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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Aajshubhalagna tere milanakon giridharnagar gunin ganaayo .. pratham samaagamaten | NityaPad-327 | आजशुभलग्न तेरे मिलनकों गिरिधरनागर गुनिन गनायो ॥ प्रथम समागमतें
कित डरपत बड़ेभाग्य संचित फलपायो ॥।१॥ नवनिकुंज मंडप सखी
सुमतिविधाता सुहस्त बनाये ॥| रसिकलाल तब संग प्रमुदित कृष्णदास मंगलयश
गायो ॥२॥ | Bihagaro |
Podhe hari rangmahal piya pyaari . | NityaPad-130 | पोढे हरि रंगमहल पिय प्यारी ।
सुंदर रची हे सेज ता ऊपर तकिया धरे हे सवारी ।| १॥॥
जगमग होत अंगीठी पावक गोखन धरे हे दीप सुधारी ।
मधुर सुर गावत कोकिल कल कृष्णदास बलिहारी ॥। २॥। | Bihaag |
Khanjan nayan | NityaPad-316 | खंजन नयन
रूपरसमाते । अतिशय चारू चपल अनियारे पलपिंजरा न समाते ॥ १॥| उडउड
जात निकट श्रवणनके उलट फिरत ताटंक फंदाते॥ सूरदास अंजनगुण अटके न
तरु अबहि उडजाते ॥२॥ | Adano |
Gopbadhu mandal madhya naayak gopallal ruchiranan bimbadhar muralika dharey .. | Pustak1-338 | गोपबधू मंडल मध्य नायक गोपाललाल रुचिरानन बिंबाधर मुरलिका धरे ॥
अद्भुत नटवर विचित्र भेष टेक अति सुदेश कनक कपिश काछ शिखी शिखंड शिखरे ॥१॥
कुकुझों कुकुओआँ झनकत थोंगथोंग थोंगतकिट
धिकिट धिर्धीकिट तकथेई उघटत रास रसभरे ॥
जयजय गिरिराजधरन कोटि
मदन मूरति पर हरिजीवन बलबल ब्रजपुरंदरे ॥२॥ | Gori |
Dekhat surner runner bhoole.. romrom gadgad sub phoole..1.. | Part2-075 | देखत सुरनर रनर भूले॥ रोमरोम गदगद सब फूले॥१॥
सुरविमान सुमनन॥ जयध्वनि शब्द देव नर गाये ॥२ ॥
देव कह्नो ब्रजवासिनसों तब ॥ पूजाभली करी मेरी सब ॥३ ॥
जाबो स बे मिलसदन करो सुख ॥ स्याम कहत गिरि गोवर्धन मुख ॥।४ ॥
ग्वाल करत स्तुति सब ठाढे॥ भाव भक्तिचित सबके बाढे ॥५ ॥
भवन जावो कहें श्रीमुखबानी ॥ भोजन शेष स्याम कर .आनी ॥६ ॥
बांट प्रसाद सबनकों दीनों॥ ब्जनारी नर आनन्द कीनों॥७ |
सूरस्थाम गोपन सुखकारी ॥ चलो कह्मो ब्रजकों नरनारी ॥८ ॥ | Bilawal |
Mohan tilak gorochan mohan mohan lalaat atee raajai. mohan | NityaPad-059 | मोहन तिलक गोरोचन मोहन मोहन ललाट अति राजै। मोहन
सिर पर मोहन कुलही मोहन सुरंग अति भ्राजै ॥ ९॥ मोहन ख्रवन कुसुम जु मोहन
कपोल अवतंस विराजै। मोहन अधर पुट पै मोहन मुरलि मोहन कल बाज ॥। २॥।
मोहन मुखारबिंदपै झूमत मोहन अलक- अलि मधुकाजै। गोविन्द प्रभुनखसिख
जू मोहन मोहन घोख सिरताजै ॥। ३॥। | Gori |
Atee seey usirsane seenche khaase khaskhaane baithe priyapreetam munn harkhatahen | | NityaPad-319 | अति से उसीरसाने सींचे खासे खसखाने बैठे प्रियाप्रीतम मन हरखतहें |
फूलचकी बनमाला हिय मध्यराज रही फूलनके आभूखन मानों चंदन सरसत हें ॥१॥
औरनको सेनदेत प्यारी अंक भरि लेत प्रेम के समुद्र की लहर परसत हें ॥
ब्रजाधीशबलिहारी बिलसत प्रिय प्यारी नवल निवारी फूंही जल बरसत हें ॥२॥ | Kanharo |
Tein kachhu ghaliri thagori piyapar | NityaPad-226 | तें कछु घालीरी ठगोरी पियपर
प्यारी ॥ निशदिन तुही तुही जपत प् राणपति तेरी एरीसों लालन गिरिवरधारी ॥ १॥
समर बेग आवे स्वरूप तब सुधि न कछू तनकी बिहारी ॥ रसना रटत तुबनाम
राधे राधे गोविंद प्रभु पिय ध्यानसो भरत अंकवारी ॥२॥ | Saarang |
Jaagi hoe laal, gopal, girivardharan, saras rituraj | Part3-020 | जागि हो लाल, गुपाल, गिरिवरधरन, सरस ऋतुराज
बसंत आयोौ ॥ फूले द्वुमवेली, फल, फूल, बौरे, अंब, मधुप, कोकिला कीर
सैन लायौ ॥१॥ जावौ खेलन, सबै ग्वाल टेरत द्वार, खाऊ भोजन मधु,
घृत, मिलायौ || सखी-जूथन लीयें आईं है राधिका मच्यौं जहगडराग रंग
छायौ ॥२॥ सुनति मृदु-बचन, उठे चौंक नंदलाल, कर लीयैं पिचकाई सुबल
बुलायौ ॥ निरखि मुख, हरखि हियैं, वारि तन मन प्रान, सूर येह्टि मिसहि
गिरिधर जगायौ ॥३॥ | Basant |
Sukhanidhi srigiriraj tareti .. kund kund | NityaPad-355 | सुखनिधि श्रीगिरिराज तरेटी ॥ कुंड कुंड
जल अचवत नहावत पुन्रि पुनि रजमें लोटी ॥९॥ धरतभोग बेजरकी
रोटी उपर मेवा टेंटी ॥ रसिकदास जन श्रीवल्लभ पद परस सकल दुःख मेटी ॥। २॥ | Bihaag |
Raniju yeye suta yeh sukh aisee suhag rahee chirko nita maaee. | Part1-031 | रानीजू ये सुत यह सुख ऐसी सुहाग रही चिरको नित माई।
अब निधरक भय जाय तुम विधि यह बेर सिराई ॥१॥ रानी यह आंगन द्वारे
बगरन रहो नित भीर सुहाई । और रहौ गावत गीत ग्वाल सब रहौ वर चौक
पुराई ॥२॥ रानीजू तुम रहौ आनंद भरी र स जीवों सुतै खिलाई । और रही
आनंदराय खिलावत शुभ गोद बैठाई ॥३॥ रानीजू हम रहें निरखत बदन
लालकौ सकल काज बिसराई । श्रीविद्ल-गिरिधर-निधि प्रगटे जुग बहु जतन
बनाई ॥ | Asawari |
Parosat gopi ghoonghatmaaren.. kanak latasi sundarsima aaeehen jyon | NityaPad-082 | परोसत गोपी घूंघटमारें।। कनक लतासी सुंदरसीमा आईहें ज्यों
नारें ॥१॥| झनक मन आंगनमें डोलत लावण्य मोर सवारें॥ नंदराय नंदरानीते
दुरलालेंभलें निहारें॥ २॥ घरकी सोझ मिलाय थार में आगें ले जब धारें।। परम
मिलनियां मोहनजूकी हांसी मिष हुंकारें ।३॥| रुचिर काछिनी जटित कोधनी
जूरावांह उधारें॥ परमानंद अवलोकन कारण भीर बहुत सिंघद्वारे ॥४॥। | Todi |
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