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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Harikon terat firat guwari ..|
NityaPad-198
हरिकों टेरत फिरत गुवारी ॥| आन लेहो तुम छाक आपनी बालक बल बनवारी ॥ १॥॥ आज कलेऊ कियो प्रातही बछरा लेबन धाये ॥। मेवा मोदक मैया यशोमति मेरे हाथ पठाये ।। २ जब यह वानी सुनी मनोहर चल आये तहां पास ॥ कीनी भली भूख जब लागी बलपरमानंददास ।।३॥
Saarang
Srimadacharya key charannakh chihn koo dhyaan urmein sadaa rahat jinake.
NityaPad-005
श्रीमदाचार्य के चरणनख चिह्न को ध्यान उरमें सदा रहत जिनके। कटत सब तिमिर महादुष्ट कलिकाल के भक्तिरस गूढ दृढ होत तिनके || १॥ जंत्र अरु मंत्र महातंत्र बहु भांति के असुर अरु सुरनको डर न जिनके। रहत निरपेक्ष अपेक्ष नहि काहुकी भजन आनन्द में गिने न किनके ॥२॥ छांड इनको सदा औरको जे भजे ते परे संसूतिकूप भटके । धार मन एकश्रीवल्लभाधीश पद करन मनकामना होत जिनके ॥। ३॥ मत्त उन्मत्त सों फिरतअभिमान में जन्म खोयो वृथा रातदिनके | कहत श्रुतिसार निरधार निश्चय करि सर्वदा शरण रघुनाथ जिनके ।।४॥।
Bilawal
Chandan khaur thaur thaur anga lepan karat aras paras bilas greesham tapati ..
NityaPad-242
चंदन खौर ठौर ठौर अंग लेपन करत अरस परस बिलास ग्रीषम तपति ॥ गुलाबन की पंखुरिन सों सेज रचि पचि सुगंध सुवास बस पुहुपन के बींजना ढुरत ढुरावत प्यारी प्यारे प्रानपति ॥१॥ पुहुपन सौं गूंथे बार पुहुपन के सब सिंगार गुलाब जल छूटति फुहारे भर भर अंक माल त्यों त्यों त्यों प्यारी अति कंपत ॥ 'हरिवल्लभ' प्रभु गुंसाई यह विधि ऋतु मनाई
Saarang
Srivallabharaj vrajajan pranadhar.. sukhsagar
Part2-306
श्रीवल्लभराज ब्रजजन प्राणआधार॥ सुखसागर रूपके आगर नागर अति सुकुमार ॥१॥ कुंचित चित केशपाश सुदेश निरख तिलक मोह्यो मार ॥ अंबुज नयन मधुर वेंन सेंनन मनहार ॥ २ ॥ पीत वसन उपरेना भुजपर लटकट मर । रलजटित आभूषण अंग अंग कुंडल मकराकार ॥३॥ श्री जल नही कोऊ लायक यह लीला वपुधार॥ भक्त हेत विदित बेद पथ पतितनके उरधार ॥४॥ करुणामय डक प्रेमवश निजजनको प्यारो ॥ विष्णुदास श्रीलक्ष्मण नंदन यहहे नंद दुलारो॥
Poorvi
Lalke fenta ainthaa ametha banyo fabyo bhraguti bhaal parr naval
NityaPad-163
लालके फेंटा ऐंठा अमेठा बन्यो फब्यो भ्रगुटी भाल पर नवल नंदलालके आवत बनते बने सांझ सुरभिन मांझ ।। अटक लटक नरही दूृगन ब्रजबालक॥। ९॥ चलत गजगति चाल मनहरत तेहि काल बाहु अंस न धरें सखा प्रिय ग्वालके ॥। गोपीजन युथ जुूरे द्वार द्वारा खड़ी निरख नंदलाल युवती जन जालके ॥२॥
Hameer
9 (hoo raag nayaki thchh! sunee duff dauri aaee baal kahaan jeho laal ..
Part3-337
९ (हु राग नायकी थ्छ! सुनी डफ दौरी आई बाल कहां जेहो लाल ॥ मुरली छिनाई लई स्यामजु बेंदी दीनी भाल ॥ १॥ काहु कर अरगजा लीनो काड् कर अबीर गुलाल॥ कोऊ अंगुरिन करि आंजत अंजन कोऊ पहरावत माल ॥२॥ भली भई हरि नीके पाये पूजवत मनके ख्याल ॥ “नंददास' प्रभु छांड़ि हठीले टूटेगी मोतिनमाल ॥३॥
Iman
Naine kataachhako baan chalawat vallabh preetam pyaaro
Part2-327
नेन कटाच्छको बान चलावत वल्लभ प्रीतम प्यारो री । घायल सी हों घूमत डोलत नेन निरख छबि हारों री ।॥१।॥। प्रानजीवन धन मेरे वबल्‍लभ इन नेनन को तारो री । रसिक श्रीवल्लभ- मुख्मुसकनि पर तन मन धन सब वारों री |॥२।।
Jheendati
Khele nagar ajodhya maanhe raghuveer jaanaki ..
Part3-167
खेले नगर अजोध्या माँहे रघुवीर जानकी ॥ कस्तुरी कों तिलक हों बलि जाँऊ मुख पान की ॥१॥ इत ते निकसे जनक नँदिनी उत ते निकसे राम ॥ चोवा चंदन औरू अरगजा छिरकति मोहन श्याम ॥२॥ गुनी गंधरव सुर नर मुनि मोहे चंण बजावति हनुमान की ॥। 'परमानद” कर जोर कहति मेरी बिरध हरि नाम की ॥३॥
Dhanashri
Jasumati mudit mudit sub gokul nand mudit munn adhik
Part1-020
जसुमति मुदित मुदित सब गोकुल नंद मुदित मन अधिक भावरी ॥ खग मृग मुदित मुदित ठ्रुम वेली महरि मुद्ित जहाँ धरत पावरी ॥१॥ बालक मुदित भवन में खेलत हलधर मुदित अनुज सुभावरी ॥ जुबती मुदित भई छबि निरखत हमरे त्रियनकौ यह न्हावरी ॥२॥ यमुना मुदित भई तिहिं औसर 'मुदित भयौ तन परम चावरी ॥ जन त्रिलोक प्रभु काहे न मुदित द्वै उदित भयौ ब्रजकुलकी रावरी ॥३॥
Bilawal
Podhe hari radhika key sanga ..
NityaPad-130
पोढे हरि राधिका के संग ॥ रंगमहलमें ललित तिबारी परदा परे सुरंग ॥१॥ झलमलात पावक अंगीठी रतन जटित बहोत रंग ॥ कुँभनदास प्रभु गोवर्धनधर मोहत कोटि अनंग ॥। २॥।
Bihaag
Shishir rituko aagam bhayo pyaari bidaa
Part3-005
शिशिर ऋतुको आगम भयो प्यारी बिदा भयो हेमन्त ॥ विरहिनके भागिनतें आली आवत चल्यो वसन्त ॥ १॥ जाहि दूतिके भवन बसे हो भाँवरि लीने कन्त ॥ कुंभनदास प्रभु या जाडेको आयगयो है अन्त ॥२॥
Malkoos
Harirakhe taahi darr kako...
Part2-334
हरिराखे ताहि डर काको।॥ महापुरुष समर्थ कमलापति नरहरीसो ईशहे जाको ॥१ ॥ अनेक शासना करकर देखी निष्फल भई खिस्याय रहो ॥ ता बालकको बार न बांको हरिकी शरण प्रल्हाद गयो ॥२॥ हिरण्यकश्िपुको उदर विदार्यो अभय राजप्रल्हादे दिनो ॥ परमानंद दयाल दयानिधि अपने भक्तको नीको कीनो ॥३ ॥
Kanharo
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