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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Tata thei rasmondal mein bunn naachat piyake sanga preetampyari .. | Part1-332 | तत थेई रासमंडल में बन नाचत पियके संग प्रीतमप्यारी ॥
गावत सरस सुजात मिलावत चपल कुटिल भ्रू अनियारी ॥१॥ मालव राग
अलापत भामिनी लेत उरप नागरनारी ॥ प्यारी के संग वेणु बजावत सुघरराय
गिरिवरधारी ॥२॥ क्रृष्णदासप्रभु सौभग सीमा सब युवतिनमें सुकुमारी ॥
जोरी अद्भुत प्रगटित भूतल केलिकला रस मनुहारी ॥३॥ | Malav |
Aaj hamaare vijay dashahara dhariye laal jabaare hoe .. curr singar | Part1-317 | आज हमारे विजय दशहरा धरिये लाल जबारे हो ॥ कर सिंगार
श्याम सुंदरकों अपनो तन मन बारे हों ॥१॥ सब सखियन मिल मतो उपायो
चलिये जमुनातीर हो ॥ परमानंद जसोमती अति प्रफुल्लित बहु गोपिनकी भीर
हो. ॥२॥
| Saarang |
Yeh sukh dekho ree tum maaee . barasganth vrishbhan laliki | Part1-176 | यह सुख देखो री तुम माई । बरसगांठ वृषभान ललीकी
बहोरि कुसलसों आई ॥१॥ आगमके दिन नीके लागत सबहिन मन सचुपाई।
धन बडभागी रानी कीरतिके पुण्यपुंज निध ि पाई ॥२॥ प्रगटी लीला सकल
या व्रजमें आनंद वेली बढाई । 'कुंभनदास” की जीवन राधे जसोमति सुत
सुखदाई ॥३॥ | Devgandhar |
Begg chali saaji dall chatur chandrawati | | Pustak1-319 | बेग चलि साजि दल चतुर चंद्रावती |
कसब कंचुकी बंद राखि आनन््दकन्द नंदनंदनकुंदर मिलन को दावरी ॥१॥
नैन पंकज लोल मधुर मोहन बोल राजत भोंह. कपोल उदधि को भावरी ।
चंद्रावली करत केलि मानो मन्मथ पेलि सुरत सागर झेल सहज चढ़ि रावरी ॥२॥
चले गयंद गति नूपुर किंकिनी बजति देख गजवर लजित चलन को भावरी ।
“दास मुरारी” प्रभु कर कमल मेलि उर जीत गिरिधरन अब प्रेम लडबावरी ॥३॥ | Kedaro |
Laihonri abb laihon goraskau yeh daan .. hansi gahi hiya | Part1-233 | लैहोंरी अब लैहों गोरसकौ यह दान ॥ हँसि गहि हिय
बनमाल मनोहर आनंद उर अति आन ॥१॥ हैँसि मूदु बचन कहत ब्रज सुंदरि
ऐसे न कीजै कान्ह ॥ श्रीविदलगिरिधरनलालसों हँसत लसत मनमान ॥२॥
| Bilawal |
Palana jhoolau hoe nandlal | kamalnain sukhden sakal vraj | Part1-093 | पलना झूलौ हो नंदलाल | कमलनैन सुखदेन सकल ब्रज
सुंदर जसुमति बाल ॥१॥ पॉयन नूपुर छुद्र घंटिका कर पोंहोंची अति चार ।
कंठ कंठश्री कर मधि अंगद उर बधना अरू हार ॥२॥ श्रवनन कुंडल नासा
बेसरि अंजन नेन विशाल । गोरोचन कस्तूरी कुंकुम तिलक बन्यौ बिच
भाल ॥३॥ अलकावलि मुक्तावलि गूँथी बिच लर लटकन लटके । शोभा
निरखत सबहीकौ मन जहाँ तहाँ ते अटके ॥४॥ बेनी गुही जसुमति सुंदर
श्याम पीठि पर सौहे । मानों मेघ पर नील मेघ छबि चितवतही चित मोहै ॥५॥
परम मनोहर मुरली तेरी लै ठिंग पलना पौढ़ी । अपनौ पीतांबर कटिलों कान्हर
अपनेही कर ओढ़ी ॥६॥ विविध खिलौना टिंग राखोंगी ज्यों भावै त्यों खेल।
मेवा मिश्री और मिठाई माखन मुखमें मेल ॥७)| जसुमति माई चाइसों यह
विधि अपनों सुत हुलरावै | हरि लीला यह आनैंदकी निधि रंसिक सदाई
गावै ॥८॥ | Ramkali |
Shyamahin dosh jinn maaee .. kahau yahiri bosses jaat kinn | Part1-288 | श्यामहिं दोष जिन माई ॥ कहौ याहिरी बॉस जात किन
कौनें तोहि बुलाई ॥१॥ उनकी कथा मनहिं दे राखो याकी चलत ढिठाई ॥
वे जो बुरे भले तौउ अपने यह लंगर निठुराई ॥२॥ ऐसी रिस आवत है मोकूँ
दूर करी झहराई ॥ सूरस्यामकी कान करत हूँ नातर करत लराई ॥३॥ | Dhanashri |
Bhorbhaye aayeho lalan neeki batatiyan .. yavakke angcheenen | NityaPad-142 | भोरभये आयेहो ललन नीकी बततियां ।। यावकके अंगचीनें
नीलपट प्यारी दीने नयनम आलस भरे जागे सबरतियां ॥|१॥ छूटी ग्रीव बनदाम
नखक्षत अभिराम केसें अब तुरतस्थाम डगमगी गतियां॥ केसोदास प्रभु नंदसुवन
काहे लजात भलेजू सावरे गात जानी सब घतियां ॥।३॥ | Bhairav |
Aaj humm karihe nandjuki kaann .. baraj jasoda yathaa chhotaakon | Part1-240 | आज हम करीहे नंदजुकी कांन ॥ बरज जसोदा यथा छोटाकों
हम लुटी पहचान ॥१॥ बाठघाट सखा संग लै मारग रोकत आन ॥ सूरदास
प्रभु झगरत ठाढ़े प्रीत पुरातन जान ॥३॥ | Bilawal |
Arrie tuun baar baar ukak uchak aave jaani bhojan kii biriyaan. | NityaPad-080 | अरी तुं बार बार उ्कक उचक आवे जान ि भोजन की बिरियां।
जेंबत नंद गोद ले ढोटा वरजोहे सौ बिरियां ॥९॥ घर न सुहात जाय बिन देखे
डोलत फिरत निडरिया। श्री विद्टल गिरिधरन छेल को तकिहि रहित दिन
भरिया ॥ २॥। | todi |
Aaj chalori vrindavan biharat vasant panchami pancham gawat .. | Part3-014 | आज चलोरी वृंदावन बिहरत वसंत पंचमी पंचम गावत ॥
साजिले हुगडुवा भरि चंदन हरखि आनंद मृदंग बजावत ॥ १॥
कुसमित द्वरुमवेली आछी छबि कूजत कोकिल कीरमानों हम हि बुलावत ॥
कल्यान के प्रभु गिरिधरके परस्पर ये अखियां अतिही सुख पावत ॥२॥ | Basant |
Naagar nand daa mainu dey daiy jaandan maaliyan . boliyaan | Part3-316 | नागर नंद दा मैनु दे दै जाँदाँ मालियाँ । बोलीयाँ
ठोलीयाँ कट्डि-कहि होलीयाँ गावदाँ दे दे तालियाँ | तकु दा फरदां सुधर
सलौनियाँ सोहनी खेलनि बालियाँ ॥ लस्बरि ललचाई लवंद लावंदाँ ॥ चोली
दे पिचकारियाँ ॥२॥ सानू अतर अंडियाँ बडियाँ चाखियाँ रति तालियाँ ॥
दिल डसि लेडियाँ सितम करेवियाँ जालिम जुल्फैं कालियाँ ॥३॥ मैंने दी
फौजै-बिच लावैदियाँ भौंहें दें चल चालियाँ || रसिक सखी सौं हँसा मुख
चुख लखि अखियाँ हौं दी सुखालियाँ ॥४॥ | Shri Hatee |
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