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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Naval laal govardhandhari aavat banat sohe. manigan bhushan anga
NityaPad-173
नवल लाल गोवर्धनधारी आवत बनत सोहे। मनीगन भूषन अंग बिराजत छबिली चाल मन मोहें। मोर मुगट काछिनी कटि राजत देखत मनमथ कोहे ॥ नंददास प्रभु गायन पाछें आवत चहूंधा दृष्टि करजोहे ॥।
Gori
Aink reeti preeti vash keene mohan yaahi tein vrajareeti nyaari '
Part1-167
एंक रीति प्रीति वश कीने मोहन याही तें ब्रजरीति न्यारी ' जाकी माया सब जगत नचावत ताहि नचावत घोषकी नारी ॥१॥ जाकी चरन रज ब्रह्मादिक दुर्लभ सो रज व्रजवधू बन बगर बुहारी डारी | सूरदास मदनमोहन जिनके हरि नैन प्रान कहा कहूँ बुद्धि अनुसारी ॥२॥
Kanharo
Mandal jore sabai ekatra bhayein nirtat rasik shiromani .. mukut
Part1-325
मंडल जोर सबै एकत्र भयें निर्तत रसिक शिरोमनी ॥ मुकुट धरैं शिर पीत पट कटितट बाँधें तान लेत बनि ठनी ॥१॥ एक एक हरि कीन ब्रज बनिता अरू सोहे गनी गनी ॥ चढ़ विमान सुरयुवति निरख कहैं परस्पर गिरिवरधर पियधनी ॥२॥ गोपबधू बालक मिल गावत मध्य नृत्य करत बलमोहन ॥ परमानंददासकौ ठाकुर सब मिल गावत धन धन ॥३॥
Todi
Jaago krishna khelo rung horry .. abir gulal
Part3-021
जागो कृष्ण खेलो रंग होरी ॥ अबीर गुलाल लियो भरि झोरी ॥ ब्रज नव वधू ख्लेलन कों निकसी घोषराई जु की पौरी ॥१॥ कछु खाओ और सुगंध फैंट भरि करो रगणमगो राम तुम जोरी ॥ संग सखा खेलन को जैहो “दास” निरख्ि बोलत मुख होरी ॥२॥
Bibhaas
Laltum aachhe lehukhilona..
Part2-039
लालतुम आछे लेहुखिलोना॥ यह मिस ठानि नहवावन बेठी रोवो जिनमेरे छोना ॥१ ॥ अंगफुलेल उबटनो चुपर्यो तिलक दियो अक्षतधरिं भाल।॥ बीरा द्वे धरि वारि आरति चमकत सुंदर गाल ॥२ ॥ फिरन्हवाय कर केसर लेपत तत्क्षण उष्णोदकले ठारि ॥ रानी एक अंगोछा लाइ जलले डारि ओवारि॥३ ॥ अंग अंगोछ ढांपि चरन करन सिंगार बेठाये लाल॥ वागो तास लाल चीरा पहरावत भूषनलाल ॥४ ॥ ब्रजरानी गोपीसों बोलति कार्तिक चौदश कृष्ण अनूप ॥ द्वारकेश प्रभु नीके न्हवाये यहमिस बाढे रूप ।॥५ ॥
Ramkali
Kunjabhavan gavankaro tanake santapaharo puranchandso darash deejai ..|
NityaPad-335
कुंजभवन गवनकरो तनके संतापहरो पूरणचंदसो दरश दीजै ॥| कंजखंजन कोटिकवारों मीनमृग वारडारो ऐसे इन नयननिरख कमल नयन कुतार्थ कीजै ॥ १॥। जिनको पथ कोउ नपावत निगमहारे गावत कबनतें तुब पथनिहोरत तिनसों हिलमिल सुखलीजै ॥ धोंधीके प्रभुरससागर तेरेही रसभीजे ॥२॥
Kanharo
Rati sangram veer russ maate.. hoe hari suur siromani
Part2-349
रति संग्राम वीर रस माते॥ हो हरि सूर सिरोमनि अज हूं न संभारत तातें ॥१ ॥ आनि ही बरन भये दोऊक लोचन आपुन सहज बनातें॥ मानों भीर भई जोधन की भये क्रोध अति राते ॥२ ॥ परिमल लुब्ध मधुप जहाँ बैठत उडि न सकत तिहिं ठां तें॥ मानों मदन के हे सर फाबे फोक वा राधा तें ॥३ ॥ बेठि जात अलसात उनी दे क्रम क्रम उठत तहाँ ते॥ मानहूं मूरछा कटाच्छ नाट सर कटि न सकत हियरा तें ॥४ ॥ डगमगात घूमत मानों घाइल सोभा सूमर कला तें ॥ 'सूरदास' प्रभु रति रन जीतें अब संकात धोका तें ॥५ ॥
Suha
Houn neeke jaantari aalee bahunaayak koo neh. kahein
Part2-356
हों नीके जानतरी आली बहुनायक को नेह। कहें धूप कहुँ छाँह जनावत कहूँ बादल कहूँ मेह ॥१ ॥ कहूँ कहूँ प्रीत की रीत जनावत कहूँ काहुँसो करत सनेह। 'तानसेन' के प्रभु तुम बहुनायक छिन आँगन छिन गेह ॥२ ॥
Sarang
Sakhiyan rachi rachi sez banaai ..
NityaPad-338
सखियन रचि रचि सेज बनाई ॥ मणिमय जटितपर्यक कनकके मुक्तनकी अधिकाई ॥।१॥ पोढे श्रीसहित सुंदरवर झलमलदीप झरोखन झांई । मानदास बलजाय सहेली मिलेहें पियाप्रीतम सुखदाई ।॥॥२॥
Kedaro
Maharinke mandir begi chalori . chully jaav vaha dhaam samahin jinn
Part1-045
महरिंके मंदिर बेगि चलोरी । चली जाव वह धाम सामहीं जिन कहूँ बीच परौरी ॥१॥ मालनि बांधत बंदन मालें बीच आमकी मौरी । देत महावरिं पॉइन चाईन डोलत दौरी दौरी ॥२॥ रमकी झमकी फिरत गुजरियाँ भूषन वसन सजौरी ! बिबिध बधावें काज परावें विलंब न कीजै बौरी ॥३॥ हाथन कंचन थाल बिराजत बिच मोतिन सों रौरी । जन गोविंद बलवीर दरसकों सबहिन लागी ढोरी ॥४॥
Sarang
Baranon srivallabh avtaar ..
Part2-270
बरनों श्रीवललभ अवतार ॥ गोकुल पति प्रकटे फिर गोकुल सकल विश्व आधार ॥१॥ सेवा भजन बताय निजजनकों मेदयो यम व्योहार ॥ कुंभनदास प्रभु गिरिधर आये दैवी उतरेपार ॥२॥
Devgandhar
Chalau merey ladile hoe poyne pann dharo manmohan enhan
Part1-166
चलौ मेरे लाडिले हो पॉयन पण धरो मनमोहन ेंहँ बलाय ॥१॥ आजकोौ दिन सुहावनों बलिजाऊँ लालरे ऑगन खेलियै धाय । बाझुँगी सर्वसु नारायन विप्रन पैंऊँगी गाय ॥२॥
Iman
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