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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Abb mukh-mukh maadongi gahi paaye hoe mohan ..
Part3-279
अब मुख-मुख माडोंगी गहि पाये हो मोहन ॥ लिये गुलाल फिरत हों कबकी तकन बनी कछु गोहन ॥१॥ काजर देह बनाय लालकें यों लागे गोसोहन ॥ अब अपनो मन भायो करहों कहा नचावत भ्रोंहन ॥ २॥ सुधकीजे पहली बातनकों लगे ठगे से जोहन ॥| उदय राज प्रभु या अवसर हों नेंकनकरों बिछोहन ॥३॥
Goud Malhaar
Shree balal‍labh karuna karke mohe keeje niz daasan koo daas.
Part2-324
श्री बलल्‍्लभ करुणा करके मोहे कीजे निज दासन को दास। पूरण काम है नाम तिहारो इतनी मो मन पूर हो आस ॥१ ॥ तिहारी कृपा करठाक्ष तें दुर्लभ पाइये सुलभ करों ब्रजवास | तिहारे सेवक जन संगत बिनु निसदिन मो मन रहत उदास ॥२॥ श्रीवृन्दावन गिरि गोवर्द्धन श्री यमुना तट करूँ निवास । श्री हरि बदन चंद सु विमल यश गान करत सुर सदा अकास ॥३ ॥ कृपा निधान कृपा कर दीजे जो सब लोक मिटे उपहास। दीजे दिव्य देह गोविंद को इन दृग निरखों अनुदिन रास ॥४ ॥
Bihaag
Palana pai paudhe hari jhoolat charan aangootha mukh raakhe . maanon
Part1-108
पलना पै पौढ़े हरि झूलत चरन आँगूठा मुख राखे । मानों की सुरसरि मधुर जानि जग आई मधुरकौ रस चाखे ॥१॥ किधों अनल सुत भक्तिरस स्वादनकों वेणु द्वारा अमृतरस बरखे । किधों अनल सुत नरभावनकों चरणोदक दे आ करखे ॥२॥ किधीं ब्रह्मादिक बिभ्रमकारने के बिधु कंज मिलापकरे । द्वारशेश बली मुग्धभाव लखि नैन निमीलत अंकभरे ॥३॥
Aasawari
Shree vall‍labh santat suyash nitya uthh gaaruun...
NityaPad-001
श्री वल्‍लभ संतत सुयश नित्य उठ गारऊं।॥ मनक्रमवचन क्षण एको न विसराऊं ॥१॥ श्रीपुरुषोत्तम अवतार सुकृतफल जगतबंदन श्रीवि्ठलेश हुलराऊं ॥ परस पदकमलरज निरख सुंदरनिधि प्रेमपपुलकत कलेश कोटिक नशाऊं॥२॥ श्रीगिरिधर देवपतिमानमर्दन करन घोखरक्षक सुखद लीला सुनाऊं॥। श्रीगोविंद ग्वालसंग गाय ले चलत वन विशद अंबुज हाथ शिर परशाऊं।॥।३॥ श्रीबालकृष्णसहज बालकदशा कमललोचन रंग रुचि बढाऊं ।। भक्तिमार्ग प्रकटकरण गुणराशि ब्रजमंडल श्रीगोकुलनाथ लडाऊं ॥।४॥ श्रीरघुनाथ धर्मधीर शोभासिंधु दुख दूर बहाऊं।॥ पतितउद्धारण महाराज श्री यदुनाथ रसनाचातक ज्यूं रटाऊं ॥५॥ श्रीघनश्याम रूप अभिराम रसिकरस निरख नयन सिराऊं ॥ चतुर्भुजदास पर्‌यो द्वारे प्रणपति करें श्रीवललभकुलचरणामृत भोर उठ पाऊं ॥६॥।
Bhairav
Abahi daan lehuun russ goraskau dekhiyat haye mukh
Part1-254
अबही दान लेहूँ रस गोरसकौ देखियत है मुख लैनकौ ॥ जानतहों जू ऐसें और ठौर गीद रहे सूधे द्वै रहो जू कापर करत रोस नैनकौ ॥१॥ छाँड़िदि पट नातर कहूँगी जाय नंदजू सों कथनियों कथत तू जो ग्वाल थैनकौ ॥ कल्याणके प्रभु यशोदा आगें जाय कहीं बहोरि उत्तर न आवे त्रिय बेनकी ॥२॥
Shyam Kalyan
Nandaraani harinhi ladayaavai . rattan jatit paudhaay paalnen prem
Part1-095
नँदरानी हरिंहि लड़यावै । रतन जटित पौढ़ाय पालनें प्रेम नेह हुलरावै ॥१॥ कमलनैन मुँदि कर किलकत यों कर चरन चलावै । लै बलाय सुंदर मुख चुंबत उर आनंद बढ़ावै ॥३॥ पोंछत आँखें पलकन भाल डिटौना बनावे । राई लोन उतारि शीशतें केहरि नख पहरावै ॥३॥ मानत सुफल जनम अपनों करि जिय अभिलाष बढ़ावै । देहु वर निज उदैराजप्रभु जग गोपाल कहाबै ॥४॥
Ramkali
Saanjh bhaee ghar aavahu pyaare ..
NityaPad-292
सांझ भई घर आवहु प्यारे ॥ दौरत कहा चोटकहुं लागे पुनि खेलोगे होइ सकारे । १॥॥ आपही जाई बांह गहि लाई कंठ रहे लपटाई ॥ धूर झार तातो जललाई तेल परसजु नहवाई ॥२॥ सरस वसन तन पोछ स्यामकों भीतर गई लिवाई ।। सूरस्थाम कछु करो बियारू पुनिराखों पौढाई ॥३॥
Gori
Ladley lalki bandas kahee napreho || kulhe champak bhariho atee
NityaPad-166
लाडले लालकी बंदस कही नपरेहो || कुल्हे चंपक भरीहो अति सुरंग और लटपटी पाग रही आधे सिरधस ॥॥१॥ वरुणी पीत हरे छूटी बंद अरगजामोजैसो स्थाम उरस ॥ गोविंदप्रभु सुरत शिथिल दंपति प्रेम गलित बैठी कुंजमहलतें निकस ॥२।॥।
Iman
Yashumati thaar paros dharayathohe tuho bulaave chalo douu bhaiya ..
NityaPad-076
यशुमति थार परोस धरयथोहे तुहो बुलावे चलो दोऊ भैया ॥ बावानंदकी गोदबेठकें भोजनकरो हों लेहुं बलैया ।।१॥ पाछे करो केलि मनमोहन तुमको देहों बहुत मिठैया ॥ गोविंदप्रभु गिरिगाजधरन चले बैठी जहां यशोदामैया ॥२॥
Dhanshree
Anand bhawan vrishbhaanken . jaaee sutaa bhaay keerati varr aisee
Part1-192
आनंद भवन वृषभानकें । जाई सुता भाय कीरति वर ऐसी कुंवरि नहीं आनकें ॥१॥ नहिं कमला नहिं शची नहिं रति सुंदररूप समानकें। चतुर्भुज प्रभु हुलसी ब्रजवनिता राधामोहन जानिकें ॥२॥
Saarang
Laal neck dekhiyen bhawan hamaro..
Part2-243
लाल नेक देखियें भवन हमारो॥ द्वितीयापाट सिंहासन बैठे अविचल राज तिहारो ॥१ ॥ सास हमारी खरिक सिधारी ४९९०७ बाबा मास व यह एकांतहे कल ॥२॥ ध सद्य श्याम घन पीजे ॥ परमानंददासको ठाकुर कछु कहो हमारो कीजे ॥३ ॥
Saarang
Peetam pyaari kai sanga horry garey-laag piya khelain ..
Part3-075
पीतम प्यारी कै सँग होरी गरे-लाग पिय खेलैं ॥ चोवा चंदन अरूु अरगजा अबीर गुलाल उडाबैं केसरि रँग पिचकारी भरि भरि पीया पिय पै मेलैं ॥१॥ ताल परव्रावज बीन बाँसुरी ढ़फ मुख चँग बजावें तारी दै दे गारी गाबवै करति परसपर केलैं ॥ हाथ जोरी करि नाँचें सगन मन माँही मोह़े ॥ सुर नर “ब्रजपति' की छबि निरखि अति छबिली छेले ॥२॥
Bhairav
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