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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Kendet deit jaat kananpar ooncheeteran naam sunawat ..
Part2-046
केंदेत देत जात काननपर ऊँचीटेरन नाम सुनावत ॥ सुन्दर पीत पिछरी लेले मुख पर फेर सबन विज्ुकावत ॥१ ॥ काहूको बछरा काहूको ले लै आगें आन दिखावत ॥ पूंछ उठाय सुथी व्है भाजत आप हँसत ओर सबन हँसावत ॥२॥ फिर चुचुकार सूधी कर भाजत बछरन अपने हाथ मिलावत।॥। श्रीविद्डुलगिरिधर बलदाऊ इहि विधि अपनी गाय खिलावत ॥३ ॥
Sarang
Bhojan karat bhaanvate jiyake navalnikunj mahal mein ..|
NityaPad-214
भोजन करत भांवते जियके नवलनिकुंज महल में ॥| अरसपरस दोऊ खात खवबावत जोसुख उपजत लोचन हियमें ॥१॥ कीनो कछुक मनोरथ मोहन हेत सवार ग्रास मुख तियके ॥ हँस चितयो जब रूपमाधुरी रहे गयो कोर हाथही पियके ॥२॥
Saarang
Vrajpati yeh sukh poore bhaag .. jaa nidhikon tapa karat mahaa
Part1-015
ब्रजपति यह सुख पूरे भाग ॥ जा निधिकों तप करत महा मुनि सदा दिवस निशि जाग ॥१॥ सखी बुलावौ मंगलगावौ पूरी मोतिन चौक ॥ इतनी महरि सुनी जब श्रवनन टेरे सब व्रज लोक ॥२॥ वधू सिंगार कियें जब आईं मानों वे शशि डार ॥ भूषन झलके कंचनसे तन लखि सकुची त्रिय मार ॥३॥ और गोप जूथन जुरि धाये लाये मंगलसाज ॥ पौरीजाय तब नंदजूकी पूजै मनके काज ॥४॥ गावत गीत बधाई जुबती होत चित्त अति चाई ॥ विकसित आनन मनहुँ कमल नव उरमें मोद न माय ॥५॥ ग्वाल अचानक है पाछै सिर नावत दधिके माँट ॥ फिरत तहाँ वे विद्लल जित तित सुधि न परे कित बाट ॥६॥ बोलत आपुसमें मन भायौ रहत नहीं कछु कान ॥ सुरनारी आनंदित यह दुति देखन चढ़ी विमान ॥७॥ दिये अति व्रजराज सबनकौं धन मानों बरष्यो मेहा ॥ बोलत कृष्णदास शोभा बन आये वे सब गेहा ॥८॥
Devgandhar
Jovanmore romawali sufal fully kanchukivasant dhampilichali basant poojan ..
Part3-015
जोवनमोर रोमावली सुफल फली कंचुकीवसंत ढांपिलिचली बसंत पूजन ॥ बरनवरन कुसुम प्रफुल्लित अंबमोर ठौरठौर लागेरी कोकिला कूजन | १॥ विविध सुगंध संभारि अरगजा गावत ऋतुराज राग सहित ब्रजवधूवन ।। सूरदास मदनमोहन प्यारी ओर पियसहित चाहतकुसल सदां दोऊजन ॥२॥
Basant
Mohan tein maati que‍yon khaai . thaade gwal kahat sub baalik
Part1-141
मोहन तें माटी क्‍यों खाई । ठाड़े ग्वाल कहत सब बालिक जे तेरे समुदाई ॥१॥ मुकरि गये मैं सुनी न देखी झूठेई आनि बनाई । दे प्रतीति पसारि वदन तब सब बसुधा दरसाई ॥२॥ मगन भई जसुमति मुख चितवत ऐसी बात उपजाई । सूरदास उर लाय लालकों लोन उतारत राई ॥३॥
Ramkali
Srivallabh abaneemen prakate nijajan roop
Part2-294
श्रीवल्लभ अबनीमें प्रकटे निजजन रूप निधानरी॥ प्रभु संबंध करदेहें मूहकर तू निश्चय जिय जानरी॥१॥ नंदनंदन इनसोंनहीं अंतर निशवासर कर जानरी॥ रसिक कहें लीला दरसेहें यह ठान्योहे ठानरी ॥२॥
Sarang
Sajnimote nayan gaye abalon aas raheen aavanaki harike
NityaPad-096
सजनीमोते नयन गये अबलों आस रहीं आवनकी हरिके अंगछये ॥१॥ जबते कमल बदन उनदरस्यों दिनदिन और भये ॥ मिले जाय हरदी चूना ज्यों एकहि रंग रये॥ मोकों त्यज भये आपस्वारथी वे रसमत्त भये || सूरस्थामके रूपसमाने मानों बूंद तये ॥३॥।
Ramkali
Brindavan neeko banyo doll || jhoolat krishna
Part3-373
बृंदावन नीको बन्यो डोल || झूलत कृष्ण तरणि तनया तट जहां मधुपन के टोल ॥ १॥ आस पास ब्रज बालक मंडली मधुप करत झकझोर ॥ फूली सरस सुगंध माधवी झूम रही चह्ूं ओर ॥२॥ ओर पुष्प कहां लों बरनों अगणित झूमक झोर ॥ तामें कोकिला शब्द सुहाये नाचत मधुरे मोर ॥३॥ चोवा चंदन ओर अरणजा केसर भरी हें कुमकुम घोर ॥ पिचकाई भरभर जु चलावत तक नव ऊरज कठोर ॥8॥ बाजे सरस सुहाये बाजत ताल मृदंग उपंग ॥ बाजत वीन बांसुरी महूबर ओर डफ ढोल मृदंग ॥५॥ हँस गावत करताल बजावत कहत होरिका होल ॥ डारत भरत अबीर सबे मिल भरत झोलका झोल ॥६।| सुख की सीमा वरनी न जाई भली बनी हैं जोर ॥ रस में ममन भये सब राजत कहा कह मति थोर ॥७॥ कहि मोहन जन प्रभु की लीला नवल किशोर किशोरी ॥ शोभा मोपें बरणी न जाय प्रमुदित चंद चकोरी ॥८॥
Devgandhar
Naval vrajrajko laal thaadho sakhee lalit sanket butt nikat
NityaPad-138
नवल ब्रजराजको लाल ठाढो सखी ललित संकेत बट निकट सोहे ॥ देखरी देख अनिमेष या वेषको मुकुटकी लटक त्रिभुवनजु मोहे ॥१॥ स्वेदकण झलक कछु झुकीसी रहेत पलक प्रेमकी ललक रसरास कीये || धन्य बडभाग वृषभान नृपनंदिनी राधिका अंसपर बाहु दीये २ मणिजटित भूमिपर नवलता रहीझूम कुंजछबि पुंज बरणी न जाई ॥ नंदनंदन चरण परसहित जान यह मुनिनके मनन मिल पांत लाई ॥३॥ परम अदभुत रूप सकल सुख भूप यह मदनमोहन विना कछुन भावे ॥ धन्य हरिभक्त जिनकी कृपा तें सदा कृष्ण गुण गदाधर मिश्र गावे ।।४॥
Khat
Yeh sukh kahyo kaunpe jaay .. barasganth aaee lalanki
Part1-016
यह सुख कह्यो कौंनपे जाय ॥ बरसगांठ आई लालनकी कोउ फूलतनअधाई ॥१॥ फूलत अति आनंद आनंद सब फूलत जसोमतिमाय ॥ फूलत कुंवरि भान सब फूलत आये रहसि बढाय ॥२॥ फूलत गोपवधू मुख निरखत आवत झुंड बनाय ॥ चंद्रावलि व्रजमंगल रोहनि आदर लेत बुलाय ॥३॥ सब सुखभरी कूख जसुमती की ताकी लेत बलाय ॥ श्रीविदलगिरिधरको सोहिलो पैयत देव मनाय ॥४॥
Devgandhar
Doll jhulaavat sub vraj sundari jhoolat madan geepal ..
Part3-377
डोल झुलावत सब ब्रज सुंदरि झूलत मदन गीपाल ॥ गावत फाग धमार हरख भर हलधर ओर सब ग्वाल ॥९॥ फूल कमल केतकी कुंजो गुंजत मधुप रसाल ॥ चंदन बंदन चोबा छिरकत उडत अबीर गुलाल ॥२॥ वाजत वेणु विषाण बांसुरी डफ मृदंग ओर ताल ॥ नंददास प्रभु के संग विलसत पुण्य पुंज ब्रजबाल ॥३॥
Basant
Maaee aajato gokulgam caso raho phulaken . grih phoole deese
Part1-060
माई आजतो गोकुलगाम कैसो रहो फुलकें । गृह फूले दीसे जैसे संपति समूलकें ॥१॥ फूलीफूली घटा आई घरहर घूमकें ॥ फूली फूली बरखाहोत झर लायौ झूमकें ॥२॥ फूल्यौ फूल्यौ पुत्र देखि लियौ उर लूमिकें॥ फूली है यशोदा माय ढोटा मुख चूमिकें ॥३॥ देवता आगिन फूले घृत खोँड होमिकें । फूल्यौ दीसे दधिकाँदी ऊपर सो भूमिके ॥४)। मालिन बॉधे बंदनमाला घरघर .डोलिकैं। पाटंबर पहराय अधिके अमोलकें ॥५॥ फूले हैं भंडार सब ढवारे दीये खोलिकें ॥ नंदराय देत फूले नंददास बोलिकें ॥६॥
Jejvanti
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