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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Bhaare bhaye merey laal horry khelo gope baal utho
Part3-021
भारे भये मेरे लाल होरी खेलो गोप बाल उठो जुपाल लाल दुह्लो धोरी गैया ॥ उस्नोदक अभ्यंग स्नान करि हो कलेउ कान्ह सजो बिबिधि बान कहति मैया ॥ १॥ केसर के कलस भरौ पिचकारी कर धरो अबीर गलाल लेह्दू रे संग बल भैया ॥ इंडुरी पिंडरी वारु आरति मंगल वारू राई लोंन उतारूं बार डारू 'सूर' बल जैया ॥२॥
Bibhaas
Charan lagyo chita mero srivallabh charan lagyo chita mero ..
NityaPad-005
चरण लग्यो चित मेरो श्रीवललभ चरण लग्यो चित मेरो ॥ इन विन ओर कछु नहि भावे इन चरणनको चेरो ॥ १॥। इनहि छांड ओर जो धावे सो मूरखजु घनेरों ॥ गोविंददास यह निश्चय कर सोड़ ज्ञान भलेरो ॥२॥
Bilawal
Keerati aaj prafullit maaee . saubhag bhaagi manawati apane
Part1-187
कीरति आज प्रफुल्लित माई । सौभग भागि मनावति अपने कुँवरि राधिका जाई ॥१॥ है रहो गहगह वृषभान घोष में मंगल गावति धाई। ग्वालिनि गावति चौक पुरावति बदन निहारन आईं ॥२॥ धनि धनि तुमरी डूजवी रतिजू जामें तें ऐसी जाई । श्रीविद्डलगिरिधरन कुँवरिसों रहे दोऊ गोद भरा ॥३॥
Saarang
Nandgam nikolagatari.. praatsamaidhimathat gwalini sunat pradhur dhwani gaazatari .. 1..
NityaPad-179
नंदगाम नीकोलागतरी॥ प्रातसमैदधिमथत ग्वालिनी सुनत प्रधुर ध्वनि गाज़तरी ॥ १॥ धन्ययेगोपी धन्ययेग्वाल जिनकेमोहन उरलाग तरी ॥। हलधरसंगग्वालसबराजत गिरिधरलेलेदधि भागतरी ॥२॥ जहांवसत सुरदेवभमहामुनि एकोपलनहीं त्यागतरी ॥ नंददासकों यह कृपाफल गिरिधर देखे मनजागतरी ॥। ३॥।
Bilawal
Harikon terat haye nandrani .. bahut verbhai kahunkhelat kahaan raho
NityaPad-085
हरिकों टेरत हे नंदरानी ॥ बहुत वेरभई कहुंखेलत कहां रहो सारंग पानी ॥१॥ सुनत ही टेरि दोरितव आए कबके निकसे लाल ॥ जेंमत नहीं नंद तुम ही विनु वेगि चलो गोपाल ॥।२॥ स्थामहिल्याई महेरिं जसोदा तुरत ही पाव पखारे ॥ सूरदास प्रभु संग नंदके बेठे दें दोऊ बारे ॥ ३॥।
Dhanshree
Laalan! pragat bhaye guna aaju, tribhangi laalan
Part3-224
लालन! प्रगट भए गुन आजु, त्रिभंगी लालन ऐसे हो | रोकत घाट बाट, गृह-बनहूं, निबहति कहिं कोउ नारि ॥ भली नहीं यह करत सांवरे, हम दैंहैं सब गारि ॥ फाजुन मैं तो लखत नम कोऊ, फबत्ति अचगरी भारि ॥ दिन दस गए, दिना दस औरीौं, लेहु साध सब सारि॥ पिचकारी मोकौं जनि छिरकौ, झरकि उठी मुसुकाई ॥ सासु-ननद मोकौं घर बैरिनि, तिनहिं कहौं कह जाई ॥| हा हा करि, कहि नंद दुहाई, कहा परी यह बानि ॥ तासौं भिरह तुमहिं जो लायक, इहिं हेरनि मुसुकानि ॥ अनलायक हम हैं, की तुम हो, कही न बात उचघारि ॥ तुमहूँ नवल, नवल हमडूँ हैं, बड़ी चतुर हो ग्वारि ॥ यह कहि स्याम हँसे, बाला हँसि, मनही मन दोउ जानि ॥ 'सूरदास' प्रभु गुननि भरे हो, भरन देडु अब पानि ॥
Kafi
Aaj badhaayau nandraayaken gopi gaaven mangalchar ..mpru..... aaee
Part1-059
आज बधायौ नंदरायकें गोपी गावें मंगलचार ॥ंप्रु.॥॥ आई जो मंगल कलश लैकें ता ऊपर फूल डार । अक्षत रोचन दूब लै चली विविध फूल भरि थार ॥१॥ घरघरतें गावति चलीं ब्रजजन झुंड अपार । चलीं सबै मिलि महरिके घर देखन नंदकुमार ॥२॥ देख मोहन आसपूरी सबै देत असीस । नंदमहरकौ लाड़िलौ चिरजीयो कोटि बरीस ॥३॥ महरि दानजो बोहोत दीयौ और दियौ नंदराय । ऐसौ सुख देखो सदा जन सूरदास बलि जाय ॥४॥
Gori
Shyam hii sunder syaam hii alaken sthaam bunny benny atee bhaari .
NityaPad-067
श्याम ही सुन्दर स्याम ही अलकें स्थाम बनी बेनी अति भारी । स्याम ही भ्रोह सोहनी बांकी स्थाम ही नेनन अंजन सारी ॥॥९॥। स्थाम कपोलन स्याम डिठौना स्थाम ओढे कामरिया कारी। स्याम दुगन के स्याम हैं तारे स्थाम सुन्दर गोविन्द गिरिधारी ॥२॥
Todi
Apane piyaa sanga khelaun horry .. ghar ghar tain baanak
Part3-075
अपने पिया सँग खेलौं होरी ॥ घर घर तैं बानक बनि आईं, साँवरी, सलौंनी, सुँदरि भोरी ॥१॥ बाजत ताल, मृदंग मुरज, ढ़फ, बिच मुरली धुनि धोरी ॥ चोवा चंदन औरू अरगजा, अबीर लिए भरि झोरी ॥२॥ मैं अपुनो मन भायौ पायोौ बंधी प्रेम रस डोरी ॥ “सूर स्याम' प्रभु रस भरे खेलति मदन मोहन राधा जु गोरी ॥३॥
Bhairav
Cassie yeh purry baan baat chalat gahat paani jaani juvatinkau
Part1-240
कैसी यह परी बान बाट चलत गहत पानि जानि जुवतीनकौ अचरा गहि तानौ ॥ अबलों लरिकाई मानि राखी मैं बहुत कानि गुनकी हो खानि तुम नीके करि जानो ॥१॥ छोडी कपड़ानि लाल देखत सब सखा ऑन लोक लाज बड़ी हानि मानहु न मानौ || रसिक प्रीतम रसके दानि इह थीं कहा अकुलानि . समयौ पहिचानि लंगर नीकें बतरानो ॥२॥
Aasawari
Maanani
NityaPad-331
माननी मान जिन मान एतो करे आप पायन परे नाथ तेरे ।। दरस जाके करन जगत तरसत सदा सो तो इकटक तेरो बदन हेरे ॥ १॥ हों कहत श्रीमुख ओट वेग मिल मितसुं पेरो बचन जिन भूल फेरे ॥ रसिक प्रीतम संग अनुराग भरी मिल त्रिया श्रीहरि दुःख तेरो सब नवेरे ॥।२॥।
Kalyan
Dekhari dekh radha ravan .. madanamurat sthaamghan tunn
Part2-357
देखरी देख राधा रवन ॥ मदनमूरत स्थामघन तन बढत शोभा भवन ॥९ ॥ कुसुम कुंचित केश विचबिच मंजुरी बंधूक ॥। नक्षत्र कहूंकहूं देखियत मानों उपमालायक मूक ॥।२ ॥ श्रवणमें नव झलक मानों लसत कुंडल किरण।॥ अंगअंग छबि चलत सुहाय मानों बादर वरण ॥३॥ मुरलिका स्वर वरष चहूँदिश छूटी धरवा धार॥ मानों बूड़ बिनोद विरहत बंधु निपुणविहार ॥४ ॥ धनुष उर बनमाल राजत गिरागरज गंभीर ॥ सूरश्रीगोपाल बनत्नज सदां पावस धीर ॥५ ॥
Sorat
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