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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Jabjab dekho aaya hariko vadan taba nayathana merey mope naan aavahi ..
NityaPad-312
जबजब देखो आय हरिको वदन तब नयथना मेरे मोपे न आवही ॥ ऐसेरूप लालची ललचाय रहे मानों ज्यों बिछुरे जलचर जलपावहीं ॥१॥ रूपके रिझोने नयनारसमें मिल मग्न भये अब सखी हमसों न बतरावहीं।। मुरारीदास प्रभु एते पर निहुर भये अपनी ओट दुरावहीं ॥२॥
Iman
They badhaai munn pooji aas . shrivrishbhan gopgrih radha keeyau
Part1-181
थे बधाई मन पूजी आस । श्रीवृषभान गोपगृह राधा कीयौ नेह प्रकाश ॥१॥ फूले नरनारी मिलि गावत सबब्रज भयौ हुलास । रावलि कीरति कूखि सुहाई प्रगट्यौ परम विलास ॥२॥ रूप रंग गुण रसिक छबीली सब सुख निधी निवास | कीनी सुफल अष्टमी दोऊ बरखा भादों मास ॥३॥ चंद्रावलि ब्रजमंगल सुंदरि बदन निहारत हास । श्रीविद्ठडलगिरिधर की जोरी गोकुल रावल पास ॥४॥
Dhanashri
Bal‍labh kii baanik munn bhaai.
Part2-285
बल्‍लभ की बानिक मन भाई। करि स्नान संवारि केश माथे तिलक बनाई ॥१ ॥ संध्या करत हरत मेरो मन इत उत नयन चलाई। करि शृंगार तब मो तन चितयो रामदास बलि जाई ॥२॥
Bilawal
Piyaa binn chand lagyo duhkh daine.
NityaPad-361
पिया बिन चंद लग्यो दुःख देन। तारा गिनत गिनत हुं हारी पलकन लागे चेन ॥। पिय बिन. ।। कहां वे जमुना पुलिन मनोहर कहां वे सुखकी रैन॥ सूरदास प्रभु तिहारे दरस बिन विरहनिकुं नहीं चेन ॥ पिया
Bihaag
Priyasang rangbhar curr vilase ..
NityaPad-012
प्रियसंग रंगभर कर विलासे ॥ सुरतरससिंधुमें अतिही हरषित भई कमलज्यों फूलते रवि प्रकाशे ॥१॥ तनते मनते प्राणते सर्वदा करतहै हरिसंग मृदुलहासे ॥ कहत ब्रजपति तुमसबनसों समजाय मिटे यमत्रास इनहीं उपासे ॥२॥।
Ramkali
Ray munn chinta naan curr petki ...
NityaPad-364
रे मन चिंता न कर पेटकी ॥। हलन चलन यामें कछुनाहिन कलम लिखीजो ठेटकी ॥१॥ जीवजंतु जेते जलथलके तिन निधि कहा समेटकी ॥| समे पाए सबहिनकूँ पहुँचे कहां बाप कहा बेटकी ॥ २॥ जाको जितनो लिख्यो विधाता ताको पहुँचे तेटकी ॥ सूरदास ताहे क्‍यों ना सुमरे जोहै ऐसो चेटकी ।॥३॥
Bihaag
Cone russ gopin lino ghoont | madangopal nikat karpaaye
NityaPad-107
कोन रस गोपिन लीनो घूंट | मदनगोपाल निकट करपाये प्रेमकामकी लूट ॥। १॥ निरख स्वरूप नंदनंदनको लोकलाज गई छूट ॥ परमानंद वेदसागरकी मर्यादा गई टूट ।॥॥२॥
Gori
Nandrani hoe dadhimandhankaren. baare kanhaiya arankije chhandab
NityaPad-181
नंदरानी हो दधिमंधनकरें। बारे कन्हैया आरनकीजे छांडअब देहु मथानी॥।१॥ वारी मेरे मोहनकर पिरायेंगे कौनचितमें मतिठानी॥ हँसमुसकाय जननीतनचितये सुधि सागरकी आनी ॥२॥ जेगुण सरस्वति छंदनगाये नेतिनेतिमूदुबानी ॥ परमानंदयशोदारानी सुत सनेह लपटानी ॥। ३॥
Bilawal
Bhar dohni doodh haathate varvataheete leey jaat chhudaai...
NityaPad-296
भर दोहनी दूध हाथते वरवटहीते ले जात छुडाई॥। पूत लाडिलो जाने नाहिं तेंकियों ढीट यशोदा माई ॥॥१॥ बांट देत सब ग्वालनसो सुनरी महरि आप नहीं खाईं।। आनसमें बछरा छोरतहै तारीदेत बिडारत गाई ॥२॥ एकजो ढोटा नंदमहरको मेरो कछु नवस्यात ॥ परमानंद मोहन मूरत बदनस्वरूप देख मुसकात
Gori
Sadaa srigovardhan mein sthit. sadaa biraajen
Part2-324
सदा श्रीगोवर्धन में स्थित। सदा बिराजें श्रीवललभ विट्ठल, महा महोच्छव नित्त॥ जग्य-भोक्ता जो जग्य करत हैं भक्त जननि के हित्त॥ 'छीत- स्वामी' गिरिधरन श्रीवि्ठुल लग्यौ रहत नित चित्त ॥
Bihaag
Vraj sukh tum vizasat vrajaraani . kamalnainkaun palana
Part1-104
ब्रज सुख तुम विज़सत व्रजरानी । कमलनैनकौं पलना झुलानी ॥१॥ नैन निरखि अँसुवनकी धारा । सब तन पुलकि प्रस्वेद अपारा ॥२॥ देखिदेखि अचरज मन आने । यह सपनो केथों साँचहि जाने ॥३॥ अपने धर्म की करैं बड़ाई । मोहि बुढ्यांत महा निधि पाई॥४॥ धन्य धन्य मोहि यों लीये | मोहि विधाता यह सुत दिये ॥५॥ अपने ललनकों धरि हों राखौं | काहु न देंहुँ कछू नहीं भाखों ॥६॥ होय बड़ौ यह रणजीतेगौ। तब अपनीौ करे ब्रज चीतेगी ॥७॥ कब्हुँक कहै अनेक कहानी । हँसत ललन मुख लखि न अघानी ॥८॥ बारबार कर अंचल फेरै | पलकनी बिछुरन मुख हेरे ॥९॥ कबहुँक ले सुत उठि करि नाथै । लट गोबिंद कर गही खांचे ॥१०॥ ब्रज जुबतिन में ठाडी फूल | सुनत बड़ाई त्रिभुवन भूलै.॥११॥ रसिक प्रीतमकी लीला गावै । मन शुद्ध होई महा सुख पावै.॥१२॥
Aasawari
Bheri baajai bharuva naanchai aagein gachaiya daure juu ..
Part3-102
भेरि बाजै भरुवा नाँचै आगें गचैया दौरे जू ॥ ता पाछे सब गोप के लरिका हो हो होरी बोले जू ॥१॥ कमर हलावें बाँह मरोरे अधरन कौ रस लेवे जू ॥ नैन नचाबैं बगल बजाबै मुख पै गुलचा देवेजू ॥ २।। भरूवाजी को मूँड़ मुँडायौ निलज निपट अंग खोले जू ॥ 'रामदास! प्रभु या होरी में ढोल ढोल की बोले जू ॥३॥
Sarang
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