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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Aaj biraj mein horry haye rasiya ..
Part3-383
आज बिरज में होरी है रसिया ॥ बाजत ताल मृदंग झांझ ढफ और नगारे की जोरी रे रसीया ॥१॥ उडत गुलाल लाल भये बादर केसर रंग झकझोरी रे रसीया ॥ चंद सखी भज बालकृष्ण छबि चिरजीयो यह जोरी रे रसीया ॥२॥
Hori-Kafi
Horry khelein naval laal chitbat lochan bishal ..
Part3-205
होरी खेलें नवल लाल चितबत लोचन बिशाल ॥ करत हैं रति रंग ख्याल लिये संग ब्रजबाल ॥ चोबा चंदन कपूर बूका वंदन चूर कुंकुम पिचकारी भरि उड़व॒त अबीर गुलाल ॥१॥ सोंधो केसर लाय प्यारी पीय उरमिलाय आलिंगन परिरंभण अंजन दृग चुंबन गाल ॥ खेलत रस रंगरेल यमुना चले विविध केलि वल्‍लभ पिय निरखत छबि बारतले कंचन माल ॥२॥
Kaafi
Biharat haye jasuna naa jall sthaam.. raajat haye douu
Part2-342
बिहरत है जसुना ना जल स्थाम॥ राजत है दोऊ बांहा जोरि दंपति ओर ब्रज वाम ॥१ ॥ कोऊ ठाढी जल जानु जंघलों कोउ कटि हृदय ग्रीव॥ यह सुख बरनि सके एसो को सुंदरता की सीव ॥२ ॥ स्थाम अंग चंदन की आभा नागरि केसर रंग॥ मलयज पंक कुँमकुम मिलि के जल जमुना इक रंग ॥३ ॥ निस सत्रम मिट्यो तन आलस परिहार जमुना भई पावन॥ 'सूर' स्रम जल मध्य जुबतीगन जन के मन भावन ॥४॥
Bilawal
Dinahi dinn hott kanchuki gaadhi .. shyam jalad ghana
Part2-355
दिनही दिन होत कंचुकी गाढी ॥ श्याम जलद घन अति रस बरखत जोवन सरिता बाढी ॥१ ॥ अति भयभीत उरोज कुचन पर मोहन मुरति चाढीं॥ व्यास सखी दरशनकी प्यासा निकस किनारे ठाडी ॥२॥
Goud Sarang
Munn merey kii ichcha pooji aayo maas fagun koo
Part3-141
मन मेरे की इच्छा पूजी आयो मास फागुन को नीको ॥ लाज सकुच तजि सास ननद की दौरि गहूंकरसों कर पीको ॥१॥ अब मेरो कोऊ कहा करेगो यह तो औसरहे होरीको ॥ मेनभरी मूरति ब्रजपतिकी देखत दुःख मिटेगो जीको ॥२॥
Todi
Dekho tou
NityaPad-202
देखो तो मारगमें सब मिल आन कौन हों पठाई ॥ भूलपरी है कैधों विपिनमें पेंडो नाहि चलाई ॥२॥ किथों हमारे प्रेमविवशतन वापें चल्यो नजाई ।। किथों गोपाल लेले हो बोलत है गदगदस्वरन सुहाई ।३॥ रहे गोपाल अकेले जब तब ग्वालन निकट बुलाई ॥ आलिंगनदे महा अधररस सिरतें छाक उतराई ॥|४॥ टेर दई ग्वालनको मोहन ढिंगही छाक ह॒वेपाई ॥ रसिक प्रीतम को मधुरनाद सुन ग्वालमंडली धाई ॥५॥
Saarang
Houn parbhaat samein uthh aaee kamal nayan tumhaaron dekhan mukh ..
NityaPad-021
हों परभात समें उठ आई कमल नयन तुम्हारों देखन मुख ॥ गोरस वेचन जात मधुपुरी लाभ होय मारग पाऊं सुख ॥ १॥॥ कमलनयन प्यारोकरत कलेऊ नेक चिते मोतनकी जेरूख ॥ तुम सपने में मिलकैं विछुरे रजनीजनित कासों कहीयें दुःख ।।२॥ प्रीति जो एक लालगिरिधरसों प्रकट भई अबआय जनाई ॥ परमानंदस्वामी नागर नागरिसों ममनसा अरूझाई ॥। ३॥।
Bibhaas
Raas rachyau bunn kunwar kishori ..
Pustak1-349
रास रच्यौ बन कुँवर किशोरी ॥ मंडल बिमल सुभग बूंदावन यमुनापुलिन स्थामघन गोरी ॥१॥ बाजत वेणु रबाब किन्नरी कंकण नूपुर किंकिणी सोरी ॥ ततथेई ततथेई शब्द उघटत पीय भले बिहारी विहारिन जोरी ॥२॥ बरहा मुकुट भ्रकुटी तट आबत धरें भुजन में भामिन भोरी ॥ आलिंगन चुंबन परिरंभण परमानंद डारत तृणतोरी ॥३॥
Kedaro
Sakhee kesenk kaho harike rupco rasahi .. apanehi
Part2-367
सखी केसेंक कहो हरीके रूपको रसही ॥ अपनेही तनमें भेद बहुत विध रसना न जानत नयनकी दशही ॥१ ॥ जिन देखेते आहि वचन बिन जिन ही वचन दरशनन तरसरही ।| बिनबानी अति उगम प्रेमणजल सुमरसुमर यह रूप यशही ॥२॥ यह समझ पछतात मनहीं मन कहा करों मोहि विध नहिं नशहीं॥ सूर सकल अंगनकी यह गति कहा रच्यो बिध पक्ष द्वय रसहीं ॥३ ॥
Sorat
Giridhar gend maangat aaya .
Part2-234
गिरिधर गेंद मांगत आय । सेजतें उठ झांकत इत उत बैठे जहां नंदराय ।। १॥। मधुर वानी सुन सयानी आई रोहिनी धाय । “कृष्णदास' के प्रभुकी मंगल आरती करत जसोमति माय ।। २।।
Lalit
Nandmahar ghar pragaten shyam | gopijan anand hulsiken .
Part1-024
नंदमहर घर प्रगटें श्याम | गोपीजन आनंद हुलसिकें । परममुदित गावत गुण ग्राम ॥१॥ गोप सबें मिलि भेटि ले आये होरा रत्न बहुत धरिदाम ॥ सुरदास प्रभुको मुख निरखत पूजे सकल मनोरथ काम ॥२॥
Bilawal
Yavilovne oopar varorimai kotinaanch ..
NityaPad-180
याविलोवने ऊपर वारोरीमाई कोटिनाँच ॥ छबिसोंडूलत कटिपरवेनी दधिकी घुमड और क्वणितवलयक्षुद्रघंटिका ध्वनिसुन नूपरकरतसांच ॥१॥ गौराकृति अतिशोभित मानोंश्रमकणवदनतामें कनकलागी आंच ॥ धोधीकेप्रभु रसवशकरलीनें येहीगतिभेदनपावे यानेतीकी खेंचखांच ॥॥२॥।
Bilawal
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