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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Bilasati haririh saras holka samaye ramani sange ..
Part3-010
बिलसति हरिरिह् सरस होलका समये रमणी संगे ॥ गूढ़ भाव समुदय संवर्धित हृदय समुदित नंगे ॥१॥| संजोजयति दशा दशमादौं हृदि भावयति बिलासं ॥ निस्त्रप वचन शतेन विरचति युवतिजन परिहासं ॥२॥ स्पृशति कपोलौ पाणियुगेन करोति कुमकुमालेपं ॥ निज रमण लघुताकरणे विदधाति समय संक्षेप ॥३॥ ताल मृदंग बिबिध वादित्र सुधघोषानंदित घोष ॥ सपदि वशीकुरुते निज गोकुलमखिलं रसपोष ॥४॥ सरस वेणुनादेन हृदयमति तुनते निर्मलभाव॑ ॥ मुरलिक्यानुकरोति कदापि मधुरतर कोकिलरावं ॥|५॥ नृत्यति मनसिज रतिभर भावेन मधुर वदखिल समक्ष ॥ सदसि ददाति महारसमपि हरिपदयुगल भावलक्ष ॥६॥ उड्जापयतिसरस कुंकुम रेणुयुत राग ॥ सित सौरभयुत रेणु मिश्रणावेदि रूप विभाग ॥७॥ चंदननीरसेक सरसाकृत युवति युवजन देहं ॥ निज सुकुमार तनोरनुरूप॑कुरुते विस्मृत गेह ||८॥ अति रभसेन कदाचिदुपर्यपे पतति युवति शत यूथे || दस विध रति पथि मदन मनोरध समुचित रुचिर वरूथे ॥९॥ श्रीबललभ पद युग कृपयेव हृदा पश्यति 'हरिदासे' ॥ तव पूरयतु चिंतितं सकल॑सखि सामयिक विलासे ॥१०॥
Basant
Gopalki aavani tum dekho vrajnari ..
NityaPad-286
गोपालकी आवनि तुम देखो ब्रजनारी ॥ मंदमंद मटकनि पर छिनु छिनु बलहारी ॥१॥ मोर मुकट बनमाल पीतांबर सोहे ॥ कुंडल मुखजगमगात कोटि काम मोहे ॥२॥। बेनु बजावत नेन नचावत सुरभी संग आवे ॥ जुबती चकोर चंद परमानंद गावे ॥३॥
Gori
Podhe sthamaju sukhsej..
NityaPad-341
पोढे स्थामाजू सुखसेज॥ संग श्रीवृषभान तनया रंगरसको हेज ॥१॥ तरणितनया विलुलित कनक मालतीको तेज ॥ शोभाकी सीमाहैं दंपति गोविंददास गनेज॥२॥
Bihaag
Kaun bunn jaiho bhaiya aaj .. kahat gopal
NityaPad-209
कौन बन जैहो भैया आज ॥ कहत गोपाल सुनोहो बालक करो गमन को साज ॥१॥ ऐसो चतुर कौन नन्दनन्दन जो जाने रस रीति ॥ तहां चलो जहां हरखि खेलिये अरु उपजे मन प्रीति ॥२॥ पूरे बेनु बखान महुवरी छींक कंध चढाये ॥ रोटी भात दही भरि भोजन और आगे दे ग्वाल गाये ॥३॥ ठौर ठौर कूकैं दे प्रहसत आये जमुना तीर ॥ 'परमानन्द' प्रभु आनन्द रूप राम कृष्ण दोऊ बीर ॥४॥
Saarang
Neck gopalendijo tair ..
NityaPad-075
नेक गोपालेंदीजो टेर ॥ आज सवारे कियो न कलेऊ सुरत भई बडिवेर ॥१॥ ढूंढत फिरत यशोदामैया कहांकहांहो डोलत॥ यह कहि यो घर जाउ सांवरे बावानंद तोहि बोलत ॥२॥ इतनी बात सुनही आये प्रीतिजु मनमें जानी ॥ परमानंदस्वामी की जननी देखवदन मुसकानी ।। ३॥।
Dhanshree
Aavat maaee radhika pyaari yuvati youth mein bunny .. nicus
NityaPad-112
आवत माई राधिका प्यारी युवती यूथ में बनी ॥ निकस सकल श्वजराज भवनतें सिंघद्वार ठाढे ललन कुंवर श्रीगिरिवरधारी ॥ १॥ निरख बदन भ्रोंह मोरी तोरतृण ओर चाल चितवन ओर तिहिछिनु अंचल संभारत घुंघटकी ओठटब्है लीयोहें लाल मनुहारी । गोविंदप्रभु दंपतिरस मूरति दृष्टिसो भरत अंकवारी ॥२॥।
Kanharo
Jinn daro jinn daro juu ankhiyan mein abira ..
Part3-126
जिन डारो जिन डारो जू अँखियन में अबीरा ॥ रतनजटित पिचकाई कर लिये भर-भर केसर नीरा ॥ १॥ ललिता प्रीतमको मुख मांड्यो चरच्यो श्याम सरीरा॥ सूर प्रभु रसवस कर लीनो इन हलधरको बीरा ॥२॥
Bilawal
Mangal maadho naam uchchaar..
NityaPad-131
मंगल माधो नाम उच्चार।। मंगल बदन कमल कर मंगल मंगल जनकी सदा संभार ।।१॥ देखत मंगल पूजत मंगल गावत मंगल चरित उदार ॥ मंगल श्रवण कथा रस मंगल मंगल तनु वसुदेव कुमार ॥२॥ गोकुल मंगल मधुवन मंगल मंगल रूचि वृंदावनचंद ॥ मंगल करत गोवर्धनधारी मंगल वेष यशोदानंद ॥।३॥ मंगल थेनु रेणुभू मंगल मंगल मधुर बजावत बेन ॥ मंगलगोपवधू परिरंभण मंगल कालिंदी पय्फेन ॥४॥ मंगल चरणकमल मुनिवंदित मंगल कीरति जगत निवास ॥ अनुदिन मंगल ध्यान धरत मुनि मंगलमति परमानंददास ॥५॥।
Bhairav
Baansuri basey tau vraj humm naa basaingi laal baansuri baraao
Part1-288
बाँसुरी बसे तौ ब्रज हम ना बसैंगी लाल बाँसुरी बराओ तो हमें बिदा दीजिये ॥ जेते राग तेते दाग जेते छेद तेते भेद जेते सुर तेते शूल रौम रौंम छीजिये ॥१॥ ताननके तीखे तान लागत मोय मैंन बान श्रवण सुनत जाय बनमें बसि जिये ॥ बंसी छाँड़ौ गोप श्याम बिनती करत बाम जैसी कीनी सूरश्याम तैसीहू न कीजिये ॥२॥।
Dhanashri
Khlel faag ghar aayo ladillo jasumati karat badhaai ..
Part3-365
ख्लेल फाग घर आयो लाडिलो जसुमति करत बधाई ॥ विविध उपहार लिये सब ब्रजजन संग लगाई ॥ १॥ कनक थार भर मुक्ताफल ले आरती उतराई॥ नंदनंदन की या छबि ऊपर सूरदास बलजाई ॥२॥
Sarang
Tihari baat mohi bhawat laal | barbar jasumatike bhawan mein
Part1-167
तिहारी बात मोहि भावत लाल | बारबार जसुमतिके भवन में यह सुनत हों आवत लाल ॥१॥ पारपरौसिन अनख करति हैं औरें कछू लगावत लाल । ताकी साखि विधाता जाने जिहिं लालच उठि धावत लाल ॥२॥ दधिकौ मथन और गृह कारज तुम्हारी प्रेम विसरावत लाल । परमानंद प्रभु कुँवर लाड़िलि निरेखि बदन सचुपावन लाल ॥३॥
Iman
Aho ghar ghar
NityaPad-211
अहो घर घर तें आई छाक ॥ खाटे मीठे ओर सलोने बिविध भांतके पाक ॥१॥ मंडल रचना कर जमुना तट सघन कंदब की छांह ॥ गोपीग्वाल सकल मिल जेवत मुख ही सराहत जात ॥२॥ बांटली मोहन दोऊ भैया कर: दोना अत ही सीहात ॥३॥ टेंटी साक संधानो रोटी गोरस सरस महेरी ॥ कुमनदास गिरधर लिपटत नाचत देदे फेरी ॥४॥
Saarang
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