top of page

Sheetkal Ke Pad

To get full expanded Kritan text click on any column of the kirtan row in below table.

Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Nandmahar koo kunwar kanhaiya horry khelan jaane
Part3-131
नंदमहर को कुंवर कन्हैया होरी खेलन जाने हो ॥ रसमें विरसकरे अरबीलो लघुदीरघन पहेंचाने हो ॥९१॥ अंगुरी गहत गहेकर पोंडोंचो भुज मूलन लग आबे ॥ देख विराने श्रीफलऊपर लालची मन ललचावबे ॥२॥ आंज्यो चाहे ओर के नयना अपने नयन दुरावे ॥ पकरदयो चाहे सुधा निधि हाथन अधर सुधा क्‍यों पावे ॥|३॥ तेतफुलेल उलेंडे सिरतें ग्रंथदुकूलनजोरी ॥ बहुत गुलाल डार आंखन में हस लंगर झकझोरी ॥४॥ कमल पत्रकार चेकपोलन मरूबवट मुखहि बनावे ॥ दुलहनी सीकर पठबत उततें दूल्हे आप कहावे ॥५॥ जो हम रूठ जांय घर बैठें तो सखी हम हि मनावे ॥ सकत सनेह करे युवतिनसों सेनन अरथ जनावे ॥६॥ राजा मित्र सुन्यों नहीं देख्यों भयो ऊपखानों सांचो ॥ मुरारीदास प्रभु सोंजिन बोलो कोटिक नांचकिन नांचो ॥७॥
Sarang
Jaya shree balal‍labhadev dhanee ..
Part2-271
जय श्री बलल्‍लभदेव धनी ॥ रासबिलास करत गोवर्धन मुरति ललितबनी ॥१ ॥ पुरुषोत्तम मुख कमल विकसित रसिकन मुकुटमनी ॥ चरणनिवेदन दे निज जनकों कृपाकरीजु घनी॥२॥ श्रीभागवत सुधानिधि मथकें बानी निगम भनी॥ लीला सृष्टि सिंधु सब पुरित दैवी निज अपनी॥३॥ श्रीविन्‍्ठल॒प्रकटित परमानंद भजन प्रचारबनी ॥ श्रीयमुना पुलिमकेलि वृन्दावन गिरिधर गुणितगुनी ॥४ ॥
Devgandhar
Srivundavan navanikunj bhramar bhramat karat gunj kusum punj
NityaPad-209
श्रीवुंदावन नवनिकुंज भ्रमर भ्रमत करत गुंज कुसुम पुंज ललित लता गहवर वन नीको ॥ जमुनातीर अंजन खर हरे गाय चरवेको प्यारीको धाम लाल भावतोहे जीको ॥९॥ रूचि उपजत छाक खात सखन सहित अति अघात परम मुदित फिर खात पठई मैया नीको ॥ कृष्णदास गिरिधरको कौतुक देख सुरपुर विमान कुसुमवृष्टि करत और या सुखतें फीको ॥२॥
Saarang
Aaj kuhunki raatr maadho deepmalika mangalchar ...
Part2-053
आज कुहूंकी रात्र माधो दीपमालिका मंगलचार ॥। खेलोजूथ सहित संकर्षण मोहन मूरति नंदकुमार । १ ॥ कहत यशोदा सुनों मन मोहन चंदन लेप शरीर करो॥ पानफूल चोवा अंबर मणिमाला ले कंठधरो ॥२ ॥ गोक्रीडन पुन काल्ह होयगो नंदादिक देखेंगे आय। परमानंददास संगलीने खिरक खिलावत धौरीगाय ॥३ ॥
Kanharo
Aajko dinn dhanee dhanri maee nain bhar dekhe nandanandan ..
NityaPad-235
आजको दिन धनी धनरी मई नैन भर देखे नंदनंदन ॥ परम उदार मनोहर मूरति तापहरन नख पूजित चंदन ॥१॥ रसिक राय श्री गोवर्धन धारी रूप रासि युवतिन मन फंदन ॥ ध्वजा वज़् जब अंकुश बिराजत कृष्णदास कीये पद बंदन ॥।२॥।
Adano
Horry key rasiya or khyaal ..
Part3-383
होरी के रसीया ओर ख्याल ॥ फगुवा दे मोहन मतवारे फगुवा दे ॥ ब्रजकी नारी गावे गारी ॥ दो बापन के बिच डोले ॥ १॥ नंदजु गोरे जसोदा गोरी ॥ तुम कहांते भये कारे | २॥ पुरुषोत्तम प्रभु जुबतिन हेते ॥ गोप भेख लियो अबतारे ॥ ३॥
Hori-Kafi
Sunhu ree murali kii utapati .. banamen rahat baans kull yakau
Part1-291
सुनहु री मुरली की उतपति ॥ बनमें रहत बाँस कुल याकौ यह तौ याकी गति ॥९१॥ जलधर पिता धरनि है माता अवगुण कहौं उघार॥ बनहूँ तैं याकौ घर न्यारो निपजे जहाँ उज़ार ॥२॥ एकतें एक गुणन है पूरे मातपिता अरु आप ॥ ना जानिये कौन फल प्रगट्यौ अतिहीं कृपा प्रताप ॥३॥विश्वासी परकाज न जानें याके कुलकौ धर्म ॥ सुनहुँ सूर मेघन की करनी ओर धरनी कौ कर्म ॥४।॥।
Nat
Submill aaeen laadili vrishbhan nrishati key dwaar hoe ..dhri...
Part1-271
सबमिल आईं लाड़िली वृषभान नृषति के द्वार हो ॥धृ.॥ सब मिल आय कट कीरतिसों देहु लड़ेंती संग || बनमें फूल बिराज रहे हैं खेलन साँझी रंग ॥१॥ यह सुन कीरति बोल कुंवरिकों उबटिन्हवाई प्रीति ॥ अँग अँगोछ फुलेल केश बिच पाटी पारी चीति ॥२॥ बेनी सुरंग गूँथि माँगमें सेंदुरभरी बनाय ॥ बाँयें सीसफूल इत चंदा बिच लटकन लटकाय ॥३॥ टीकी कमलपत्र काजर दे बेसर चिबुक बिराज ॥ खुटिला खुभी और टेढ़ी बेंदी झूमक साज ॥४॥ कंटसरी तिमनी दुलरी चंपकली हार हमेल ॥ मुलकट अअगिया बाँह बिजोंढे बाजूबंदन पेल ॥५॥ चूरी गजरा कंकन पोंहोंची हाथ साँकरा मुँदरी ॥ कि लहेंगा सारी फु्फुदी बाजत किकिणी सगरी ॥६॥ पग नूपूर पायल जेहर अनबट बिछिया पगपान || यह सिंगार कर चली लड़ैती सब मिलि गावत गान ॥७॥ बनमें बीनत फूल हरखसों डलियों सोहे हाथ ॥ फूलगेंदकों आये लालन सखा न कोऊ साथ ॥८॥ खेलत गेंद परी इन बीचन प्यारी लई उठाय ॥ लालन आय गेंद माँगत हैं ललिता कह्ौ समुझाय ॥९॥ अब तो गेंद न पैहो लालन चतुराई के मूल ॥ पूछत लाल सबै क्‍यों आंई बनमें बीनन फूल ॥१०॥ कहाँ लड़ैती साँझी धरिहें फूल सबै लै चीति ॥ लाल कह्मौ मोहि आछी आवै देखो मेरी रीति ॥११॥ सबन कहा कैसें लै चलियें एकन कह उपाय ॥ पेहेरावा आभूषन सारी करीयें सखी सजाय ॥१२॥ सबै हरख सिंगार किये मिल चलीं आपने गेह ॥ नामधस्थौ श्यामाजू इनको तब बाँह परस्पर देह ॥१३॥ ललिता चंद्रभागा व्रजमंगल मैना नयना रूप ॥ करुणा मोहा कुमुदा रत्ना लोभा ललना अनूप ॥१४॥ रंभा कृष्णा दुर्गा ध्याना रूपा हरखा नाम ॥ रंगा हंसा दामा प्रेमा ज्ञाना जुहिला भाम ॥१५॥ चंपा बहोला सुमना नीला हीरा मुक्ता प्यारी ॥ कुंजा अमला समला विमला चंद्रावली सुकुमारी ॥१ ६) तारा कमला अमला यमुना वूंदा नंदा नारी ॥ अबला शीला सुखिया प्रमुदा नवला सुमति बिहारी ॥१७॥ चतुरा कामा रसिका श्यामा राधा लै घर आईं ॥| एक वेश एक रूप सबनकौ देखत रही लुभाई ॥१८॥ गावत आवत सब मन भावत आरती कीराति साज ॥ पूछत कह्मौ लड़ैती यह को जोरी भल्ी विराज ॥१९॥ बीनत फूल यह मैं देखी पूछी इनकी बात ॥ नंदगाममें बास बसत है श्यामा नाम कहात ॥२०॥ इनमें एक बड़ों गुण मैया जानत साँजझी चीति ॥ मन हरखित कीरति तब बोली खेलों सब मिलि प्रीति ॥२१॥ भुठिया वार आरती बारी भीतर गई लिवाय ॥ भीति लीप चंदनसों छिरकी साँझी धरत बनाय ॥२२॥ धूपदीप नेवेद्य धस्बौ पुनि आरती करत सँवारि ॥ कीरति कहा बियारू कीजै भूखी हो सुकुमारी ॥२३॥ भोजनकर सब हाथ पखारे बीरा रत्ना देत ॥ बीरा ले कह्मौ हम घर जैहैं कीरति कह्ौ सुहेत ॥२४॥ श्यामा तुम जिन जहु दूर घर यहाँई सोवो रात ॥ औरनसों यों कह्मौ बेगिही आवोगी उठ प्रात ॥२५॥ वे तब गईं रही है श्यामा खेलत चोपर रंग ॥ जीत परस्पर होत दुहुनकी राधा श्यामा संग ॥२६॥ एक सेज पौढ़े तब दोऊ उठे प्रात अरसाय ॥ बेऊ सब आँईं तिहिं अवसर निरख सबै मुसिकाय ॥२७॥॥ सौँझी डलिया में धर लीनी गावत चली सुभाय ॥ डलिया यमुनाजल पधराई सबै न्हात सुख पाय ॥२८॥ लाल कह्मौ अब हम घर जैहैं मैया जानतनाय ॥ यों कहि आवत जसुमति देखी रूखे भये लजाय ॥२९॥ जसुमति पूछत रात कहाँ रहे लालन कही बनाय ॥ दौरी गाय गयौ ता पाछें गोवर्द्धन लियौ बुलाय ॥३०)॥ आछे फल ले मोहि खवाये सोय रह्मौ ता पास ॥ द्वारकेश प्रभुकी बतियाँ सुन जसुमति आयौ हास ॥३१॥
Gori
Horry hoe hari khelati aabati .. jopin kai munn
Part3-270
होरी हो हरि खेलति आबति ॥ जोपिन कै मन मोद बढ़ावति ॥१॥ ब्रज जुवतिन लै प्यारी आईं ॥ उत तेैं नंद को कुँवर कन्हाई ॥२॥ सुरंग गुलाल अबीर उड़ावति ॥ कैसरि नीर जुबतिन सीस तें नावती ॥|३॥ बीन रबाब किन्नरी बाजति ॥ ताल मृदंग चंग सुर गाजति ॥४॥ बंसरि लै तरुमी-गन धाँईं ॥ गोपन लै कनक पिचकाई ॥५॥ फगुवा लैंन नैंद-गृह आईं ॥ भूषन बसन सबैं पहिराई ॥६॥ देति असीस चली ब्रजनारी || इष्टि बिधि क्रीड़ति कुंज-बिहारी ॥७।| सो छबि देखि देव सचु पावति ॥ फूलन की बरखा बरखाति ॥८॥ जमुना नहॉन चले जदुराई ॥ यह सोभा मोपै बरनि न जाई ॥९॥ राधा गिरिधिर अविचल जोरी ॥ प्राननाथ जन नवल किसोरी ॥१०॥
Nat
Bhaee kanyaju vraj nripati vrishbhaanke sunat sub lok taji
Part1-197
भई कन्याजु व्रज नृपति वृषभानके सुनत सब लोक तजि सदन सुध ना रही भरे काँवरि हरद दूध दधि आनके ॥१॥ करत सब केलि बहु भाँति नाना रंग देत किलकारि आनंद रस मानके । भेरि दुंदुभी छोल झाँझ झालरी चंग करत रस गान सुरतान बंधानके ॥२॥ आये जाचक भाट विप्र जनके ठाठ देत सब दान सन्‍्मान कर जानके । कहत्त हरिवंश वूंदाविपिन रसिकनी नंदसुत हार हिये राधिका प्रानके ॥३॥
Goud Saarang
Vrij byauhar nirastra nainan vidhi koabhiman gayo .
NityaPad-212
वृज ब्यौहार निरस्त्र नैनन विधि कोअभिमान गयो । गोपी ग्वाल गोसुत परचारग हू हों क्‍यों न भयो ॥ फल अंगुरिन अंगुरिन बीच राखे ओदन माज दयो । आपुन खात खवबावत ग्वालन बाल विनोद ठयो ॥ अहो भाग्य महोभाग्य ननन्‍्दजू तप को फल जू लीयो ॥ ललिता ललित सूर के प्रभू की ब्रजजन गाय जीयो ॥२॥
Saarang
Karat hari nritya navrang radha sanga lait navgati bhed charchari taalke ..
Pustak1-329
करत हरि नृत्य नवरंग राधा संग लेत नवगति भेद चरचरी तालके ॥ परस्पर दरस रसमत्त भये तत्त थेई थेई गति लेत संगीत सुरसालके ॥१॥ फरहरत बर्हिवर थरहरत उपहार भरहरत भ्रमर वर विमल वनमालके ॥ खसित सित कुसुम शिर हँसत कुंतल मानों लसत कल झलमलत स्वेद कण भालके २) अंग अंगन लटक मटक भृंगन भ्रोंह पटक पटताल कोमल चरण चालके ।| चमक चल कुंडलन दमक दशनावली बिबिध विद्युत भाव लोचन विशालके ॥३॥ बजत अनुसार द्विम द्विम मृदंग निनाद झमक झंकार कटि किंकिणी जालके ॥ तरल ताटक तड़ित नील नव जलद में यों विराजत प्रिया पास गोपालके ॥४॥ युवति जन यूथ अगणित बदन चंद्रमा चंद्र भयौ मंद उद्योत तिहिं कालके ॥ मुदित अनुराग वश राग रागिणी तान गान गत गर्द रंभादि सुर बालके ॥५॥ गगनचर सघन रास मगन बरषत फूल बार डारत रत्न जतन भर थालके ॥ एक रसना गदाधर न वर्णत बने चरित्र अद्रभुत कुँवर गिरिधरन लालके. ॥६॥
Saarang
Page 1 of 1

© 2026 All rights reserved. Vaishnav Samaj of RTP, DBA - Krishnadham-VYO 

bottom of page