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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Praatasame smarun srivallabh srivitthalnath param sukhakaari .. | NityaPad-004 | प्रातसमे स्मरुं श्रीवल्लभ श्रीविद्ठलनाथ परम सुखकारी ।।
भवदु:खहरण भजनफलपावन कलिमलहरण प्रतापहारी ॥ १॥॥
शरण आये छांडत नहिं कबहुं बांह गहेकी लाज विचारी ॥
त्यजो अन्यआश्रय भजों पदपंकज द्वारकेशप्रभुकी बलहारी ॥२॥। | Ramkali |
Doll jhultahen pyaaro laal bihaari viharin | Part3-366 | डोल झुलतहें प्यारो लाल बिहारी विहारिन
ए राग रम रहो ॥ काह्ू के हाथ अधोटी काह्ू के बीन काहू के मृदंग को
झप ले ताल काहू के अरगजा छिरकत रंगरहो ॥१॥ डांडी डांडी खेल
सच्यो जो परस्पर नहीं जानियत पण क्यों रह्यो ॥ हरीदास के स्वामी स्यामा
कुं विहारी ऊनको खेल किंनहूं न लब्यो ॥२॥ | Kalyan |
Sunat khisyani purry chala dooti preetam pein gaee haye lajaay .. | NityaPad-125 | सुनत खिसयानी परी चल दूती प्रीतम पें गई हे लजाय ॥
बे तो नहि मानतकोटि जतन कीए हो पचिहारी बोहोत मनाय ॥१॥|
आपुहि मनाड़ लीजे मोसों एसी कही सुनो अब कहा कीजे लाल दूसरो उपाय ॥
नंददास प्रभु एसी सुनि आपहि पधारे तब पोढे अपनी प्यारी को उर लाय ॥।२॥ | Bihaag |
Tumein vrajraj duhaai .. jinn gulal aankhin | Part3-204 | तुमें ब्रजराज दुहाई ॥ जिन गुलाल आंखिन
में डारो ॥| पलक ओट में जुग सम वीते यह कहा नेंक निकाई ॥|१॥ मुख
मकरंद लुन्ध मधुकर दृण ओरन कछू सुहाई ।॥ अनुरागे एते ही रससों
चाख रूप चिकनाई ॥२॥ सुनि सोंधे भीने गिरिधर मनगति अधिकाई ॥
मुकुट लटक कुंडल चटकन पर कृष्णदास बलजाई ॥३॥ | Kaafi |
Suur aayo sirpar chhaaya aaee payan tarr panthi | NityaPad-246 | सूर आयो सिरपर छाया आई पायन तर पंथी
सब झुक रहे देख छांह गहरी ॥ धंधीजन धंधौ छांड रहेरी धूपन के लिये पशुपंछी
जीव जंतु चिरिया चुप रहरी ॥१॥ ब्रजके सुकुमारलोग देदे कमार सोर्वें उपवनकी
ब्यार तामें पोढे पियप्यारी ॥ सूर अलबेली चल काहेंकूं डरत हैं महाकी मध्य
रात जैसें जेठकी दुपहरी ॥२॥ | Saarang |
Mohanavasan hamaare deeje... | NityaPad-035 | मोहनवसन हमारे दीजे।॥
बारणेजाऊं सुनो नंदनंदन सीतलगत तनभीजे ॥१॥
कोनस्वभाववृथा अनअवसर इनबातनकैसेजीजे ॥
सुनदुखपावेमहरियशोमति जाय कहेंअबहीजे ॥२॥
सब अबला जलमाँझ उघारीदारुणदुख कैसे सहीजे ॥
प्रभुबलराम हम दासीतिहारीजोभावे सो कीजे ॥।३॥ | Ramkali |
Kabahuun naan sunyo daan goraskau . tum tou kunwar badeke chhota | Part1-222 | कबहूँ न सुन्यो दान गोरसकौ । तुम तो कुँवर बड़ेके छोटा
पार नहिं कहुँ जसकौ ॥|१॥ रोकत हौ परनारि विपिनमें नेंकु नहीं जिय कसकौ।
परमानंद प्रभु मिसजु दानकौ है कछु और ही चसकौ ॥२॥ | Devgandhaar |
Manini maan nihoro | | NityaPad-323 | मानिनी मान निहोरो |
हौं पठई तोहि लेन सांवरे चलरी गर्व कर थोरो ॥१॥|
कुंजमहल ठाड़े मनमोहन चितवत चंदचकोरो ॥।
हरीदास के स्वामी स्यामा कुंजविहारी चलोरी होत है बोरो ॥ २॥ | Kedaro |
Nisake uneede mohan nayan rasamasye .. kaheko lajaat kendho | NityaPad-146 | निसके उनीदे मोहन नयन रसमस्ये ॥ काहेको लजात केंधो
कहो लालन कहा बस्ये ॥१९॥| डगत चलत आलस जुंभातहो देखियत वसन
खस्ये ॥ कुंमनदासप्रभु गिरिधर तुम भुजबंधन कर उरहिलाए कस्ये ॥ २॥ | Bibhaas |
Aaj bhalodin herry maain prakate srivallabh | Part2-295 | आज भलोदिन हेरी माईं प्रकटे श्रीवललभ
जगभूष ॥ लक्ष्मणगृह अति होत बधाई मंगल गावत नारि अनूप ॥१ ॥|
दानदेत मनभायो लक्ष्मण अधिक दयाल स्वरूप ।| रसिकनके प्रभु वल्लभ -
भुवपर आये भाग्यन निज युप ॥२॥ | Sarang |
Jugal russ bharey bhojan karat kunj mein tarran tanaya teer att | NityaPad-211 | जुगल रस भरे भोजन करत कुंज में तरन तनया तीर अत
सुहायो॥ लेत झुक झुक कोर झपट दोऊ हाथतें हसत बहु भांत मन करत
भायो।॥१॥| करत मनुहार बहो भात मिल: सुन्दरी: लिजीये लाल बहो बिध
बनायो ॥ दिजीये कृपा कर रसिक के दासको सेस ये परम फल मुनिन गायो॥ २॥। | Saarang |
Balibali jaauun madhur sur gavahu . abki baar merey kumbar | Part1-154 | बलिबलि जाँऊँ मधुर सुर गावहु । अबकी बार मेरे कुँबर
कन्हैया नंदहि नाच दिखावहु ॥१॥ तारी देहु आपने करकी प रम प्रीति
उपजावहु | आन अंत धुनि सुनि डरपत कत मो भुज कंठ लगावहु ॥२॥
जनि शंका जिय करो लाल मेरे काहेकों सरमावहु | बाँह उठाय काल्हिकी नॉई
धौरी थेंनु बुलावहु ॥३॥ नाचहु नेंकु जाँऊँ बल तेरी मेरी साथ पुरावहु ।
रतनजटित किंकिनी पग नूपुर अपने रंग बजावहु ॥४॥ कनक खंभ प्रतिबिबत
शिशु इक लोंनी ताहि खबावहु । सूरश्याम मेरे उरतें कबहुँक टारें नेंक न
भावहु ॥६॥ | Bilawal |
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