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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Aajabani vrishbhaankunvaridriti anchalvaarat trinatorat kahentabhaleju bhalein bhaama .. | NityaPad-120 | आजबनी वृषभानकुंवरिदृती अंचलवारत तृणतोरत कहेंतभलेजु भलें भामा ॥
वदनजोति कंठपोति छोटी छोटी लरमोतिन की सादाशुंगारहार कुचविच अतिशोभितहें बोरसरीदामा ।। १॥
एकरसनां गुणअपार केसेंक वरणों विशद्की रति अंगअंग पियनमत अभिरामा ॥
गोविंदबल सरबी कहें रचिपचि विरंचि कीनी स्यामरमणको माई तूहीहे श् यामा ।।२॥ | Kanharo |
Praatasmein uthiyashomati dadhimanthankinon .. premsahit navnitale | NityaPad-181 | प्रातसमें उठियशोमति दधिमंथनकीनों ॥ प्रेमसहित नवनीतले
सुत के मुखदीनों ॥ १॥ ओटेद्धघैयाकियो हरिरुचिसोलीनों॥ मधुमेवापकवानले
हरिआगेकीनों ॥२॥ यह विधिनित्यक्रीडाकरें जननी सुख पावे ॥ गोविंद प्रभु
आनंदसों आँगनमेंधावे ॥। ३।। | Bilawal |
Horry khelati vraj kunjan mahiya .. nand nandan | Part3-225 | होरि खेलति ब्रज कुंजन महिया ॥ नंद नंदन
सौं अति रति बाढ़ी लाड़िली बिहरति कदंब की छेया ||१॥ पौढ़न के समे
के औसर और न कोऊ रघह्नौ तिष्ठि सैया ॥ 'सरस रंग”-संतत यह जोरि
पीतम प्यारी बिना कोऊ नहिया ॥२॥ | Kafi |
Aao mill vrajki naari horry dhoom machaao .. | Part3-313 | आओ मिल ब्रजकी नारी होरी धूम मचाओ ॥
चंदन वंदन कुमकुम ले मोहन मुख लगाओ तारी दे मारी गाओ ॥ १॥ केसर-
केसर कनक पिचकारी भरि ले करन धाओ ॥ हरि किसोरी सन्मुख होय
धारसों धार मिलाओ ॥२॥ | Gouri |
Yashodamathmathpyavat ghaiya .. | NityaPad-196 | यशोदामथमथप्यावत घैया ॥
कर त्तबकडी धरतहैं आगें रुचिसोंलेत कन्हैय ा ।। १॥
बहोर धरत हरि लेत है पुनिपुनिसुंदरस्याम सुहैया ॥
ओट्योदूध धर्योबेलाभर पीवत कान्ह नन््हैया ॥२॥|
मनमोहनभोजनकों बैठे परोसतले कर मैया ।।
खट रसके प्रकार धरे सब निरख रसिक बल जैया ॥ ३।। | Bilawal |
Banamen sthaam charawat gaiya .. bundaavanmein | NityaPad-205 | बनमें स्थाम चरावत गैया ॥ बुंदावनमें
बंसी बजाई बैठे क्दंबकी छैया ॥१॥
भांति भांति के भोजन करकें पठये यशोमति मैया ॥
सूरदास प्रभु तुम चिरजीयो मेरो कुंवरकन्हैया ॥३॥ | Saarang |
Harimarag jovat bhaee saanjh. dinmani ast bhayo godhurak aavat | NityaPad-173 | हरिमारग जोवत भई सांझ। दिनमनि अस्त भयो गोधूरक आवत
बने मंडली मांझ ॥१॥ बाजत बेनु रेनु तनमंडित वनमाला उर लोचन चारू |
बरूहा मुगट स्वन गुंजमनि वनज धातुको तिलक सिंगारु ॥ २॥ गोपी नेन भूंग
रसलंपट सादर करत कमल मधुपान | विरहताप मोचन परमानंद मुरली मनोहर
रूपनिधान ॥। ३।। | Gori |
Tum hita banban bahu dolly .. navalarasik navnagar giridhar | NityaPad-308 | तुम हित बनबन बहु डोली ।। नवलरसिक नवनागर गिरिधर
कहि कहिके बोली ॥१॥। तज जियलाज कान गुरुजनकी कपट कंचुकी खोली ॥।
ऐसे मिली नवल ब्रजभामिन मनमथ मनमथ टोली ॥ २॥ | Kalyan |
Sheetal suvas atihi chhirakyyo | NityaPad-248 | शीतल सुवास अतिही छिरक््यो
गुलाब रस खसखानो । मध्य निर्मल जंत्र जल कृत पवन जाड़ो लागत हेमन्त
ऋतु याही ठोर अब आय रही हे मानो ॥१॥ अत्तर अरगजा सोहे पान फूल
तेसोई राग रंग सुंदरि त्रियन संग एसेंई मन आनंद आनो । प्रभु विचित्र गिरिधर
पिय तुम योंही ग्रीष्म ऋतु जुग वर बानों ॥१॥ | Saarang |
Jasoda maiya lalakon jhulaavai. aaen baare kaanhakin hulraavai. | Part1-111 | जसोदा मैया लालकों झुलावै। आएं बारे कान्हकीं हुलरावै।
कनियाँ कनियाँ अईयाँ अईयाँ यों कहि लाड़ लडावै । ह॒लुलुलु हलुलुलु हैं हो हाँ
हाँ कहि कै गोद लियें खिलावै ॥१॥ दोऊ कर पकर जसोदा रानी ठुमकी पाँय
धरावे । घननन घननन घुँघरुबाजें, झाँझरियाँ झ्मकावै ॥२॥ सूरदास
मदनमोहनकों याही भाँति रिझ्ावै । म॑ म॑ म॑ म॑ पप् पप् पप् पप् चच चचू चचू चचु
ततू ता थेई यह बिधी लाड़ लड़ावै ॥३॥ | Aasawari |
Maadho yeh prasaadahaunpaaun.... | NityaPad-367 | माधो यह प्रसादहौंपाऊं।॥।
तुब भृत्य भुत्य भक्त परिचारक दासको दास कहाऊं ॥।१॥
ये परमारथ मोहिगुरुसिखयो श्यामाश्यामकी पूजा ॥
यह बासना बसो जियमेरे देव न देखदूजा ॥ २॥
परमानंददास तुम ठाकुर यह नातो जिनटूटो ॥।
नंदकुमार यशोदानंदनहिलिमिलि प्रीत न छूटो ॥३॥ | Kedaro |
Mokul sakal gwalini sub mill khelein faag .. | Part3-286 | मोकुल सकल ग्वालिनी सब मिल खेलें फाग ॥
तिनमें श्रीराधा लाडिली जाको परम सुहाग ॥१॥ झुंडन मिल गावत चली
झूमक नंद के द्वार ॥ आज परव मिल खेलें हम तुम नंद कुमार ॥२॥ रसिक
कुंवर सुंदरवर राधा जीवन प्रान ॥ मोहन बदन दिखाबहो दुरोतो नंदकी
आन ॥ ३॥ प्रगट प्रीति गोकुल भई अब कहा करो दुराव ॥ हँमनदरसबिन
जीवें कोझ करो चबाव ॥४॥ जसोदा के सुतचित चुभिरही यह तुझ्यारि
मुसक्यान | अबन अनंत रुचि उपजे सहज परियहबान ।|५॥ दुरत लाल
भलें पाये राधा भर अंकबार॥ कनक कुंडी केसर भरी लेदोरी ब्रजनार ॥६॥
भरो भरो सखी श्याम की पीत पिछोरी पाग ॥ देहगेह सुधि भूली नंदनंदन
अनुराग ॥७॥ चोबा साख कुंकुमा गोरा मदे जवाद ॥ हस हस हरि पर डारत ओर नाना फुलवाद ॥८॥ छूटे केस कंचुकी बंदटूटी मोतिन माल ॥
करतल ताल बजावें गावें गीत रसाल ॥॥ गगन विमान न छायो सुरनर
कौतुक भूल || जय जय शब्द उचारें आनंद वरखें फूल ॥१०॥ लाल गोपाल
कुपाबिन यह रस लेन कोय || हरि वृषभान किशोरी की कथा मगन मन
य ॥११॥ | Gouri |
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