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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Jiyaki najaanat hoe piya apani garaj key hoe gaahak .. mridu
NityaPad-311
जियकी नजानत हो पिय अपनी गरज के हो गाहक ॥ मृदु सुसकाय ललचाय आय ढिंग हरत परायो मन नाहक ॥| १॥ कपटी कुटिल नेह नहीं जानतहो छलसों फिरत घरघरके रस चाहक ॥। ये दई निर्दई स्थामघन परमानंद उर साहक ॥२॥
Iman
Mohan khelat horry ..shru0.. bansivat yamuna tata
Part3-233
मोहन खेलत होरी ॥श्रु०॥ बंसीवट यमुना तट कुंजन तर ठाडे बनवारी ॥ उत्तडी सखिन को मंडल जोरें श्रीवृषभान दुलारी ॥ होडा होडी करत परस्पर देतहें आनंद गारी ॥ भरें गुलाल कुंकुमा केसर करन कनक पिचकारी ॥|१॥ वाजत वेणु बांसुरी कित्नरि महुवर ओर मुख चंगा | आवज अमृत कुंडली अघबट ताते सरस उपंगा |। ताल मृदंग झांझ डफ बाजत सुरके उठत तरंगा ॥ गावत नाचत करत कौतूहल छिरकरत केसर अंगा ॥२॥ तबही स्यथाम सब सखा बुलाये सबहिन मतो सुनायो ॥ अरे भैया तुम चौकस रहीयो मत कोऊपाय गहायो ॥ जो काहू कों पकर पायहें कर हें मन को भायो ॥ ताते सावधान उ्है रहियो में तुमकों समुझायो ॥३॥ तबहीं किशोरी राधा गोरी मनमें मतो जुकीनों ॥ एक सखी तहां बोल आपनी बेष सुबल को दीनों ॥ ताको मिलन चले उठ मोहन सखान कोऊ चीनों ॥ नेंसिकवात लगाय लालकों पाछेते गहिलीनों ॥४॥ आई सिमट सकल ब्रज सुंदरि मोहन पकरे जबही ॥ मांगत हुती यही विधिनापें दाव जो पायो अबही ॥ तब तुम वसन हरेजु हमारे हा हा खाई सबही ॥ अब हम वसन छीनि कें लेहें हा हा खेहो तुमही ॥५॥ एक कहे नेंक वदन उघारो हम हूं देखन पावें ॥ एक कहें मुखमांड स्यामको माथे बेंदालावे ॥ श्रीमुख कमल नयन मेरे मधुकर तिनकी तृषा बुझावें || एक कहे नेंक इनहिं नचावो हमसब ताल बजावें ॥६।| एक सखी मधुरे स्वर गावें मुखते मारी भाखें ॥ एकजु हँसत दूर भई ठाडी घूंघट पटमुख ढांकें ॥ एक सखी हरि को मुख चितबत तनकी दशा न ताकें ॥ श्री हरि चरित्र अंतको पावे सबहिन की दिसताकें ॥७॥ एक जु सखी आय पाछेते मोर पक्ष गहढिलीनो ॥ एक अचानक आय लालको पीतांबर गहिछीनो ॥ एकन आंख आंज मुख मांड्यो ऊपर गुलचादीनों ॥ मानत कोन फाजग में प्रभुता मन मान्यों सो कीनों ॥८॥ एक कहे बोलो बलभैया तुमें ही आन छुडावे ॥ सरख्रा एक पठवो तुम घरलों जसुमति को लेआवे ॥ छल बल सों छूट्यो चाहतहो गह्लेन छूट न पावें ॥ श्रीराधाजू की करो वीनती सो तुम भले हि छुडावें ॥९॥ दूरही ते देखे बलआवत एक सखी उठधघाई ॥ छल बल कर जेसें तेसें कर उनहूं कों गहिलाईं ॥ आन पकर इक ठोरे कीने हरिहलधर दोऊ भाई ॥ उनहंकी आंख आंज मुख मांड्यो श्रीराधाजू सेन बताई ॥१०॥ करजोरें हरि हलधर ठाडे आज्ञा हम को कीजे ॥ जो कछु इच्छ होय तुमारी फगुवा हमसों लीजे ॥ हँसहँस बात कह़त मनमोहन बोवत सुख के बीजें करो विदा जांय अपनेघर पीतांबर मेरो दीजें ॥ १ १॥ देख देख ब्रह्मा शिव नारद मनहींमन पछिताई ॥ ये बड भाग्य सकल ब्रज बनिता हम मुख कही न जाई ॥ ज्याकारण हम ध्यानरत हैं ध्यानहूं आवत नाहीं ॥ सो देखो ब्रज युवतिन आगें ठाडे जोरे बांही ॥१२॥ तब ही श्याम सब सखा बुलाये फगुवा बहुत मंगायो ॥ जो जाके जेसो मन मान्‍्यों तेसो ताहि पहरायो ॥ श्रीजगन्नाथराय चिरजीयो सबको भलो मनायो ॥ वाढो बंश नंद बावा को माधोदास यश गायो ॥ १ ३॥
Sarang
Hari sanga horry khelani aanee .. chandrabhaga, chandravali
Part3-082
हरि सँग होरी खेलनि आँई ॥ चंद्रभगा, चंद्रावलि भांमा, राधा परम सुहाई ॥१॥ चोवा चंदन अगर कुँमकुमा सुरँग गुलाल उड़ाई ॥ रतनजटित पिचकाईन भरि भरि छिरकति कुँवर कन्हाई ॥२॥ ताल मृदंग, पटह ढफ बाजै, घोष नगारे धाई ॥| श्री मंडल सहनाई सुंदर बिच बिच बैनु बजाई ॥३॥ अरस परस खेलति पिय प्यारी, उपमा बरनि न जाई ॥ सूरदास” बलि जाई बदन की निरखि निरखि मुसिकाई ॥४॥
Khat
Senbhog laaee bhar thaari .
NityaPad-301
सेनभोग लाई भर थारी । रुचिर कचोरी पुवा पुरी मानभोग पावत पिय प्यारी ॥१॥ धर्यो कटोरा भर्यों मुरब्बा सरस संधाने साक सवारी । ओदट्यो दूध भर्यो भाजनमें तामें बहुत मिठाई डारी।।२॥ ललित ललिता कर अचवावत जमुनोदक कंचन भरि झारी ॥! 'गोपीनाथथ' खबावत बीरी दंपति छबि संपत उर भारी ॥ ३॥
Kanharo
Keejiye nandlal kaleu .. kheer khaand or makhan mishree
NityaPad-029
कीजिये नंदलाल कलेऊ ॥ खीर खांड ओर माखन मिश्री लीजिये परम रसाल ॥ १॥| ओटयो दूध सद्य धोरीको तुमको देहों गोपाल ॥। बेनी बढे होय बलकीसी पीजिये मेरे बाल ।। २॥। हों बारी या बदनकमल पर चुंबन देहो गाल ॥ गोविंदप्रभु कलेऊ कीनो जननी वचन प्रतिपाल ॥३॥
Ramkali
Merey mainani ihai baani purry | giridharlal-mukharvind-chhabi
NityaPad-072
मेरे मैननि इहै बानि परी | गिरिधरलाल-मुखारविंद-छबि छिनु-छिनु पीवत खरी॥। १॥ पाग सुदेस लाल अति सोहति मोतिनि की दुलरी। हरि-नख उरहिं विराजत मनि-गन-जटित कंठ कंठसिरी ॥२॥ छीत-स्वामी गोवर्धनधर पर वारों तन मन री ! विद्वलनाथ निरखि के फूलत, तन सुधि सब बिसरी ॥३॥
Aasawari
Besar kaun kii atee neeki.. hodpari preetam arupyari
NityaPad-315
बेसर कौन की अति नीकी॥ होडपरी प्रीतम अरुप्यारी अपने अपने जीकी ॥। १॥ न्याय परच्यो ललिताके आगें कौन सरस कौन फीकी॥ नंददास विलग जिनमानों कछु एक सरस ललीकी ॥ २॥
Adano
Hohohori hoho hohori .. itahi gopal gwal
Part3-156
होहोहोरी होहो होहोरी ॥ इतहि गुपाल ग्वाल समूह उत्त युवती मधि राधागोरी ॥१॥ बाजत ताल मृदंगरंग दरसत परसत बरसत वुह्ं ओरी ॥ देकर ताल उघट नाचत मिलि आप आपमें बांहां जोरी ॥२॥ केसर बहुत मंगाय अबीर उडाय ओर लीने भरिझोरी ॥ ललिता मुठीचलाय दुहुंन दृष्टिबचाय गांठि गहि जोरी ॥३॥ अंचल खिच्यो जानि सकुचेदंपतिमन हँसिहँसिभोह मरोरी ॥ चतुरसखी लखिहाथदेपाई जानीजातिदुह्डुंब की चोरी ॥४॥ बनिटढें फगुवादी ये मोहनप्रभु फेंटगह़े जो कहत किसोरी ॥ कीजे आज आप भायो हरि पायेहें घेरि सांकरी खोरी ॥५॥
Dhanashri
Madhav maas subhag sukhad ekadashi pragat lakshman
Part2-292
माधव मास सुभग सुखद एकादशी प्रगट लक्ष्मण सदन वललभाधीश्वर ॥ जगत उद्योत खद्योत सब मिट गये भक्त दसविध रचन वसत निज सुहागभर ॥१ ॥ स्वीय जनहित वपु धार लीला करत गोपीको प्रेम उछलत प्रती मृदुलतर॥ होत आनंद जाहि दरस कोए सकलजन दुख सब्रे मिटतत निज जनन होए प्रेमभर ॥२॥ तैलंग कुलतिलक ध्वज चक्र चूडानपत पादयुग भुवन अखिल दिगविजय कर।॥ धाम गोकुल वास नीत्यलीला करत सरस रंगन रहत नीत्य जीय नेमधर ॥३ ॥
Sarang
Aavein rawal kii gwar naar gokulate khel |
Part3-339
आवें रावल की ग्वार नार गोकुलते खेल | शिथिल अंग लज्जित मेन मोहन रंग रंगे नयन पीक लीक अरचि एन किये रति केल ॥ १॥ अंस न अवलंब पांति प्रफुल्लित लपटात जात हसन दशन कांति जुही ज्यों न रही फेल | पुलकित इत रोम पांति सोंधे सब सग बगात केसर के रंग सिंधु प्रेम लहरि झेल ॥ २॥ सब वेश नव किशोरी मन्‍्मथ की मटक मोरी प्रीतम अनुराग फाग बाढी रंग रेल ॥ ब्रजपति रिझ बार पाय अचयो रस मन अघाय भोन गोन काज राज हंस न गति पेल ॥ ३॥
Adano
Chatkavari pawri pagan nagan jaree pahari nikse nandlal
NityaPad-118
चटकावरी पावरी पगन नगन जरी पहरि निकसे नंदलाल पिया ॥ कटि तट चटकीलो रंगीलो छबीलो चपलाहूतें चपल काम रही सी बिलोवत हिया ॥ १॥| जब उन मुसकाय चितयेरी मो तन निठुरन मुरझन झपकन मन पलकन मनु पवन उलावे प्राण दिया ॥। नंददास प्रभु ता दिनतें मेरी गति हों जानों के जाने मो जिया ॥२॥।
Adano
Bandee padpankaj nandlal.. jey bhavtaran pooran kripal chita chintat hott budhi visal | kripakaran or deenpal | sadaa
Part3-035
बंदी पदपंकज नंदलाल॥ जे भवतारन पूरन कृपाल चित चिंतत होत बुधि विसाल | कृपाकरन ओर दीनपाल | सदा वसो मेरे हृदय माय ॥ कुंबर माधुरी चितष्ठि धाय ॥१॥ तिमर हरन सुखकरानंद ॥ मुनिवंदन आनंदकंद ॥ स्याम मुकटमनि कमलनेन ।। छबि समूहपर लजितमेन ॥२॥ गोकुलपति गुन नांहिनपार ॥ श्रीनंद सुबन सुमिरों उदार ॥ निगमागम सब ओघसार ॥ सोई वृंदावन प्रणट्यो बिहार ॥३॥ ऋतुबसंत पंडहलो समाज ॥ तहांतमुदित जुवतिजन सजजुसाज ॥ मुदित चले जहां सूरस्याम ॥ वसंत वधावन नंदधाम ॥५॥
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