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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Baaje badhaaiyaan way saeeyan nandade darbar . huwa suta sohanaan way manada | Part1-055 | बाजे बधाइयाँ वे सईयां नंददे दरबार । हुवा सुत सोहनां वे मनदा
मोंहानां सुकुंवार । आई सुनी गोपियां वे हिलिमिलि गावही खुशीयाल । जुरे सब
लोक मंगनवे गुनीगन बोले दै दे ताल ॥ गुनीदे ताला ताला नाचै ॥वाहवाव॥
आंगनपह पटमांचे ॥बाहवा॥ नंददा लाल जीवों ॥वाहवा) दुधा अमृत
पीवो ॥वाहवा॥ खुशी दिल पावां थूमां ॥वाहवा)! ललादी तुंनीयूमां
॥वाहवा॥ उसदा मंगल गावां ॥वाहवा॥ दान दुपट्टा पावां ॥वाहवा॥
पावां पटदान मोती वे ) जावां दिल फूल दे घरमांह ॥ असाढा हाथ टोडर
वे ॥ बाजूबंध झूलदे बिचु बांह ॥ तुजपर घोलियां ये ॥ जसोदे बोलियां दे
सुनाय ॥ धनि धनि आजदा दिन वे ॥ दैदी दान क्यों न मगाय ॥ महरने
दान मँँगाया |वाहवा॥ कंचन झर बरखाया ॥वाहवा)| हे बड भागन तूरी
॥बाहवा॥ करी मुरादेपुरी ॥वाहवा। बीच खुशी दील गाढ़े ॥वाहवा॥
मंगल मुखी तु साढ़े ॥वाहवा।| जन्म जन्म गुन गावां बाहवा ॥ नागर दरशन
पावां ॥वाहवा॥ | Desh |
Kabaki houn khlelat mohison artahon saban chhaandi | Part3-054 | कबकी हों ख्लेलत मोहीसों अरतहों सबन छांडि
मेरी आंखिन भरतहो ॥ रहो हो रहो हो हरि होंडूंन ओर त्रिय नेंकुनटरतहो
॥१॥ नेनमींडि फिरिफिरि मुसिकात जात होंहूं जानत तेसी मोहीसों करतहो ॥
कल्यानके प्रभु गिरिधरपति विवस न्हैन डरतहो ॥२॥ | Basant |
Dampati sukh | NityaPad-243 | दंपति सुख
करति अति ही रस भीजे चंदन अरगजा अंग लेपन कीए ॥ अति सीतल सुगंध
खसखानो छिरक््यों गुलाब जल बरखत पवन पानी पुरवा देखीयत ग्रीषम ऋतु
मानन लागे हरख हिये ॥१॥ अग्र धूम अग्र धूम महेक आवत सोरभ लेत
सुख पावत जीए ॥| जानन मनि जान 'तानसेन' के प्रभु अचबत नित
अमीए॥२॥ | Saarang |
Jasmumati madan gopal jhulaavati . dekhi saine gati tribhuvan | Part1-092 | जसमुमति मदन गुपाल झुलावति । देखि सैन गति त्रिभुवन
कंपत्त शिव विरंचि डर पावत ॥१॥ श्याम अरुन आलस अति लोचन उभय
पलक मिलि आवत । जनु रविगति सकुच कमल जुग निस अलि उड़न न
पावत ॥२॥ चौंकि चौंकि शिशुताई प्रगटकरि छिनु इक माँहि आवत । जानों
निशापति करि रवि किरणा श्रुति भंडार समावत ॥३॥ कर शिरपर धरि श्याम
मनोहर ऊपर अधिक छबि पावत । सूरदास मानों पन्नग सुत प्रभु ऊपर फन
छावत ॥४॥ | Ramkali |
Taadhin nandisurate aaeen. apane patiko sanga liye hain atee atur | Part1-208 | टाढ़िन नंदीसुरते आईं। अपने पतिको संग लिये हैं अति आतुर
उठि धाईं ॥१॥ उदै देखि ब्रज बल्लभकुल को फूली अँग न समाईं | नाचत
गावति प्रमुदित है कें टेरि असीस सुनाई ॥२॥ महाभाग्य कीरति आदर दे
भीतर भवन बुलाई । कंचन बहु भूषन पार्टंबर नखशिखते पहिराई ॥३॥
रतनभान रतननकी पोहोंची ढाढ़िन हाथ गहाई । उदैभान सोनेके टोडर देत बहुत
सुख पाई ॥४॥ दिये खता अगनित धानन के ललित भान लुटाई | अष्टभान
और कुंतभानजू गोधन ठाठ बताई ॥५॥ महाराज वृषभान बहुत करि मनकी
आस पुजाई । किशोरीदासकों बाँह पकरिकें बरसाने जो बसाई ॥६॥ | Maru |
Horry key madmaate aae .. naval laal merey munn | Part3-077 | होरी के मदमाते आए ॥ नवल लाल मेरे मन
भाए ॥ १॥ नैन तंबोल कहाँ रंग राचे ॥ खेलि बिनोद लाल के साँचे ॥२॥
होरी के मिसि सब बनी आई ॥ चोवा चोली कहाँ रँगाई ॥३॥ जावक
रँग रणमणी पणीयाँ ॥ घूमति नेन रैंन जब जणियाँ ॥४॥ नेह नयोौ कित
लाल छिपावति ॥ चिहक्ल सकल अँग प्रगट जनाबति ॥|५॥ गोपी जन मन
मोद बढ़ावति ॥ '“नंददास' प्रभु काहे लजावति ॥६॥ | Bhairav |
Aaj maaee jhoolat hain nandlal.. sanga raajat vrishbhan | Part3-372 | आज माई झूलत हैं नंदलाल॥ संग राजत वृषभान
नंदिनी जोरी परम रसाल ॥ १॥ श्रीगोवर्द्धन की सुभग शिखर पर रच्यो जो
डोल विशाल ॥ कदली करण केतकी कुंजो बुकल मालती जाल ॥२॥ नूतन
न्यूत प्रवाल रहे लस माधुरीसों अरुझाय ॥ कमल प्रसून पराग पुंज भर बहत
समीर सुहाय ।। ३॥ मधुप कीर कल कोकिल कुंजत रस मकरंद लुभाय।। सुन
सुन श्रवण पुलक पिय प्यारी रहत कंठ लपटाय ॥४॥ निरझर झरत सुगंध
सुबासित रंग रंग जल लोल ॥ उभय कूल कलहंस मंडली कूजत करत कलोल
॥५॥ युवतिजन समूह मिल गावत प्रमुदित लोचन लोल ॥ बाजत ताल मृुदंग
होत रंग विहसत चारू कपोल ॥६॥ चोवा चंदन छिरकत भामिनि अवलोकत
रस भाय ॥ श्रीविद्डलनाथ आरती उत्तारत दास निरख बलजाय ॥७॥ | Devgandhar |
Dehovrajanath hamariangi .. | NityaPad-036 | देहोब्रजनाथ हमारीआंगी ॥
नातर रंगबिरंग होय गोकेइबेरियाहममांगी ॥।१॥
बृजके लोगकहा कहेंगे देखपरस्पर-नागी ।।
खरेचतुरहर िहो अंतरगत रेनपरी कबजागी ॥१॥
सकलसूतकंचनकेलागे बीच रत्ननकी धागी |।
परमानंदप्रभु दीजिये नकाहेप्रेमसुरंगरंगपागी ।। ३।॥। | Ramkali |
Jaapar kamalkant dharai.. | NityaPad-362 | जापर कमलकांत ढरै॥
लकरी घासको बेचनहारो तासिर छत्र-धरै ॥१॥|
विद्यानाथ अविद्या समरथ जो कछु चाहे सोई करै ॥
रीतेभरे भरेपुन ढारे जो चाहेतो फेरभरे ॥२॥
सिद्धपुरुष अविनाशी समरथ काहूते न डरे ॥
परमानंद यह संपति मनतें कबहू नाहिन टरै ॥। ३॥। | Bihaag |
Aho kaanh pyaare gau vann key rakhvaare .. daan lehu ghar zaan | Part1-223 | अहो कान्ह प्यारे गौ वन के रखवारे ॥ दान लेहु घर जान
दे हु रे तिहारे जिय में कहा रे ॥१॥ मडुकी फोरी बैंया मरोरी लोग हँसावन
हारे ॥ “कृष्ण दास” प्रभु रसिक मुकुट मनि तुम जीते हम हारे ॥२ | Lalit |
) nikunj mein podhe rasik piya pyaari rung rung bheeni | Part3-363 | ) निकुंज में पोढे रसिक पिय प्यारी रंग रंग भीनी
सारी॥ खेलि फाग रस अति ही उमग लियो है लाला मनुहारी ॥ १॥ शिधिलित
बसन जूंमात आलस भरे पौढे पर्यंक सुखकारी ॥ नंददास दंपति छबि ऊपर
तन मन धन बलिहारी ॥२॥ | Bihag |
Jehon dulhe laal dulhaiya ... bahu vidhi saak sudhaare vinjav aur | NityaPad-079 | जेहों दुल्हे लाल दुल्हैया ॥। बहु विधि साक सुधारे विंजव और
बनायो घैया ॥१॥| कंचनथार कंचन की चोकी परोसत मोद बढै ॥ ठाड़ी पवन
करत रोहिनी लेत वारन मैया ॥२॥ कर अचवन मुख बीरी दीनी आनन्द उर न
समैया ॥ लाल लाडिली की छबि ऊपर परमानन्द बल जैया ॥। ३।। | Aasawari |
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