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Sheetkal Ke Pad

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Kirtan Title
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Kirtan
Raag
Aeye munn maan merey kahyo kaahe koo risani pyaari tuu. pratham ree
NityaPad-223
ए मन मान मेरे कह्यो काहे को रिसानी प्यारी तू। प्रथम री भैरो गुन जन गाइये याही ते सुघराई होतु॥१॥ मालकोस की तानन ले-ले राजत रूप बिहाग॥। 'द्वारकेस' प्रभु बसंत खिलावत याही तैं बढत सुहाग ।२॥।
Saarang
Aaj baney vrajraj kunwar baithe singhdwar nicus anga anga nava nava
NityaPad-059
आज बने ब्रजराज कुंवर बैठे सिंघद्वार निकस अंग अंग नव नव छबि वरणि नजाई ॥ अलक तिलक नासिकाजो कपोल लोलकुंडल छबि देखत लजावत कोटिकोटि रबि अरुण अधर दशननमें झाई ॥॥९॥ लटपटी विच पाग लालके पीतकुल्हे भर गुलाल लटकत सिर सेहरो बन्यो शोभा अधिकाई ॥। गोविंदप्रभुकी बानिक देखत विधकित सब ब्रजजन मन रूपरास गिरिवरधर सुंदर मणिराई ।।२॥
Nat
Merey munn anand bhayau houn tou phooli anga naan maau ..dhru... saat
Part1-208
मेरे मन आनंद भयौ हों तो फूली अंग न माऊ ॥ध्रु.॥ सात साखिको मेरो राजा जा घर बजत बधाई । देव कुसुम बरषत हैं नीके रानी कीरति कन्या जाई ॥१॥ हय गज हीर चीर मणि माणिक भादों झरी लगाई । कुँवरि भई वृषभान नृषति घर अष्ट महासिद्धि आई ॥२॥ बाजे बाजत सुचिसों नीके रानी जसुमति भली नचाई । भाभीजूसों झगरो कीजे आज भली बनि आई ॥३॥ चलौ सुवासिन सब मिलि साथिये कंचन थार सजाई । गरीबदासकों सुबुद्धि दीजे बहोत पँजीरी पाई ॥४॥
Gori
Achwat yugal kishore kishori . bhojan karchauki parr baithe
NityaPad-305
अचवत युगल किशोर किशोरी । भोजन करचौकी पर बैठे भलीबनी यह जोरी ॥। ९॥| एक सखी पाय पलोटत ठाडी एक सखी करत निहोरी ॥ कुंभ खीरको एकले आई एक बीरा भर झोरी ॥२॥ एक सखी लाई पियको बागो प्यारीजूकी सुरंग पटोरी | कए सखी दरपन ले ठाड़ी एक युगल चरणन रतिजोरी ॥३॥ निजमंदिर बैठे पियप्यारीकोऊ वारवार तृण तोरी ॥| सर्व सखत्री श्रीवल्लभ जूकी जूठन लेन कुं बहुत निहोरी ।।४॥
Bihaag
Hoe hoe horry venu madhya gaave syaam .. nrityat
Part3-290
हो हो होरी वेणु मध्य गावे स्याम ॥ नृत्यत युवती समूह संगमिल मधुरतान विश्राम ॥१॥ फूली लता नवल गहेवर वन . बरन वरन बहू भांत ॥ किलकत शुकपिक आनंदभरे मनोहर मधुपन पांत ॥२॥ बाजत चंग उपंग मुरली डफ झालर झांझ मृदंग ॥ मदन गोपाल लेत गति सहज लजबत कोटि अनंग ॥३॥ कुंकुम चंदन वंदन अरगजा सुंगध॒ ताई ॥ वीच बीच तक तक तानत हैं नयनन की पिचकाई ॥४७॥ फाठत चीर रहत द्वुमद्र॒म प्रति टूटत मोतिन हार ॥ क्रीडा रसवश भये मगनमन तनकी तजी संभार ॥५॥ दास चतुर्भुज प्रभु चहुंदिश जुरगावें चेतव राग ॥ सुख समूह श्रीगोवर्द्धन तट रच्यो रंमीलो फाग ॥६॥
Gouri
Surang durang sohat pagkuranglal casenloyanalone ..
NityaPad-102
सुरंग दुरंग सोहत पागकुरंगलाल केसेंलोयनलोने ॥ कपोल विलोलनमें झलकेकल कुंडल कानन कोने ॥। १॥। रंगरंगीलेके अंग सबें नवरंगरंगेऐसे पाछें भये न आगें होने ॥ नंददास सखी मेरी कहां बचले कामके आये टटाबक टोने ॥२॥
Nat
Kihin miss yashomatihiken jaauun ..
NityaPad-088
किहिं मिस यशोमतिहीकें जाऊं ॥ सकलसुखनिधि- मुखअबलोकूं नयननतृषा बुझाऊं ॥। १॥॥ द्वारआरज सभाजुरीहे निकसवेनहिंपाऊं विनागयेपतिब्रतछुटे हसेगोकुलगाऊं ॥२॥ स्थाम गात सरोजआनन- मुदितलेलेनाऊं | सूरहिलगनकठिनमनकी कहीकाहि सुनाऊं ॥।३॥
Ramkali
Shrilakshman ghar baajat aaj badhaai ..
Part2-273
श्रीलक्ष्मण घर बाजत आज बधाई ॥ पूरण ब्रह्म प्रकट पुरुषोत्तम श्रीवललभ सुखदाई ॥१ ॥ नाचत तरुण वृद्ध और बालक उर आनंद न समाई॥ जयजय यश बंदीजन बोलत विप्रन वेद पढाई ॥ हरद दूब अक्षत दथधि कुंकुम आंगन कीच मचाई ॥ बंदनमाला मालिन बांधत मोतिन चौक पुराई ॥३॥ फूले ट्विजबर दान देतहें पट भूषण पहराई ॥ मिट गये ढूंढ नंददासनके मन वांछित फलपाई ॥४ ॥
Devgandhar
Houn hari sanga horry khelongi .. chova chandan
Part3-079
हों हरि सँग होरी खेलोंगी ॥ चोवा चंदन अबीर अरणजा पिचकाईन रंग मेलौंगी ॥ १॥ लोक लाज कुल कानि सब तजि पतिवृत् पाँडन पेलौंगी॥ “सूरदास' स्वामी की बाँह द्वै पकरि कै झेलौंगी ॥२॥
Ramkali
Bhorahi aayo merey dwaar jogiya alakh kahey kahey
Part3-180
भोरही आयो मेरे द्वार जोगीया अलख कहे कहे जाग ॥ मोहन मूरति एनमेनसी नैन भरे अनुराग ॥१॥ अंग बिभूतिगरें बिचसेली देखीयत विरह बिराग ॥ तनमन वारूं धीरज के प्रभुपर राखूंगी बांध सुहाग ॥२॥ तुम कोनकेवस खेले हो रंगीले हो हो होरियां ॥ अंजन अधरन पीक महावरि नेनरंगे रंगरोरियां ॥३॥ वारंबार जुंभात परस्पर निकसिआईं सब चोरियां॥ नंददास प्रभु उहांई वसोकिन जहां व्सेंवेगोरियां ॥४॥
Lalit
Koee aeka saanvarori itahabaiaavejaaee .. geongionyanan
NityaPad-159
कोई एक सांवरोरी इतहबैआवेजाई ॥ ज्योंज्यॉनयनन देखियेरी त्योत्यॉमन ललचाई ॥९॥ वदनमदनमनमोहना घुंघरवारे केश ॥ मोहनमूरति माधुरी नृत्यतमनोहरवेश ॥२॥| श्यामवरणहियो वेधियो जोबनमदछकेनैन ॥ रूपठगोरीमोहिलगीरी बिनदेखेनहिंचैन ॥३॥ धीरहरनबडरीभुजारी मदगजराजकी चाल ॥ _ उरदेखेंमनआवही ह॒वैरहियेबनमाल ॥।४॥ समझाये समझतनहीं रहीं छक मनरह्योभोय ॥॥ रामरायप्रभुसोरमी कहिभगवान सखीसोय ।।५॥।
Bilawal
Mohan boondaavan kreedat kunj banyau aeka bhaav .. sharadnisha
Part1-335
मोहन बूंदावन क्रीड़त कुंज बन्यौ एक भाव ॥ शरदनिशा जगमग रही मोहन बेंन बजाय ॥१॥ बेंन बजावत टेरसों ठाढ़े द्म की छाँई॥ व्रजनारी व्याकुल भईं घर घरते उठि धाई ॥२॥ नंदलाल तुम्हें जानिके आईं तिहारे पास ॥ सो चरित्र विधिनें रच्यौ रँग मिलि खेलें रास ॥३॥
Sorat
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