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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Aaj bunn thhan vraj khelan faag nikasyo nand dularo ..
Part3-137
आज बन ठन ब्रज खेलन फाग निकस्यो नंद दुलारो ॥ फब्यो है ललित भाल लालकें जटित लाल टिपारो ॥१॥ बडरे बंक विशाल नयन छबि भरे इतराई ॥ बन्‍्यो हे मंजुल मोरचंद चलत देखत छांई ॥२॥ उतबनी ब्रज नवकिशोरी गोरी रूपही भोरी ॥ बोरी प्रेम रंग में मानो एकही डारकी तोरी ॥३॥ ब्रजकी बालले गुलाल मोहनलाल छाये ॥ मानो नील घनके ऊपर अरुण अंबर आये ॥४॥ ताही धूंधर मक्मत्त भ्रमर भ्रमत एसें ॥ बनीहे छबि विशाल प्रेम जाल गोलक जेसें ॥५॥ बन्‍्यो हैं जलजंत्र खेल छूटि रंग की धारें ॥ जानों धनुधंर सरनलरत धारसो धार मारें ॥६॥ और कहां लगि कहिये खेल परम रस की मूली ॥ गावत शुक शारद नारद शिव समाधि भूली ॥७॥ जहीं जहीं हरि चरित्र अमृत सिंधु सो रति मानी ॥ नंददास ताकों मुक्ति लोनकोसो पानी ॥८॥
Maru
Aaju sakhee terein aavainge, hari khelan koo
Part3-315
आजु सखी तेरें आवैंगे, हरि खेलन को फाग री ॥ सगुन सँदेश सुन्‍्यौ हो तेरैं आंगन बोले काग री ॥ मनमोहन तेरे बस माई ॥ सुनि राधे बड़भाग री ॥ बाजत ताल, मृदंग, झांझ, डफ, का सोबै, उठि जाग री ॥ चोबा चंदन लै कुमकुम अरू केसरि, पैयाँ लाग री ॥ सूरदास प्रभु तिहारे दरसन, आवत अचल सुहाग री ॥
Shri Hatee
Masdinakou chauk aaj naidrani baithi dhota liyein. haath poyi
Part1-135
मासदिनाकौ चौक आज नैदरानी बैठी ढोटा लियें। हाथ पॉइ माँडे रोरीसों पीरे अक्षत माथें दियें ॥१॥ नैंदराय और मात यशोदा रहसि कहत येही दिन आयो | इन आँखिनसों हमें विधाता लालकौं तीसरी चौक दिखायी ॥२॥ फूलि फूलिकें सब व्रजनारिन आछे मंगल गाये । अपने अपने घरके द्वारें सब मिलि बाजे फेरि बजाये ॥३॥ रहसि कहत सबै दुहु वन बहु विधि हमरे अभिलाष पूजाये | श्रीविद्रनगिरिधर दोऊके तुम मैया ये बाप कहाये ॥४॥ # राग सारंग # आनंदराय गृह गावति खेलति आवति है व्रजनारी । नये नये आभूषन अंग पहरे अरु तन उत्तम सारी ॥१॥ बैठी जुरी नंदगृह देत परस्पर गारी । मेवा वॉटि करत नौछावर गोपवधू निज भारी ॥२॥ तुमरे ढोठा पर नेंदरानी हम सगरी बलिहारी ! सब सुख दीने प्रगट श्रीविद्॒ल नंद कुँवर गिरिधारी ॥३॥
Saarang
Srivallabhalal paalane jhoole maat ilamma jhulaave hoe ..
Part2-325
श्रीवल्लभलाल पालने झूले मात इलम्मा झुलावे हो ॥ निरख निरख छबि अपने लालकी तनकी तपत बुझावे हो ॥१॥ कठुला कंठ बच्रके हरि नख ह्वे दतियां दरसावे हो | भाल विशाल तिलक गोरोचन व लजावे हो ॥२॥ कबहुक सर खिलोना लेले नाना भांति हो ॥ सगुणदास प्रभु शिशु व्है पोढे श्रीवल्लभ दरस दिखावे हो ॥३ ॥
Aasawari
Yeh gujari joban madmati khelat giridhar sanga ..
Part3-299
यह गुजरि जोबन मदमाती खेलत गिरिधर संग ॥ यामें गूढमंत्र मोहनको लोभ्यो ललित त्रिभंग ॥१॥ चंचल चपल कठाक्ष कोर जब चलत चितवत भाय ॥ मुरली ध्वनि विसराय रहे हरि इकटक दृष्टि लगाय ॥२॥ कमल नालले लटक लटक जब नियरे आवत बाल ॥ चित्र लिखे ज्यों रहत मनोहर ओहोट जात सब ज्वाल ॥३॥ कुंकुम रंगभरी पिचकारी सनन्‍्मुख छोडत आय ॥ जाकें लगत बिचार रहत मन ठगके लड़वा सवाय ॥४॥ मदन छबीले विफरे डोलें बोलत छूटे वेन || घाइल न्हे जुगिरतरण रतिके ज्यों विन पाये मेन ॥५॥ सुरंग गुलाल उडाय अचानक डारत मुठी अबीर || हाव भावकर मत्त छेलकों विकल होत मनधीर ॥६॥ पांच सखिनसों मिलललके मिलगावत मीठी गारि ॥ सुन चोंकत चितचतुरको पियडारत सर्वस्व वारि ॥७॥ यह रस मजन सबे व्रजवासी घरघर खेलें फाग ॥ ब्रजपति प्राणपिया विलसत ऊर अंतरको अनुराग ॥८॥
Gouri
Aathein bhadonki andhiyaari . garjat gagan damini kondhati
Part1-064
आठें भादोंकी अँधियारी । गरजत गगन दामिनी कोंधति गोकुल चले मुरारि ॥१॥ शेष सहख्र फन बूँद निवारत सेत छत्र शिर तान्यौ। बसुदेव अंक मध्य जगजीवन कहा करैगौ पान्यो ॥२॥ यमुना थाह भई तिहिं औसर आवत जात न जान्यी । परमानंददासको ठाकुर देव मुनिन मन मान्य ॥३॥
Kanharo
Kalindi kalikalmash harni, ravitnaya yamanuja sthaama
NityaPad-014
कालिंदी कलिकल्मष हरनी, रवितनया यमअनुजा स्थामा महासुंदरी गोबिंदघरनी ॥।९॥ जय यमुने जय कृष्णवल्लभा पतितन को पावन भवतरनी, सरनागत को देत अभय पद जननी तजत जस सुतकी करनी ॥।२॥ सीतल मंद सुगंध सुधानिधि धाई धर बपु उत्तर धरनी, परमानंद' प्रभु परम पावनी युग युग साख निगम नित वरनी ॥ ३॥
Bhairav
Mein apano manhariso jore‌you .. harison jore sabnason torr‌you ...
NityaPad-092
में अपनो मनहरिसो जोर्‌यो ॥ हरिसों जोर सबनसों तोर्‌यो ॥। नांचनच्योत बघूंघट कैंसो लोकलाज डर पटकपिछोरदो ॥१॥ आगे पाछें सोचमिट्यो जियको बाटमाझ मटुकालेफोरणञो ॥ कहनो होय सोकहो सखीरीकहाभयो काहूनेमुखमोरञ्यो ९ नवललालगिरिधरन पियासंगप्रेमरंगमें यहतनबोरद्यो ॥ परमानंदप्रभु लोग हसनदे लोकवेदतिनुका ज्योंतोरद्यो ।। ३॥
Dhanshree
Mangarh kyon huun natootat abalaake balko prataap .. aapan
NityaPad-121
मानगढ क्यों हूं नटूटत अबलाके बलको प्रताप ॥ आपन ढोवाचढ गिरिधरपिय अबलातू चिलाचांप मुक्तकटाक्ष घूंघटदरवाजो नहीं खूटत ॥१॥ विविध प्रणतहथ नालगोला बोलेंजू उछटपरत काम कोट नहीं फूटत ॥ गोविंदप्रभु सामदाम भेद दंड कर घेरापरञ्यो चहूं दिशसंचित रुख्याई जलक्योंहूँ नहीं खूटत ॥। २॥॥
Kedaro
Khelat aaya dhaay baithe vrajrajki god ..
NityaPad-291
खेलत आय धाय बैठे ब्रजराजकी गोद ॥ मुख चुंबनकर आन लेतहैं मनमें मानत मोद ॥१॥ सुंदर कर उगार मांगत है चितये तातकी कोद ।। गोविंद कहें चलो भोजन भयो बोलत मातयशोद ॥ २।॥।
Gori
Kreedat manimraya anganrang...
NityaPad-058
क्रीडत मणिम्रय आंगनरंग॥। पीत ताफस्ताकी झगुली बनीहे कुलही लालसुरंग।॥। १॥ कटिकिंकिणी घोषविस्मित सखीधाय चलत बलसंग।॥। गोसुत पूंछ भ्रमावत करगहिं पंकरागसोहे अंग ॥२॥ गजमोतिन लरलटकन शोभित सुंदर लहरत रंग | गोविंदप्रभुके जु अंगअंगपर वारों कोटि अनंग ॥३॥
Dhanshree
Kumudaban bhalee pahunchi aaya .. sufal bhaee haye chhaak tihari laal kadamtar paay ..1.. tahaante
NityaPad-202
कुमुदबन भली पहुंची आय ॥ सुफल भई है छाक तिहारी लाल कदमतर पाय ॥१॥ तहांते उठ चले मानसरोबर संग सखा सब लाय ॥ बैठत तहां ठौर गिरिऊपर चरत चहूं दिश गाय ॥२॥ खेलत खात हँसत परस्पर बातें कहत बनाय ॥ रामदास बलबल बूझनकी कहा कहा व्यंजनलाय ॥३॥
Saarang
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