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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Banaspati phooli basant maas .. rasik janan
Part3-050
बनसपति फूली बसंत मास ॥ रसिक जनन मनभयो हुलास ॥धु०॥ श्रीगोकुल फूल्यो अति रसाल ॥ बाजे चंग मुदंग्रा उपंग ताल ॥ सोहे सुंदर तिलक बनायो भाल ॥ गोपी छिरकति केसरि भरि गुलाल ॥ १॥ ब्रजजन फूले अंग अंग ॥ फाणशु खेलति हलधर कृष्णसंग ॥ फूले गोपीग्वाल मिलि युवतीजूथ ॥ मानोप्रगट भयोडै कामदूत ॥२॥ बुंदावन फूल्यो कुंजकुंज ॥ जमुना जल फूले करतिगुंज फूल कमल कली लीयें भंवर बास ॥ फूले खग बोलति आसपास ॥ ३॥ गोवर्धन फूल्यो ठोरठोर ॥ फूले पांडर केशू अंबमोर ऐसी शोभा बिलसे बायोंमास || फूलेजन गांवें माधोदास ॥४॥
Basant
Bhojan karat deva bhaye person.. mango nand tumaaren joe munn..1..
Part2-074
भोजन करत देव भये परसन॥ मांगो नंद तुमारें जो मन॥१॥ भली करी तुम भेरी पूजा॥ सेवक तुमतें और न दूजा ॥२ ॥ जो मांगो सोई हमदेंहें॥ जहां भाव ताही पैं रेहें ॥३ ॥ में सेवा बश भयो ॥ जो फल चाहो लेहु सवारे ॥४॥ यहसुन चक्रत भये नरनारी ॥ कियो प्रथमही भारी ॥५ ॥ अब देखो मुख बात कहत हैं॥ एसो देव कहां त्रिभुवनहें ॥६ ॥ कान्ह कह्यो कछु मांगो इनसों॥ गिरिदेवता देत परसनसों ॥७॥ सूर श्याम देवता आपें॥ व्रजजनके त्रयहरत तापहें ८ ॥
Bilawal
Nirtat gopal laal adbhut nutt bhesh dharein gaan karat
Part1-356
निर्तत गोपाल लाल अद्भुत नट भेष धरें गान करत ब्रजसुंदरि रास रंगिनी ॥ अति कोमल बन्यौ कूल बहुभाँति फूलेफूल जल स्थिर रहत तहाँ तट तरंगिनी ॥१॥| सरद सर्वरी छिटकत मधुप जूथ सुर मिलाबत बिहँसत पीय संग चपल दृष्टि कुरंगिनी ॥ गिडगिडता गिडगिडता तांतां कटि तकिट तारावली झंझंझननननन बाजे मृदंगिनी ॥२॥ ततथेई ततथेई उच्चारत उरप तिरप टूटे हारि बिलसत पीय बाम भाग कुचउतंगिनी ॥ कृष्णदास स्वामिनी मनोज भेष राधिका रसिक कंठ लाय लई सुख देत अंगिनी ॥।३॥
Kedaro
Kahau kapi raghaukau sandesh .. kushal kshema lakshman baidehi
Part1-304
कहौ कपि राघौकौ संदेश ॥ कुशल क्षेम॒ लक्ष्मण बैदेही श्रीपति सकल नरेश ॥१॥ जिन पूँछी कुशलात नाथकी अहो भरत बलवीर ॥ बिमल देह दुख भरहिं रहत है या जलनिधी के तीर ॥२॥ गहबर बसत निशाचर छल कियौ हरी सिया मो मात ॥ ता कारण लक्ष्मण शिर दीनौ भये राम बिन भ्रात ॥३॥ इतनी श्रवन सुनत शिर ढारग्ौ निरख भूमि परञ्नौ सोई ॥ हाय हाय कर पुत्र पुत्र कहि लोट सुमित्रा रोई ॥४॥ धन्य सो पूत पिता पन राखे धन्य सो कुल जिहिं लाजै ॥ धन्य सो सेवक अंत के अवसर आवै प्रभु के काजै ॥५॥ ता कारन रघुनाथ पठायौ हों जु लैन गिरि आयौ ॥ है अति दूर निशा सब बीती को लक्ष्मणहिं जिवायो ॥६॥ लै पर्वत शर बैठ पवन सुत् हों प्रभुषँ पहोंचाऊँ ॥ सूरदास पॉवखित मेरे तब लगि भरत कहाऊँ ॥७॥
Maru
Arrie tere nayan lalone jinn mohe sthaam salonen.
NityaPad-049
अरी तेरे नयन ललोने जिन मोहे स्थाम सलोनें। अतिही दीरघ विमलअवलोकत कटाक्षन कोररी भारे पिय रस रीझेरी कोने ।!१॥| वदनजोतिचंद्रहुते निरपल कुच कठोर भुजमृणाल बंकटटाबक टोनें।। जनगोविंदप्रभु चलत ललित गति कसोटी लीक परी सोने ॥२॥
Lalit
Puck‍wakhajurjambubadrifal leho kaachhan terridwar ..
NityaPad-212
पक्‍्वखजूरजंबूबदरीफल लेहो काछन टेरीद्वार ॥ लरका यूथसंग बलमोहन चोके करत विहार।। १ ॥ सुंदर कर जननीकेनोंदीनों ले धाये तब नंदकुमार | हीरारत्ननपूरीत भाजन ऐसे परमउदार ॥।२॥ उरसों लगाय खातखातचले मीठे परम रसाल ॥ जूठी गुठली मारत गोविंद के हँसत हँसावत
Saarang
Aavou merey chhagan magan | balgopal lehu balaiyon dadhi makhan
Part1-162
आवोौ मेरे छगन मगन | बालगोपाल लेहु बलैयोँ दधि माखन चलेहु आँगन ॥१॥ सिखवत चलन जसोदा मैया अँगुरी लगन | कोमल चरन कहो कैसें कीनौ शकटभंजन !२)। अरी लै लौनी मैयापै माखन करि गति कान्‍्ह । बालचरित्र रघुनाथदास बलि मुनिमन अठकान ॥
Saarang
Naan bharau raine bharau ray langarwa . hoe hoe mohi jinn
Part3-217
न भरौ रेन भरौ रे लंगरवा । हो हो मोहि जिन भरौ रे लंगरवा ॥ सब सखियन मिलिं केसरि घोरयौं भरि-भरि लाई करबा ॥ भरि पिचकारी मेरे मुख पै डारि मेरी अँगियाँ भीजी बस करोौ रे लंगरवा ॥१॥ बरजति हों बरज्यौ नहीं मानत त्तोरयौ उर कौ हारूवा ॥ फणगुवा माँगतति मो पै मोहन होई रहो होरी कौ भरुवा ॥२॥ सुनैगो नॉहिंन नाहक लरैगणो औरु कुटम कौ डरवा ॥ 'कृष्ण जीबन लछीराम' के प्रभु प्यारे लेऊ बलैयाँ पाँर्ईड परिबा लंगरबा ॥३॥
Kafi
Lalco beeri deit banaay ..
NityaPad-306
लालको बीरी देत बनाय ॥ अपुनेकर राधा मुगनेनिः अतआनंद मन मांय ॥१॥ निरखत बदन कमल प्रीतम को चितवबत मुरमुसक्याय ।। रसिक प्रीतम की बानक निरखत पुन पुन लेत बलाय ॥२॥
Kanharo
Laalan baithe kusum bhawan.. latpati
NityaPad-258
लालन बैठे कुसुम भवन॥ लटपटी विघूर्णित लोचन मकरकंडल सोहे श्रवनन॥१॥ शीतलताई सुंदरताई सौरभ छाय रही शोभातन॥ कहुं कहा रसरूप माधुरी रसिक पीबत रस प्रमुदित मन मन॥२॥
Saarang
Saghan vann fulyori kusuman phooli sub banrai ..
Part3-002
सघन वन फूल्योरी कुसुमन फूली सब बनराई ॥ फूली ब्रज युवतीजन फूले सुंदर वर रति आई ॥१॥ जानपंचमी मिलाप करन वृषभान सुता बन आई ॥ रसिक प्रीतम पिय अति रसमाते डोलत कुंजन माई ॥२॥
Malkoos
Piyahi jimawat maval kishori ... rahein sikhiran rahent pukhdet
NityaPad-085
पियही जिमावत मवल किशोरी ॥। रहें सिखीरन रहेंत पुखदेत मधुर जब चिते हसत मुखमोरी ।। १॥। छिन छिन प्रीति प्रबल प्रीतम उर प्रीया प्रेम झलकोरी ॥ यह सुख सदा सखी विलसत परमानंददास बलहोरी ।। २॥।
Dhanshree
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