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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Aangan shyam nachaavahin jasumati nandrani .. taari daiy daiy gaavahin
Part1-144
आँगन श्याम नचावहीं जसुमति नंदरानी ॥ तारी दै दै गावहीं मधुरे सुरबानी ॥१॥ पॉयन नूपुर बाजहीं कटि किंकिनी कूंजे । नेन्ही नेन्ही एड़ियन अरुनता फली बंब न पूजें ॥२॥ जसुमतति गान सुनें श्रवनन तब आपूही गावें | तारी बाजत देखही पुनि तार बजावै ॥३॥ केहरि नख उर पर रूरे सुठि शोभाकारी । मनहूँ श्याम घन मधि में नव शशी उजियारी ॥४॥ गभवारे सीर केसहें बने मूँघरवारे लटकन लटकें भाल पर विधु मधि गनतारें ॥५॥ कटठुला कंठ चिबुक तरें मुख दसन बिराजें ॥ खंजन बीच शुक आनिके मनु परी दुराजें ॥६॥ जसुमति सुत हिं नचावही छवि देखत जियतें ॥ सूरदास प्रभु श्याम कौ सुख टरत न हियतें ॥६॥
Suha
Khelan dey mohe horry hoe rasiya.. jaani naan dehaun gahi
Part3-353
खेलन दे मोहे होरी हो रसीया।। जानि न देहौं गहि राखौंगी काए को बैंयाँ मरोरी हो रसीया | १॥ ब्रिंदाबन बिच ख्रेलि मच्यौ है सँग राधिका गोरी हो रसीया ॥ सखी सहेली सब मिलि खेलैं हम कहा कीनीं चोरी हो रसीया ॥ २॥ फगुवा लीये बिनु जानि न देहौं तुम मत जानौं भोरी हो रसीया ॥ ऋषिकेस' प्रभु मिलि मगन भये डारति है तृन तोरी हो रसीया ॥ ३।।
Bihaag
Ruchirtar bal‍labhadhishcharanam ..
NityaPad-004
रुचिरतर बल्‍लभाधीशचरणं ॥ अस्तु में सर्वदा सुंदराकृति जगन्मोहनं हदि विरहकरणं ॥१॥ विहितमायावादवादिजन जारजन्यसंगतात्मजनकुमतिहरणं ।| अखिलसाधनरहितदो षशतकलुषकर कुमतिभर भरितनिजदासशरणं ॥२॥। अंजसा कदंबपादपबहुपत्रयुतवासनाभंगभवजलधितरणं ॥। वद॒ति हरिदास इति सकलजनमात्रकृतिगोकुलाधीशपदकमलवरणं ॥ ३॥।
Ramkali
Chaturyubavati gabanat piya paivan ..
NityaPad-335
चतुरयुबव॒ती गबनत पिय पैवन ॥ गहे उर रसवचन सहचरी के प्रेम मगन भूषणसाजत तन ॥। १॥ नवशुंगार सब अंगअंगप्रति मोह्यो रतिपति नयनन के अंजन ॥ चतुर्भुजप्रभु गिरिधर भुजभरलई सौदामिनि भेटी मानो नवघन ॥२॥
Kanharo
Aalee tero badan chand dekhat buss bhaye kunjbihari ... useer
NityaPad-332
आली तेरो बदन चंद देखत बस भये कुंजबिहारी ॥। उसीर महलमें तेरो मग देखत बेर बेर तोये संभारी ॥९॥॥ तो बिना रही न सकत नवल प्रान प्यारो एसि निद्ठर तू सुनरी कुमारी ॥ नंददास प्रभु प्यारी रूप गुन उजियारी एसे ब्रजाधीशजीसों मान करत तू चल क्यों लों लाज निवारी ॥२॥
Bihaag
Humm tumsaun binati karein, jani, aankhini bharau
Part3-226
हम तुमसौं बिनती करें, जनि, आँखिनि भरौ गुलाल | सहल्लयौ परत हम पै नहीं ये, निपट अनोखौ ख्याल ॥ दरसन तैं अंतर परे हो, करहु अबीर अबीर | तुमहि कहौ कैसे जियैं जहँ, मीन न पाबैं नीर ॥ स्याम ! तुम्हारे रंग रंगी कछु, और न रंग सुहाई | नितही होरी खेलियै हो, तुम संग जादवराई || यह फगुवा हम पावहीं हो, चितवनि मृदु मुसुकान । सूर स्याम करौ जू, तुम हो जीवन-प्रान ॥
Kafi
Aajato uneede hoe laal || laal lochan piyake alsaane
NityaPad-050
आजतो उनीदे हो लाल || लाल लोचन पियके अलसाने बिनगुण बनी उरमाल ॥|१॥| डगमगात चरणधरत धरणी पर मेंज़ु लखे तबहीं बेहाल ॥ अति तुतरावत बात बनावत लागोहो मोहि रसाल ॥। २॥ हमसो कपट औरनके वश भये हमारो मरणतुम्हारो ख्याल ॥ तुम बहुनायक सुखके गाहक सूर बाल बेहाल ॥ ३॥।
Lalit
Horry kheli kahaante aaye laalan rasake saanware
Part3-152
होरी खेलि कहांते आये लालन रसके सांवरे रंग भीने ॥ रंगचुचात पीतांबर कांधें कनिक पिचककरमें लीने ॥१॥ प्रीत पणे कितलाल गुलालन कोन नारि रस बस कीने ॥ प्रान पिया रे पैयत मनकी होत कहा अबहंसि दीने ॥ २॥ हिय अंकित नख चंदन वलकें लस्वियतहे पटझीने ॥ अंकभरी मुसिकाय छबीले घनदामिनिकी छबिछीने ॥३॥।
Dhanashri
Nayana merey atkeri vaa mohan
NityaPad-310
नयना मेरे अटकेरी वा मोहन के संग।। कहा कहों वरज्यो नहीं मानत रंगे उनके रंग ॥।९॥ औरनको तिरछे हवे चितवत गुरुजनहीसों जंग ॥ सूरदासप्रभु प्रेमसुरत में होत न कबहू भंग ॥॥२॥
Kalyan
Laal kachhu keeje bhojan tiltil kaaree houn vaari hoe.
Part2-236
लाल कछु कीजे भोजन तिलतिल कारी हों वारी हो। अब जाय बेठो दोऊ भैया नंदबाबाकी थारीहो ॥१ ॥ कहियतहे आज संक्रांति भलोदिन करिके सब भोग संवारीहो। तिलहीके मोदक कीने अति कोमल मुदित कहत यशुमति महतारी ॥२ ॥ सप्त धानको मिल्यो लाडिले पापर ओर तिलवरी न्‍्यारी। सरस मीठो नवनीत सद्य आजको तिल प्रकार कीने रुचिकारी ॥३ ॥ बेठे श्याम जब जेमनलागे सखन संग देदें तारी । परमानंददास तिहि औसर भर राखे यमुनोदक झारी ॥४ ॥
Dhanashri
Jasoda naheen varaje apnobal .. apano baal
Part3-025
जसोदा नहीं वरजे अपनोबाल ॥ अपनो बाल रसिया गोपाल ॥ध्रु०॥| स्नान करन गई जमुनातीर ॥ करकंकन अभरन धरेचीर ॥ मेरी जल प्रवाह तन गई दीठि ॥ पाछेतें कान्ड मेरी मलत पीठि ॥१॥ यह अन्न न खाय मुख पीवे नखीर ॥ यह केतीक वार गयो जमुनातीर ॥ होंवा रोरी ज्वालिन तेरो ग्यान ॥ यह पलना झूले मेरो वारो कान्ह ॥२॥ बुंद्ावन देखेमे तरून कान्ह ॥ घर आये केसें भये अयान ॥ उठि चलीरी ग्वालि जिय उपजी लाज ॥ सुरदास ये प्रभुके काज ॥३॥
Basant
Srilakshman kull gaaiye srivallabh suban sujan ..
Part3-092
श्रीलक्ष्मन कुल गाइये श्रीवल्लभ सुबन सुजान ॥ लाल मनमोहना हो ॥ गुन निधि गोपीनाथजू निर्गुन तेज निधान ॥१॥ पुरुषोत्तम आनंदमें श्रीविवल ब्रजके भूप ॥ कोटि मदन विधुवारनें मुख सोभा सुखरूप ॥२॥ भूतल द्विज वपु धारिकें श्रुतिपथ कियो प्रचंड ॥ मारण पुष्टि प्रकासिकें मायामत कियो खंड ॥३॥ श्रीमिरिधर गुन आगरे ॥ पूरन परमानंद ॥ राज सिरोमनि लांडिले करुनामय गोविंद ॥४॥ श्रीबालकृष्ण मुख चंद्रमा पंकन नेन विसाल ॥ श्रीवललभ गोकुलनाथजू प्रिय नवनीत दयाल ॥५॥ श्रीपत्ति श्रीरघुनाथजू जगजीवन अभिराम ॥ रूप रासि जदुनाथजू कमला पूरन काम ॥६॥ नवकिसोर घनस्यामजू अंगअंग सुखदाय ॥ बालक सब ब्रह्मजानिकें वेदबिमल जसगाय ।|७॥ बिंद्राविपिन सुहावनों ब्रजलीला सुखसार ॥ मानिक॑चंद्र प्रभु सर्वदा श्रीगोकुल करत बिहार ॥८॥
Bilawal
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