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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Dhanhari naine dhana rupradha | dhanya yeh mukut dhana dhanya pratibimb
NityaPad-172
धनहरि नेन धन रूपराधा | धन्य यह मुकुट धन धन्य प्रतिबिंब मुख धन्य दंपत्ति रहत भेख आधा ॥।१॥ धन धन सिंगार धन धन्य निरख सुखनि स्थाम धन्य छबि लूटलुटत मुरारी। सूरप्रभु चतुर चतुरानबल नागरी रहे प्रति बिंब पर नेन जोरी ॥२॥
Bhairav
Dekh sakhiri palana jhoolat sundarshyam salauna ..
Part3-026
देख सखिरी पलना झूलत सुंदरश्याम सलौना ॥ चकई भौंरा फिरकनी लहेंद़ खेलत विविध खिलौनां ॥ ९॥ हाथनलईं कनक पिचकाई छिरकत नंदललौना ॥ अबीर गुलाल उडावत सबष्लिन नागर नंदनंदौना ॥ २ मालतिलक गोरोचन अतिछबि चितवनमें कछुटौना || रूप अनूप अलक घुंघरारी मृगमद आड डिठौना ॥|३॥ देखतरूप ठगोरीसी लागत अंग अनंग लजौना ॥ घरमें देखे पलना झूलत बाहिर तरुन तरोना ॥8॥ घटरस व्यंजन स्वाद सलोनी इनबिन सबही अलौना ॥ रह्यो न परे मृहछिन मेरी आली कुंजन केलि करौना ।। ५॥ गिरिधरलाल की लीला अद्भुत मुनिजन ध्यान धरत धरमौना ॥ अतुलप्रताप अभय पददायक सो जसुमति को ये छोना ॥६॥| लोकलाज कुलकानि तज्यो में अब होनी होय सो हौना ॥ दासनके प्रभु गोवर्धनधर सब सुख फलन फलौना ॥७॥
Basant
Ayus paay turtahi dhaaye.. apani senaa saban bulaaye ..1 ..
Part2-082
आयुस पाय तुरतही धाये॥ अपनी सेना सबन बुलाये ॥१ ॥ कह्यो सबन ब्रज उपर आबो॥ घटा घोर कर गगन छिपावो ॥२ ॥ मेघवर्त जलवर्त जुआगें॥ ओर मेघ सब पाछेंलागें ३ ॥ गरज उठे ब्रज उपर जाई ॥ शब्द कियो यह घात सुनाई ॥४ ॥ ब्रजके लोग डरे अति भारी॥ आज घटा देखियतहें कारी ॥५ ॥ देखत देखत अति अधिकायो॥ नेंकहीमें रवि गगन छिपायो॥६ ॥ ऐसे मेघ कबहूं नहि देखे॥ अतिकारे काजर अबरेखे॥७॥ सुनो सूर ये मेघ डरावन॥ व्रजवासी सब कहत भयावन ॥८ ॥
Bilawal
Sub gaayanmein dhumarkheli..
Part2-049
सब गायनमें धूमरखेली॥ श्रवण पूंछ उंचकाइ सूधीव्है ग्वाल भजावत फिरत अकेली ॥१ ॥ पकर लई गोपाल आपही कंठ बनावत सेली॥ चुंबतमुख आकों भर भेटी टेर कहत लाओ गुरभेली ॥२ ॥ आप गोपाल खवाय खिलावत सब गायनकी हेली॥ परमानंद देखें बनि आवे जब धौरीकी बछिया झेली ॥३ ॥
Sarang
Bunn vann aayo chhaila horry kau ..
Part3-382
बन वन आयो छैला होरी कौ ॥ मल्‍ल काछु सिंगार बन्यो है याके फेंटा सीस मरोरी को ॥ १॥ सोंघे सन्‍यो उपरेना सोहत याके मार्थे बेंदा रोरी को ॥ परसोतम प्रभु कुंवर लाडिलो यह रिझवार किशोरी को ॥२॥
Hori-Kafi
Bhajan binn kete gaye jhakhmaar |
NityaPad-369
भजन बिन केते गये झखमार | माला तुलसी तिलक बनाये ठग खायों संसार।। भजन. ॥ नित्य प्रति उठी नाहावे धोवे करत आचार विचार। दया धर्मकी बात नजाने प्रेम जैसे चंडाल।। भजन .।। परमारथमें नव रहे ठाडो करत लोभकी लार। सूरदास भगवंत भजन बिन जनम जनम नर्क द्वार ।|
Bihaag
Gurujanmain thaadai dauu preetam senan khelati horry ..
Part3-066
गुरुजनमैं ठाड़ै दौऊ प्रीतम सेनन खेलति होरी ॥ नैनन वेनन कह जू परसपर परम रसिकनी जोरी ॥ १॥| पिचकाई दृण छुटति कटाच्छन ढोरें अरुन रँँग रोरी ॥ छिरकति रस सौं छेल छबीलौ कुंवरि छबीली गोरी ॥ २॥ लसति दसन तँबोल रस भीनै हँसि निरखति पिय ओरी ॥ मनौ सुरंग गुलाल उडावति सुंदर नवल किसोरी ॥३॥ छुटी अलक वदन छबि लागति बरनि सके कवि कोरी ॥ मनौं कनक कुपी चोवा की, कुंवरि सीस पै ढोरी ॥४॥ कठिन उरोज गाढी जू कैंचुकी अरू अँचल ओट अगोरी ॥ सँकेत कुँजन जानि रसिक पिय नैन निमेष न मोरी ॥५॥ ललितादिक सखी पिय प्यारी अरूगिरिधारीकी चोरी ॥ 'गोकुल बिहारी! कौ मुख निरखति प्रेम समुद्र झकौरी ॥॥६॥
Basant
Nandadet bahu deepdan...
Part2-053
नंददेत बहु दीपदान।॥ खिरिक खोरि ब्रज गोपुर गृहगृह मालाकार करत निरमान॥१॥ कार्तिक मास कुहूँ रजनी मुखदीप्ति दिव्य रवि कोटि समान ॥ अतुलित छबि लख ब्रजकी वनिता उमगउमग उरकरतहें गान ॥२ ॥
Kanharo
Cone russ bhootal prakat bhayo ..
Part2-275
कोन रस भूतल प्रकट भयो ॥ देखोरी देखो भरि नेनन प्रभु आनंद मयो ॥१ ॥ जो रस निगम अगमहू अगोचर सो सब सद्य लयो॥ सो रस श्रीलक्ष्मण भट गृह प्रकटित प्रेम मयो २ ॥ घर घर नंद नंदन फल फूल्यो सेवा विधि सिखयो॥ आपनु किये रसाल रीतिसों श्रीवललभ गिरिधर रिझयो ॥३ ॥
Ramkali
Sakhee nandako nandan saanvaro mero chita chor jaayari.
NityaPad-160
सखी नंदको नंदन सांवरो मेरो चित चोर जायरी। रूप अनुप दिखायके सखी गयो हे अचानक आयरी ।।१॥ टेढी चलनि मधुर चंचल गति टेढे नेन चलायरी । टेढी हीं कछु छ्वे रहे हे सखी मधुर बेंन बजायरी ॥ ३॥ कानन कुंडल मोर मुकुट छबि सोभा बरनी न जायरी | चतुर्भुज प्रभु प्रानको प्यारो सब रसिकनको रायरी ॥। ३॥।
Bilawal
Chova mein chahal rahey hau laalan kahaan kahaan gaye raat dashahara manaavan ..
Pustak1-319
चोवा में चहल रहे हौ लालन कहाँ कहाँ गये रात दशहरा मनावन ॥ एकतें एक सुघर घोष नारी तुमतौ छैल गिरिधारी सबहिन के मन भावन ॥१॥ कर माँझ कर लीनौ हँसि एक बीरा दीनौ ले लै-नाम लागे भोही पै गिनावन ॥ धोंधीके प्रभु बिनु सुभट ईत्त जनावत बातन बतरावत जात सखी आई समुझावन ॥२॥
Bibhaas
Rasbhare peeya pyaari baithe kusumbhavan ..
NityaPad-262
रसभरे पीय प्यारी बैठे कुसुमभवन ॥ कुसुमनकी शेज ओर कुसुमवितान तने तेसो ही सीतल मंद सुगंध पतन ॥१॥ कुसुमन के परदा कुसुमन के बाजना कूजत अली पीक कीर शुक श्रवन गोविन्द बलिजोरी सदाड़ बिराजे सुककरत राधा रमन ॥२॥
Kedar
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