरजीयो यशोदाकोछगना ।।३॥ | Dhanashree |
Page 1 of 1
bottom of page
