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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Koo jeetyau kinn maani haar .. tum haare vavrajraj ladaite humm jeetin | Part1-264 | को जीत्यौ किन मानी हार ॥ तुम हारे वब्रजराज लड़ैते हम जीतीं
उदैभान कुबार ॥१॥ और सब जीती फूफी हमारी हमहूँ तो कछु लगत
तुमारे॥ तुम दानी हम दान चुकावत जीतनमें को बहुत जितारे ॥२॥ मेरौ
दान लियें तुम ठाढ़ी तुमती जीतत बात बनाई ॥ श्रीविद्नलगिरिधरनलाल की
ललिता होई ओर किन आई ॥३॥ | Poorvi |
Yashoda tohi baandhat kyon aayou | kasakayau naheen nenk munn | Part1-143 | यशोदा तोहि बाँधत क्यों आयौ | कसकयौ नहीं नेंक मन
तेरी याही कोहू जायौ ॥१॥ शिव विरंचि महिमा नहीं जानत सो तो गाय संग
धायौ । तातें तू पहचानत नाँही कौन पुन्य तें पायौ ॥२॥ इतनी कहि उसकारत
बाहिं गोरस हित बल छायौ | कहा भयौ जो घरके लरिका चोरी माखन
खायौ ॥३॥ अपने कर करि बंधन छोड़े प्रेम सहित उर लायौ । सूर सुबचन
मनोहर कहि कहि अनुज सूल बिसरायोौ ॥४॥ | Bilawal |
Radhika raman kii muralika shravan suni bhawan grih kaaj | Part1-296 | राधिका रमन की मुरलिका श् रवण सुनि भवन गृह काज
तज गमन कीयौ भामिनी ॥ नाद रस बिवश भईं आन गति छूट गईं बिपिन
आतुर चलीं रूप अभिरामिनी ॥९॥| निकट पियके गई रसिक कर गहि लई
गिरिधरन श्यामघन जुबती सौदामिनी ।। करैं वासर केलि कंठ पर भुज मेलि
चतुर संग चत्रभुजदासकी स्वामिनी ॥२॥। | Kedaro |
Manato harike haath bikaanyon .. nikasyo maan guman sahit | NityaPad-095 | मनतो हरिके हाथ बिकान्यों ।। निकस्यो मान गुमान सहित
बहमें यह होत न जान्यों ॥१॥ नयननसाट करी मिलनयनन उनहींसों रुचि
मान्यों। बहुत यतन करहों पचिहारी फिर इतकों न फिरान्यों ॥२॥ सहज
सुभायठगोरी परी सीस फिरत अरगानों ॥ सूरदास प्रभु रसवश भई गोपी बिसर
. गयो तन ज्ञानों ॥ ३॥। | Ramkali |
Jai shrilakshman suban naresh.. prakatbhaye pooran | Part2-294 | जै श्रीलक्ष्मण सुबन नरेश॥ प्रकटभये पूरण
पुरुषोत्तम कलियुग धारें द्विजबर वेश ॥१ ॥ जान जन्म दिन हरख हरख
मुनि बरखत कुसुम सुदेश ॥ गयो तिमिर अज्ञान तुरत नश मानो उदित
दिनेश ॥२ ॥ नखशिख रूप कहांलों बरनों पार न पावतशेष ॥ विष्णुदास
प्रभु मुख अवलोकत पल नही परत निमेष ॥३ ॥ | Sarang |
Sriganga jagataaran koo aaee.. bhagirath tapasya | Part2-336 | श्रीगंगा जगतारण को आई॥ भगीरथ तपस्या
कीनी शिवले सीस चढाई ॥१ ॥ पापी दुष्ट अजामिल गणिका पतित परम
गति पाई ॥ परम पुनीत प्रीत ब्रह ्मादिक वेदव्यास मिल गाई ॥२ ॥ नाम लेत
तुम ध्यान धरतहें तारत वार न लाई॥ विप्र गदाधर भारद्वाज कुल केवल
गंगा सहाई ॥३ ॥ | Bibhaas |
Aaj sakhee mohan atee baney. sees tiparo farharat baruhachand | NityaPad-171 | आज सखी मोहन अति बने। सीस टिपारो फरहरात बरुहाचंद
अलक बीच चंपकली अति गने ॥९॥ लाल काछ कटि छुद्रघंटिका नूपुर
रुनझुनात गति लेत ग्रग्रता ग्रग्रता तत तरंग सने ॥ गोविन्द प्रभु रसभरे नृत्य करत
सकल कला गुन प्रवीन व्रजनुपति निपुने ॥२॥। | Yaman |
Bhari-bhari dhari-dhari aavat gagar tuu kaun key russ bharee ! aur dinan tum ekahi | NityaPad-274 | भरि-भरि धरि-धरि आवत गागर तू कौन के रस भरी ! और दिनन तुम एकहि
बिरियां जात ही पनियां आज केऊ बेर गई ऐसे कहा भयो बिनु देखे हरी ॥१॥।
जो तू सास ननद की काम करेगी तो तू अपने कुल डरेगी री ॥ 'हरिदास ठाकुर
को प्रभु है रूप विमोहन नैन प्रान गये सब ढरेगी री ॥२॥ | Sorat |
Madan mohan saun preeti curry main kahaa bhayo joe kouu mukh moyi . | NityaPad-098 | मदन मोहन सौं प्रीति करी मैं कहा भयो जो कोऊ मुख मोयी ।
इह ब्रततें हों कबहु न टरिहौं जानि सबनिसों नातो तोर्यों ॥ १॥॥ सास रिसाऊ मात
गृह ब्रासौं हों पतिसों मानहुँ घट फोर्यो | कुंभनदास गिरिधरसों मिलिहौ आरज -
पथ हौं सबनिसों छोयों ॥॥२॥। | Saarang |
Jey hilgan kathin haye yamanaki .. jaake liyein sunon merisjani | NityaPad-089 | जे हिलगन कठिन हे यामनकी ॥ जाके लियें सुनों मेरीसजनी
लाजगईसबतनकी ॥|१॥ लोकहसो परलोकहिजाओ ओर देओ कुलगारी ॥
सोक्योरहे ताहि विनदेखें जोजाकोहितकारी ॥२॥ रसुलब्धनिमिषनहीं छांडत
ज्यों आधीनमृगगानें । कुमनदासस्नेहमरमकी श्रीगोवर्द्धनधर जानें ॥। ३॥। | Ramkali |
Kiyo gopalco sub hoy .. | NityaPad-352 | कियो गोपालको सब होय ॥
जो जाने पुरुषार्थ आपनो अतिकर झूठो सोय ॥|१॥
दुखसुख लाभअलाभ सहज गति ताहि न मरिये रोय ॥।
जो कछुलेख लिख्यो नंदनंदन मेंट सके नहिं कोय ॥ २।।
उद्यम साधन जंत्रमंत्र विधि ये सब डारो धोय ॥|
परमानंददासको ठाकुर चरणकमल चितपोय ।।३॥ | Bihaag |
Chalhu gopal bolat mehtari .. parosethar dharemag chitwat | NityaPad-075 | चलहु गोपाल बोलत महतारी ॥ परोसेथार धरेमग चितवत
नयनन आंसू डारी ॥१॥ विविध भांत पकवान मिठाई मेवा मिश्री ठानी ॥
रामदासप्रभु रसिक छबीलो ब्रजयुवतिन सुखदानी ॥२॥ | Dhanshree |
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