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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Hanse mridulal kahat gualinus daan hamase deejai .. atee | Part1-233 | हँसे मृदुलाल कहत ग्वालिनसों दान हमासे दीजै ॥ अति
नव नेहभरी वह भामिनी कहत नहिं नहिं लीजै ॥१॥ भरत परस्पर भाव ट्गनसों
सुधा समूहसों भीजै ॥ श्रीविद्रलगिरिधरनलाल अब मनमानै सो कीजै ॥२॥
| Bilawal |
Sunariali duperiki | NityaPad-249 | सूनरीआली दूपेरीकी
बिरीयां बैठे झरोखन पोवत हार ॥ ओंचक आय गये नंदनंदन मोत्तन चितये
कांकरीडार ॥१॥ हों सकुची लज्जीत भई ठाडी गुरुजन मनमें कियो बिचार ॥।
गोविंद प्रभु पिय रसिक शिरोमनी सेन बताई भुजा पसार ॥२॥। | Saarang |
Baldasha gopalki sub kaahu bhaavai | jaake bhavanmein jaat | Part1-149 | बालदशा गोपालकी सब काहू भावै | जाके भवनमें जात
है सो लै गोद खिलावै ॥१॥ श्यामसुंदर मुख निरखिकें अबला सचुपावै ।
लाल लाल कहि ग्वालिनी हँसि कंठ लगावै ॥२॥ चुटकी दे दै मुदित व्है करताल
बजाबै | परमानंद प्रभु नाचहीं शिशुताई जनावै ॥३॥ | Bilawal |
Aaj singar shyam sunder koo dekhehi bunn aave .. eyam paag | NityaPad-067 | आज सिंगार श्याम सुंदर को देखेही बन आवे ॥ एयाम पाग
अरु श्वेत चोलना छूटेबंद सुहावे ॥१॥ मोतीन माल हार उर उपर कर मुरलीजु
बजावे ॥ नंददास प्रभुरसिक कुंवरको ले उछंग हुलरावे ॥ २॥ | Saarang |
Rishshayi sakhiri tein sauvery sujanrai || taana bandhan anoopam | Part1-351 | रिश्षयी सखीरी तें सॉवरी सुजानराय || तान बंधान अनूपम
गतिसों मधुर ताल स्वर सुधर गाय ॥१॥ राखे प्रेम प्रमोद प्राणपति ग्रूढ़भाव
सैंनन जनाय ॥ उघटत शब्दसंगीत स्वामिनी नृत्यत पग नूपुर बजा य ॥२॥
हरिसंग रासरंग राख्यों मिलिके अंगअंग गुण बहुत भाव ॥ चब्रभुज
गिरिगोवर्द्धनघारीलाल लेत रहसि हँसकंठ लाय ॥३॥ | Kedaro |
Ritu vasant bilasati raajat rajamage raing .. paudhe | Part3-362 | ऋतु वसंत बिलसति राजत रजमगे रैंग ॥ पौढे
दंपति अंग अंग सोभा कही न जाई दामिनी सी सोभा तन राधा घनस्याम
संग ॥१॥ अरस परस लुम झुम नैना अति घूम घूम मंद मंद आलस वलित
लजावति कोटि अनंग | हरियारो हरख अति सुजस जाय “नंददास”! जाल
रंध्र निरखि निरसरित्र मानु गोपीजन अति उमँग ॥२॥ | Basant |
Haye daiya matwala jogi daare merey aayaa haye ..dhru... jatajoot | Part1-115 | हे दैया मतवाला जोगी दारे मेरे आया है ॥ध्रु.॥ जटाजूट
शिर गंग बिराजत तैलोचन मन भाया है| वृषभ ऊपर असवार होयकें श्रीगोकुलकों
धाया है ॥१॥ बाघंबर पाट्ंबर सोहै अंगछार लपटाया है | कर त्रिशूल डमरू
लियें खप्पर सिंगीनाद बजाया है ॥२॥| अरुण नैन विजयाजु चढ़ायें आक धत्तूरा
खाया है | तिलक चंद्रमा भूकुटी ऊपर जोगी जुगत बनाया है ॥३॥ सरंडमाल
गरैं बीच बिराजत शेषनाग लपटाया है । अदभुत रूप धस्बौ जोगीकौ मेरा गुपाल
डराया है ॥४॥ देखों मैया तेश बालक जिन मोय चटक लगाया है। सूरश्याम
चरनरज बंदी दरशनमें सचुपाया है ॥५॥ | Aasawari |
Madhumangal anandit tunn pulkit naan maaye hoe. sub | Part2-330 | मधुमंगल आनंदित तन पुलकित न माये हो। सब
अपने मित्र सुबंधु बोल जोतसी बोलाये हो ॥१ ॥ बूझत लग्न लेहें कौन
दिनको कहो जु तुम ज्ञानी हो। पुरुषोत्तम आये हैं ब्याहन मेरी कुंवरी
सयानी हो ॥२ ॥
| Maru |
Mohanlal key sanga lalana sohai jaisen taroo tamalke dhing phul | Part1-340 | मोहनलाल के संग ललना सोहै जैसें तरू तमालके ढिंग फुल
सोनजरदकौ ॥ बदनक्रांति अनुप भाँति नहिं समात नीलांबर गगनमें जैसें प्रगस्यौ
शशि पूरन शरदकौ ॥१॥ मुक्ता आभूषण युति बिंबित अंग अंग चूने मिले
रंग दूनौ होत जेसें हरदकौ ॥ सूरदास मदन मोहन गौहन की छबि बाढ़ी मेंटल
दुख निरखि नैेन मैंन दरदकी ॥२॥ | Kalyan |
Jhoolau hoe laadale lalana .. phooli jasomati chaav jhoolavat | Part1-112 | झूलौ हो लाड़ले ललना ॥ फूली जसोमती चाव झूलावत
फूलन मध्य पलना ॥१॥ सुरपुर निरखि देव आनंदित वर्षावत बहु पुष्पना ॥
कृष्णदास प्रभुकी छबि निरखत वारत तनमन धना ॥२॥ | Aasawari |
Horry khelai mohana sunder girdhari .. nakh sikh | Part3-129 | होरी खेलै मोहना सुंदर गिरधारी ॥ नख सिख
सुभग सिंगार सजै सौंधे सुखकारी ॥१॥ सीस कुल्हे छबि अति बनी सोड़ै
ललित लला री ॥ केसर को बागो बन््यौं सोहे अति भारी ॥२॥ लाल
गुलाल उड़ाब हीं रँग रह्यो सरसा री ॥ यह सुख सोभा निररिब के 'सूरदास'
बलिहारी ॥३॥ | Kafi |
Rusanon nakar pyaari rusavo nivaar.. | NityaPad-322 | रूसनों नकर प्यारी रुसवो निवार।।
कबकीहों ठाडी तोसों अरज करतहोौं रैनरही घड़ी चार ॥१॥
मेरो कह्यो तू मान सुहागिन अतिसुंदर सुकुमार।॥
गोविंदप्रभुसों हिलमिल भामिन तनमन जोबनवार ॥२॥ | Nayaki |
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