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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Tapat dhoop
NityaPad-240
तपत धूप दुपेहतीकी ता मध तुम कोन कारन आये ॥ सुनीहो गँवार नारी आदर करि मोहनकों आलिंगन करन देई मन भाये ॥॥९॥ दसनको अग्रधूप मोहे ब्रज सूर अनूप केसे नीके लागत मानो गृह बन आये ॥ गोविन्दप्रभु जान सिरोमनि लाडिले परेई रहो इन चरननतर जानत गेल भुलाये ॥२॥
Saarang
Nandbhavanako bhushanmai ..| yashudakolal veer haldhar koo
NityaPad-159
नंदभवनको भूषणमाई ॥| यशुदाकोलाल वीर हलधर को राधारमण सदासुखदाई ॥१॥ इंद्रकोइंद्र देवदेवन को ब्रह्म को ब्रह्म अधिक अधिकाई ।। कालकोकाल ईशईशन को वरण कोवरण महावरदाई ॥।२॥ शिवकोधन संतन को सर्वस्व महिमा वेदपुराणनगाई ॥ नंददास को जीवन गिरिधर गोकुल मंडन कुंवर कन्हाई ।।३।।
Bilawal
Slellel faag kahat hoe horry || ita kamini samaaj
Part3-297
स्लेलल फाग कहत हो होरी || इत कामिनी समाज बिराजत उतर गिरिधर हलधर की जोरी ॥१॥ बाजत ताल मृदंग झांझ डफ बीच बीच मुरली ध्वनि थोरी ॥ श्रवण सुहाई गारी देतहें ऊंचेतान लेत त्रिय गोरी ॥२॥ कोटि मदनते सुंदर स्यामा देखत मोहि जात मति भोरी ॥ मोहन नंदनंदन रस विथकित क्‍यों हू दृष्टि जात नष्टि मोरी ॥३॥ कुंकुम रंग भरभर पिचकारी हरि तन छिरकत नवलकिशोरी ॥ जानों अनुराग उमड सन्मुख ब्हे धावत वंसमेंडवर तोरी ॥७४॥ कबहुक दसवीसक मिल आवत लेत छुडाय मुरली झकझोरी ॥ जाय श्रीदामा लेले आवत देन कही बह भांत पटोरी ॥५॥ कनक कलश कुंकुम भरलीने ओर कस्तुरी बहुत घसधोरी ॥ खेलत गोकुल वीच की चमची अधिक सुंगध भई ब्रज खोरी ॥६॥ भरकर कमल अबीर उडावत गोविंद निकट जाय चोर चोरी मानहं प्रचड वातवश पंकज घनगन शोभित चट्ंओरी ॥७॥ ग्वाल बाल सब संग मुदित मन जाय यमुना जल न्हान पहिलोरी ॥ नये वसन आभूषण पहरत ओरन देत पार्टबर कोरी ॥८॥ द्वेज आनंद समेत करत द्विज तिलक फूल फलरोचन रोरी ॥ सूरस्वामी बिप्र भाटनकों देत कनक रतननकीबोरी ॥९॥
Gouri
Barasganthi vrishabhaankunvariki keerati geet gavayeju . chandan aggar
Part1-198
बरसगांठि वृषभानकुँवरिकी कीरति गीत गवायेजु । चंदन अगर लिपाइ अरगजा मोतिन चौक पुराये जू ॥१॥ नंदीसुरतें नंद जसोदा ससुत न्योंति बुलाये । गोपी गोप गाय गोसुत लै चलि बरसाने आये ॥२॥ तब वृषभान बड़े आदरसों निज मंदिर पधराये । भीतर भवन जसोदा कीरति मिलत परम सुख पाये ॥३॥ जसुमतिकी कनियाँतें लालन लै कीरति योद खिलाये । ब्रजरानी लई कुँवरि गोद व्रजनारिन मंगल गाये ॥४॥ विविध सुगंध फुलेल उबटनों कुँवरि कुँवर उबटाये । तातें नीर न्हवाय पोंछि पट भूषण तन पहराये ॥५॥ तब वृषभान बोलि लये भीतर कीरति मंत्र सुनाये । निश्चय करि यह निजब्रत लीजे कान्ह कुँवरि वर पाये ॥६॥ तब वृषभान बाहिर आये नंदराय पहराये । कुल प्रोहित मुनि गर्ग बोलि कह्मौ परम पदारथ पाये ॥७॥ नंदराय वृषभान परस्पर अद्भुत नाच नचाये । जसुमतिजूसों करचौ समधौरों व्याह के गीत गवाये ॥८॥॥ तब व्रजराज मुदित मन मुनि ऋषिकुल प्रोहित पहराये। अगनित गाय दईं विधि करके पटह निसान बजाये ॥९॥ प्रमुदतित बोहोरि चली नंदरानी गावत सरस बधाये । नंदगोप बलि मोहन लैके नंदगाम फिरि आये ॥१०॥ बंदी मागध सूत बोहोत करि दे सनमान पठाये । रहसे फूले व्रजजन डोलें मानों रंक निधि पाये ॥११॥
Malav
Uttamkul avtaar kahaa joe srivallabhakumar naan jaanyo ..
NityaPad-348
उत्तमकुल अवतार कहा जो श्रीवल्लभकुमार न जान्यो ॥ चरचा न कीनी वरवललभकी रचि पाखंडकियो बहुबानो ॥ १॥| रसिक कथासुनीनहीं श्रवणन रह्मो विषयरसही लपटानो | सोच मिट्यो नहीं उर अंतरको समझ समझ लाग्यो पछतानो ॥।२॥। गिरिगोवर्धन ब्रजबुंदावन कबहुंनयनन निरख सिरानो ॥ कुष्णदास प्रभुकी गुणमहिमा अगम निगम नहि जात बखानो ॥। ३
Kanharo
Podhe kunj mahaldou dhaam ..|
NityaPad-343
पोढे कुंज महलदोउ धाम ॥| परम चतुर द्रखभान नंदनी कमल नयन घनस्यथाम ॥१॥ अति झीने मधुर सुरगावत जुर आई वृजभाम ॥ अरस परस दोउ महा रस भीने परमानंद पूरण काम ॥। २॥॥
Bihaag
Raadhe chhirkat chheent chhabili .. oonchekuch kanchuki bund
Part2-340
राधे छिरकत छींट छबीली ॥ ऊँचेकुच कंचुकी बंद छूटे लटकि रही लटकीली ॥१ ॥ बदनचन्द्र ताटंक कनकमय रतनजदटित मनिनीली ॥ मत्तगयंद गति राजत कटिपर सोहत किंकिनी ढीली ॥२ ॥ मच्यो खेल यमुना जल अन्तर प्रेममुदित रस झीली ॥ नन्द सुबन भुज ग्रीव बिराजत भाग सुहाग भरीली ॥३ ॥
Todi
Theit theit geedi geedi taka taka thong thong ..
Pustak1-344
थेईत थेईत गीडी गीडी तक तक थोंग थोंग ॥ ततथेई थेई नृत करत नट नागर अवघर गति आन आन || तकधिलांग तकधिलांग धुमकिट धुमकिट मधुर मधुर बाजे मृदंग ॥ अलग लाग उरप तिरप सरत सूरन मिली तान ॥१॥ बीन कीन्‍्नरी पिनांग महुवर कर कठताल लाल लाडली गुण निधान ॥ परम विचित्र अति सुजान ॥ क्रृष्णदास प्रभु गोपाल मोही सब ब्रज की बाल ॥ बांकी श्रोंह बांके नेन मारत मानो सर कमान ॥२॥
Iman
Pirei kundal nupur peere piro pitambaro odhe thaado | pre paag
NityaPad-068
पीरेई कुंडल नूपुर पीरे पीरो पीतांबरो ओढे ठाडो | पीरीई पाग लटक सिर सोहे पीरो छोर रह्यो कटि गाढो ॥ १॥। पीरी बनी कटि काछनी लालके पीरो छोर रच्यो पटुकाको | गोविन्द प्रभुकी लीला दरसत पीरोई लकुट लिये कर ठाडो ॥२॥
Dhanshree
Podhe radharaman |
NityaPad-343
पोढे राधारमन | आवागमन नहीं काहूको भामिनीके भवन ॥|१॥| सीख मोरी मान हो सजनी प्रात उठ कीजे हो गमन। गोविंद प्रभु पिय केलि करतहै कंस काली दमन ॥२॥
Bhor nikunj bhawan piya pyaari karat paraspar hansi-hansi batiyaan.
Part2-245
भोर निकुंज भवन पिय प्यारी करत परस्पर हँसि-हँसि बतियाँ। बाजत बीन पखावज अधोटी गाबति चतुर ताल दै सरिब्याँ ॥१ ॥ तुम पहरो बागो आभूषन सीस बांधि अलबेली पगियाँ। तोरा झोरा लूम कलंगी ढरकावो मोरन की पसखियाँ ॥२ ॥ स्याम कंचुकी कसि तन गाढ़ी मैं ओढों सिर सुरंग चुनरियाँ। कर कंकन बाजूबंद पहोंची कंठ पोत दुलरी तिमनियाँ ॥३ ॥ अलकावलि भाल टीकी नथ पायल नूपुर अनवट बिछियाँ। यह विधि करि सिंगार दोऊ ठाड़े ले दर्पन मुख निररि हरखियाँ ॥४ ॥ मृगमद तिलक अलक घुंघरारी देखि चकित भई मद भरी अंखियाँ। 'कृष्णदास' प्रभु चतुर बिहारी लई लगाय स्यामा कों छतियाँ ॥५ ॥
Bilawaal
Khele khele mohan kunj gully .. rung rangili vrishbhan
Part3-337
खेले खेले मोहन कुंज गली ॥ रंग रंगीली वृषभान सुता संग राजत बहुत अली ॥६९॥ ताल मृद्दंग बांसुरी वीना मधुरे मिल बजावत चली ॥ तेसोही स्वर गावत सब सुंदरी रंग रंग रली ॥२॥ कर गुलाल राधे जब छिरकत शोभित मानों कमल कली ॥ कुंज विहारी जू अरणगजा केसर छिरकी भांत भली ॥३॥ सर सरिता खग मृज सुन मोहें सबहिन अपनी गति बदली ॥ गुण रूपके पिय प्यारी को मुख निरखत हैं सगली ॥४॥
Iman
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