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Sheetkal Ke Pad
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Kirtan Title | Page | Kirtan | Raag |
|---|---|---|---|
Tail bharey bharey kesh sondhen anga bharey swachch saaree . oormit kumbh | Part1-136 | तेल भरे भरे केश सोंधें अंग भरे स्वच्छ सारी । ऊर्मित कुंभ
भरे उर दोउ तेंबोल भरे मुख चुचकारी ॥१॥ जसुमतिके अंक त्रिभुवन मंडन
गोद लियें चुखावति भारी । हिरदें नैन दोउ वाद लग्योहे दूरी न करै दोऊन अंचल
बिडारी । पीढ़ा बैठि पाऊँ धरि नीचें तहाँ ठाड़ी सनमुख सुकुमारी | देखत सूर
. भयो अति शीतल गति न करे अंतर मत्ति हारी ॥३॥ | Saarang |
Peeya pitambar murali jeeti.. | Part2-065 | पीया पीतांबर मुरली जीती॥
हाहाकरत न देत लडेंती पांच परत निसबीती ॥१ ॥
राखी दुराय सघन कुंजनमें ललितादिक रहत सचीती॥
विट्ठल विपिन विनोद बिहारीसों प्रगट करत रस रीती ॥२॥ | Kanharo |
Arrie tere nain salone manmohan rijhwaar .. tujo naee dalahi nava joban abahi aaee gone .. 1.. | Part3-195 | अरी तेरे नैन सलोने मनमोहन रिझवार ॥ तूजो नई दलही नव जोबन अबही आई गोने ॥ १॥
खेलत नाहि फाग गिरिधरसों यह जुदई सिख कोने ॥|
कृष्ण जीवन लछीरामके प्रभू सों खेलत नाहि अघोने ॥२॥ | Kaafi |
Doll maaee jhoolat hein vrajnath .. sanga shobhit | Part3-374 | डोल माई झूलत हें ब्रजनाथ ॥ संग शोभित
वृषभान नंदिनी ललिता विशाखा साथ ||१॥
बाजत ताल मृदंग झांझ डफ रुज मुरज बहु भांत ॥
अति अनुराग भरे मिल गावत अति आनंद किलकात ॥२॥
चोवा चंदन बूका बंदन उडत गुलाल अबीर ॥
परमानंद दास बलहारी राजत हैं बलबीर |॥३॥ | Devgandhar |
Srivallabh taja apunon thakur kaho konapen jaiye hoe.. | Part2-288 | श्रीवल्लभ तज अपुनों ठाकुर कहो कोनपें जैये हो॥
स्वगुणा प ण पुरन करुणास ागर जहां महारस पैये हो ॥१ ॥
सुरतही देख अनंग तन मन प्रान विकैये हो॥
परम उदार चतुर सुखसागर अपार सदा गुन गैये हो ॥२ ॥
सबहिनते अति उत्तम जानी चरनपर प्रीत बढेये ।॥
कान न काहूकी मन धरीये व्रत अनन्य एक ग्हीये ॥३ ॥
सुमरसुमर गुन रूप अनूपम भवदुख सब विसरैये॥
मुख विधु लाबण्य अमृत इकटक पीवत नाहीं अधैये ॥४ ॥
चरन कमलकी निशदिन सेवा अपने हदे वसैये॥
रसिक कहे संगिनसों भवोभव इनके दास कहैये हो ॥५ ॥ | Aasawari |
Sahaj uraj parr chhoot rahee lutt... kanak lataaten utar bhujangani | NityaPad-118 | सहज उरज पर छूट रही लट।॥ कनक लतातें उतर भुजंगनि
अमृतपान मानो करति कनकघट॥ १॥
चितवति चार तोहे देखें त्रिक मोहे चिबुक बिन्दु बर अधर निकट ॥
चतुर्भुज प्रभु गिरिधरन रंगी रंग अतिबिचित्र गृहकुंज जमुनतट ॥२॥। | Kalyan |
Inmein koo vrishbhankishori .. sthambataydeho apane curr | NityaPad-159 | इनमें को वृषभानकिशोरी ॥ स्थामबतायदेहो अपने कर
बालापन की जोरी ॥१॥ वहदेखो ठाडी युवतिनमें नीलवसन तनगोरी ॥। बालापनमें
मोहिसिखायो छलबलबहुविध चोरी ॥२॥ तिहारेगुणनकी ग्रथितमाल
भैंउरहीते नहीछोरी ॥। सूरदासप्रभु तिहारे मिलनको जैसेपाट की डोरी ।।३॥ | Bilawal |
Bali waman hoe jug pavankaran .. kahi naan parat sobha | Part1-218 | बलि वामन हो जग पावनकरण ॥ कहि न परत सोभा
नीलमणिनकी सी गोभा गगन गयौ जब सुंदर चरण ॥१॥ बन्याहे भेद अति
उततें गंगाकी धार चँंसी है धरनि उज्वल बरण ॥ इततें पदकी जोति मानों
कारलिंदीकी धार चढ़ी है अमरपुर पापहरण ॥२॥ रहे हैं चक्ृृत चाहि सुर नर
मुनिवर दुहुँ दिसि नेह आन कीये बरण ॥ नंददासप्रभु जाके चरित्र दुरित दवन
रंचक श्रवण मिटेँ जन्ममरण ॥३॥ | Saarang |
Khelat faag sakhaa sangaline vrajaveethani | Part3-157 | खेलत फाग सखा संगलीने ब्रजवीथनि
गिरिधारीहो ॥ युवती यूथ संग ले आई श्रीवृषभान दुलारीहो ॥१॥ विविध
भांति पहरे बहुभूषन तन तन सुखकी सारी ॥ रूपदेस्त्रि अपने मनहीमन
काम कामिनिहारी ॥२॥ केसररंग कनिक पिचकाई भरि धाई ब्रजनारी ॥
मदनगुपाल लालकों छिरकत गावत मीठीगारी || ३॥| एकअबीर गुलाल मुठ ीले
मोहनमुखपर डारी | एकजु आंखिन आंजत काजर एकबजावत तारी ॥४॥
नंदनंदनतन चितबत राधा तनकीदशा बिसारी ॥ नेह गांठि छूटत नही छोरी
ललनारतन उजारी ॥५॥ प्रेम मगनदौरी त्रियगनते लालभरे अंकवारी ॥
अधरामृतदीनों पियकोतन बढ्योरंग अतिभारी ॥६॥ राधाबदन विलोकि
श्यामघन मनमें बात विचारी ॥ मुठीकामरस सिंधुमगन न्हे होहोम॑त्रपढि
डारी ॥७॥ चहुंओर ब्रज वनितन घेरे फणशुवा मांगत प्यारी ॥ सुघरराय अपनों
तनमनधन दियो सबन सुखकारी ॥८॥ | Dhanashri |
Makhan rotty lehu kanhabare..| taatitaati ruchi upajaavat | NityaPad-299 | माखन रोटी लेहु कान्हबारे॥| तातीताती रुचि उपजावत
ब्रिभुवनके उजियारे | १॥॥ और लेहु पकवान मिठाई मेवा बहुविध सारे ।। ओट्यो
दूध सद्य घृतमधु रुचिसो खा ओ मेरे प्यारे ॥ स्२॥ तब हरि उठकें करत बियारु
भ्रक््तनप्राणपियारे ॥ सूरस्याम भोजन करके शुच्ि जलसों बदनपखारे ॥३॥ | Kanharo |
Doodhso snan karo munn mohan chhoti diwari kaal manaaye .. | Part2-036 | दूधसो स्नान करो मन मोहन छोटी दिवारी काल मनाये ॥
करो सिंगार लाल तन वागो कुल्हे जरकसी सीस धराये ॥१॥
जेसो श्याम पीतरंग प्यारी मिली तेसेही दम्पति परम सुख पाये।।
आज समागम हे प्यारीको ज्यों निरधनके धन पाये ॥२॥
वह छब्रि देखदेख ब्रजजनही देत असीस अपुनी मन भाई॥
चिरजीयो दुलहनि दूलेहदोऊ परमानंददास बल जाई ॥३ ॥ | Bilawal |
Aaju maaee khelati fagu hari .. sub sakhiyan | Part3-268 | आजु माई खेलति फागु हरी ॥ सब सखियन
सिंगार कीयो मिलि सेंदूर माँग भरी ॥१॥ गुलाल की चोली अबीर की
झोरी चहूँ दिस लागी झरी ॥ “कृष्ण जीबन लछीराम' के प्रभु राधा कों
अंक भरी ॥१५॥ | Sarang |
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