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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Chibuk koop madhya piya manpartho adharsudharas aas || kutil
NityaPad-113
चिबुक कूप मध्य पिय मनपरथो अधरसुधारस आस || कुटिल अलक लटकत ऊपर काढनकों कंडक डार्‌यो बांधप्रेमके पास ।॥१९॥ चंचल लोचन ऊपर ठाढ़ेहें अेचनको मानो मधुरहास ॥ नंददासप्रभु प्यारी छबि देखें बढीहें अधिक पियास ॥ २॥॥
Kedar
Dhanya janani joe subhat jaaye .. bheer parein ripukon dall malik
Part1-306
धन्य जननी जो सुभट जाये ॥ भीर परें रिपुकों दल मलिक कौतुक प्रभुहि दिखाये ॥१॥ जीवत सुख भुगवे होय यश बहु बिधि कीरति गाये ॥ भरे तौ मंडल भेद भानुकौ सुरपुर जाय बसाये ॥२॥ कौशल्या सों कहत सुमित्रा जिन स्वामिन दुख पाये ॥ लक्ष्मणते हों भई सपूत्ती रामकाज जो आये ॥३॥ लौह गहैें लालच करै जियकौ औरों सुभट लजाये ॥ सूरटास प्रभु जीत शत्रुकों कुशलक्षेम घर आये ॥४॥
Maru
Gaay khilawan kharik chaleri...
Part2-048
गाय खिलावन खरिक चलेरी।॥ गिरिधरलाल ललित लरिकासंग बाबानंद बलदाऊ भलेरी ॥१॥ अश्रीदामा आदि सुबल अर्जुन सब भोजविशाल बनेरी॥ नाचत गावत करत कोलाहल करो सिंगार आज हेबेरी ॥२॥ सुन निजनाम नेंचुकी निकसी गांग बुलाई काजर पीरी ॥ कानलाग कहे कुरुर कुरुर डाढ मेल आतुरव्है दौरी ॥३ ॥ नंदकुमार निवेर झार मुख वछरा छोर दियेरी ॥ हँसहँस कहत सुनोरे भैया हों खेलत खेल नयेरी ।४॥ गोधन पूज ग्वाल पेहेराये काहूकों पगा काहकों पिछोरी ॥ व्रजभामिनी मिल मंगल गाबत रसिक प्रभु जुग जुग राजकरोरी ॥५ ॥
Sarang
Khelat syaam gwalini sanga .. aeka gawat, aeka
Part3-270
खेलत स्याम ग्वालिनि संग ॥ एक गावत, एक नाचत, इक करत बहु रंग ॥ मुरज, बीन, उपंग, मुरली, झाँझ, झालरि, ताल ॥ पढ़त होरी, बोलि गारी, निरखिकैं ब्रज-बाल ॥ कनक-कलसनि घोरि केसरि कर लिये ब्रज-नारि ॥ जबहिं आवतत देखि तरूुनी, भजत दै किलकारि ॥ दुरि रही इक खोरि ललिता, जितहिं आवत स्यथाम ॥ धरे भरि अँकवारि औचक, धाई आईं बाम ॥ बहुत ढीठौ दै रहे हो, जानबी अब आज ॥ राधिका दुरि हँसति ठाढ़ी, निरखि पिय मुख लाज ॥ लियौ काहू मुरलि करतें, कोऊ गछ्कौ पटपीत || सीस बेनी जूंथि, लोचन करी आँजि अनीत ॥ गए करतैं छुटकि मोहन, नारि सब पछितातिं सीस धुनि, कर मींजि बोलति, भली लै गे भाँतिं ॥ दाऊँ हम नहिं लैन पायौो, बसन लेती लाल ॥ सूर-प्रभु ! कहँ जाहंगे अब, हम परी इंडिं ख्याल ॥
Nat
Itani baar tum kahaan rahey .. sagari raine path chaahat nayandahe .. 1..
NityaPad-146
इतनी बार तुम कहां रहे ॥ सगरी रेन पथ चाहत नयनदहे ।। १॥ कुंमनदासप्रभु भये ताहीके वशजिनहि गहे ॥ गिरिधर पिय भले बोल निवाहे संध्याजु कहे ।।२॥।
Bibhaas
Sabal aaj kulahal maaee . baajan baajat bhavanan gaajat
Part1-202
सबल आज कुलाहल माई । बाजन बाजत भवनन गाजत प्रगटी सेबन सुखदाई ॥|१॥ धरत साथिये बंदनवारे रोपी द्वार सुहाई । गावत गीत अली गोकुलकीं जे जुरि न्‍यौंते आई ॥२॥ वृषभानके आँगन रानीजू बैठी देति बधाई ॥ श्रीविड्डलगिरिधरन कुंवरिकी वरसगांठि मन भाई ॥३॥|
Kanharo
Kahat maheri taba aiseevaani.. indrahiki deeni rajdhani ..1 ..
Part2-067
कहत महेरि तब ऐसीवानी॥ इंद्रहीकी दीनी रजधानी ॥१ ॥ कंस का अतिकानी ॥ यह प्रभुकीहे आशिष बानी ॥२ ॥ गोपन बहुत मानी ॥ जहांतहां यह चलत कहानी ॥३ ॥ तुम घर मथीये सहस्न मथानी ॥ ग्वालिनि रहत सदा विततानी ॥४ ॥ तृण उपजत उनहीके पानी॥ ऐसे प्रभुकी सुरत भुलानी ॥५ ॥ सूर नंद मनमें तब आनी ॥ सत्य कही तुम देव कहानी ॥६ ॥
Bilawal
Aangan dadhiko udadhi bhayau. gopi gwal firat maharaanen sakal
Part1-052
आँगन दधिको उदधि भयौ। गोपी ग्वाल फिरत महरानें सकल संताप गयो ॥१॥ वकसत पगणा पिछौरी गुनियन अति आनंद भयौ । नंद यशोदाके मन आनंद धोंधीके प्रभु जनम लयौ ॥२॥
Malhar
Harison aeka russ preeti rahiri ..| tanman praan samarpan keeno apano
NityaPad-107
हरिसों एक रस प्रीति रहीरी ॥| तनमन प्राण समर्पण कीनो अपनो नेम ब्रत लेनि वहीरी ॥। १॥ प्रथम भयो अनुराग दृष्टितें मानों रंकनिधि लूट लईरी ॥ कहत सुनत चित अनत न भटक्यो वेही हिलगजिय पेठ गईरी ॥२॥ मर्यादा उललंघ सबनकी लोकवेद उपहास सहीरी ॥ परमानंददास गोपिनकी प्रेमकथा शुक व्यास कहीरी ॥।३॥
Gori
Gawat giridharan sanga param mudit raas rung oorap tirap lait taana naagar nagri ..
Pustak1-343
गावत गिरिधरन संग परम मुदित रास रंग ऊरप तिरप लेत तान नागर नागरी ॥ सारीगमपधनी ऊघटत गति सप्त सुरन लेत लाग डाट सुलप अति उजागरी ॥१॥ चर्बित तांबूल देत ध्रुवताल गतिहीं लेत गिडगिडता थुंगथुंग अलाग लोग री ॥ सुरति केलि रति बिलास बलि बलि बलि कुंभनदास आनंद नंदन राधावर सुहाग री ॥२॥
Iman
Gokulchand paalnen jhulat . haulein haulein vrajrani jhulaavati
Part1-097
गोकुलचंद पालनें झुलत । हौलें हौलें ब्रजरानी झुलावति किलकि किलकि देख मन फूलत ॥१॥ कीरतिलली बुलाई हरखसों लालन ढिंग पौढ़ाई । हों यह मुसकनि कर पद जुगपै लखि कापै बरनि न जाई ॥२॥ माखन मिश्री राखि निकाई जलबीरा पकवान । अँगरा अनुराग दुँहनिकौ कुसुम माल धरि आन ॥३॥ जो आवत सो अंबर लावत ऊपर धरि कछु रोक । बंगी झुनझुना फिरकि खिलावत फिरि दूहुँ बदन बिलोक ॥४॥ गावत मंगलचार सोहिलो बाजे बाजन द्वार । नंद महोत्सवके सुख ऊपर द्वारेश बलिहार ॥५॥
Ramkali
Dekhauri mohan panghat parr thaado haye nava nikunj taisiye sarad suhai raat . phool kau
NityaPad-272
देखौरी मोहन पनघट पर ठाडो है नव निकुंज तैसीये सरद सुहाई रात । फूल कौ टिपारो बन्यो फूलन कौ मल्‍लकाछ फूलन के हार उर फूले-फूले करत बात ॥१॥ फूलन को उपरैना फूलन पचरंग आन-आन भांति फूल के कुंडल छबि अति सुहात । फूलन की बेंनी सिर फूलन के बाजूबंद फूले फूले कृष्णदास' यह छबि कही न जात ॥२॥
Saarang
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