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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
Page
Kirtan
Raag
Phool gaee vrishbhan dulari ..
Part2-251
फूल गई वृषभान दुलारी ।। पहेले तो निरखत नेनन भर क्‍यों पूजों एकांतन न्‍्यारी ।।१॥। कर अंजन नेनन दे मोहन अपने हाथ जीमायो ।। अंग अंग सब भूषण भूषित बसन मनोहर तिलक करायो ।। २।। रूप रास केसेंक बरनों नव नागरि नवनागर पायो ।। रति रस केलि करो दोउजन लीलारस परमानंद पायो ।।३॥।।
Saarang
Liye sakal sonj horry kii naval kishori juu
Part3-322
लिये सकल सोंज होरी की नवल किशोरी जू मयनन में ॥ सेत अबीर स्याम तागर सुत नेह फुलेल सन्‍्यों नयनन में ॥१॥ कुटिल कटाक्ष छूटत पिचकाई प्रीति रंग भरभर नयनन में ॥ लाल गुलाल अरुण अरुणाई मिलवत ललित सख्ली नयनन में ॥२॥ विहंसन फगुवा देतलेतहें सहचरी हूं न लखे नयनन में ॥| रस भीजे रीझे पिय प्यारी जगन्नाथ पूरण नयनन में ॥३॥
Kalyan
Tere
NityaPad-326
तेरे लांबे केस विविध कुसुमग्रधित देख हरी सिरधरें मोरचंदवा ॥ शुृंगाररसको सर्वस्तर किशोरीप्यारी तब अंगअंग कहालों कहूं अल्पम्मति वशभये आनंदके कंदवा ॥१॥ कस्तूरीके पत्र कुंकुमकलित वल्लीसिंदूर को चित्रनिररर कुचमंडित धातुप्रवाल परे सुभग श्रीतन मनवचन मानआनंदवा ॥ कृष्णदास बलहारी अलकनकी शोभापर गिरिवरधरके आली चित फंदवा ॥।२॥
Bihagaro
Milli diyau haye sakhee koo bhesh apune laal
Part3-170
मिलि दियौ है सखी को भेष अपुने लाल को ॥ मिलि गावत चली है धमार गजगति चाल सों ॥१॥ वृषभानु सुता नंदलाल को हो दियौ है सखी कौ भेष ॥ सारी सुरंग सुहाबनी हो नैननि काजर रेख ॥२॥ जसुमति आगैं राधिका हो कहति हैं बात बिचारि ॥ स्याम सुंदर के कारने हम लाई हैं एकु नारि ॥३॥ जसुमति बुझे राधिका हो कहाँ की कन्या होई ॥ कहा नाम या बाल कौ हौ मै सुनि जानों सोई ॥9७॥ नंद महर की यह सुता हो मोहनी जाकौ नाँऊँ ॥ महारावर साँची कहाँ हो गोकुल जाकौं गाँऊँ ॥५॥ यह रावर मुसिकाइ कें हो जब जान्यौं या भेष ॥ तन मन धन नोछावरि हो बलिहारी या देब ।।६|। फग॒ुवा माँग राधिका हो महा रावर गहि धाई ॥ अब भले तुम छूटी हो मोए फगणुवा देहु मँगाई ॥७॥ फगुवा दीयौ जसुमति हो पान फूल पकवांन ॥ फगुवा लीनै राधिका हो भए सकल कल्यान ॥८॥ लाल गुलाल उड़ाव डि गगनलोौं सब छाई ॥ एकु एकनु अँक भरै हो सोभा कही न जाई ॥९|॥ रस बाढ्यौ गोपषिका हो खेलति झूमक चारि || एकु सखी मिलि एकु सौं देति है छोरी की गारि ॥१०॥ पुहुप सुरंग सुहाबनों हो फूले फले सुबास॥ जसोदा नँदन राधिका हो खेलें रैंग विलास ॥१॥ ऐसी सोभा फागु की हो मोपै बरनि न जाई ॥ 'रसिक” सुंदर लाल पैं हो निरखि सदाँ बलि जाई ॥१२॥
Dhanashri
Chhatho bilas kiyaa shyamaju .. godhan banakon chully
Part1-308
छठो बिलास किया श्यामाजू ॥ गोधन बनकों चली भामाजु ॥ पहेरें रंगरंग सारी ॥ हाथन पूजा थारी ॥१॥ ताकी मुख्य सहचरी राई ॥ खेलनकों बहुत सुघराई ॥छंद।॥ चली बनवन बिहसि' सुंदरि हार केकण जगमगे ॥ आय मंदिर पूजदेवी भोग सिखरन सगमगे ॥२॥ तासमय प्रभुजी आप ॑ पधारे कोटिक मन्मथ मोहहीं ॥ निरख सखियन कमल मुख मानों निधन धन जों सोहहीं ॥३॥ खेलका आरंभ कीनौ राधा माधौ बिच किये ॥ वाकी परछाँई परी तब रसिक चरणन चित दिये ॥४॥
Malav
Apane piya sanga khelon milli horry pichkarin
Part3-160
अपने पिय संग खेलों मिलि होरी पिचकारिन . रंग भरों गोरी ॥ गृह गृहते बानिक वनिवनि आंई साँवरी सलोनी सुंदर भरी ॥१॥ बाजत ताल मृदंग मुरण डफ वीच वीच मुरली धुनि थोरी ॥ चोवा चंदन ओर अरगजा अबीर लिये भरे भरि झोरी ॥२॥ में अपनों वर पायोरी सजनी वांधि प्रीति रस की डोरी ॥ सूर स्याम प्रभु रस भरे खेलत मदन मोहन राधा जोरी ॥३॥
Dhanashri
Raadhe tere gawat kokila gann raheri maundhar .. piyake gawat
NityaPad-276
राधे तेरे गावत कोकिला गण रहेरी मौनधर ॥ पियके गावत मेंनारहे मुखमोर कोटिमदनमोहनको लियो मनहर ॥१॥ कुंजमहल में मोहन मधुरता नराखी वितानतर ॥ गोविंदप्रभु रीझ हृदयसों लगाई वृषभान कुंवर ॥२॥
Nat
Dadhike matware kaanh kholo que‍yon naan palaken..
NityaPad-015
दधिके मतवारे कान्ह खोलो क्‍यों न पलकें।। शिश मुकुटकी लटा छुटि और छुटि अलकें ॥१॥ सुरनरमुनि द्वार ठाड़े दरस कारन कीलकें ॥ नासिकाको मोती सोहे बीच लाल ललकें ॥ २॥ कटि पीतांबर मुरलीकर श्रवन कुंडल झलकें ॥ सूरदास मदनमोहन दरस देहो भलकें ॥।३॥
Bibhaas
Jasumati vihasati foosati bhaari .. barasgathike shobhit
Part1-073
जसुमति विहसति फूसति भारी ॥ बरसगॉठिके शोभित बधाये ले आवति व्रजनारी ॥१॥ चंद्रावलि व्रजमंगल रोहिणी दूधन अरघ बढ़ावें ॥ इत्तते गाय उठत उतते वे आदर दे बैठावैं ॥२॥ लिये बुलाय रायजू ब हँसि हँसि सबही दिखावैं ।| श्री विद्रलगिरिधरनकूँ गोद ले तिलक आरती करावें ॥
Devgandhar
Bunny roop-rung raadhe, taatain adhik baney vrajnath ..
Part3-256
बनी रूप-रंग राधे, तातैं अधिक बने ब्रजनाथ ॥ , ललिता अरु चंद्रावली मिलि, बन्यो छबीलौं साथ ॥ ताल पखावज बाजहीं संग, डफ मुरली को घोर ॥ नंद-द्वार औसर रच्यौ दोऊ, राजत नवल किसोर ॥| एक कोद ब्रज-सुंदरी, इक कोद गुवाल गुबिंद ॥ सरस परसपर गावहीं, दै गारि नारि बहु-बुन्द ॥ आवहु री ! हम दुरि रहें बल-भद्ग कृष्ण गहि वेढि ॥ लोचन उनके आजही अरू, अधरनिको रस लेहिं ॥ सीला नाम गुवालिनी, तिहिं गहे कृष्ण धपि धाई || उपरैना मुरली लईई, मुखनिरखि हरषि मुसुकाई ॥ गहे अचानक राधिका, तब रही कंठ भुज लाई ॥ मन के सब सुख भोगये, जब परसे जादव-राई ॥ कोटि कलस भरि बारुनी, दई बहुत मिठाई पान ॥ राधा-माधौ सु रस रहो, सब चले जमुन जल नहान ॥ द्वितिया सकल समाज सौं, पट बैठे आनंद कंद ॥ दान देत ब्रज सुंदरी, नग-भूषण नव निधि नंद ॥ बन-बीथिनि भरि पुर गलिनि मैं, उमंग्यों रंग अपार ॥ सूर, सु नभ सुर थकित रहे सब, निरखत प्रान-अधार ॥
Sarang
Kaahekon shithil keeye merey putt .. nandgopasut chhaandi atapati
Part1-257
काहेकों शिथिल कीये मेरे पट ॥ नंदगोपसुत छाँड़ि अटपटी बारबार बनमें रोकत बट ॥|१॥ कर लंपट परसौ न कठिन कुच अधिक व्यथा तन रहे निधरक घट ॥ ऐसी विरुध है खेल तुमारै पीर न जानत गहत पराई लट ॥३॥ कहूँ नहीं सुनी कबहूँ नहीं देखी बाद परत कालिंदीके तट ॥ परमानंद प्रीत अंतरकी सुंदर श्याम विनोद सुरत नंद ॥३॥
Kanharo
Nand badau jijman hamarau. teenlok mein bhrami amii aayou raakhi
Part1-128
नंद बड़ौ जिजमान हमारौ। तीनलोक में भ्रमि अमि आयौ राखि हमारी मान ॥१॥ या व्रजमंडल गोप जिते हैं मेरें एक समान । तिनमें अब हों दै घर जाँचों नंदराय वृषभान ॥२॥ काहूकों कुंजर काहूकों मंदिर काहू हेम बहु दान । जब जानूँ तब मोहि देहुगे तबहीं तो परमान ॥३॥ ढाढ़िनकों मैं संग ले आयौ कुटुंब सहित संतान । तुमारे द्वार परयौ जस गाऊँ कृष्ण कृष्ण गुन गान ||४॥ तुमारे बाल गोपालें दरसों और न मनमें आन । रामक्ृष्ण ढाढ़ी तब उठि करि शोभा कहत बखान ॥५॥
Maroo
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